॥ शुभमस्तु ॥
मुंडन मुहूर्त जनवरी 2028
मुंडन मुहूर्त: 1 शुभ तिथि
1 जनवरी – 31 जनवरी 2028 · नई दिल्ली
- खरमास (सूर्य धनु या मीन में)1 जन॰ – 14 जन॰: इन दिनों मुंडन नहीं
- 28जनवरीशुक्रवार
छोड़ी गई तिथियाँ और कारण (30)
- खरमास (सूर्य धनु या मीन में)
- 1 जन॰, 2 जन॰, 3 जन॰, 4 जन॰, 5 जन॰, 6 जन॰, 7 जन॰, 8 जन॰, 9 जन॰, 10 जन॰, 11 जन॰, 12 जन॰, 13 जन॰, 14 जन॰
- शनिवार इस कार्य के लिए वर्जित
- 15 जन॰, 22 जन॰, 29 जन॰
- तिथि, नक्षत्र और योग का शुभ मेल नहीं
- 16 जन॰, 17 जन॰, 19 जन॰, 20 जन॰, 21 जन॰, 23 जन॰, 24 जन॰, 26 जन॰, 27 जन॰, 30 जन॰, 31 जन॰
- मंगलवार इस कार्य के लिए वर्जित
- 18 जन॰, 25 जन॰
जनवरी 2028 में नई दिल्ली के लिए मुंडन के 1 शुभ मुहूर्त हैं: 28 जनवरी। 1 जनवरी से 14 जनवरी तक खरमास (सूर्य धनु या मीन में) होने से इन दिनों मुंडन नहीं किया जाता।
मुंडन मुहूर्त कैसे देखा जाता है
मुंडन (चूड़ाकर्म) संस्कार के लिए चर और लघु नक्षत्र, शुभ तिथि और सोम, बुध, गुरु या शुक्रवार देखे जाते हैं। यह संस्कार दिन में किया जाता है और चातुर्मास, खरमास तथा गुरु-शुक्र अस्त में नहीं होता।
- नक्षत्र: अश्विनी, मृगशिरा, पुनर्वसु, पुष्य, हस्त, चित्रा, स्वाती, ज्येष्ठा, श्रवण, धनिष्ठा, शतभिषा, रेवती
- मंगलवार और शनिवार नहीं
- चातुर्मास, खरमास, गुरु-शुक्र अस्त और अधिक मास वर्जित
- केवल दिन के समय-खंड
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
मुंडन किस उम्र में होता है?
अधिकतर परिवार पहले, तीसरे या पाँचवें वर्ष में मुंडन कराते हैं। उम्र का नियम कुल-परंपरा के अनुसार बदलता है।
क्या एक ही तिथि हर शहर में शुभ होती है?
तिथि और नक्षत्र पूरे भारत में लगभग एक जैसे रहते हैं, पर सूर्योदय, राहुकाल और समय-खंड शहर के अनुसार बदलते हैं। इसलिए अपना शहर चुनें।
अंतिम तिथि कैसे तय करें?
यह सूची सामान्य पंचांग नियमों पर आधारित है। अंतिम निर्णय से पहले अपने कुल-पुरोहित या पंडित जी से वर-वधू या परिवार की कुंडली के साथ मिलान अवश्य कराएँ।
ये तिथियाँ कैसे चुनी गईं
हर दिन सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण और चंद्र राशि के सटीक बदलने के समय NASA JPL DE440s पंचांग गणना और लाहिड़ी अयनांश से निकाले जाते हैं। फिर कार्य के नियमों से मिलान होता है, और भद्रा, व्यतीपात, वैधृति, राहुकाल और यमगंड का समय हटाया जाता है।
- पूरे दिन वर्जित
- चातुर्मास, खरमास, गुरु-शुक्र अस्त, अधिक मास (कार्य के अनुसार)
- अतिरिक्त अंक
- सर्वार्थ सिद्धि, अमृत सिद्धि, गुरु-पुष्य, रवि-पुष्य, अभिजित मुहूर्त, शुक्ल पक्ष
- व्यक्तिगत (वैकल्पिक)
- चंद्र बल और तारा बल
- लग्न शुद्धि और कुंडली मिलान इसमें शामिल नहीं हैं; इन्हें पंडित जी से देखवाएँ।