हिंदू परंपराओं में एक ही परम सत्य की उपासना अनेक देवस्वरूपों के माध्यम से की जाती है। यहाँ प्रमुख देवताओं के स्वरूप, गुण, पर्व और संबंधित पाठों का संक्षिप्त परिचय है।
देवता और उपासना-परंपराएँ
ये परिचय प्रमुख स्वरूपों से अध्ययन शुरू करने के लिए हैं। क्षेत्रीय और संप्रदायगत व्याख्याएँ अलग हो सकती हैं; किसी एक सूची को संपूर्ण हिंदू परंपरा न मानें।
विषय
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शिव
शैव
शिव के ध्यानस्थ, नटराज, दक्षिणामूर्ति और लिंग स्वरूप अलग उपासना-संदर्भ खोलते हैं। शैव परंपराएँ एक ही दार्शनिक मत तक सीमित नहीं हैं।
त्रिशूल, डमरू और नंदी जैसे चिह्नों का अर्थ संबंधित मंदिर और परंपरा के साथ पढ़ें। ज्योतिर्लिंग यात्रा-परंपरा और स्थानीय शिव मंदिर की कथा अलग स्तर की जानकारी हैं।
अध्ययन प्रश्न
इस स्वरूप से जुड़े किसी ग्रंथ या स्थानीय परंपरा का नाम अपनी अध्ययन टिप्पणी में लिखें।
रामकथा में धर्म, परिवार, राज्य और कठिन निर्णयों पर विचार होता है। वाल्मीकि रामायण, रामचरितमानस और क्षेत्रीय रामायणों में भाषा और प्रस्तुति के अंतर हैं।
सीता, लक्ष्मण और हनुमान के बिना रामकथा का सामाजिक और भक्तिपरक संदर्भ अधूरा है। उद्धरण देते समय ग्रंथ और कांड स्पष्ट करें।
अध्ययन प्रश्न
इस स्वरूप से जुड़े किसी ग्रंथ या स्थानीय परंपरा का नाम अपनी अध्ययन टिप्पणी में लिखें।
विष्णु को जगत के पालनकर्ता के रूप में पूजा जाता है। राम और कृष्ण उनके सर्वाधिक पूजित अवतारों में हैं। एकादशी, राम नवमी और जन्माष्टमी वैष्णव उपासना के प्रमुख पर्व हैं।
देवी की उपासना दुर्गा, लक्ष्मी, सरस्वती, काली और अनेक क्षेत्रीय स्वरूपों में होती है। नवरात्रि, दुर्गा अष्टमी, दीपावली और वसंत पंचमी इन स्वरूपों से जुड़े प्रमुख पर्व हैं।
गणेश को आरंभ और बुद्धि, सूर्य को प्रकाश और जीवन, तथा हनुमान को सेवा, बल और भक्ति से जोड़ा जाता है। गणेश चतुर्थी, छठ और हनुमान जयंती इनके प्रमुख पर्व हैं।