मंगल दोष: बनने के नियम, मतभेद और कुंडली उदाहरण
मंगल दोष की नामित भाव-सूचियों की तुलना करें, लग्न, चंद्र और शुक्र से गिनें, और दो उदाहरणों में नियम का अंतर समझें।
॥ असतो मा सद्गमय ॥
मंगल दोष की नामित भाव-सूचियों की तुलना करें, लग्न, चंद्र और शुक्र से गिनें, और दो उदाहरणों में नियम का अंतर समझें।
२७ नक्षत्रों की नाड़ी तालिका देखें, ८-अंक कूट गिनें और समान नक्षत्र, राशि व चरण के नामित अपवाद समझें।
२/१२, ५/९ और ६/८ भकूट जोड़ों में दोनों दिशाओं से चंद्र राशि गिनें और नामित अंक-सारणी तथा राशि-स्वामी अपवाद जाँचें।
BAV और SAV का अंतर समझें, सूर्य अष्टकवर्ग की योगदान-सारणी दोहराएँ और ४८ मूल तथा २४ शोधित मान जाँचें।
गजकेसरी योग की चंद्रमा और लग्न से गणना, ग्रंथों के नियम-अंतर और तीन उदाहरण समझें। गठन को फल या गारंटी से अलग जाँचें।
सूर्य-बुध संबंध और राशि-सीमा के पार अंश-दूरी जाँचें। एक नामित अस्त-बुध नियम समझें; योग को बुद्धि या सफलता की परीक्षा न मानें।
रुचक, भद्र, हंस, मालव्य और शश योगों को ग्रह, राशि और केंद्र की कसौटी से तुलना करें। राशि-कुंडली और नवांश को मिलाए बिना उदाहरण जाँचें।
नामित विपरीत राजयोग नियम से छठे, आठवें और बारहवें भावेश की गणना करें। व्यापक और संकीर्ण नियमों की तुलना तीन लग्न-आधारित उदाहरणों से करें।
केमद्रुम नाम मानने से पहले चंद्रमा के आसपास की राशियाँ, सूर्य-छाया ग्रह और स्रोत-विशेष योग्यता जाँचें। दोहराने योग्य उदाहरण और प्रतिउदाहरण पढ़ें।
साइडेरियल वृषभ में रोहिणी की सीमा, चार चरणों के नवांश और चंद्रमा की गणना समझें; प्रतीकों को निश्चित भविष्यवाणी न मानें।
०° मेष से अश्विनी की सीमा और चार चरण-नवांश निकालें; अश्विनीकुमार की परंपरा समझें, पर स्वास्थ्य या स्वभाव की भविष्यवाणी न करें।
कर्क में पुष्य के चार चरण निकालें और जन्म-चंद्रमा, गुरु पुष्य गोचर तथा पूरे मुहूर्त के बीच का फर्क समझें।
३४६°४०′ से ३६०° तक रेवती और मीन के चार चरण निकालें; गण्डान्त की नामित पद्धतियों का फर्क समझें, भय न फैलाएँ।
अश्विनी और कृत्तिका के बीच भरणी की सीमा व चार चरण निकालें; नक्षत्र में शुक्र और मेष में मंगल की भूमिका अलग समझें।
कुंडली में हंस योग की जाँच: लग्न से केंद्र (1, 4, 7, 10) में कर्क, धनु या मीन राशि का गुरु, शास्त्रीय नियम, अपवाद और कुंडली उदाहरण।
कुंडली में मालव्य योग की सटीक जाँच: लग्न से केंद्र (1, 4, 7, 10) में वृषभ, तुला या उच्च मीन का शुक्र, सभी 12 लग्नों की तालिका, अस्त नियम और उदाहरण।
कुंडली में रुचक योग की जाँच: लग्न से केंद्र में मेष, वृश्चिक या उच्च मकर का मंगल, भाव 1, 4 व 7 में मांगलिक दोष से संबंध, लग्न पात्रता और उदाहरण।
कुंडली में भद्र योग की सटीक जाँच: मिथुन या कन्या में केंद्रस्थ बुध, केवल द्विस्वभाव लग्नों में बनने का कारण, बुधादित्य व अस्त अंतर और उदाहरण।
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