॥ असतो मा सद्गमय ॥

ज्योतिष और परंपरा का अध्ययन

कुंडली, ग्रह, भाव, मंत्र, पर्व और पंचांग पर स्पष्ट, विस्तृत और संदर्भ-सचेत लेख। एक विषय से शुरू करें, एक-एक कदम।

सभी अध्ययन लेख

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11 मिनट का अध्ययन

हिंदू अनुष्ठान और संस्कार: यज्ञ, पूजा, होम, षोडश संस्कार और दैनिक उपासना का अर्थ

हिंदू अनुष्ठानों का शास्त्रीय वर्गीकरण: वैदिक यज्ञ व होम बनाम आगम पूजा, पंचमहायज्ञ, षोडशोपचार, सोलह संस्कार (षोडश संस्कार) और संकल्प का महत्व समझें।

13 मिनट का अध्ययन

हिंदू काल-गणना (समय की इकाइयाँ): त्रुटि, घटी, मुहूर्त और प्रहर से युग, मन्वंतर व कल्प तक

सूर्य सिद्धांत और भागवत पुराण के अनुसार हिंदू काल-गणना: त्रुटि, प्राण, पल, घटी, मुहूर्त, प्रहर, तिथि-मास तथा चतुर्युग, मन्वंतर और कल्प के सटीक मान समझें।

14 मिनट का अध्ययन

प्रथम भाव (लग्न) में गुरु: दिग्बल, पंचम-सप्तम-नवम दृष्टि और 12 लग्नों में फल

प्रथम भाव (लग्न) में बृहस्पति का शास्त्रीय विश्लेषण: पूर्ण पूर्व दिग्बल, 5-7-9 धर्म-त्रिकोण दृष्टियाँ, हंस महापुरुष योग और 12 लग्नों में फल।

13 मिनट का अध्ययन

चतुर्थ भाव (सुख भाव) में गुरु: केंद्र नियम, दृष्टियाँ और 12 लग्नों में कुंडली उदाहरण

चतुर्थ भाव (सुख भाव) में गुरु का अध्ययन: केंद्र बल, अष्टम-दशम-द्वादश भावों पर 5-7-9 दृष्टि, हंस योग, केंद्राधिपति नियम और 12 लग्नों में फल।

14 मिनट का अध्ययन

पंचम भाव (सुत/विद्या भाव) में गुरु: त्रिकोण बल, कारको भावनाशाय नियम और उदाहरण

पंचम भाव (सुत व विद्या भाव) में गुरु की व्याख्या: त्रिकोण बल, कारको भावनाशाय सिद्धांत, नवम-एकादश-लग्न पर दृष्टि और 12 लग्नों के उदाहरण।

14 मिनट का अध्ययन

अष्टम भाव (रंध्र भाव) में गुरु: अनुसंधान, दृष्टियाँ, विपरीत योग और 12 लग्नों में फल

अष्टम भाव (रंध्र व आयु भाव) में बृहस्पति: गहन शोध, दीर्घायु, विपरीत राजयोग, द्वादश-द्वितीय-चतुर्थ भावों पर दृष्टि और 12 लग्नों में फल।

14 मिनट का अध्ययन

नवम भाव (धर्म/भाग्य भाव) में गुरु: त्रिकोण नियम, दृष्टियाँ और 12 लग्नों में उदाहरण

नवम भाव (धर्म व भाग्य भाव) में गुरु का विश्लेषण: भाग्य कारक नियम, लग्न-तृतीय-पंचम भावों पर 5-7-9 दृष्टि, राजयोग और 12 लग्नों में फल।

12 मिनट का अध्ययन

एकादश भाव (लाभ भाव) में गुरु: उपचय वृद्धि, दृष्टियाँ और 12 लग्नों में फल

एकादश भाव (लाभ भाव) में बृहस्पति का शास्त्रीय विश्लेषण: उपचय वृद्धि, तृतीय-पंचम-सप्तम भावों पर गुरु दृष्टि, वसुमती योग और बारह लग्नों में फल।

13 मिनट का अध्ययन

वैदिक ज्योतिष में प्रथम भाव (तनु/लग्न भाव): नियम, कारक, दिग्बल और कुंडली उदाहरण

वैदिक ज्योतिष में प्रथम भाव (तनु/लग्न भाव) का संपूर्ण मार्गदर्शक: केंद्र-त्रिकोण द्वैत नियम, सूर्य कारकत्व, गुरु-बुध दिग्बल और बारह लग्नों का विश्लेषण।

