होहमान स्थानांतरण किन कक्षाओं को जोड़ता है?
आदर्श होहमान स्थानांतरण एक ही केंद्रीय पिंड के चारों ओर दो वृत्तीय, एक ही तल में स्थित कक्षाओं को स्पर्श करने वाले दीर्घवृत्त और दो तात्कालिक इंजन-आवेगों से जोड़ता है। पहला आवेग अंतरिक्षयान को दीर्घवृत्त में भेजता है। आधी कक्षा तक बिना इंजन चलाए जाने के बाद दूसरा आवेग अंतिम वृत्त की चाल से मेल कराता है।
बाहर जाने में r₂ > r₁ हो तो दोनों आवेग गति की दिशा में हैं। हर आवेग अपने स्थान पर चाल बढ़ाता है। फिर भी अंतिम वृत्तीय चाल आरंभिक वृत्तीय चाल से कम होती है। यह विरोध नहीं है: दोनों आवेगों के बीच बाहर जाते समय यान गुरुत्व के कारण धीमा होता है।
यह लेख आदर्श दो-पिंड गणना है, वास्तविक उड़ान-योजना नहीं। इसमें वायुमंडल, इंजन चलने की सीमित अवधि, तल बदलना, बाहरी व्यवधान और वास्तविक संचालन के लिए आवश्यक निगरानी शामिल नहीं हैं।
दूरी केंद्र से लें, सतह से ऊँचाई नहीं
| मात्रा | अर्थ | यहाँ इकाई |
|---|---|---|
| r₁, r₂ | आरंभिक और अंतिम वृत्त की केंद्रीय त्रिज्या | km |
| aₜ | स्थानांतरण दीर्घवृत्त का अर्ध-दीर्घ अक्ष | km |
| μ | केंद्रीय गुरुत्वीय प्राचल; हल्का उपग्रह | km³/s² |
| Δv₁, Δv₂ | दो अलग आवेगी वेग-परिवर्तन | km/s |
| tₜ | आधे दीर्घवृत्त का उड़ान-समय | s |
सभी संख्यात्मक उदाहरणों में μ = 398600.4 km³/s² लिया गया है। यह IAU के नाममात्र पृथ्वी गुरुत्वीय प्राचल 3.986004 × 10¹⁴ m³/s² का रूपांतरण है। एक घन किलोमीटर में 10⁹ घन मीटर होने से SI मान को 10⁹ से भाग देते हैं। गणना दोहराई जा सके इसलिए यह स्थिरांक स्पष्ट किया गया है।
7000 km और 14000 km दोनों केंद्रों के बीच की त्रिज्याएँ हैं, ऊँचाइयाँ नहीं। इनपुट ऊँचाई हो तो पहले चुनी हुई केंद्रीय त्रिज्या जोड़ें। पृथ्वी की नाममात्र भूमध्यवृत्तीय त्रिज्या 6378.1 km लेने पर 7000 km की कक्षा की मॉडल ऊँचाई 621.9 km होगी।
दो वृत्तों से स्थानांतरण दीर्घवृत्त बनाएँ
दीर्घवृत्त निकटतम बिंदु पर अंदर वाले वृत्त और दूरस्थ बिंदु पर बाहर वाले वृत्त को स्पर्श करता है। इसका अर्ध-दीर्घ अक्ष aₜ = (r₁ + r₂)/2 और बाहर जाने में उत्केंद्रता eₜ = (r₂ − r₁)/(r₂ + r₁) होती है। केंद्रीय पिंड दीर्घवृत्त की नाभि पर होता है, उसके ज्यामितीय केंद्र पर नहीं।
r₁ = 7000 km और r₂ = 14000 km पर aₜ = 10500 km तथा eₜ = 1/3 है। aₜ(1 − eₜ) और aₜ(1 + eₜ) निकालने पर दोनों सिरों की त्रिज्याएँ वापस मिलती हैं। चाल निकालने से पहले यह छोटी जाँच उपयोगी है।
दोनों आवेग केंद्रीय पिंड के विपरीत ओर लगते हैं। प्रस्थान-बिंदु से सीधे बाहर खींची गई रेखा अंतरिक्षयान का पथ नहीं है। बीच में यान गुरुत्व के अधीन मुड़े हुए दीर्घवृत्त पर जाता है; आदर्श मॉडल में लगातार इंजन चलाने की आवश्यकता नहीं ली गई है।
