पूर्ण चंद्र को सुपरमून कब कहते हैं?
चंद्र कक्षा के पृथ्वी से निकट बिंदु, उपभू यानी perigee, के आसपास होने वाले पूर्ण चंद्र को आम तौर पर सुपरमून कहते हैं। दूर बिंदु अपभू यानी apogee है। चंद्रमा का वास्तविक व्यास बढ़ता नहीं; पास होने से वह आकाश में बड़ा कोण घेरता है। “सुपरमून” अनौपचारिक शब्द है, इसलिए सूची में अपनाया मानदंड पढ़ें।
प्रतिशत पढ़ते समय मूल प्रश्न है: तुलना किससे है? NASA के प्रचलित लगभग 14% अधिक कोणीय व्यास और 30% अधिक चमक वाले अधिकतम आँकड़े निकट और दूर पूर्ण चंद्र की तुलना करते हैं। हर सुपरमून को औसत पूर्ण चंद्र से इतना बड़ा या चमकीला मानना सही नहीं है।
दूरी, चंद्रकला और स्थानीय दृश्यता अलग रखें
दूरी बताती है कि चंद्रमा कितना दूर है। चंद्रकला बताती है कि पृथ्वी से उसका प्रकाशित भाग कैसा दिखता है। चंद्रोदय स्थानीय क्षितिज पार करने का समय बताता है, जो चुनी गणना पर भी निर्भर है। इनमें से एक जानकारी मिलने से बाकी दोनों अपने आप नहीं मिलतीं।
उपभू और पूर्ण चंद्र का ठीक क्षण एक ही होना जरूरी नहीं। सुपरमून की बताई तारीख पर निकटतम दूरी और पूर्ण कला अलग घंटों में हो सकती हैं। नागरिक तारीख समय-क्षेत्र पर भी निर्भर है। इसलिए एक समय को सभी घटनाओं का समय मानने से पहले परिभाषा पढ़ें।
इस लेख में किसी आगामी घटना का पूर्वानुमान नहीं है। नीचे की दूरियाँ समझाने के लिए चुनी गई हैं। वे किसी महीने की ग्रह-सारणी, ऐतिहासिक न्यूनतम-अधिकतम या भविष्य के सुपरमून चुनने का नियम नहीं हैं।
आकार और चमक के प्रतिशत अलग क्यों हैं?
चंद्रमा जितने छोटे कोण पर दिखता है, उसके लिए कोणीय व्यास लगभग वास्तविक व्यास को दूरी से भाग देने के अनुपात में होता है। वास्तविक व्यास समान रहे तो पास वाले और दूर वाले कोणीय व्यास का अनुपात लगभग दूर वाली दूरी / पास वाली दूरी है।
केवल दूरी बदलें और प्रकाश व देखने की बाकी स्थितियाँ समान रखें, तो पूरे चंद्र-बिंब से मिलने वाला प्रकाश दूरी के वर्ग के व्युत्क्रम के अनुसार बदलता है। पास और दूर से मिले प्रकाश का अनुपात लगभग (दूर वाली दूरी / पास वाली दूरी)² होगा। यह पूरे बिंब से प्राप्त प्रकाश का मॉडल है; इससे चंद्र-सतह का हर टुकड़ा अपने आप अधिक प्रकाशमान होने का दावा नहीं बनता।
इसलिए 1.14 के व्यास-अनुपात से लगभग 1.2996 का प्रकाश-अनुपात मिलता है। वृद्धि क्रमशः 14% और 29.96% है, दोनों 14% नहीं। अनुपात में मूल मात्रा शामिल है। प्रतिशत वृद्धि पाने के लिए पहले 1 घटाएँ, फिर 100 से गुणा करें।
दूरी की तालिका जिसकी गणना आप जाँच सकते हैं
| दूरी: km | व्यास का अनुपात | व्यास की वृद्धि: % | प्रकाश का अनुपात | प्रकाश की वृद्धि: % |
|---|---|---|---|---|
| 400000 | 1 | 0 | 1 | 0 |
| 384000 | 1.041667 | 4.166667 | 1.085069 | 8.506944 |
| 360000 | 1.111111 | 11.111111 | 1.234568 | 23.45679 |
400,000 km के आधार से 360,000 km की तुलना में व्यास-अनुपात 400,000 / 360,000 = 1.111111… है। कोणीय व्यास की वृद्धि लगभग 11.11% हुई। बिना गोल किए अनुपात का वर्ग लगभग 1.234567… है, जिससे प्राप्त प्रकाश लगभग 23.46% अधिक हुआ।
384,000 km के लिए उसी आधार से कोणीय व्यास लगभग 4.17% और प्रकाश लगभग 8.51% अधिक मिलता है। गणना जाँचने के लिए तालिका में अतिरिक्त दशमलव हैं। उनसे वास्तविक अवलोकन के लिए उतनी ही सटीकता का दावा नहीं किया गया है।
बीच के चरण में पूरा मान रखें। पहले 1.11 तक गोल करके उसका वर्ग लेने पर 400,000 / 360,000 का सीधा वर्ग लेने से थोड़ा अलग उत्तर मिलेगा। यह गोल करने का प्रभाव है, चंद्र कक्षा बदलने का नहीं।
तुलना का आधार बदलते ही शीर्षक का प्रतिशत बदलता है
| आधार दूरी: km | व्यास की वृद्धि: % | प्रकाश की वृद्धि: % |
|---|---|---|
| 400000 | 11.111111 | 23.45679 |
| 384000 | 6.666667 | 13.777778 |
निकट चंद्रमा की दूरी दोनों पंक्तियों में वही है। दूसरी पंक्ति का आधार भी अपेक्षाकृत पास है, इसलिए वृद्धि छोटी है। दोनों उत्तर संगत हैं। यहाँ 384,000 km केवल चुनी तुलना-दूरी है; उसे सभी पूर्ण चंद्रों की सटीक औसत दूरी नहीं कहा गया है।
उल्टी दिशा में तुलना करने पर हर भी बदलता है। इस मॉडल में 400,000 km पर बिंब का व्यास, 360,000 km वाले व्यास का 90% है, यानी 10% छोटा। प्रकाश 81% है, यानी 19% कम। एक दिशा में “11.11% बड़ा” और दूसरी में “10% छोटा” परस्पर विरोधी नहीं हैं।
चित्र में देखें कि दावा व्यास, दिखाई क्षेत्रफल या कुल प्रकाश का है। 30% अधिक प्रकाश दिखाने के लिए चंद्र-वृत्त को 30% चौड़ा बनाना अतिशयोक्ति होगी। संख्याएँ अलग माप बता रही हैं; उन्हें एक जैसी वृद्धि न समझें।
दो तस्वीरों की ठीक तुलना कैसे करें?
