॥ असतो मा सद्गमय ॥

ज्योतिष और परंपरा का अध्ययन

कुंडली, ग्रह, भाव, मंत्र, पर्व और पंचांग पर स्पष्ट, विस्तृत और संदर्भ-सचेत लेख। एक विषय से शुरू करें, एक-एक कदम।

ज्योतिष और कुंडली

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11 मिनट का अध्ययन

पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र: धनु के अंश, चार चरण, आपः (जल) प्रतीक और उदाहरण

१३°२०′ से २६°४०′ धनु तक पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र के अंश, सिंह से वृश्चिक तक चार नवांश चरण, आपः (जल) प्रतीक और २०-वर्षीय शुक्र महादशा की गणना समझें।

11 मिनट का अध्ययन

उत्तराषाढ़ा नक्षत्र: धनु-मकर के अंश, चार चरण और विश्वेदेव प्रतीक

२६°४०′ धनु से १०°००′ मकर तक उत्तराषाढ़ा नक्षत्र के अंश, दोहरे वर्गोत्तम चरण, विश्वेदेव व अभिजित संबंध और ६-वर्षीय सूर्य दशा की गणना समझें।

11 मिनट का अध्ययन

श्रवण नक्षत्र: मकर के अंश, चार चरण, विष्णु प्रतीक और दशा गणना

१०°००′ से २३°२०′ मकर तक श्रवण नक्षत्र के अंश, मेष से कर्क तक चार नवांश चरण, विष्णु व त्रिविक्रम प्रतीक और १०-वर्षीय चंद्र महादशा की गणना समझें।

11 मिनट का अध्ययन

धनिष्ठा नक्षत्र: मकर-कुंभ के अंश, चार चरण, अष्ट वसु और पंचक नियम

२३°२०′ मकर से ६°४०′ कुंभ तक धनिष्ठा नक्षत्र के अंश, चार चरण, अष्ट वसु प्रतीक, ३००°००′ से पंचक आरम्भ और ७-वर्षीय मंगल महादशा की गणना समझें।

11 मिनट का अध्ययन

शतभिषा नक्षत्र: कुंभ के अंश, चार चरण, वरुण प्रतीक और दशा गणना

६°४०′ से २०°००′ कुंभ तक शतभिषा नक्षत्र के अंश, वर्गोत्तम चरण ३ सहित चारों नवांश, वरुण प्रतीक और १८-वर्षीय राहु महादशा की गणना समझें।

12 मिनट का अध्ययन

पूर्वा भाद्रपद नक्षत्र: कुंभ-मीन के अंश, चार चरण और अज एकपाद प्रतीक

२०°००′ कुंभ से ३°२०′ मीन तक पूर्वा भाद्रपद नक्षत्र के अंश, मेष से कर्क तक चार नवांश चरण, अज एकपाद प्रतीक और १६-वर्षीय गुरु महादशा की गणना समझें।

12 मिनट का अध्ययन

उत्तरा भाद्रपद नक्षत्र: मीन के अंश, चार चरण और अहिर्बुध्न्य प्रतीक

३°२०′ से १६°४०′ मीन तक उत्तरा भाद्रपद नक्षत्र के अंश, सिंह से वृश्चिक तक चार नवांश चरण, अहिर्बुध्न्य प्रतीक और १९-वर्षीय शनि महादशा की गणना समझें।

12 मिनट का अध्ययन

वैदिक ज्योतिष (ज्योतिष शास्त्र): निरयण राशिचक्र, तीन स्कंध, ग्रंथ और पद्धति

वैदिक ज्योतिष (ज्योतिष शास्त्र) का आधारभूत परिचय: वेदांग परंपरा, तीन स्कंध (सिद्धांत, संहिता, होरा), निरयण राशिचक्र, कुंडली के घटक और शास्त्रीय ग्रंथ।

13 मिनट का अध्ययन

शुरुआती पाठकों के लिए वैदिक ज्योतिष: लग्न, भाव, ग्रह, नक्षत्र और दशा सीखने की विधि

