स्मार्त और वैष्णव एकादशी: व्रत की तिथियाँ अलग क्यों होती हैं?
एकादशी के दो व्रत-दिन क्यों आते हैं? नई दिल्ली के जाँचे हुए उदाहरण से सूर्योदय, अरुणोदय, पारण और सही कैलेंडर चुनने का तरीका समझें।
॥ असतो मा सद्गमय ॥
एकादशी के दो व्रत-दिन क्यों आते हैं? नई दिल्ली के जाँचे हुए उदाहरण से सूर्योदय, अरुणोदय, पारण और सही कैलेंडर चुनने का तरीका समझें।
24+ पंचांग समय को सही नागरिक तारीख और घड़ी में बदलें। काम करने वाला कन्वर्टर, समयरेखा, उदाहरण तथा सूर्योदय और समय-क्षेत्र की स्पष्ट जानकारी।
अपनी परंपरा, स्थानीय सूर्योदय, द्वादशी और समय-क्षेत्र देखकर एकादशी पारण का सही समय खोजें।
जानें कि स्थानीय सूर्योदय पंचांग की तारीख से कैसे जुड़ता है, सूर्योदय की गणना अलग क्यों होती है और कौन-से पर्व दूसरे समय पर निर्भर हैं।
विदेश में पर्व की तारीख स्थानीय शहर, परंपरा और अनुष्ठान के नियम से चुनें; भारत की तारीख में केवल समय-क्षेत्र न जोड़ें।
समझें कि हिंदू तिथि अंग्रेजी तारीख से कैसे अलग है, वह आधी रात क्यों पार करती है और पंचांग में सूर्योदय से दिन का नाम कैसे तय होता है।
पंचांग ऐप की सही तुलना करें: स्थान, समय-क्षेत्र, सूर्योदय की सेटिंग, गणना-पद्धति और पर्व-नियम अलग हो सकते हैं।
जानें अमांत और पूर्णिमांत में चंद्र मास कहाँ समाप्त होता है, कृष्ण पक्ष का नाम क्यों बदल सकता है और दो पंचांग कैसे मिलाएँ।
अधिक मास क्यों आता है, दो अमावस्याओं के बीच संक्रांति न होने का नियम और 2023 के अधिक श्रावण का जाँचा हुआ उदाहरण पढ़ें।
राहुकाल के आठ भागों की गणना, वार का नियम, शहर और ऋतु से समय बदलने का कारण और पंचांग मिलाने की विधि जानें।
जन्म के क्षण की तिथि पहचानें और उसे वार्षिक पालन के लिए चुनी जाने वाली स्थानीय तारीख से अलग समझें।
पंचक रहित की एक स्पष्ट गणना-पद्धति, चार संख्याएँ, शेषफल और पंचांग के पाँच नक्षत्रों वाले पंचक से इसका अंतर समझें।
वर्ज्यम् को नक्षत्र से जुड़ी पंचांग-अवधि की तरह समझें; स्रोत-सारणी, अवधि-पद्धति, स्थानीय तारीख और मध्यरात्रि पार होने का समय पढ़ें।
भद्रावास, विष्टि करण की अवधि से कैसे अलग है, एक प्रकाशित चंद्र-राशि मानचित्र कैसे पढ़ें और दोनों पंचांग-खानों को अलग रखें।
एक सतत तिथि-गणना से शिववास का सूत्र और सातों अवस्थाएँ जाँचें; अनुष्ठान के समय-विचार को दैनिक शिवभक्ति से अलग रखें।
पंचांग के पाँच अंग और एक पूरा उदाहरण समझें; गणना से मिले मानों को मुहूर्त की परंपरा-विशिष्ट व्याख्या से अलग रखें।
महाशिवरात्रि और मासिक शिवरात्रि का अंतर, चार प्रहर व निशीथ काल की रात्रि-पूजा की संरचना और स्थानीय तिथि तय करने के पंचांग नियम समझें।
कार्तिक पूर्णिमा, वाराणसी की देव दीपावली, त्रिपुरारी पूर्णिमा, गुरु नानक गुरुपर्व, जैन पालिताना यात्रा और ओडिशा के बोइता बंदना का अंतर समझें।
एस्ट्रोज्ञान को Google Search में अपने पसंदीदा स्रोतों में जोड़ें।