दो आवेग घटाने से पहले चार चाल निकालें
वृत्तीय चालें v₁ = √(μ/r₁) और v₂ = √(μ/r₂) हैं। स्थानांतरण की चालें विस-वाइवा से मिलती हैं: vₜ₁ = √[μ(2/r₁ − 1/aₜ)] तथा vₜ₂ = √[μ(2/r₂ − 1/aₜ)]। हर घटाव में एक ही स्थान की दो चालों की तुलना होनी चाहिए।
बाहर जाने में Δv₁ = vₜ₁ − v₁ और Δv₂ = v₂ − vₜ₂ हैं। स्पर्श-बिंदुओं पर संबंधित वेग एक ही गति-दिशा में हैं, इसलिए चालों का अंतर स्पर्शरेखीय आवेग का परिमाण देता है। दिशा बदलने वाले किसी भी मनमाने वेग-परिवर्तन में यह सरल घटाव नहीं लगा सकते।
कुल डेल्टा-v दोनों आवेगों के परिमाणों का योग है। यह अंतिम और आरंभिक वृत्तीय चालों का अंतर नहीं है। अलग स्थानों पर लगे दोनों आवेगों का सीधा सदिश योग भी पूरी प्रणोदन-आवश्यकता का सही अर्थ नहीं है।
7000 से 14000 km तक पूरा हल
| मात्रा | मान | इकाई |
|---|---|---|
| r₁ | 7000 | km |
| r₂ | 14000 | km |
| aₜ | 10500 | km |
| eₜ | 0.333333 | 1 |
| v₁ | 7.546053 | km/s |
| vₜ₁ | 8.713431 | km/s |
| Δv₁ | 1.167378 | km/s |
| vₜ₂ | 4.356716 | km/s |
| v₂ | 5.335865 | km/s |
| Δv₂ | 0.979150 | km/s |
| |Δv₁| + |Δv₂| | 2.146528 | km/s |
| tₜ | 5353.834676 | s |
| समय घंटों में | 1.487176 | h |
पहला आवेग चाल को 7.546053 से 8.713431 km/s करता है। दूरस्थ बिंदु तक पहुँचते हुए गुरुत्व के कारण स्थानांतरण चाल 4.356716 km/s रह जाती है। अंतिम वृत्त में 5.335865 km/s चाहिए, इसलिए वहाँ 0.979150 km/s की एक और वृद्धि जरूरी है।
कुल 2.146528 km/s है। इसके बजाय अंतिम वृत्तीय चाल में से पहली घटाएँ तो लगभग −2.210188 km/s मिलता है। यह केवल आरंभ और अंत की चालों की तुलना है, इंजन की आवश्यक डेल्टा-v नहीं। दोनों के बीच की उड़ान और गुरुत्वीय त्वरण को कहानी से हटाया नहीं जा सकता।
दूसरा आवेग छोड़ देने पर इस मॉडल में यान उसी स्थानांतरण दीर्घवृत्त में रहता है और बाद में अंदर की ओर लौटता है। अंतिम त्रिज्या तक पहुँच जाना अपने आप अंतिम वृत्तीय कक्षा में प्रवेश नहीं है।
समय स्थानांतरण दीर्घवृत्त की आधी अवधि है
केप्लर का अवधि-नियम Pₜ = 2π√(aₜ³/μ) देता है। निकटतम से दूरस्थ बिंदु तक आधी अवधि लगती है, इसलिए tₜ = π√(aₜ³/μ)। उदाहरण में 5353.834676 सेकंड, अर्थात 1.487176 घंटे मिलते हैं।
यहाँ आरंभिक वृत्त या अंतिम वृत्त की अवधि नहीं रखनी है। त्रिज्याओं के अंतर को किसी एक चाल से भाग देना भी सही नहीं होगा। पथ मुड़ा हुआ है, चाल बदलती है और दोनों चरम बिंदुओं पर त्रिज्यीय वेग-घटक शून्य है।
यह आदर्श समय पहले आवेग के तुरंत बाद से दूसरे आवेग तक का है। वास्तविक मिशन में प्रक्षेपण, तैयारी, इंजन की सीमित अवधि, बाद में स्थिति मिलाना और आगमन की प्रक्रियाएँ अलग समय जोड़ सकती हैं।
अलग अंतिम त्रिज्याओं की तुलना करें
