॥ असतो मा सद्गमय ॥

ज्योतिष और परंपरा का अध्ययन

कुंडली, ग्रह, भाव, मंत्र, पर्व और पंचांग पर स्पष्ट, विस्तृत और संदर्भ-सचेत लेख। एक विषय से शुरू करें, एक-एक कदम।

धर्मग्रंथ और दर्शन

127–137 / 137

सब हटाएँ

12 मिनट का अध्ययन

भगवद्गीता 18.33: सात्त्विकी धृति, योग और स्थिर संकल्प का अर्थ

गीता 18.33 का संस्कृत पाठ, लिप्यंतरण, स्वतंत्र हिंदी अर्थ, पद-विवेचन, शंकर-भाष्य का संदर्भ और स्थिर संकल्प का स्पष्ट उदाहरण पढ़ें।

13 मिनट का अध्ययन

भगवद्गीता 13.8: अमानित्व और ज्ञान में सहायक नौ गुण

गीता 13.8 का संस्कृत पाठ, लिप्यंतरण, स्वतंत्र हिंदी अर्थ, नौ गुण, शंकर-भाष्य और दो स्रोतों में 13.8 तथा 13.7 की संख्या का अंतर समझें।

13 मिनट का अध्ययन

गीता 5.18 का अर्थ: विद्या-विनय, समदृष्टि और विवेकपूर्ण व्यवहार

गीता 5.18 का संस्कृत पाठ, IAST, मौलिक हिंदी अर्थ, पद-व्याख्या, अध्याय का संदर्भ, शंकर भाष्य और समदृष्टि के व्यावहारिक उदाहरण पढ़ें।

15 मिनट का अध्ययन

गीता 4.18 का अर्थ: कर्म में अकर्म, पद-व्याख्या और शंकर भाष्य

गीता 4.18 का संस्कृत पाठ, IAST, मौलिक हिंदी अर्थ, प्रसंग, शंकर का आत्म-विवेक, नाव की उपमा और जिम्मेदारी से जुड़े स्पष्ट उदाहरण पढ़ें।

14 मिनट का अध्ययन

गीता 12.15 का अर्थ: अनुद्वेग, स्थिरता और दूसरों के प्रति संवेदनशीलता

गीता 12.15 का संस्कृत पाठ, IAST, पद-अर्थ, अध्याय का संदर्भ और शंकर भाष्य पढ़ें। हर्ष-अमर्ष-भय-उद्वेग तथा व्यवहार के स्पष्ट उदाहरण समझें।

15 मिनट का अध्ययन

भगवद्गीता 18.30 का अर्थ: सात्त्विकी बुद्धि और विवेक के चार क्षेत्र

गीता 18.30 का संस्कृत पाठ, पदार्थ और मौलिक अर्थ पढ़ें। चार युग्म, शंकर भाष्य का संदर्भ तथा विवेक और जिम्मेदारी के सावधान उदाहरण समझें।

15 मिनट का अध्ययन

भगवद्गीता 9.22 का अर्थ: अनन्य भक्ति और योगक्षेमं वहाम्यहम्

गीता 9.22 का संस्कृत पाठ, पद-अर्थ, अध्याय का संदर्भ और शंकर भाष्य पढ़ें। योगक्षेम, अनन्य निष्ठा, भरोसे और फल की गारंटी के बीच अंतर समझें।

14 मिनट का अध्ययन

भगवद्गीता 17.14: शारीर तप, आदर, आर्जव और अहिंसा का अर्थ

गीता 17.14 का संस्कृत पाठ, पद-अर्थ और शंकर भाष्य पढ़ें। शरीर के तप को वाणी, मन, उद्देश्य और बाहरी प्रदर्शन से अलग करके विस्तार से समझें।

15 मिनट का अध्ययन

भगवद्गीता 18.5 का अर्थ: यज्ञ, दान और तप क्यों न छोड़ें?

गीता 18.5 का संस्कृत पाठ, शब्दार्थ, 18.6 से संबंध और शंकर-भाष्य समझें। कर्म निभाने तथा आसक्ति छोड़ने का अंतर विस्तृत उदाहरण से पढ़ें।

15 मिनट का अध्ययन

भगवद्गीता 18.23 का अर्थ: सात्त्विक कर्म, कर्तव्य और आसक्ति का त्याग

गीता 18.23 का संस्कृत, शब्दार्थ और शंकर-भाष्य पढ़ें। कर्तव्य, राग-द्वेष, फल की तृष्णा तथा उत्तरदायी कर्म का अंतर विस्तृत उदाहरण से समझें।

15 मिनट का अध्ययन

भगवद्गीता 18.11 का अर्थ: कर्मफल का त्याग और जिम्मेदार कर्म

गीता 18.11 को संस्कृत, पदार्थ, अध्याय के क्रम और शंकर की टीका सहित पढ़ें। कर्म छोड़ने, फलत्याग और परिणामों की जिम्मेदारी का अंतर समझें।

Google पर एस्ट्रोज्ञान से जुड़े रहें

एस्ट्रोज्ञान को Google Search में अपने पसंदीदा स्रोतों में जोड़ें।

Google पर पसंदीदा स्रोत बनाएँ
    ज्योतिष और हिंदू परंपरा के अध्ययन लेख | Astrogyana