क्या प्रकाशित प्रतिशत देखकर तिथि बता सकते हैं?
नहीं। प्रकाशित प्रतिशत बताता है कि दिख रहे चंद्र-बिंब का कितना भाग सूर्य के प्रकाश से रोशन है। तिथि चंद्रमा और सूर्य के दिशायुक्त देशांतर-अंतर के 12° खंडों से निकलती है। लगभग आधा प्रकाशित चंद्रमा बढ़ते और घटते, दोनों पक्षों में आता है; इसलिए अकेला प्रतिशत पक्ष या सही तिथि नहीं बताता।
तारीख के लिए स्थान चुनकर तिथि गणना देखें। चंद्रमा का चिह्न या फोटो सामान्य कला पहचानने में उपयोगी है, लेकिन उसमें तिथि के समाप्ति-समय की पूरी जानकारी नहीं होती।
तीन संख्याएँ, तीन अलग प्रश्न
प्रकाशित अंश: दिख रहे चंद्र-बिंब का कितना हिस्सा सूर्य से प्रकाशित है? “50% प्रकाशित” प्रेक्षक को दिखने वाले बिंब की बात है। इसका अर्थ यह नहीं कि पूरे चंद्र-गोले का आधा हिस्सा उसी क्षण पहली बार रोशन हुआ, या चंद्रमा की चमक पूर्ण चंद्र की ठीक आधी हो गई।
चंद्र कला: दिखाई देने वाले आकारों के चक्र में चंद्रमा किस चरण पर है? NASA की व्याख्या इस बदलाव को पृथ्वी से सूर्य-प्रकाशित चंद्रमा देखने की ज्यामिति से समझाती है। बढ़ती कला में प्रकाशित रूप बढ़ने की ओर और घटती कला में घटने की ओर होता है।
तिथि: चंद्र देशांतर में से सूर्य देशांतर घटाने पर मिलने वाला दिशायुक्त अंतर किस 12° खंड में है? यह निर्देशांक से तय अंतराल है। प्रकाशित प्रतिशत को तीस से गुणा करके तिथि नहीं निकालते।
उदाहरण के लिए, 50% × 30 करने पर 15 आता है। यह शॉर्टकट दोनों अर्धचंद्र चरणों को पंद्रहवीं तिथि बता देगा। नीचे सही निर्देशांक-गणना से शुक्ल अष्टमी और कृष्ण अष्टमी मिलती हैं। प्रतिशत वाला तरीका कोण की परिभाषा और चक्र की दिशा, दोनों खो देता है।
अंतर सही दिशा में लें
भारत मौसम विज्ञान विभाग के विवरण में तिथि सूर्य से आगे चंद्रमा के देशांतर में क्रमिक 12° बढ़त से परिभाषित है। एक ही भूकेन्द्रीय निर्देशांक-पद्धति में चंद्र देशांतर से सूर्य देशांतर घटाएँ। पूरा 360° चक्कर जोड़ या घटाकर अंतर को 0° या उससे अधिक और 360° से कम रखें। फिर 12 से भाग देकर पूर्णांक भाग लें और एक जोड़ें।
क्रमांक 1–15 शुक्ल पक्ष और 16–30 कृष्ण पक्ष में आते हैं। कृष्ण पक्ष में भीतर का क्रमांक पाने के लिए 15 घटाएँ। शुक्ल पक्ष की अंतिम तिथि पूर्णिमा और कृष्ण पक्ष की अंतिम तिथि अमावस्या है।
दिशायुक्त अंतर बनाए रखें। चंद्रमा 270° और सूर्य 30° पर हो तो अंतर 240° है। उसे छोटा चाप मानकर 120° कर देना घटते पक्ष को बढ़ते पक्ष में बदल देगा। वृत्त पार करने का एक और उदाहरण: चंद्रमा 10° और सूर्य 350° हो तो −340° में 360° जोड़कर 20° मिलता है, जो दूसरी तिथि में है।
चार उदाहरण: मिलता-जुलता रूप, अलग तिथि
ये सीखने के लिए दिए देशांतर हैं, वास्तविक प्रेक्षण नहीं। सभी देशांतर एक साझा संदर्भ में हैं। कला के नाम इन कोणों के आसपास का सामान्य रूप बताते हैं; ये सटीक प्रकाशित प्रतिशत की गणना नहीं हैं।
| सूर्य देशांतर | चंद्र देशांतर | चंद्र − सूर्य, 0°–360° में | पूरे चक्र में तिथि क्रमांक | तिथि और कला |
|---|---|---|---|---|
| 30° | 120° | 90° | 8 | शुक्ल अष्टमी; प्रथम चतुर्थांश, लगभग आधा प्रकाशित |