| r₂ (km) | eₜ | Δv₁ (km/s) | Δv₂ (km/s) | कुल (km/s) | समय (h) |
|---|---|---|---|---|---|
| 8400 | 0.090909 | 0.335542 | 0.320576 | 0.656119 | 0.933931 |
| 10500 | 0.200000 | 0.720234 | 0.650469 | 1.370702 | 1.131333 |
| 14000 | 0.333333 | 1.167378 | 0.979150 | 2.146528 | 1.487176 |
| 21000 | 0.500000 | 1.695937 | 1.276052 | 2.971989 | 2.289658 |
| 28000 | 0.600000 | 1.999033 | 1.386755 | 3.385788 | 3.199894 |
| 42164 | 0.715239 | 2.336796 | 1.433931 | 3.770727 | 5.327265 |
| 70000 | 0.818182 | 2.629043 | 1.368762 | 3.997805 | 10.441661 |
हर पंक्ति में आरंभिक त्रिज्या और केंद्रीय प्राचल वही हैं; केवल बाहर की वृत्तीय त्रिज्या बदली है। 42164 km यहाँ एक संख्यात्मक गंतव्य है। किसी वास्तविक कक्षा को भूस्थिर कहने के लिए सही घूर्णन-अवधि, भूमध्यवृत्तीय तल और दिशा भी चाहिए।
इस बाहर जाने वाले परिवार में दूर के लक्ष्य का स्थानांतरण अर्ध-दीर्घ अक्ष बड़ा होता है, इसलिए बिना इंजन वाली उड़ान में सामान्यतः अधिक समय लगता है। दोनों आवेगों के वक्र एक जैसे नहीं हैं। चित्र में दूसरा सामान्यीकृत आवेग आगे चलकर घटता है, जबकि पहला दिखाए गए क्षेत्र में बढ़ता रहता है।
दोनों आवेगों को अलग वक्रों पर देखें
R = r₂/r₁ रखें और हर आवेग को v₁ = √(μ/r₁) से भाग दें। तब Δv₁/v₁ = √[2R/(1 + R)] − 1 और Δv₂/v₁ = [1 − √(2/(1 + R))]/√R है। चित्र के मान आयामरहित हैं। km/s वापस पाने के लिए वास्तविक आरंभिक वृत्तीय चाल से गुणा करें।
| R = r₂/r₁ | Δv₁/v₁ | Δv₂/v₁ | कुल/v₁ | tₜ/P₁ |
|---|---|---|---|---|
| 1 | 0.000000 | 0.000000 | 0.000000 | 0.500000 |
| 1.2 | 0.044466 | 0.042483 | 0.086949 | 0.576845 |
| 1.5 | 0.095445 | 0.086200 | 0.181645 | 0.698771 |
| 2 | 0.154701 | 0.129757 | 0.284457 | 0.918559 |
| 3 | 0.224745 | 0.169102 | 0.393847 | 1.414214 |
| 4 | 0.264911 | 0.183772 | 0.448683 | 1.976424 |
| 6 | 0.309307 | 0.190030 | 0.499338 | 3.273950 |
| 10 | 0.348400 | 0.181388 | 0.529788 | 6.449322 |
समय का अनुपात आरंभिक वृत्त की अवधि P₁ से लिया है और ½[(1 + R)/2]³ᐟ² के बराबर है। R = 1 पर दोनों वृत्त एक हैं और दोनों आवेग शून्य हो जाते हैं। सूत्र तब भी उसी वृत्त की आधी अवधि लौटाता है, लेकिन कक्षा बदलनी ही न हो तो इतना इंतजार अनिवार्य नहीं। यह सीमांत ज्यामिति है, जरूरी संचालन नहीं।
अंदर की कक्षा में जाने पर आवेग उलटते हैं
| आरंभ → अंत (km) | पहला हस्ताक्षरित Δv | दूसरा हस्ताक्षरित Δv | परिमाणों का योग | समय (s) |
|---|---|---|---|---|
| 7000 → 14000 | 1.167378 | 0.979150 | 2.146528 | 5353.834676 |
| 14000 → 7000 | -0.979150 | -1.167378 | 2.146528 | 5353.834676 |
