मंत्र साधना संग्रह

अर्थ और पाठ-संदर्भ सहित 10 मंत्र, नाम-स्मरण और प्रार्थनाएँ। देवनागरी या रोमन पाठ चुनें, अपनी अध्ययन-सूची बनाएँ और हर मंत्र की जप-गणना अलग रखें।

पाठ और अर्थ

पाठ का प्रकार
लिपि

10 पाठ मिले

गायत्री मंत्र

सविता · अध्ययन · वैदिक मंत्र

ॐ भूर्भुवः स्वः। तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्य धीमहि। धियो यो नः प्रचोदयात्॥

oṃ bhūr bhuvaḥ svaḥ | tat savitur vareṇyaṃ bhargo devasya dhīmahi | dhiyo yo naḥ pracodayāt ||

सरल उच्चारण: Om bhoor bhuvah svah, tat savitur varenyam, bhargo devasya dheemahi, dhiyo yo nah prachodayat.

भावार्थ

हम उस परम प्रकाश का ध्यान करते हैं; वह हमारी बुद्धि को सत्पथ पर प्रेरित करे।

पाठ-संदर्भ

ऋग्वेद 3.62.10

मूल ऋचा “तत्सवितु…” है; प्रचलित पाठ में जोड़ी जाने वाली महाव्याहृतियां “ॐ भूर्भुवः स्वः” यहां अलग दिखाई गई हैं।

अभ्यास और उच्चारण

यह सामान्य पाठ-सहायता है। स्वर और वैदिक उच्चारण अपनी शाखा/परंपरा के योग्य अध्यापक से सीखें; जप-संख्या यहां निर्धारित नहीं की गई है।

रोमन पाठ स्वरांकित वैदिक उच्चारण का विकल्प नहीं है। शब्दों की संधि और मात्रा के लिए योग्य अध्यापक की रिकॉर्डिंग या प्रत्यक्ष मार्गदर्शन लें।

त्र्यम्बक मंत्र (महामृत्युंजय)

रुद्र · अध्ययन · वैदिक मंत्र

ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्। उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्॥

oṃ tryambakaṃ yajāmahe sugandhiṃ puṣṭivardhanam | urvārukam iva bandhanān mṛtyor mukṣīya mā'mṛtāt ||

सरल उच्चारण: Om tryambakam yajamahe sugandhim pushtivardhanam, urvarukam iva bandhanan mrityor mukshiya maamritat.

भावार्थ

हम सुगंधित, पोषण देने वाले त्र्यम्बक का यजन करते हैं; जैसे पका फल बंधन से छूटता है, वैसे मृत्यु के बंधन से मुक्ति मिले, अमृतत्व से नहीं।

पाठ-संदर्भ

ऋग्वेद 7.59.12

“महामृत्युंजय” प्रचलित नाम है; स्रोत में यह त्र्यम्बक ऋचा के रूप में आती है।

अभ्यास और उच्चारण

यह आध्यात्मिक पाठ है, चिकित्सा या आपातकालीन सहायता का विकल्प नहीं। वैदिक स्वर और अनुष्ठान-विधि के लिए योग्य परंपरागत अध्यापक से मार्गदर्शन लें।

रोमन पाठ स्वरांकित वैदिक उच्चारण का विकल्प नहीं है। शब्दों की संधि और मात्रा के लिए योग्य अध्यापक की रिकॉर्डिंग या प्रत्यक्ष मार्गदर्शन लें।

शिव नाम-स्मरण

शिव · नाम-स्मरण

ॐ नमः शिवाय।

oṃ namaḥ śivāya

सरल उच्चारण: Om namah shivaya.

भावार्थ

शिव को नमस्कार।

पाठ-संदर्भ

पारंपरिक शैव नाम-मंत्र

यह प्रचलित नाम-स्मरण रूप है। वैदिक रुद्र-पाठ का पूरा स्वरांकित मंत्र यहाँ प्रस्तुत नहीं है।

अभ्यास और उच्चारण

पहले पाठ और अर्थ समझें। यहाँ दी गई गणना व्यक्तिगत अभ्यास का उपकरण है, अनिवार्य अनुष्ठान-संख्या नहीं। विशेष विधि अपनी परंपरा के योग्य अध्यापक से सीखें।

रोमन पाठ स्वरांकित वैदिक उच्चारण का विकल्प नहीं है। शब्दों की संधि और मात्रा के लिए योग्य अध्यापक की रिकॉर्डिंग या प्रत्यक्ष मार्गदर्शन लें।

नारायण नाम-स्मरण

विष्णु · नाम-स्मरण

ॐ नमो नारायणाय।

oṃ namo nārāyaṇāya

सरल उच्चारण: Om namo narayanaya.

