पौराणिक कथाएँ
पुराणों की कथाएँ धर्म, भक्ति, तीर्थ, वंश, सृष्टि और लोकाचार को कथा-रूप में प्रस्तुत करती हैं। एक ही कथा अलग पुराण या क्षेत्र में भिन्न रूप से मिल सकती है, इसलिए यहाँ कथा के साथ उसका ग्रंथ-संदर्भ भी दिया गया है।
ध्रुव की कथा
भागवत पुराण के चतुर्थ स्कंध में बालक ध्रुव की तपस्या और विष्णु-भक्ति का वर्णन है। कथा दृढ़ संकल्प, अंतर्मुखता और व्यक्तिगत पीड़ा को साधना में बदलने का संदेश देती है।
प्रह्लाद और नरसिंह
भागवत पुराण के सप्तम स्कंध में प्रह्लाद की विष्णु-भक्ति, हिरण्यकशिपु का विरोध और नरसिंह अवतार का प्रसंग आता है। यह कथा प्रतिकूलता में विश्वास और अहंकार की सीमा को रेखांकित करती है।
समुद्र-मंथन
भागवत पुराण के अष्टम स्कंध और अन्य पुराणों में देव-असुर सहयोग, हलाहल, अमृत और अनेक रत्नों के प्राकट्य का वर्णन मिलता है। विभिन्न ग्रंथों में घटनाक्रम और विवरण में अंतर हो सकता है।
गजेंद्र मोक्ष
भागवत पुराण के अष्टम स्कंध में संकटग्रस्त गजेंद्र की पुकार और विष्णु द्वारा उसकी रक्षा का प्रसंग है। भक्ति-परंपरा में इसे पूर्ण शरणागति के उदाहरण के रूप में पढ़ा जाता है।