| 30° | 150° | 120° | 11 | शुक्ल एकादशी; आधे से अधिक प्रकाशित, बढ़ती कला |
| 30° | 270° | 240° | 21 | कृष्ण षष्ठी; आधे से अधिक प्रकाशित, घटती कला |
| 30° | 300° | 270° | 23 | कृष्ण अष्टमी; अंतिम चतुर्थांश, लगभग आधा प्रकाशित |
पहली पंक्ति में 120° − 30° = 90°। 90 को 12 से भाग देने पर 7.5 मिलता है; पूर्णांक भाग 7 में एक जोड़ने से क्रमांक 8 मिला। अंतिम पंक्ति में 300° − 30° = 270° और वही प्रक्रिया क्रमांक 23 देती है। 15 घटाने पर कृष्ण पक्ष की आठवीं तिथि मिलती है।
इसलिए दोनों चतुर्थांश चरण अष्टमी में आते हैं, पर पक्ष अलग है। दूसरी और तीसरी पंक्ति में चंद्रमा आधे से अधिक प्रकाशित दिखने वाला है, लेकिन तिथियाँ शुक्ल एकादशी और कृष्ण षष्ठी हैं। दोनों को कोई सटीक समान प्रतिशत नहीं दिया गया है: उसकी गणना के लिए सूर्य–पृथ्वी–चंद्रमा की वास्तविक ज्यामिति चाहिए।
पूर्ण चंद्र का क्षण पूरी पूर्णिमा तिथि नहीं है
USNO की परिभाषाएँ चार मुख्य कलाओं को स्पष्ट भूकेन्द्रीय देशांतर-अंतर 0°, 90°, 180° और 270° पर रखती हैं: नया चंद्र, प्रथम चतुर्थांश, पूर्ण चंद्र और अंतिम चतुर्थांश। ये विशिष्ट क्षण बताने वाले नाम हैं। तिथियाँ क्रमिक 12° सीमाओं के बीच के अंतराल हैं।
यदि शुरुआती सीमा को तिथि में लें और अंतिम सीमा को अगली तिथि में, तो पूर्णिमा 168° से 180° के पहले तक रहती है। ठीक 180° का पूर्ण चंद्र क्षण पूर्णिमा की समाप्ति और कृष्ण प्रतिपदा की शुरुआत की सीमा है। इसी प्रकार 360° से लौटकर 0° पर आने वाला नया चंद्र क्षण अमावस्या से शुक्ल प्रतिपदा का संक्रमण है।
| दिशायुक्त देशांतर-अंतर | चक्र में क्रमांक | इस सीमा-नियम में तिथि |
|---|---|---|
| 179°59′ | 15 | शुक्ल पूर्णिमा |
| 180°00′ | 16 | कृष्ण प्रतिपदा |
| 359°59′ | 30 | कृष्ण अमावस्या |
| 0°00′ | 1 | शुक्ल प्रतिपदा |
यह गणितीय सीमा को नाम देने का नियम है, किसी पर्व की तारीख बदलने का निर्देश नहीं। एक कैलेंडर पूर्ण चंद्र वाले दिन को प्रमुखता से दिखा सकता है, जबकि पंचांग पूर्णिमा के आगे उसका समाप्ति-समय देता है। दोनों को विरोधी मानने से पहले देखें कि संबंधित शीर्षक किस चीज का नाम है।
स्थान, घड़ी और चंद्रोदय की भूमिका
भूकेन्द्रीय कला या तिथि की सीमा एक क्षण होती है, जिसे अलग समय-क्षेत्रों में अलग घड़ी-समय से व्यक्त कर सकते हैं। घड़ी में अलग अंक दिखने भर से खगोलीय घटना अलग नहीं हो जाती। समय-क्षेत्र बदलने पर स्थानीय नागरिक तारीख बदल सकती है।
किसी व्रत को नागरिक तारीख देना संबंधित पंचांग-नियम पर भी निर्भर है; कई स्थितियों में स्थानीय सूर्योदय या कोई दूसरा निर्दिष्ट काल देखा जाता है। तिथि और कैलेंडर-तारीख तथा सूर्योदय का महत्व इस अगले चरण को समझाते हैं। केवल गोल किए प्रकाशित प्रतिशत से व्रत की तारीख न चुनें।
चंद्रोदय क्षितिज का अलग प्रश्न है। किसी कला का नाम यह सुनिश्चित नहीं करता कि उस समय चंद्रमा आपके क्षितिज के ऊपर होगा। स्थानीय चंद्रोदय और चंद्रास्त देखें; घटना मध्यरात्रि के बाद हो तो उसके साथ लिखी तारीख भी पढ़ें।
चंद्र ऐप और पंचांग की तुलना कैसे करें?
