॥ शुभमस्तु ॥
संपत्ति खरीद मुहूर्त नवंबर 2027
संपत्ति खरीद मुहूर्त: 11 शुभ तिथियाँ
1 नवंबर – 30 नवंबर 2027 · नई दिल्ली
जिन तिथियों को परिवार को भेजना है, उन्हें चुनें।
- 1नवंबरसोमवार
- 3नवंबरबुधवार
- 4नवंबरगुरुवार
- 5नवंबरशुक्रवार
- 10नवंबरबुधवार
- 11नवंबरगुरुवार
- 12नवंबरशुक्रवार
- 15नवंबरसोमवार
- 16नवंबरमंगलवार
- 18नवंबरगुरुवार
- 30नवंबरमंगलवार
छोड़ी गई तिथियाँ और कारण (19)
- तिथि, नक्षत्र और योग का शुभ मेल नहीं
- 2 नव॰, 6 नव॰, 7 नव॰, 8 नव॰, 9 नव॰, 13 नव॰, 14 नव॰, 17 नव॰, 19 नव॰, 20 नव॰, 21 नव॰, 22 नव॰, 23 नव॰, 24 नव॰, 25 नव॰, 26 नव॰, 27 नव॰, 28 नव॰, 29 नव॰
नवंबर 2027 में नई दिल्ली के लिए संपत्ति खरीद के 11 शुभ मुहूर्त हैं: 1 नवंबर, 3 नवंबर, 4 नवंबर, 5 नवंबर, 10 नवंबर, 11 नवंबर, 12 नवंबर, 15 नवंबर, 16 नवंबर, 18 नवंबर, 30 नवंबर।
संपत्ति खरीद मुहूर्त कैसे देखा जाता है
ज़मीन, फ्लैट या मकान की रजिस्ट्री और बयाना देने के लिए स्थिर नक्षत्र, शुभ तिथि और गुरु या शुक्रवार अच्छे माने जाते हैं। गुरु-पुष्य योग संपत्ति के लिए विशेष शुभ है।
- नक्षत्र: रोहिणी, मृगशिरा, पुनर्वसु, पुष्य, मघा, हस्त, विशाखा, अनुराधा, मूल, रेवती और तीनों उत्तरा
- सोम, गुरु और शुक्रवार को प्राथमिकता
- गुरु-पुष्य और रवि-पुष्य को अतिरिक्त अंक
- खरमास और अधिक मास में सावधानी का संकेत
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
रजिस्ट्री का समय देखें या बयाने का?
दोनों के लिए एक ही नियम लागू होते हैं। जो काम पहले हो रहा है, उसे शुभ समय-खंड में रखें।
क्या एक ही तिथि हर शहर में शुभ होती है?
तिथि और नक्षत्र पूरे भारत में लगभग एक जैसे रहते हैं, पर सूर्योदय, राहुकाल और समय-खंड शहर के अनुसार बदलते हैं। इसलिए अपना शहर चुनें।
अंतिम तिथि कैसे तय करें?
यह सूची सामान्य पंचांग नियमों पर आधारित है। अंतिम निर्णय से पहले अपने कुल-पुरोहित या पंडित जी से वर-वधू या परिवार की कुंडली के साथ मिलान अवश्य कराएँ।
ये तिथियाँ कैसे चुनी गईं
हर दिन सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण और चंद्र राशि के सटीक बदलने के समय NASA JPL DE440s पंचांग गणना और लाहिड़ी अयनांश से निकाले जाते हैं। फिर कार्य के नियमों से मिलान होता है, और भद्रा, व्यतीपात, वैधृति, राहुकाल और यमगंड का समय हटाया जाता है।
- पूरे दिन वर्जित
- चातुर्मास, खरमास, गुरु-शुक्र अस्त, अधिक मास (कार्य के अनुसार)
- अतिरिक्त अंक
- सर्वार्थ सिद्धि, अमृत सिद्धि, गुरु-पुष्य, रवि-पुष्य, अभिजित मुहूर्त, शुक्ल पक्ष
- व्यक्तिगत (वैकल्पिक)
- चंद्र बल और तारा बल
- लग्न शुद्धि और कुंडली मिलान इसमें शामिल नहीं हैं; इन्हें पंडित जी से देखवाएँ।