भावार्थ

नारायण को नमस्कार।

पाठ-संदर्भ

पारंपरिक वैष्णव अष्टाक्षर मंत्र

सामान्य परिचय के रूप में दिया गया है; दीक्षा और विशेष जप-विधि के नियम अपनी संप्रदाय-परंपरा से जानें।

अभ्यास और उच्चारण

पहले पाठ और अर्थ समझें। यहाँ दी गई गणना व्यक्तिगत अभ्यास का उपकरण है, अनिवार्य अनुष्ठान-संख्या नहीं। विशेष विधि अपनी परंपरा के योग्य अध्यापक से सीखें।

रोमन पाठ स्वरांकित वैदिक उच्चारण का विकल्प नहीं है। शब्दों की संधि और मात्रा के लिए योग्य अध्यापक की रिकॉर्डिंग या प्रत्यक्ष मार्गदर्शन लें।

वासुदेव नाम-स्मरण

कृष्ण · नाम-स्मरण

ॐ नमो भगवते वासुदेवाय।

oṃ namo bhagavate vāsudevāya

सरल उच्चारण: Om namo bhagavate vasudevaya.

भावार्थ

भगवान वासुदेव को नमस्कार।

पाठ-संदर्भ

भागवत पुराण 4.8.54 में भी उल्लिखित द्वादशाक्षर मंत्र

भागवत में यह ध्रुव-नारद संवाद के साधना-प्रसंग में आता है। यहाँ केवल पाठ और सामान्य भावार्थ है।

अभ्यास और उच्चारण

पहले पाठ और अर्थ समझें। यहाँ दी गई गणना व्यक्तिगत अभ्यास का उपकरण है, अनिवार्य अनुष्ठान-संख्या नहीं। विशेष विधि अपनी परंपरा के योग्य अध्यापक से सीखें।

रोमन पाठ स्वरांकित वैदिक उच्चारण का विकल्प नहीं है। शब्दों की संधि और मात्रा के लिए योग्य अध्यापक की रिकॉर्डिंग या प्रत्यक्ष मार्गदर्शन लें।

गणेश प्रार्थना

गणेश · प्रार्थना व श्लोक

वक्रतुण्ड महाकाय सूर्यकोटिसमप्रभ। निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा॥

vakratuṇḍa mahākāya sūryakoṭisamaprabha | nirvighnaṃ kuru me deva sarvakāryeṣu sarvadā ||

सरल उच्चारण: Vakratunda mahakaya suryakoti samaprabha, nirvighnam kuru me deva sarvakaryeshu sarvada.

भावार्थ

हे वक्र सूँड और विशाल शरीर वाले, करोड़ों सूर्यों के समान प्रकाशमान देव, मेरे कार्यों में विघ्न दूर करें।

पाठ-संदर्भ

प्रचलित गणेश प्रार्थना

इसे बिना प्रमाण किसी वेद की ऋचा नहीं बताया गया है। यह लोकप्रिय प्रार्थना-पाठ है; स्थानीय पाठांतर मिलते हैं।

अभ्यास और उच्चारण

पहले पाठ और अर्थ समझें। यहाँ दी गई गणना व्यक्तिगत अभ्यास का उपकरण है, अनिवार्य अनुष्ठान-संख्या नहीं। विशेष विधि अपनी परंपरा के योग्य अध्यापक से सीखें।

रोमन पाठ स्वरांकित वैदिक उच्चारण का विकल्प नहीं है। शब्दों की संधि और मात्रा के लिए योग्य अध्यापक की रिकॉर्डिंग या प्रत्यक्ष मार्गदर्शन लें।

विद्यारंभ प्रार्थना

सरस्वती · प्रार्थना व श्लोक

सरस्वति नमस्तुभ्यं वरदे कामरूपिणि। विद्यारम्भं करिष्यामि सिद्धिर्भवतु मे सदा॥

sarasvati namastubhyaṃ varade kāmarūpiṇi | vidyārambhaṃ kariṣyāmi siddhir bhavatu me sadā ||

सरल उच्चारण: Saraswati namastubhyam varade kamarupini, vidyarambham karishyami siddhir bhavatu me sada.

भावार्थ

हे वर देने वाली सरस्वती, आपको नमस्कार। मैं अध्ययन आरंभ कर रहा हूँ; उसमें सिद्धि मिले।

पाठ-संदर्भ

प्रचलित विद्यारंभ प्रार्थना

सामान्य प्रार्थना-संग्रहों में प्रचलित पाठ; किसी निश्चित वैदिक सूक्त का दावा नहीं। अध्ययन और अभ्यास के साथ पढ़ें।

अभ्यास और उच्चारण

पहले पाठ और अर्थ समझें। यहाँ दी गई गणना व्यक्तिगत अभ्यास का उपकरण है, अनिवार्य अनुष्ठान-संख्या नहीं। विशेष विधि अपनी परंपरा के योग्य अध्यापक से सीखें।

