खगोलीय आधार
सूर्य और चंद्रमा की खगोलीय स्थिति के आधार पर पंचांग के अंगों की गणना की जाती है। निरयन गणना में लाहिड़ी अयनांश का उपयोग होता है। परिणाम में प्रयुक्त स्थान, दिनांक और गणना का समय सुरक्षित रखा जाता है, जिससे वही गणना दोबारा जाँची जा सके।
स्थान और समय
प्रत्येक परिणाम चुने हुए अक्षांश–देशांतर, ऊँचाई, स्थानीय समय-क्षेत्र और वहाँ लागू ग्रीष्मकालीन समय-परिवर्तन पर आधारित है। स्थान न चुने जाने पर अयोध्या को स्पष्ट आरंभिक स्थान माना जाता है और शहर बदलने का विकल्प सामने रहता है।
सूर्योदय
सूर्योदय/सूर्यास्त में पृथ्वी का वायुमंडलीय अपवर्तन और उपलब्ध होने पर स्थान की ऊँचाई शामिल होती है। तिथि, नक्षत्र, योग और करण के दिन-सीमा निर्णय स्थानीय सूर्योदय के संदर्भ में किए जाते हैं।
गणना में सूर्य-केंद्र के लिए मानक क्षितिज −0.8333° लिया जाता है, जिसमें सूर्य की दृश्य त्रिज्या और मानक वायुमंडलीय अपवर्तन सम्मिलित हैं। स्थान की ऊँचाई पर्यवेक्षक की स्थिति में शामिल होती है; स्थानीय पहाड़, इमारत, वास्तविक मौसम-दाब/तापमान और दृश्य क्षितिज की रुकावटें मॉडल नहीं की जातीं। चंद्र उदय/अस्त चंद्र-केंद्र के क्षितिज-पार होने पर आधारित है।
स्वीकृति सहनशीलता
सार्वजनिक उपयोग से पहले स्वतंत्र संदर्भ मानों के विरुद्ध सूर्य/चंद्र देशांतर में अधिकतम 0.01°, तिथि–नक्षत्र–योग–करण परिवर्तन में 2 मिनट, और सूर्योदय/सूर्यास्त में 2 मिनट से अधिक अंतर स्वीकार नहीं किया जाता। ये प्रकाशन सीमाएँ हैं, हर स्थान के प्राकृतिक क्षितिज की गारंटी नहीं। सीमा से बाहर का परिणाम प्रकाशित करने के बजाय “गणना उपलब्ध नहीं” दिखाया जाता है।
ध्रुवीय और अपूर्ण दिन
जिस दिन सूर्योदय या सूर्यास्त नहीं होता, उस घटना का समय खाली रहता है—06:00/18:00 जैसा अनुमान नहीं लगाया जाता। सूर्योदय न मिलने पर पंचांग-अंगों की गणना स्पष्ट रूप से स्थानीय मध्यरात्रि संदर्भ में दिखाई जाती है; ऐसी गणना को सूर्योदय-आधारित व्रत या त्योहार निर्णय के रूप में जारी नहीं किया जाता।
त्योहार और परंपरा
त्योहार नियम तिथि, पक्ष, सूर्योदय-व्याप्ति, प्रदोष/मध्याह्न जैसे काल, परंपरा, क्षेत्र और पारण नियम से तय होते हैं। विभिन्न संप्रदायों या क्षेत्रों में मतभेद होने पर उन्हें छिपाया नहीं जाता।
केवल उस नियम का परिणाम सार्वजनिक होता है जिसमें पर्व, क्षेत्रीय पंचांग, परंपरा और निर्णय-विधि स्पष्ट हों तथा पास-पड़ोस की तिथियों पर परीक्षण पूरा हो। केवल सूर्योदय की तिथि देखकर बने “संभावित संदर्भ” को एकादशी, प्रदोष या किसी नामित व्रत का अंतिम निर्णय नहीं कहा जाता।
गणना में बदलाव
गणना-विधि में कोई महत्वपूर्ण बदलाव होने पर पुराने परिणामों से उसका अंतर दर्ज किया जाता है। हर दैनिक परिणाम के साथ गणना-संस्करण और अंतिम गणना का समय दिखाया जाता है।
सुधार और संपर्क प्रक्रिया
यदि आपको किसी स्थान या तिथि में असामान्य परिणाम दिखे, तो पृष्ठ का पता, शहर, तारीख, दिखाई गई त्रुटि और संभव हो तो तुलना का आधार भेजें। सुधार प्रक्रिया पढ़ें या हमसे संपर्क करें।
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