आर्द्रा नक्षत्र: मिथुन के अंश, चार चरण, रुद्र प्रतीक और दशा गणना
६°४०′ से २०°००′ मिथुन तक आर्द्रा नक्षत्र के अंश, धनु से मीन तक चार नवांश चरण, रुद्र प्रतीक और १८-वर्षीय राहु महादशा-शेष की सटीक गणना समझें।
॥ असतो मा सद्गमय ॥
६°४०′ से २०°००′ मिथुन तक आर्द्रा नक्षत्र के अंश, धनु से मीन तक चार नवांश चरण, रुद्र प्रतीक और १८-वर्षीय राहु महादशा-शेष की सटीक गणना समझें।
१६°४०′ से ३०°००′ कर्क तक आश्लेषा नक्षत्र के अंश, चारों चरण, नाग प्रतीक, १७-वर्षीय बुध दशा और १२०°००′ कर्क–सिंह गंडांत सीमा का नियम समझें।
१०°००′ से २३°२०′ कन्या तक हस्त नक्षत्र के अंश, मेष से कर्क तक चार नवांश चरण, सविता प्रतीक और १०-वर्षीय चंद्र महादशा-शेष की गणना उदाहरण सहित समझें।
३°२०′ से १६°४०′ वृश्चिक तक अनुराधा नक्षत्र के अंश, सिंह से वृश्चिक तक चार नवांश चरण, मित्र प्रतीक और १९-वर्षीय शनि महादशा-शेष की गणना समझें।
वर्ष के चार नवरात्रि चक्र, दुर्गा सप्तशती और देवी भागवत के शास्त्रीय आधार, तिथि-क्षय व वृद्धि से ८ या १० दिन का गणित और क्षेत्रीय परंपराएँ समझें।
धनतेरस से भाई दूज तक दीपावली के पाँच दिनों का पंचांगीय क्रम, प्रदोष व्यापिनी अमावस्या नियम, और हिंदू, जैन व सिख परंपराओं का तुलनात्मक परिचय जानें।
अमावस्या दिवाली के १५ तिथियों बाद कार्तिक पूर्णिमा पर देव दीपावली का रहस्य, शिव की त्रिपुरारी कथा, देवउठनी एकादशी से अंतर और गृह दीपदान विधि जानें।
श्रावण पूर्णिमा से पूर्व के शुक्रवार की पंचांग गणना, चारुमती और श्यामबाला की व्रत कथा, वरलक्ष्मी में अष्टलक्ष्मी का समन्वय और गृहस्थ व्रत नियम जानें।
फाल्गुन शुक्ल अष्टमी से पूर्णिमा तक होलाष्टक की आठ तिथियों का गणित, उत्तर भारत के क्षेत्रीय मुहूर्त नियम, प्रह्लाद आख्यान और ब्रज उत्सवों का संबंध जानें।
वैदिक, उपनिषद, आगम और गृह-परंपराओं में प्रणव (ॐ), स्वस्तिक, तिलक, कलश, आयुध और पवित्र वनस्पतियों के शास्त्रीय व अनुष्ठानिक अर्थ समझें।
शैव सिद्धांत, कश्मीर शैव दर्शन, वीरशैव/लिंगायत और स्मार्त परंपराओं में शिव-उपासना, पंचाक्षरी मंत्र, प्रमुख ग्रंथ, सोमवार-प्रदोष साधना और मंदिर मर्यादा समझें।
वाल्मीकि रामायण, रामचरितमानस और हनुमान चालीसा के आलोक में हनुमान-उपासना, दास्य भक्ति, मंगल-शनि साधना, सात्विक अर्पण और चारित्रिक आदर्श समझें।
महाशिवरात्रि पूजा की संपूर्ण विधि: फाल्गुन कृष्ण चतुर्दशी निशीथ काल, चार प्रहर रुद्राभिषेक क्रम, बिल्वपत्र नियम, वर्जित वस्तुएँ और षोडशोपचार पूजन।
अष्टलक्ष्मी स्तोत्रम् के आठों श्लोकों का मूल संस्कृत पाठ, सरल हिंदी भावार्थ, आठ स्वरूपों का दार्शनिक महत्व और शुक्रवार व वरलक्ष्मी पूजा में पाठ-विधि पढ़ें।
वैदिक ज्योतिष में उभयचारी योग की जाँच: सूर्य से द्वितीय और द्वादश दोनों राशियों में चंद्र-रहित ग्रह, अस्त-अंश जाँच, कर्तरी भेद और कुंडली उदाहरण।
कुंडली में चंद्र और लग्न अधि योग का विश्लेषण: छठे, सातवें और आठवें भाव में बुध, गुरु व शुक्र के सात विन्यास, अपवाद नियम और कुंडली उदाहरण।
कुंडली में चंद्र-मंगल योग की परख: चंद्रमा-मंगल युति व परस्पर सप्तम दृष्टि, उच्च-नीच राशि के प्रभाव, अंश दूरी और व्यावहारिक कुंडली उदाहरण।
वैदिक ज्योतिष में अमला (अमला कीर्ति) योग: लग्न या चंद्रमा से दशम भाव में नैसर्गिक शुभ ग्रह, पाप-ग्रह निषेध नियम और कुंडली उदाहरण समझें।
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