- एक ही क्षण और समय-क्षेत्र मिलाएँ; बिना समय के दो “आज” वाले परिणाम न मिलाएँ।
- पहचानें कि खाना प्रकाशित प्रतिशत, कला का क्षण, तिथि-अंतराल या दिन का नाम दिखा रहा है।
- मिलते-जुलते बिंब में बढ़ते और घटते पक्ष का अंतर देखें।
- सीमा जाँचते समय उपलब्ध सटीक अंश और समय रखें; गोल अंक भ्रम दे सकते हैं।
- अंतिम व्रत-तारीख के लिए संबंधित परंपरा का नियम लगाएँ।
अमावस्या और पूर्णिमा कैलेंडर में तारीख का प्रश्न आगे देख सकते हैं। गणना-पद्धति में परिणाम का संदर्भ दिया है। ऊपर के काल्पनिक कोण सीखने के उदाहरण हैं; उन्हें किसी तारीख के वास्तविक परिणाम की जगह न रखें।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
क्या 50% प्रकाश से आज की तिथि पता चलेगी?
नहीं। प्रथम और अंतिम चतुर्थांश के पास लगभग आधा बिंब प्रकाशित होता है। उनके देशांतर-अंतर 90° और 270° हैं, जो इस पद्धति में शुक्ल और कृष्ण अष्टमी देते हैं।
क्या प्रकाशित प्रतिशत पूरे चंद्र-गोले का प्रतिशत है?
सामान्यतः यह प्रेक्षक को दिखने वाले चंद्र-बिंब के प्रकाशित अंश को बताता है। इसे पूरे गोले की सतह या पूर्ण चंद्र की चमक का प्रतिशत न मानें।
तिथि के लिए सूर्य–चंद्रमा का छोटा कोण क्यों नहीं लें?
तिथि पूरे 360° चक्र में चंद्र से सूर्य का दिशायुक्त देशांतर-अंतर लेती है। 240° को छोटा चाप मानकर 120° कर देने से पक्ष की जानकारी खो जाएगी।
क्या पूर्ण चंद्र का क्षण पूरी पूर्णिमा तिथि तक रहता है?
नहीं। इस नियम में पूर्णिमा 168° से 180° के पहले तक का अंतराल है। ठीक 180° का पूर्ण चंद्र क्षण उस अंतराल की समाप्ति-सीमा है।
क्या चंद्रमा की फोटो से व्रत की तारीख तय कर सकते हैं?
फोटो सामान्य कला का संकेत दे सकती है, लेकिन सटीक तिथि-अंतराल और स्थानीय व्रत-नियम नहीं बताती। संबंधित तारीख का पंचांग और परंपरा का नियम देखें।
पूर्ण चंद्र लिखा हो तो क्या स्थानीय चंद्रोदय हो चुका है?
जरूरी नहीं। कला और चंद्रोदय अलग घटनाएँ मापते हैं। चंद्रोदय के लिए स्थान और क्षितिज की गणना चाहिए; उसकी तारीख और समय अलग देखें।