रोमन पाठ स्वरांकित वैदिक उच्चारण का विकल्प नहीं है। शब्दों की संधि और मात्रा के लिए योग्य अध्यापक की रिकॉर्डिंग या प्रत्यक्ष मार्गदर्शन लें।

असतो मा सद्गमय

ब्रह्म · शांति-पाठ

असतो मा सद्गमय। तमसो मा ज्योतिर्गमय। मृत्योर्मा अमृतं गमय॥

asato mā sad gamaya | tamaso mā jyotir gamaya | mṛtyor mā amṛtaṃ gamaya ||

सरल उच्चारण: Asato ma sadgamaya, tamaso ma jyotirgamaya, mrityor ma amritam gamaya.

भावार्थ

असत् से सत् की ओर, अंधकार से प्रकाश की ओर और मृत्यु से अमृत की ओर ले चलें।

पाठ-संदर्भ

बृहदारण्यक उपनिषद् 1.3.28

यहाँ प्रार्थना का प्रसिद्ध अंश है, पूरे अनुच्छेद का पाठ नहीं। सत् और असत् की व्याख्या भाष्य के साथ पढ़ें।

अभ्यास और उच्चारण

पहले पाठ और अर्थ समझें। यहाँ दी गई गणना व्यक्तिगत अभ्यास का उपकरण है, अनिवार्य अनुष्ठान-संख्या नहीं। विशेष विधि अपनी परंपरा के योग्य अध्यापक से सीखें।

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पूर्णमदः शांति-पाठ

ब्रह्म · शांति-पाठ

ॐ पूर्णमदः पूर्णमिदं पूर्णात्पूर्णमुदच्यते। पूर्णस्य पूर्णमादाय पूर्णमेवावशिष्यते॥ ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः॥

oṃ pūrṇam adaḥ pūrṇam idaṃ pūrṇāt pūrṇam udacyate | pūrṇasya pūrṇam ādāya pūrṇam evāvaśiṣyate || oṃ śāntiḥ śāntiḥ śāntiḥ ||

सरल उच्चारण: Om purnamadah purnamidam purnat purnamudachyate, purnasya purnamadaya purnamevavashishyate. Om shantih shantih shantih.

भावार्थ

वह पूर्ण है, यह पूर्ण है; पूर्ण से पूर्ण प्रकट होता है। पूर्ण से पूर्ण लेने पर भी पूर्ण ही शेष रहता है।

पाठ-संदर्भ

शुक्ल यजुर्वेद से संबद्ध उपनिषदों का प्रचलित शांति-पाठ

ईशावास्य उपनिषद् के पहले प्रचलित आह्वान के रूप में मिलता है; इसे उसके 18 मंत्रों में कोई नया मंत्र क्रमांक न दें।

अभ्यास और उच्चारण

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रोमन पाठ स्वरांकित वैदिक उच्चारण का विकल्प नहीं है। शब्दों की संधि और मात्रा के लिए योग्य अध्यापक की रिकॉर्डिंग या प्रत्यक्ष मार्गदर्शन लें।

कर्म-अर्पण का श्लोक

कृष्ण · प्रार्थना व श्लोक

यत्करोषि यदश्नासि यज्जुहोषि ददासि यत्। यत्तपस्यसि कौन्तेय तत्कुरुष्व मदर्पणम्॥

yat karoṣi yad aśnāsi yaj juhoṣi dadāsi yat | yat tapasyasi kaunteya tat kuruṣva madarpaṇam ||

सरल उच्चारण: Yat karoshi yad ashnasi yaj juhoshi dadasi yat, yat tapasyasi kaunteya tat kurushva madarpanam.

भावार्थ

जो कर्म, भोजन, यज्ञ, दान और तप तुम करते हो, उसे मुझे अर्पित करो — कृष्ण अर्जुन से कहते हैं।

पाठ-संदर्भ

भगवद्गीता 9.27

यह संवाद का श्लोक है। भक्ति और कर्म-अर्पण के संदर्भ में अध्याय 9 के साथ पढ़ें।

अभ्यास और उच्चारण

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रोमन पाठ स्वरांकित वैदिक उच्चारण का विकल्प नहीं है। शब्दों की संधि और मात्रा के लिए योग्य अध्यापक की रिकॉर्डिंग या प्रत्यक्ष मार्गदर्शन लें।

व्यक्तिगत जप-गणना

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ॐ भूर्भुवः स्वः। तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्य धीमहि। धियो यो नः प्रचोदयात्॥

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वैदिक स्वर और शाखा-विशिष्ट पाठ के लिए Vedic Heritage Portal देखें। गीता के कर्म-अर्पण श्लोक को अध्याय 9, श्लोक 27 के संदर्भ में पढ़ें।

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