भगवद्गीता 18.33: सात्त्विकी धृति, योग और स्थिर संकल्प का अर्थ
गीता 18.33 का संस्कृत पाठ, लिप्यंतरण, स्वतंत्र हिंदी अर्थ, पद-विवेचन, शंकर-भाष्य का संदर्भ और स्थिर संकल्प का स्पष्ट उदाहरण पढ़ें।
॥ असतो मा सद्गमय ॥
गीता 18.33 का संस्कृत पाठ, लिप्यंतरण, स्वतंत्र हिंदी अर्थ, पद-विवेचन, शंकर-भाष्य का संदर्भ और स्थिर संकल्प का स्पष्ट उदाहरण पढ़ें।
गीता 13.8 का संस्कृत पाठ, लिप्यंतरण, स्वतंत्र हिंदी अर्थ, नौ गुण, शंकर-भाष्य और दो स्रोतों में 13.8 तथा 13.7 की संख्या का अंतर समझें।
गीता 5.18 का संस्कृत पाठ, IAST, मौलिक हिंदी अर्थ, पद-व्याख्या, अध्याय का संदर्भ, शंकर भाष्य और समदृष्टि के व्यावहारिक उदाहरण पढ़ें।
गीता 4.18 का संस्कृत पाठ, IAST, मौलिक हिंदी अर्थ, प्रसंग, शंकर का आत्म-विवेक, नाव की उपमा और जिम्मेदारी से जुड़े स्पष्ट उदाहरण पढ़ें।
गीता 12.15 का संस्कृत पाठ, IAST, पद-अर्थ, अध्याय का संदर्भ और शंकर भाष्य पढ़ें। हर्ष-अमर्ष-भय-उद्वेग तथा व्यवहार के स्पष्ट उदाहरण समझें।
गीता 18.30 का संस्कृत पाठ, पदार्थ और मौलिक अर्थ पढ़ें। चार युग्म, शंकर भाष्य का संदर्भ तथा विवेक और जिम्मेदारी के सावधान उदाहरण समझें।
गीता 9.22 का संस्कृत पाठ, पद-अर्थ, अध्याय का संदर्भ और शंकर भाष्य पढ़ें। योगक्षेम, अनन्य निष्ठा, भरोसे और फल की गारंटी के बीच अंतर समझें।
गीता 17.14 का संस्कृत पाठ, पद-अर्थ और शंकर भाष्य पढ़ें। शरीर के तप को वाणी, मन, उद्देश्य और बाहरी प्रदर्शन से अलग करके विस्तार से समझें।
गीता 18.5 का संस्कृत पाठ, शब्दार्थ, 18.6 से संबंध और शंकर-भाष्य समझें। कर्म निभाने तथा आसक्ति छोड़ने का अंतर विस्तृत उदाहरण से पढ़ें।
गीता 18.23 का संस्कृत, शब्दार्थ और शंकर-भाष्य पढ़ें। कर्तव्य, राग-द्वेष, फल की तृष्णा तथा उत्तरदायी कर्म का अंतर विस्तृत उदाहरण से समझें।
गीता 18.11 को संस्कृत, पदार्थ, अध्याय के क्रम और शंकर की टीका सहित पढ़ें। कर्म छोड़ने, फलत्याग और परिणामों की जिम्मेदारी का अंतर समझें।
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