अंदर जाने में बाहर के वृत्त से शुरू करें, चाल घटाकर दीर्घवृत्त में जाएँ, अंदर की त्रिज्या तक पहुँचें और फिर चाल घटाकर वृत्तीय बनें। यहाँ धनात्मक चिह्न गति की दिशा में और ऋणात्मक चिह्न गति के विपरीत परिवर्तन को दिखाता है।
एक ही दो त्रिज्याओं के लिए दोनों दिशाओं में आवेगों के परिमाणों का कुल योग और आधे दीर्घवृत्त का समय समान है। पहले और दूसरे आवेग के परिमाणों की जगह बदलती है। ऋणात्मक हस्ताक्षरित मान जोड़कर ऋणात्मक ईंधन-आवश्यकता बताना दिशा और परिमाण को मिलाना होगा।
बीच की उड़ान में ऊर्जा और कोणीय संवेग जाँचें
| कक्षा | a (km) | ε (km²/s²) | h (km²/s) |
|---|---|---|---|
| आरंभिक वृत्त | 7000 | -28.471457 | 52822.370261 |
| स्थानांतरण दीर्घवृत्त | 10500 | -18.980971 | 60994.019379 |
| अंतिम वृत्त | 14000 | -14.235729 | 74702.112420 |
दोनों आवेगों के बीच विशिष्ट ऊर्जा ε = −μ/(2aₜ) और विशिष्ट कोणीय संवेग h स्थिर हैं। स्पर्श-बिंदुओं पर h = r₁vₜ₁ = r₂vₜ₂ है। गणना-पत्र में अंतिम त्रिज्या दुगुनी और वहाँ की स्थानांतरण चाल आधी है, इसलिए यह बराबरी बनी रहती है।
आवेग एक कक्षा से अगली कक्षा में ऊर्जा और कोणीय संवेग बदलते हैं। इसलिए तीनों पंक्तियों की ऊर्जा समान होने की माँग गलत होगी। संरक्षण का नियम बीच की बिना प्रणोदन वाली दो-पिंड उड़ान पर लागू है; सिरों पर इंजन जानबूझकर कक्षीय स्थिति बदलता है।
आकार और केंद्रीय प्राचल बदलने का प्रभाव
| r₁ (km) | r₂ (km) | μ/398600.4 | कुल Δv (km/s) | समय (h) |
|---|---|---|---|---|
| 7000 | 14000 | 1 | 2.146528 | 1.487176 |
| 14000 | 28000 | 1 | 1.517824 | 4.206370 |
| 7000 | 14000 | 4 | 4.293056 | 0.743588 |
त्रिज्याओं का अनुपात और μ समान रखते हुए दोनों त्रिज्याएँ k गुना करें। तब हर चाल और डेल्टा-v 1/√k गुना होगी, जबकि समय k³ᐟ² गुना होगा। दोनों त्रिज्याएँ दुगुनी करने पर चाल की आवश्यकता √2 से भाग होगी और समय 2√2 गुना होगा।
ज्यामिति समान रखकर μ चार गुना करने पर चालें दुगुनी और समय आधा होगा। अंतिम पंक्ति दूसरे काल्पनिक केंद्रीय प्राचल का अभ्यास है; यह पृथ्वी का गुरुत्व बदलने का दावा नहीं है। ऐसी जाँचें गलत वर्गमूल या दूरी की असंगत इकाई पकड़ने में मदद करती हैं।
समान कक्षा और लक्ष्य से मिलना एक बात नहीं
जब यान आगमन-बिंदु पर पहुँचे तब लक्ष्य वस्तु भी वहीं होनी चाहिए। वृत्तीय, एक तल वाले बाहर जाने के मॉडल में प्रस्थान का कोण शून्य और लक्ष्य की आरंभिक बढ़त φ लें। उड़ान में लक्ष्य n₂tₜ आगे जाएगा, जहाँ n₂ = √(μ/r₂³)। आगमन π रेडियन पर चाहिए, इसलिए φ = π − n₂tₜ, जिसे 2π के अनुसार सामान्यीकृत किया जा सकता है।
7000 से 14000 km वाले उदाहरण में चुनी गति-दिशा में लक्ष्य की आरंभिक बढ़त 63.086570° है। यह काल्पनिक स्थिति-मिलान का उदाहरण है। इसमें प्रक्षेपण-स्थान, कक्षा का झुकाव या किसी असली यान की वर्तमान स्थिति शामिल नहीं है।
