॥ शुभमस्तु ॥
व्यापार आरंभ मुहूर्त अप्रैल 2027
व्यापार आरंभ मुहूर्त: 7 शुभ तिथियाँ
1 अप्रैल – 30 अप्रैल 2027 · नई दिल्ली
जिन तिथियों को परिवार को भेजना है, उन्हें चुनें।
- 1अप्रैलगुरुवार
- 8अप्रैलगुरुवार
- 11अप्रैलरविवार
- 12अप्रैलसोमवार
- 18अप्रैलरविवार
- 23अप्रैलशुक्रवार
- 28अप्रैलबुधवार
छोड़ी गई तिथियाँ और कारण (23)
- तिथि, नक्षत्र और योग का शुभ मेल नहीं
- 2 अप्रैल, 3 अप्रैल, 4 अप्रैल, 5 अप्रैल, 7 अप्रैल, 9 अप्रैल, 10 अप्रैल, 14 अप्रैल, 15 अप्रैल, 16 अप्रैल, 17 अप्रैल, 19 अप्रैल, 21 अप्रैल, 22 अप्रैल, 24 अप्रैल, 25 अप्रैल, 26 अप्रैल, 29 अप्रैल, 30 अप्रैल
- मंगलवार इस कार्य के लिए वर्जित
- 6 अप्रैल, 13 अप्रैल, 20 अप्रैल, 27 अप्रैल
अप्रैल 2027 में नई दिल्ली के लिए व्यापार आरंभ के 7 शुभ मुहूर्त हैं: 1 अप्रैल, 8 अप्रैल, 11 अप्रैल, 12 अप्रैल, 18 अप्रैल, 23 अप्रैल, 28 अप्रैल।
व्यापार आरंभ मुहूर्त कैसे देखा जाता है
दुकान, ऑफिस या नया व्यापार शुरू करने के लिए बुध, गुरु और शुक्रवार, क्षिप्र और स्थिर नक्षत्र तथा भद्रा-रहित समय उत्तम माने जाते हैं।
- नक्षत्र: अश्विनी, रोहिणी, मृगशिरा, पुष्य, हस्त, चित्रा, अनुराधा, श्रवण, रेवती और तीनों उत्तरा
- बुध, गुरु और शुक्रवार को प्राथमिकता, मंगलवार नहीं
- गुरु-पुष्य और रवि-पुष्य को अतिरिक्त अंक
- भद्रा और राहुकाल हटाए गए
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
उद्घाटन के समय क्या करें?
चुने गए समय-खंड में गणेश पूजन, बही-खाता पूजन या पहला सौदा करना शुभ माना जाता है।
क्या एक ही तिथि हर शहर में शुभ होती है?
तिथि और नक्षत्र पूरे भारत में लगभग एक जैसे रहते हैं, पर सूर्योदय, राहुकाल और समय-खंड शहर के अनुसार बदलते हैं। इसलिए अपना शहर चुनें।
अंतिम तिथि कैसे तय करें?
यह सूची सामान्य पंचांग नियमों पर आधारित है। अंतिम निर्णय से पहले अपने कुल-पुरोहित या पंडित जी से वर-वधू या परिवार की कुंडली के साथ मिलान अवश्य कराएँ।
ये तिथियाँ कैसे चुनी गईं
हर दिन सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण और चंद्र राशि के सटीक बदलने के समय NASA JPL DE440s पंचांग गणना और लाहिड़ी अयनांश से निकाले जाते हैं। फिर कार्य के नियमों से मिलान होता है, और भद्रा, व्यतीपात, वैधृति, राहुकाल और यमगंड का समय हटाया जाता है।
- पूरे दिन वर्जित
- चातुर्मास, खरमास, गुरु-शुक्र अस्त, अधिक मास (कार्य के अनुसार)
- अतिरिक्त अंक
- सर्वार्थ सिद्धि, अमृत सिद्धि, गुरु-पुष्य, रवि-पुष्य, अभिजित मुहूर्त, शुक्ल पक्ष
- व्यक्तिगत (वैकल्पिक)
- चंद्र बल और तारा बल
- लग्न शुद्धि और कुंडली मिलान इसमें शामिल नहीं हैं; इन्हें पंडित जी से देखवाएँ।