एक ही कैमरा, फोकल लंबाई और चित्र-पैमाना रखें। क्रॉप या आकार बदलने का विवरण भी लिखें। छोटे हिस्से को काटकर उतने ही बड़े स्क्रीन क्षेत्र में दिखाने से चंद्रमा बड़ा लगेगा, लेकिन वह खगोलीय आकार का माप नहीं होगा। समान पैमाने की तस्वीरों में बिंब के आर-पार पिक्सेल गिनना उपयोगी है।
काल्पनिक दो तस्वीरों में चंद्र-व्यास 1,000 और 1,111 पिक्सेल हो तो मापा अनुपात 1.111 है। यह तभी उपयोगी है जब दोनों का पैमाना तुलनीय हो। इतनी जानकारी अकेले कारण सिद्ध नहीं करती और यह भी नहीं बताती कि तस्वीरें उपभू तथा अपभू पर ही ली गई थीं।
JPL की मापन गतिविधि एक्सपोजर का ध्यान रखने को भी कहती है, क्योंकि अत्यधिक उजला किनारा मापना कठिन है। चमक की तुलना में और नियंत्रण चाहिए: एक्सपोजर, कैमरा प्रोसेसिंग और वायुमंडलीय स्थितियाँ पिक्सेल मान बदल सकती हैं। दो सुंदर तस्वीरें अपने आप प्रकाश का अंशांकित माप नहीं बन जातीं।
क्षितिज पर बहुत बड़ा दिखना अलग प्रश्न है
क्षितिज के पास चंद्रमा असामान्य रूप से बड़ा लगने की अनुभूति को Moon illusion कहते हैं। NASA इस दृश्य अनुभूति को मापे गए कोणीय आकार से अलग समझाता है। इसलिए इमारतों के बीच बड़ा दिखने वाला चंद्रमा अपने आप सुपरमून की पहचान नहीं है।
क्षितिज के पास देखने की योजना के लिए स्थानीय चंद्रोदय और चंद्रास्त देखें। वह साधन उदय-अस्त की जानकारी देता है; उपभू-दूरी की गणना नहीं। कैलेंडर का फर्क समझने के लिए चंद्रकला और तिथि का लेख पढ़ें। अकेली पूर्णिमा तारीख से दूरी तय नहीं होती।
इसी तरह निकट होना और पूर्ण दिखना ग्रहण की गारंटी नहीं है। उसके लिए अतिरिक्त संरेखण चाहिए, जिसे ग्रहण ऋतु का लेख समझाता है। इन प्रश्नों को अलग रखने से अवलोकन की योजना और पंचांग की व्याख्या दोनों अधिक स्पष्ट होती हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
क्या सुपरमून में चंद्रमा का वास्तविक आकार बढ़ जाता है?
नहीं। पास होने से उसका कोणीय व्यास बड़ा दिखता है। इस प्रभाव के लिए चंद्रमा का भौतिक व्यास फैल नहीं रहा होता।
क्या हर सुपरमून औसत पूर्ण चंद्र से 14% बड़ा है?
नहीं। प्रचलित अधिकतम आँकड़ा निकट और दूर पूर्ण चंद्र की तुलना करता है। औसत या पिछले महीने के पूर्ण चंद्र से तुलना का आधार अलग होगा, इसलिए अंतर छोटा हो सकता है।
चमक का प्रतिशत व्यास से अधिक क्यों हो सकता है?
सरल दूरी-मॉडल में कोणीय व्यास दूरी के व्युत्क्रम और कुल प्राप्त प्रकाश दूरी के वर्ग के व्युत्क्रम के अनुसार बदलते हैं। इसलिए प्रकाश-अनुपात लगभग व्यास-अनुपात का वर्ग है।
उपभू पर पूर्ण चंद्र हो तो क्या ग्रहण होगा?
जरूरी नहीं। ग्रहण के लिए चंद्र-पातों और पृथ्वी की छाया के साथ अतिरिक्त संरेखण चाहिए। पूर्ण कला और कम दूरी अपने आप पर्याप्त नहीं हैं।
क्या चंद्रोदय का समय ही उपभू का समय है?
नहीं। चंद्रोदय स्थानीय क्षितिज पार करने से जुड़ा है। उपभू कक्षा में दूरी से जुड़ा है। उसके लिए स्पष्ट दूरी और समय-परिभाषा वाली ग्रह-सारणी देखें।
अलग जूम की तस्वीरों से आकार की तुलना कर सकते हैं?
सीधे नहीं। पहले समान चित्र-पैमाना स्थापित करें। क्रॉप, आकार बदलना, एक्सपोजर और कैमरा प्रोसेसिंग दूरी से असंबंधित दिखाई अंतर पैदा कर सकते हैं।