11 मिनट का अध्ययन

वैदिक ज्योतिष में नवम भाव (धर्म/भाग्य भाव): सर्वोच्च त्रिकोण, कारक और उदाहरण

वैदिक ज्योतिष में नवम भाव (धर्म/भाग्य भाव) का शास्त्रीय अध्ययन: पंचम से पंचम त्रिकोण सिद्धांत, गुरु-सूर्य कारकत्व, राजयोग और बारह लग्नों के नियम।

12 मिनट का अध्ययन

वैदिक ज्योतिष में चाप (कार्मुक) योग: नाभस व पाराशरी नियम तथा कुंडली उदाहरण

वैदिक ज्योतिष में चाप (कार्मुक) योग की दोनों शास्त्रीय परिभाषाएँ: दशम से लग्न तक आकृति नाभस चाप और उच्च लग्नेश व चतुर्थेश-दशमेश परिवर्तन नियम।

14 मिनट का अध्ययन

कुंडली में राजलक्षण योग: लग्न या केंद्र में गुरु, शुक्र, बुध और चंद्रमा के नियम

कुंडली में राजलक्षण योग की प्रामाणिक जाँच: लग्न या केंद्र में गुरु, शुक्र, बुध और बली चंद्रमा की स्थिति, अस्त दोष सीमा और कुंडली उदाहरण।

11 मिनट का अध्ययन

बृहस्पति (गुरु) मंत्र: वैदिक, पौराणिक व बीज मंत्र पाठ, अर्थ और गुरुवार जप विधि

बृहस्पति (देवगुरु) के चार प्रामाणिक शास्त्रीय मंत्र—ऋग्वैदिक ऋचा, व्यास नवग्रह श्लोक, गायत्री व तांत्रिक बीज—देवनागरी पाठ, शब्दार्थ और गुरुवार जप विधि सहित।

10 मिनट का अध्ययन

शनि देव के पाँच प्रमुख शास्त्रीय मंत्र: संस्कृत पाठ, उच्चारण, अर्थ और जप नियम

शनि देव के पाँच शास्त्रीय मंत्र—व्यास पौराणिक श्लोक, शनि गायत्री, तांत्रिक बीज, दशरथ स्तोत्र और वैदिक शांति मंत्र—संस्कृत पाठ, अर्थ व जप विधि सहित।

10 मिनट का अध्ययन

शिव गायत्री (रुद्र गायत्री) मंत्र: तैत्तिरीय आरण्यक पाठ, शब्दार्थ और जप विधि

तैत्तिरीय आरण्यक १०.१ में वर्णित शिव (रुद्र) गायत्री मंत्र—ॐ तत्पुरुषाय विद्महे महादेवाय धीमहि—का संस्कृत पाठ, शब्दार्थ, पंचब्रह्म संदर्भ और जप विधि जानें।

9 मिनट का अध्ययन

अघोर रुद्र मंत्र: तैत्तिरीय आरण्यक पंचब्रह्म श्लोक, शब्दार्थ और शास्त्रीय संदर्भ

तैत्तिरीय आरण्यक १०.४५ में वर्णित वैदिक अघोर रुद्र मंत्र (अघोरेभ्योऽथ घोरेभ्यो) का देवनागरी पाठ, शब्दार्थ, पंचब्रह्म संदर्भ और प्रामाणिक उपासना विधि जानें।

11 मिनट का अध्ययन

हिंदू परंपरा में बीज मंत्र: प्रणव, शक्ति और नवग्रह बीज अक्षरों का अर्थ व उच्चारण

वैदिक, उपनिषद और आगम-तांत्रिक परंपरा में बीज (बीजाक्षर) मंत्र—ॐ, ह्रीं, श्रीं, क्लीं, ऐं, गं, दुं तथा ९ नवग्रह बीज मंत्रों—का अर्थ, उच्चारण और दर्शन समझें।

13 मिनट का अध्ययन

अक्षय तृतीया (आखा तीज): वैशाख शुक्ल तृतीया पंचांग नियम, दान-पूजा विधि और परंपराएँ

वैशाख शुक्ल तृतीया पर अक्षय तृतीया (आखा तीज) का पूर्वाह्न व रोहिणी नक्षत्र नियम, पौराणिक व जैन प्रसंग, जल-सत्तू अक्षय दान और स्वर्ण HUID जाँच जानें।

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