पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र: धनु के अंश, चार चरण, आपः (जल) प्रतीक और उदाहरण
१३°२०′ से २६°४०′ धनु तक पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र के अंश, सिंह से वृश्चिक तक चार नवांश चरण, आपः (जल) प्रतीक और २०-वर्षीय शुक्र महादशा की गणना समझें।
॥ असतो मा सद्गमय ॥
१३°२०′ से २६°४०′ धनु तक पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र के अंश, सिंह से वृश्चिक तक चार नवांश चरण, आपः (जल) प्रतीक और २०-वर्षीय शुक्र महादशा की गणना समझें।
२६°४०′ धनु से १०°००′ मकर तक उत्तराषाढ़ा नक्षत्र के अंश, दोहरे वर्गोत्तम चरण, विश्वेदेव व अभिजित संबंध और ६-वर्षीय सूर्य दशा की गणना समझें।
१०°००′ से २३°२०′ मकर तक श्रवण नक्षत्र के अंश, मेष से कर्क तक चार नवांश चरण, विष्णु व त्रिविक्रम प्रतीक और १०-वर्षीय चंद्र महादशा की गणना समझें।
२३°२०′ मकर से ६°४०′ कुंभ तक धनिष्ठा नक्षत्र के अंश, चार चरण, अष्ट वसु प्रतीक, ३००°००′ से पंचक आरम्भ और ७-वर्षीय मंगल महादशा की गणना समझें।
६°४०′ से २०°००′ कुंभ तक शतभिषा नक्षत्र के अंश, वर्गोत्तम चरण ३ सहित चारों नवांश, वरुण प्रतीक और १८-वर्षीय राहु महादशा की गणना समझें।
२०°००′ कुंभ से ३°२०′ मीन तक पूर्वा भाद्रपद नक्षत्र के अंश, मेष से कर्क तक चार नवांश चरण, अज एकपाद प्रतीक और १६-वर्षीय गुरु महादशा की गणना समझें।
३°२०′ से १६°४०′ मीन तक उत्तरा भाद्रपद नक्षत्र के अंश, सिंह से वृश्चिक तक चार नवांश चरण, अहिर्बुध्न्य प्रतीक और १९-वर्षीय शनि महादशा की गणना समझें।
वैदिक ज्योतिष (ज्योतिष शास्त्र) का आधारभूत परिचय: वेदांग परंपरा, तीन स्कंध (सिद्धांत, संहिता, होरा), निरयण राशिचक्र, कुंडली के घटक और शास्त्रीय ग्रंथ।
शुरुआती पाठकों के लिए वैदिक ज्योतिष का ७-चरणीय अभ्यास-क्रम: जन्म-इनपुट, लग्न व चंद्र राशि, १२ भाव, ९ ग्रह, नवांश (D9) और विंशोत्तरी दशा को क्रम से सीखें।
वैदिक ज्योतिष की तकनीकी कार्य-प्रणाली समझें: भूकेंद्रित क्रांतिवृत्त गणित, ~२४° अयनांश, राशि कुंडली बनाम भाव चलित संधि, नवांश और विंशोत्तरी दशा की गणना।
वैदिक ज्योतिष में पर्वत योग की जाँच: बृहत् पाराशर होरा शास्त्र, फलदीपिका व जातक पारिजात के केंद्र-शुभ नियम, षष्ठ-अष्टम शुद्धि और कुंडली उदाहरण।
कुंडली में काहल योग की गणना: चतुर्थेश-गुरु परस्पर केंद्र नियम, चतुर्थेश-दशमेश संबंध, लग्नेश बल की अनिवार्यता और बारह लग्नों के उदाहरण।
वैदिक ज्योतिष में शंख योग का विश्लेषण: पंचमेश-षष्ठेश परस्पर केंद्र सूत्र, चर राशि में लग्नेश-दशमेश का विकल्प, लग्नेश बल और कुंडली उदाहरण।
जन्म-कुंडली में भेरी योग की परख: शुक्र, लग्नेश व गुरु का परस्पर केंद्र नियम, 1-2-7-12 भाव विन्यास, बली नवमेश की शर्त और व्यावहारिक उदाहरण।
चतुःसागर योग की शास्त्रीय जाँच: लग्न के चारों केंद्र भावों (1, 4, 7, 10) में ग्रह-स्थिति, आकृति नाभस नियम, शुभ-पाप भेद और कुंडली उदाहरण।
वैदिक ज्योतिष में पारिजात (कल्पद्रुम) योग की जाँच: लग्नेश से चतुर्थ-कड़ी राशि व नवांश डिस्पोज़िटर श्रृंखला, केंद्र-त्रिकोण नियम और कुंडली उदाहरण।
कुंडली में गज योग की गणना: एकादश से नवमेश (सप्तमेश) का चंद्र के साथ एकादश भाव में होना, लाभेश की दृष्टि, गजकेसरी से अंतर और बारह लग्नों के उदाहरण।
ज्योतिष में श्रीनाथ योग का विश्लेषण: बृहत् पाराशर का दशमस्थ उच्च सप्तमेश व नवमेश-दशमेश युति नियम, फलदीपिका का शुक्र-बुध-नवमेश सूत्र और उदाहरण।
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