NASA की ग्रहों के बीच यात्रा की चर्चा दिखाती है कि पथ की ज्यामिति और ग्रह के आगमन-स्थान को साथ देखना क्यों आवश्यक है। सूर्य के चारों ओर पृथ्वी से मंगल की आदर्श गणना को पूरे मिशन में बदलने के लिए पृथ्वी के आसपास से प्रस्थान और मंगल के आसपास आगमन भी जोड़ने होंगे। केवल सूर्य-केंद्रित तालिका पूरा बजट नहीं है।
इस गणना की उपयोगिता और सीमा
तात्कालिक स्पर्शरेखीय आवेगों से एक ही तल की वृत्तीय कक्षाएँ जोड़ने में होहमान पद्धति महत्वपूर्ण संदर्भ है। इससे यह सार्वभौमिक निष्कर्ष नहीं निकलता कि हर मिशन में दो आवेग ही सबसे अच्छे होंगे। दूसरी स्थानांतरण पद्धतियाँ, समय की बाधा, तल-परिवर्तन और कम थ्रस्ट वाले इंजन तुलना बदल सकते हैं।
डेल्टा-v ईंधन का द्रव्यमान नहीं है। उसे प्रणोदक की मात्रा में बदलने के लिए इंजन का प्रदर्शन और यान का द्रव्यमान सहित प्रणोदन मॉडल चाहिए। इसी तरह बड़ी अंतिम त्रिज्या का अर्थ अपने आप पलायन नहीं: यहाँ का स्थानांतरण दीर्घवृत्त अभी बंधी कक्षा है।
चाल के सूत्र के लिए विस-वाइवा का लेख और अवधि तथा इकाइयों के लिए केप्लर का तीसरा नियम पढ़ें। पृथ्वी से निरीक्षण के अलग काम में सूर्योदय और सूर्यास्त उपकरण स्थानीय सौर समय देता है; वह कक्षा-स्थानांतरण नियोजक नहीं है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
बाहर जाने के लिए दोनों आवेग गति की दिशा में क्यों हैं?
पहला आवेग अंदर की वृत्तीय चाल से तेज करके दीर्घवृत्त में भेजता है। बाहरी बिंदु पर स्थानांतरण चाल वहाँ की वृत्तीय चाल से कम है, इसलिए वृत्तीय बनने के लिए फिर चाल बढ़ानी पड़ती है।
कुल डेल्टा-v अंतिम चाल में से आरंभिक चाल घटाने पर क्यों नहीं मिलता?
दोनों आवेग अलग स्थानों पर हैं और बीच में गुरुत्व चाल बदलता है। दोनों स्थानीय वेग-परिवर्तनों के परिमाण जोड़ें; केवल आरंभ और अंत की चालों का अंतर अलग मात्रा है।
दूसरा आवेग न लगाएँ तो क्या होगा?
आदर्श दो-पिंड मॉडल में यान उसी स्थानांतरण दीर्घवृत्त में रहेगा और बाद में अंदर लौटेगा। बाहरी त्रिज्या तक पहुँचने से अपने आप वृत्तीय कक्षा नहीं बनती।
होहमान यात्रा का समय कैसे निकलता है?
स्थानांतरण दीर्घवृत्त की आधी अवधि लें: π√(aₜ³/μ), जहाँ aₜ दोनों वृत्तीय त्रिज्याओं के योग का आधा है।
अंदर जाने में क्या डेल्टा-v की आवश्यकता ऋणात्मक है?
हस्ताक्षरित आवेग गति के विपरीत होते हैं, लेकिन बजट उनके धनात्मक परिमाणों का योग है। उसी आदर्श स्थानांतरण को उलटने पर दोनों परिमाणों का क्रम बदलता है और समय समान रहता है।
क्या इससे यान लक्ष्य वस्तु तक अपने आप पहुँच जाता है?
नहीं। लक्ष्य सही समय पर आगमन-बिंदु पर होना चाहिए। वास्तविक संचालन में संगत कक्षीय तल, सही वर्तमान स्थितियाँ और प्रणोदन मॉडल भी चाहिए।