॥ असतो मा सद्गमय ॥

ज्योतिष और परंपरा का अध्ययन

कुंडली, ग्रह, भाव, मंत्र, पर्व और पंचांग पर स्पष्ट, विस्तृत और संदर्भ-सचेत लेख। एक विषय से शुरू करें, एक-एक कदम।

सभी अध्ययन लेख

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8 मिनट का अध्ययन

उपनिषदों में अद्वैत वेदांत: आत्मा, ब्रह्म और अद्वैत

उपनिषदों की अद्वैत वेदांत व्याख्या, आत्मा-ब्रह्म का संबंध, शंकराचार्य की भूमिका और वेदांत की दूसरी शाखाओं से अंतर को सरलता से समझें।

8 मिनट का अध्ययन

सुवर्चला देवी: क्षेत्रीय हनुमान परंपरा में सूर्यकन्या

सुवर्चला देवी कौन हैं, कुछ परंपराएँ उन्हें हनुमान की पत्नी क्यों बताती हैं, इस कथा का ब्रह्मचर्य से क्या संबंध है और यह कहाँ प्रचलित है—जानें।

8 मिनट का अध्ययन

त्वरिता देवी: श्रीविद्या परंपरा की अष्टमी नित्या

श्रीविद्या क्रम में आठवीं तिथि-नित्या के रूप में त्वरिता देवी का स्थान, उनके नाम का अर्थ और हिंदू परंपराओं में अष्टमी के अलग-अलग अनुष्ठान जानें।

8 मिनट का अध्ययन

वेंकटेश्वर: तिरुमल के भगवान और श्रीनिवास की कथा

जानें वेंकटेश्वर कौन हैं, भक्त उन्हें श्रीनिवास या बालाजी क्यों कहते हैं, तिरुमल की पवित्र कथाएँ क्या बताती हैं और मंदिर में श्रद्धापूर्वक दर्शन कैसे करें।

7 मिनट का अध्ययन

विजया नित्या: श्रीविद्या क्रम में द्वादशी की देवी

विजया नित्या का अर्थ, श्रीविद्या की एक सूची में उनका द्वादशी से संबंध और एकादशी व विजयादशमी के पर्वों से उनका अंतर जानें।

9 मिनट का अध्ययन

ऐतरेय उपनिषद् में अन्न की कथा: इंद्रियाँ भोजन क्यों नहीं कर पातीं

ऐतरेय उपनिषद् की सृष्टि-कथा में अन्न, इंद्रियों और प्राण की भूमिका समझें। इस प्रतीकात्मक वर्णन को आहार-नियम या चिकित्सा-दावा मानने की भूल न करें।

9 मिनट का अध्ययन

अक्षि उपनिषद्: सूर्य, नेत्र और ब्रह्मविद्या

अक्षि उपनिषद् में सूर्य से संवाद, चाक्षुष्मती विद्या और ब्रह्मविद्या की शिक्षा समझें। नेत्र-लाभ के पारंपरिक दावों को चिकित्सा-सलाह न मानें।

8 मिनट का अध्ययन

अवधूत अनुभूति गीता: दत्तात्रेय के अद्वैतपरक गीत का परिचय

अवधूत अनुभूति गीता नाम का अर्थ, दत्तात्रेय से संबद्ध अवधूत गीता से उसका संबंध और अद्वैत शिक्षा को जिम्मेदारी से पढ़ने का तरीका जानें।

8 मिनट का अध्ययन

हिंदू धर्म की मूल मान्यताएँ: विविध परंपराओं का सरल परिचय

धर्म, कर्म, संसार, मोक्ष, भक्ति और ईश्वर जैसे हिंदू परंपराओं के विचार समझें—साथ ही जानें कि कोई एक मत हर हिंदू को परिभाषित नहीं करता।

8 मिनट का अध्ययन

भगवद्गीता 12.15 का अर्थ: शांति देने वाला भक्त

भगवद्गीता 12.15 को संदर्भ में समझें: संसार को उद्विग्न न करना और उससे विचलित न होना क्या है, तथा समता मौन या भाव-दमन से कैसे अलग है।

9 मिनट का अध्ययन

भगवद्गीता अध्याय 17: श्रद्धा, भोजन, अनुशासन और दान

भगवद्गीता के श्रद्धात्रयविभागयोग अध्याय में तीन गुणों से श्रद्धा, पूजा, भोजन, यज्ञ, तप, दान और ॐ तत् सत् का संबंध समझें।

8 मिनट का अध्ययन

भगवद्गीता 7.15 का अर्थ: माया, मोह और शरणागति

भगवद्गीता 7.15 को संदर्भ सहित समझें: कठिन संस्कृत पद, माया की भूमिका और इस श्लोक को पूरे समुदाय की निंदा में क्यों नहीं बदलना चाहिए।

8 मिनट का अध्ययन

भगवद्गीता 7.16 का अर्थ: भक्तों के चार प्रकार

भगवद्गीता 7.16 में आर्त, जिज्ञासु, अर्थार्थी और ज्ञानी—चार प्रकार के साधक समझें और जानें कि वे अलग प्रेरणाओं से कृष्ण की ओर कैसे आते हैं।

9 मिनट का अध्ययन

भगवद्गीता 7.17 का अर्थ: ज्ञानी भक्त कृष्ण को प्रिय क्यों है

भगवद्गीता 7.17 में ज्ञानी की नित्य-युक्त और अनन्य भक्ति, चार साधकों के बाद उसका स्थान और अन्य भक्तों की अवहेलना न करने की बात समझें।

8 मिनट का अध्ययन

भगवद्गीता 7.18 का अर्थ: सभी साधक उदार हैं

भगवद्गीता 7.18 का संदर्भ समझें: कृष्ण चारों भक्तों को उदार क्यों कहते हैं, ज्ञानी को अपना स्वरूप कहने का क्या अर्थ है और भाष्य कहाँ अलग हैं।

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