शुरुआती पाठकों के लिए वैदिक ज्योतिष का ७-चरणीय अभ्यास-क्रम: जन्म-इनपुट, लग्न व चंद्र राशि, १२ भाव, ९ ग्रह, नवांश (D9) और विंशोत्तरी दशा को क्रम से सीखें।

13 मिनट का अध्ययन

वैदिक ज्योतिष कैसे काम करता है: क्रांतिवृत्त गणित, अयनांश, भाव पद्धति और दशा काल

वैदिक ज्योतिष की तकनीकी कार्य-प्रणाली समझें: भूकेंद्रित क्रांतिवृत्त गणित, ~२४° अयनांश, राशि कुंडली बनाम भाव चलित संधि, नवांश और विंशोत्तरी दशा की गणना।

16 मिनट का अध्ययन

वैदिक ज्योतिष में पर्वत योग: शास्त्रीय परिभाषाएँ, केंद्र नियम और कुंडली उदाहरण

वैदिक ज्योतिष में पर्वत योग की जाँच: बृहत् पाराशर होरा शास्त्र, फलदीपिका व जातक पारिजात के केंद्र-शुभ नियम, षष्ठ-अष्टम शुद्धि और कुंडली उदाहरण।

14 मिनट का अध्ययन

कुंडली में काहल योग: चतुर्थेश, गुरु और नवमेश के नियम तथा कुंडली उदाहरण

कुंडली में काहल योग की गणना: चतुर्थेश-गुरु परस्पर केंद्र नियम, चतुर्थेश-दशमेश संबंध, लग्नेश बल की अनिवार्यता और बारह लग्नों के उदाहरण।

15 मिनट का अध्ययन

ज्योतिष में शंख योग: पंचमेश-षष्ठेश परस्पर केंद्र नियम और कुंडली उदाहरण

वैदिक ज्योतिष में शंख योग का विश्लेषण: पंचमेश-षष्ठेश परस्पर केंद्र सूत्र, चर राशि में लग्नेश-दशमेश का विकल्प, लग्नेश बल और कुंडली उदाहरण।

14 मिनट का अध्ययन

कुंडली में भेरी योग: शुक्र, लग्नेश, गुरु और नवमेश के नियम तथा उदाहरण

जन्म-कुंडली में भेरी योग की परख: शुक्र, लग्नेश व गुरु का परस्पर केंद्र नियम, 1-2-7-12 भाव विन्यास, बली नवमेश की शर्त और व्यावहारिक उदाहरण।

15 मिनट का अध्ययन

चतुःसागर योग: चारों केंद्र भावों (1, 4, 7, 10) में ग्रह और कुंडली उदाहरण

चतुःसागर योग की शास्त्रीय जाँच: लग्न के चारों केंद्र भावों (1, 4, 7, 10) में ग्रह-स्थिति, आकृति नाभस नियम, शुभ-पाप भेद और कुंडली उदाहरण।

14 मिनट का अध्ययन

वैदिक ज्योतिष में पारिजात योग: राशि-नवांश स्वामी श्रृंखला, नियम और उदाहरण

वैदिक ज्योतिष में पारिजात (कल्पद्रुम) योग की जाँच: लग्नेश से चतुर्थ-कड़ी राशि व नवांश डिस्पोज़िटर श्रृंखला, केंद्र-त्रिकोण नियम और कुंडली उदाहरण।

13 मिनट का अध्ययन

कुंडली में गज योग: सप्तमेश, एकादश भाव और चंद्र दृष्टि के नियम तथा उदाहरण

कुंडली में गज योग की गणना: एकादश से नवमेश (सप्तमेश) का चंद्र के साथ एकादश भाव में होना, लाभेश की दृष्टि, गजकेसरी से अंतर और बारह लग्नों के उदाहरण।

15 मिनट का अध्ययन

ज्योतिष में श्रीनाथ योग: दशम में उच्च सप्तमेश, नवमेश-दशमेश संबंध और उदाहरण

ज्योतिष में श्रीनाथ योग का विश्लेषण: बृहत् पाराशर का दशमस्थ उच्च सप्तमेश व नवमेश-दशमेश युति नियम, फलदीपिका का शुक्र-बुध-नवमेश सूत्र और उदाहरण।

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