॥ शुभमस्तु ॥
अन्नप्राशन मुहूर्त जनवरी 2027
अन्नप्राशन मुहूर्त: 10 शुभ तिथियाँ
1 जनवरी – 31 जनवरी 2027 · नई दिल्ली
जिन तिथियों को परिवार को भेजना है, उन्हें चुनें।
- 1जनवरीशुक्रवार
- 4जनवरीसोमवार
- 10जनवरीरविवार
- 11जनवरीसोमवार
- 14जनवरीगुरुवार
- 15जनवरीशुक्रवार
- 20जनवरीबुधवार
- 22जनवरीशुक्रवार
- 28जनवरीगुरुवार
- 31जनवरीरविवार
छोड़ी गई तिथियाँ और कारण (21)
- शनिवार इस कार्य के लिए वर्जित
- 2 जन॰, 9 जन॰, 16 जन॰, 23 जन॰, 30 जन॰
- तिथि, नक्षत्र और योग का शुभ मेल नहीं
- 3 जन॰, 6 जन॰, 7 जन॰, 8 जन॰, 13 जन॰, 17 जन॰, 18 जन॰, 21 जन॰, 24 जन॰, 25 जन॰, 27 जन॰, 29 जन॰
- मंगलवार इस कार्य के लिए वर्जित
- 5 जन॰, 12 जन॰, 19 जन॰, 26 जन॰
जनवरी 2027 में नई दिल्ली के लिए अन्नप्राशन के 10 शुभ मुहूर्त हैं: 1 जनवरी, 4 जनवरी, 10 जनवरी, 11 जनवरी, 14 जनवरी, 15 जनवरी, 20 जनवरी, 22 जनवरी, 28 जनवरी, 31 जनवरी।
अन्नप्राशन मुहूर्त कैसे देखा जाता है
अन्नप्राशन में शिशु को पहली बार अन्न खिलाया जाता है। लड़कों के लिए सम महीनों (6, 8) और लड़कियों के लिए विषम महीनों (5, 7) में शुभ तिथि, शुभ नक्षत्र और दिन का समय चुना जाता है।
- नक्षत्र: अश्विनी, रोहिणी, मृगशिरा, पुनर्वसु, पुष्य, हस्त, चित्रा, स्वाती, अनुराधा, श्रवण, धनिष्ठा, शतभिषा, रेवती और तीनों उत्तरा
- मंगलवार और शनिवार नहीं
- गुरु-शुक्र अस्त और अधिक मास वर्जित
- केवल दिन के समय-खंड
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
अन्नप्राशन किस महीने में करें?
सामान्यतः लड़कों का छठे या आठवें महीने में और लड़कियों का पाँचवें या सातवें महीने में अन्नप्राशन होता है।
क्या एक ही तिथि हर शहर में शुभ होती है?
तिथि और नक्षत्र पूरे भारत में लगभग एक जैसे रहते हैं, पर सूर्योदय, राहुकाल और समय-खंड शहर के अनुसार बदलते हैं। इसलिए अपना शहर चुनें।
अंतिम तिथि कैसे तय करें?
यह सूची सामान्य पंचांग नियमों पर आधारित है। अंतिम निर्णय से पहले अपने कुल-पुरोहित या पंडित जी से वर-वधू या परिवार की कुंडली के साथ मिलान अवश्य कराएँ।
ये तिथियाँ कैसे चुनी गईं
हर दिन सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण और चंद्र राशि के सटीक बदलने के समय NASA JPL DE440s पंचांग गणना और लाहिड़ी अयनांश से निकाले जाते हैं। फिर कार्य के नियमों से मिलान होता है, और भद्रा, व्यतीपात, वैधृति, राहुकाल और यमगंड का समय हटाया जाता है।
- पूरे दिन वर्जित
- चातुर्मास, खरमास, गुरु-शुक्र अस्त, अधिक मास (कार्य के अनुसार)
- अतिरिक्त अंक
- सर्वार्थ सिद्धि, अमृत सिद्धि, गुरु-पुष्य, रवि-पुष्य, अभिजित मुहूर्त, शुक्ल पक्ष
- व्यक्तिगत (वैकल्पिक)
- चंद्र बल और तारा बल
- लग्न शुद्धि और कुंडली मिलान इसमें शामिल नहीं हैं; इन्हें पंडित जी से देखवाएँ।