हिंदू अनुष्ठान और संस्कार: यज्ञ, पूजा, होम, षोडश संस्कार और दैनिक उपासना का अर्थ
हिंदू अनुष्ठानों का शास्त्रीय वर्गीकरण: वैदिक यज्ञ व होम बनाम आगम पूजा, पंचमहायज्ञ, षोडशोपचार, सोलह संस्कार (षोडश संस्कार) और संकल्प का महत्व समझें।
॥ असतो मा सद्गमय ॥
हिंदू अनुष्ठानों का शास्त्रीय वर्गीकरण: वैदिक यज्ञ व होम बनाम आगम पूजा, पंचमहायज्ञ, षोडशोपचार, सोलह संस्कार (षोडश संस्कार) और संकल्प का महत्व समझें।
सूर्य सिद्धांत और भागवत पुराण के अनुसार हिंदू काल-गणना: त्रुटि, प्राण, पल, घटी, मुहूर्त, प्रहर, तिथि-मास तथा चतुर्युग, मन्वंतर और कल्प के सटीक मान समझें।
प्रथम भाव (लग्न) में बृहस्पति का शास्त्रीय विश्लेषण: पूर्ण पूर्व दिग्बल, 5-7-9 धर्म-त्रिकोण दृष्टियाँ, हंस महापुरुष योग और 12 लग्नों में फल।
चतुर्थ भाव (सुख भाव) में गुरु का अध्ययन: केंद्र बल, अष्टम-दशम-द्वादश भावों पर 5-7-9 दृष्टि, हंस योग, केंद्राधिपति नियम और 12 लग्नों में फल।
पंचम भाव (सुत व विद्या भाव) में गुरु की व्याख्या: त्रिकोण बल, कारको भावनाशाय सिद्धांत, नवम-एकादश-लग्न पर दृष्टि और 12 लग्नों के उदाहरण।
अष्टम भाव (रंध्र व आयु भाव) में बृहस्पति: गहन शोध, दीर्घायु, विपरीत राजयोग, द्वादश-द्वितीय-चतुर्थ भावों पर दृष्टि और 12 लग्नों में फल।
नवम भाव (धर्म व भाग्य भाव) में गुरु का विश्लेषण: भाग्य कारक नियम, लग्न-तृतीय-पंचम भावों पर 5-7-9 दृष्टि, राजयोग और 12 लग्नों में फल।
एकादश भाव (लाभ भाव) में बृहस्पति का शास्त्रीय विश्लेषण: उपचय वृद्धि, तृतीय-पंचम-सप्तम भावों पर गुरु दृष्टि, वसुमती योग और बारह लग्नों में फल।
वैदिक ज्योतिष में प्रथम भाव (तनु/लग्न भाव) का संपूर्ण मार्गदर्शक: केंद्र-त्रिकोण द्वैत नियम, सूर्य कारकत्व, गुरु-बुध दिग्बल और बारह लग्नों का विश्लेषण।
वैदिक ज्योतिष में नवम भाव (धर्म/भाग्य भाव) का शास्त्रीय अध्ययन: पंचम से पंचम त्रिकोण सिद्धांत, गुरु-सूर्य कारकत्व, राजयोग और बारह लग्नों के नियम।
वैदिक ज्योतिष में चाप (कार्मुक) योग की दोनों शास्त्रीय परिभाषाएँ: दशम से लग्न तक आकृति नाभस चाप और उच्च लग्नेश व चतुर्थेश-दशमेश परिवर्तन नियम।
कुंडली में राजलक्षण योग की प्रामाणिक जाँच: लग्न या केंद्र में गुरु, शुक्र, बुध और बली चंद्रमा की स्थिति, अस्त दोष सीमा और कुंडली उदाहरण।
बृहस्पति (देवगुरु) के चार प्रामाणिक शास्त्रीय मंत्र—ऋग्वैदिक ऋचा, व्यास नवग्रह श्लोक, गायत्री व तांत्रिक बीज—देवनागरी पाठ, शब्दार्थ और गुरुवार जप विधि सहित।
शनि देव के पाँच शास्त्रीय मंत्र—व्यास पौराणिक श्लोक, शनि गायत्री, तांत्रिक बीज, दशरथ स्तोत्र और वैदिक शांति मंत्र—संस्कृत पाठ, अर्थ व जप विधि सहित।
तैत्तिरीय आरण्यक १०.१ में वर्णित शिव (रुद्र) गायत्री मंत्र—ॐ तत्पुरुषाय विद्महे महादेवाय धीमहि—का संस्कृत पाठ, शब्दार्थ, पंचब्रह्म संदर्भ और जप विधि जानें।
तैत्तिरीय आरण्यक १०.४५ में वर्णित वैदिक अघोर रुद्र मंत्र (अघोरेभ्योऽथ घोरेभ्यो) का देवनागरी पाठ, शब्दार्थ, पंचब्रह्म संदर्भ और प्रामाणिक उपासना विधि जानें।
वैदिक, उपनिषद और आगम-तांत्रिक परंपरा में बीज (बीजाक्षर) मंत्र—ॐ, ह्रीं, श्रीं, क्लीं, ऐं, गं, दुं तथा ९ नवग्रह बीज मंत्रों—का अर्थ, उच्चारण और दर्शन समझें।
वैशाख शुक्ल तृतीया पर अक्षय तृतीया (आखा तीज) का पूर्वाह्न व रोहिणी नक्षत्र नियम, पौराणिक व जैन प्रसंग, जल-सत्तू अक्षय दान और स्वर्ण HUID जाँच जानें।
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