आरती संग्रह

आरती में दीप या ज्योति के साथ देवता की स्तुति की जाती है। घर और मंदिर की परंपरा के अनुसार पाठ, क्रम और धुन अलग हो सकते हैं। नीचे लोकप्रिय आरतियों का परिचय और उनकी आरंभिक पंक्तियाँ दी गई हैं।

ॐ जय जगदीश हरे

आरंभिक पंक्ति: “ॐ जय जगदीश हरे, स्वामी जय जगदीश हरे।” यह आरती विष्णु के व्यापक जगदीश्वर स्वरूप की स्तुति करती है और अनेक घरों में संध्या-पूजन के अंत में गाई जाती है।

जय अम्बे गौरी

आरंभिक पंक्ति: “जय अम्बे गौरी, मैया जय श्यामा गौरी।” यह देवी के मातृ, रक्षक और मंगलकारी स्वरूप का स्तवन है; नवरात्रि में इसका पाठ विशेष रूप से प्रचलित है।

जय गणेश देवा

आरंभिक पंक्ति: “जय गणेश, जय गणेश, जय गणेश देवा।” यह गणेश की कृपा, बुद्धि और विघ्न-निवारण की प्रार्थना है और गणेश पूजन के अंत में गाई जाती है।

आरती की सरल विधि

दीप को सुरक्षित थाली में रखें, शांत भाव से स्तुति गाएँ और अंत में सभी को ज्योति का दर्शन कराएँ। बच्चों, वस्त्रों और ज्वलनशील सामग्री से दीप की पर्याप्त दूरी रखें।

पाठ, अर्थ और विस्तृत संदर्भ

आगे पढ़ें

Google पर एस्ट्रोज्ञान से जुड़े रहें

एस्ट्रोज्ञान को Google Search में अपने पसंदीदा स्रोतों में जोड़ें।

Google पर पसंदीदा स्रोत बनाएँ
    आरती संग्रह | Astrogyana