॥ असतो मा सद्गमय ॥

ज्योतिष और परंपरा का अध्ययन

कुंडली, ग्रह, भाव, मंत्र, पर्व और पंचांग पर स्पष्ट, विस्तृत और संदर्भ-सचेत लेख। एक विषय से शुरू करें, एक-एक कदम।

धर्मग्रंथ और दर्शन

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8 मिनट का अध्ययन

भगवद्गीता 6.17: युक्ताहारविहारस्य का अर्थ और संतुलित अभ्यास

गीता 6.17 का संस्कृत श्लोक, लिप्यंतरण और सरल भावार्थ पढ़ें। 6.16–18 के संदर्भ में आहार-विहार, कर्म, नींद और जागने में संयम समझें।

8 मिनट का अध्ययन

भगवद्गीता 2.48: समत्वं योग उच्यते और कर्म में समभाव

गीता 2.48 का संस्कृत, लिप्यंतरण और सरल भावार्थ पढ़ें। 2.47–49 के संदर्भ में समत्व, आसक्ति-त्याग तथा जिम्मेदारी से कर्म करना समझें।

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सत्यं वद धर्मं चर: अर्थ, मूल पाठ और उपनिषद् का संदर्भ

सत्यं वद, धर्मं चर का सरल अर्थ, संस्कृत पाठ और लिप्यंतरण पढ़ें। तैत्तिरीय उपनिषद् 1.11.1 में स्वाध्याय, आचरण और गुरु-शिष्य संदर्भ समझें।

8 मिनट का अध्ययन

भगवद्गीता 2.14: मात्रास्पर्श, अनित्यता और तितिक्षा का अर्थ

गीता 2.14 का संस्कृत पाठ, लिप्यंतरण और सरल अर्थ पढ़ें। मात्रास्पर्श, सुख-दुःख, तितिक्षा और 2.13–15 के दार्शनिक संदर्भ को समझें।

8 मिनट का अध्ययन

भगवद्गीता 4.34 का अर्थ: प्रणिपात, परिप्रश्न और सेवा

गीता 4.34 का संस्कृत पाठ, लिप्यंतरण और सरल अर्थ पढ़ें। विनम्रता, प्रश्न और सेवा को 4.33–35 के संदर्भ तथा मौलिक अध्ययन उदाहरणों से समझें।

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भगवद्गीता 17.15 का अर्थ: सत्य, प्रिय और हितकारी वाणी

गीता 17.15 का संस्कृत पाठ, लिप्यंतरण और संदर्भ पढ़ें। वाणी के तप, स्वाध्याय तथा रोजमर्रा की बातचीत के मौलिक उदाहरणों को समझें।

8 मिनट का अध्ययन

कठोपनिषद् का रथ रूपक: आत्मा, मन और बुद्धि की भूमिका

कठोपनिषद् 1.3.3–9 का रथ रूपक पढ़ें: आत्मा रथी, बुद्धि सारथी और मन लगाम। संस्कृत, भूमिका-तालिका, प्रसंग और दैनिक अभ्यास सहित।

9 मिनट का अध्ययन

ईशावास्यमिदं सर्वम् का अर्थ: ईशोपनिषद् का पहला मंत्र

ईशोपनिषद् का पहला मंत्र संस्कृत और लिप्यंतरण सहित पढ़ें। तेन त्यक्तेन भुञ्जीथा की अलग व्याख्याएँ, अलोभ और दैनिक चिंतन समझें।

8 मिनट का अध्ययन

केन उपनिषद् 1.1–2: मन, इंद्रियाँ और श्रोत्र का श्रोत्र

केन उपनिषद् के आरंभिक प्रश्न संस्कृत, पदार्थ और संदर्भ सहित पढ़ें। कान का कान और मन का मन जैसे पदों को समझें, उन्हें भौतिक अंग न मानें।

7 मिनट का अध्ययन

एक वृक्ष पर दो पक्षी: मुण्डक उपनिषद् 3.1.1–2 का अर्थ

दो पक्षियों का रूपक संस्कृत, लिप्यंतरण और संदर्भ सहित पढ़ें। फल खाने और देखने वाले पक्षी, अगला मंत्र और तीन स्पष्ट चिंतन-उदाहरण समझें।

8 मिनट का अध्ययन

श्रेयस और प्रेयस: कठोपनिषद् 1.2.1–2 का अर्थ और विवेक

श्रेयस और प्रेयस के संस्कृत मंत्र, लिप्यंतरण और प्रसंग पढ़ें। आधुनिक उदाहरणों से विवेक समझें और आत्मविद्या के मूल संदर्भ को साथ रखें।

8 मिनट का अध्ययन

परा और अपरा विद्या: मुण्डकोपनिषद् 1.1.4–5 का अर्थ

परा-अपरा विद्या के संस्कृत मंत्र, चार वेद और छह वेदाङ्ग समझें। अक्षर के ज्ञान का उद्देश्य पढ़ें और पाठ-अध्ययन को अनुभूति से अलग पहचानें।

9 मिनट का अध्ययन

भगवद्गीता 18.63 का अर्थ: पूरा विचार करके निर्णय और कर्म करें

गीता 18.63 का संस्कृत पाठ, विमृश्य और यथेच्छसि का अर्थ, शंकर-रामानुज भाष्य के संकेत तथा अर्जुन के उत्तर तक का प्रसंग सरल हिंदी में पढ़ें।

9 मिनट का अध्ययन

भगवद्गीता 17.16 का अर्थ: मन के तप के पाँच गुण

गीता 17.16 का संस्कृत पाठ और मनःप्रसाद, सौम्यता, मौन, आत्मविनिग्रह तथा भावशुद्धि समझें। प्रसंग, नामित भाष्य और सरल अभ्यास साथ पढ़ें।

9 मिनट का अध्ययन

भगवद्गीता 9.26 का अर्थ: पत्र, पुष्प, फल, जल और भक्ति

गीता 9.26 का संस्कृत पाठ, चार साधारण अर्पण और भक्ति से जुड़े पद समझें। 9.27–28 का संदर्भ तथा स्वयं विचार करने के सरल अभ्यास भी पढ़ें।

11 मिनट का अध्ययन

भगवद्गीता 12.13 का अर्थ: मित्रता, करुणा और द्वेष से मुक्ति

गीता 12.13 का संस्कृत पाठ, सात प्रमुख पद, 12.14 में वाक्य की पूर्णता और चार स्वतंत्र उदाहरणों से मित्रभाव, करुणा तथा जिम्मेदारी समझें।

11 मिनट का अध्ययन

भगवद्गीता 3.30 का अर्थ: कर्म समर्पित करें, जिम्मेदारी निभाएँ

गीता 3.30 का संस्कृत पाठ, आठ पदों की व्याख्या, 3.27–31 का संदर्भ और आधुनिक उदाहरण पढ़ें। समर्पण तथा कर्म से पलायन का अंतर समझें।

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