॥ शुभमस्तु ॥
नामकरण मुहूर्त फरवरी 2027
नामकरण मुहूर्त: 9 शुभ तिथियाँ
1 फ़रवरी – 28 फ़रवरी 2027 · नई दिल्ली
जिन तिथियों को परिवार को भेजना है, उन्हें चुनें।
- 7फ़रवरीरविवार
- 8फ़रवरीसोमवार
- 11फ़रवरीगुरुवार
- 12फ़रवरीशुक्रवार
- 18फ़रवरीगुरुवार
- 19फ़रवरीशुक्रवार
- 22फ़रवरीसोमवार
- 25फ़रवरीगुरुवार
- 26फ़रवरीशुक्रवार
छोड़ी गई तिथियाँ और कारण (19)
- तिथि, नक्षत्र और योग का शुभ मेल नहीं
- 1 फ़र॰, 3 फ़र॰, 4 फ़र॰, 5 फ़र॰, 10 फ़र॰, 14 फ़र॰, 15 फ़र॰, 17 फ़र॰, 21 फ़र॰, 24 फ़र॰, 28 फ़र॰
- मंगलवार इस कार्य के लिए वर्जित
- 2 फ़र॰, 9 फ़र॰, 16 फ़र॰, 23 फ़र॰
- शनिवार इस कार्य के लिए वर्जित
- 6 फ़र॰, 13 फ़र॰, 20 फ़र॰, 27 फ़र॰
फरवरी 2027 में नई दिल्ली के लिए नामकरण के 9 शुभ मुहूर्त हैं: 7 फ़रवरी, 8 फ़रवरी, 11 फ़रवरी, 12 फ़रवरी, 18 फ़रवरी, 19 फ़रवरी, 22 फ़रवरी, 25 फ़रवरी, 26 फ़रवरी।
नामकरण मुहूर्त कैसे देखा जाता है
नामकरण संस्कार परंपरा से जन्म के 11वें या 12वें दिन होता है। उस दिन संभव न हो तो शुभ तिथि, मृदु या क्षिप्र नक्षत्र और सोम, बुध, गुरु या शुक्रवार का दिन चुना जाता है।
- नक्षत्र: अश्विनी, रोहिणी, मृगशिरा, पुनर्वसु, पुष्य, हस्त, चित्रा, स्वाती, अनुराधा, श्रवण, धनिष्ठा, शतभिषा, रेवती और तीनों उत्तरा
- मंगलवार और शनिवार नहीं
- रिक्ता तिथि और अमावस्या नहीं
- केवल दिन के समय-खंड
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
नामकरण किस दिन करें?
परंपरा में जन्म के 11वें या 12वें दिन नामकरण होता है। सूतक के बाद की पहली शुभ तिथि भी ली जाती है।
नाम का पहला अक्षर कैसे तय होता है?
जन्म नक्षत्र के चरण से नाम का पहला अक्षर निकलता है। इसके लिए हमारा नक्षत्र कैलकुलेटर देखें।
अंतिम तिथि कैसे तय करें?
यह सूची सामान्य पंचांग नियमों पर आधारित है। अंतिम निर्णय से पहले अपने कुल-पुरोहित या पंडित जी से वर-वधू या परिवार की कुंडली के साथ मिलान अवश्य कराएँ।
ये तिथियाँ कैसे चुनी गईं
हर दिन सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण और चंद्र राशि के सटीक बदलने के समय NASA JPL DE440s पंचांग गणना और लाहिड़ी अयनांश से निकाले जाते हैं। फिर कार्य के नियमों से मिलान होता है, और भद्रा, व्यतीपात, वैधृति, राहुकाल और यमगंड का समय हटाया जाता है।
- पूरे दिन वर्जित
- चातुर्मास, खरमास, गुरु-शुक्र अस्त, अधिक मास (कार्य के अनुसार)
- अतिरिक्त अंक
- सर्वार्थ सिद्धि, अमृत सिद्धि, गुरु-पुष्य, रवि-पुष्य, अभिजित मुहूर्त, शुक्ल पक्ष
- व्यक्तिगत (वैकल्पिक)
- चंद्र बल और तारा बल
- लग्न शुद्धि और कुंडली मिलान इसमें शामिल नहीं हैं; इन्हें पंडित जी से देखवाएँ।