केप्लर के तीसरे नियम का कौन-सा सूत्र लें?
अलग-थलग न्यूटनियन दो-पिंड प्रणाली की बंधी दीर्घवृत्तीय कक्षा के लिए P² = 4π²a³ / [G(M₁ + M₂)] है। P कक्षीय अवधि है और a सापेक्ष कक्षा का अर्ध-दीर्घ अक्ष है। सापेक्ष कक्षा में एक पिंड की स्थिति दूसरे के संदर्भ में देखी जाती है। हर में दोनों पिंडों का द्रव्यमान आता है।
प्रसिद्ध छोटा सूत्र P² ≈ a³ विशेष इकाइयों और लगभग एक सौर द्रव्यमान वाली पूरी प्रणाली के लिए उपयोगी है। अलग इकाइयों, हर युग्म तारे या हर उपग्रह पर उसे बिना जाँच नहीं लगा सकते। नीचे घोषित गुरुत्वीय प्राचल, SI रूपांतरण और Julian वर्ष से उदाहरण बनाए गए हैं, ताकि दशमलव दोहराए जा सकें।
सबसे बड़ी गलती अक्सर वर्गमूल दबाने से पहले होती है: किसी क्षण की दूरी या केवल एक तारे की द्रव्यमान-केंद्र वाली कक्षा को सापेक्ष अर्ध-दीर्घ अक्ष मान लिया जाता है। पहले मात्रा की पहचान करें, उसके बाद गणित करें।
अर्ध-दीर्घ अक्ष किसी एक क्षण की दूरी नहीं
दीर्घवृत्त का सबसे लंबा पूरा अक्ष दीर्घ अक्ष है और उसका आधा अर्ध-दीर्घ अक्ष है। सापेक्ष कक्षा की निकटतम तथा दूरस्थ दूरी rₚ = a(1 − e) और rₐ = a(1 + e) होती हैं। इसलिए a = (rₚ + rₐ)/2 है। केवल वृत्ताकार कक्षा में दोनों पिंडों की दूरी पूरे चक्कर में a के बराबर रहती है।
मानें निकटतम दूरी 1 au और दूरस्थ दूरी 3 au है। तब a = 2 au और उत्केंद्रता e = 0.5 है। यदि अवधि के सूत्र में दूरस्थ दूरी 3 au रख दी तो दूसरी, लंबी अवधि निकलेगी। उस क्षण की तस्वीर दूरी को अर्ध-दीर्घ अक्ष नहीं बना देती।
औसत दूरी कहना भी सावधानी चाहता है। a इन दो चरम दूरियों का अंकगणितीय औसत है; बराबर-बराबर समय के अंतरालों पर दूरी का औसत सामान्यतः वही नहीं होता। पिंड दूर वाले भाग में अधिक समय बिताता है। संबंधित ज्यामिति के लिए उपसौर, अपसौर और कक्षीय चाल का लेख पढ़ें।
दोनों द्रव्यमान क्यों जुड़ते हैं?
r को पहले पिंड से दूसरे की दूरी-सदिश मानें। दोनों पिंड एक-दूसरे के गुरुत्व से त्वरित होते हैं। उनके त्वरण समीकरणों का अंतर लेने पर r̈ = −G(M₁ + M₂)r/|r|³ मिलता है। यही सापेक्ष गति का समीकरण है, जिसमें μ = G(M₁ + M₂) पूरी प्रणाली का गुरुत्वीय प्राचल है।
वृत्त के लिए सापेक्ष चाल 2πa/P है। अभिकेंद्री त्वरण को μ/a² के बराबर रखने से 4π²a/P² = μ/a² और अवधि का सूत्र मिलता है। दीर्घवृत्त में क्षेत्रफल πab, स्थिर क्षेत्रीय दर h/2, b = a√(1 − e²) और h² = μa(1 − e²) लें। इन्हें P = 2πab/h में रखने पर उत्केंद्रता वाले गुणक कट जाते हैं।
यही कारण है कि समान a और μ वाली दीर्घवृत्तीय तथा वृत्ताकार कक्षाओं की अवधि समान हो सकती है। इसका अर्थ हर बिंदु पर चाल या दूरी समान होना नहीं। इस व्युत्पत्ति में दो-पिंड गुरुत्व की धारणा है; महत्वपूर्ण अतिरिक्त बल हों तो अधिक पूर्ण मॉडल चाहिए।
अंक रखने से पहले इकाइयाँ घोषित करें
| मात्रा | मान | अर्थ |
|---|---|---|
| 1 au | 149597870700 m | परिभाषित खगोलीय इकाई |
| 1 Julian year | 31557600 s | 365.25 दिन, प्रत्येक 86400 सेकंड |
| μ☉ᴺ | 1.3271244 × 10²⁰ m³/s² | IAU का नाममात्र सौर द्रव्यमान-प्राचल |
| m = μ / μ☉ᴺ | इकाईरहित | पूरी प्रणाली के प्राचल का अनुपात |
| k | 1.000018886746 | वर्षों वाली अवधि के सूत्र का गुणांक |
IAU का नाममात्र सौर प्राचल निश्चित रूपांतरण स्थिरांक है। इससे यह दावा नहीं निकलता कि वास्तविक सूर्य का द्रव्यमान हमेशा उसी असीम सटीकता से स्थिर है। μ सीधे उपयोग करने पर मापे गए गुरुत्वीय प्राचल को अलग द्रव्यमान और अलग अनुमानित G में बाँटने का अनावश्यक कदम भी बचता है।
a को au में, m = μ/μ☉ᴺ को इकाईरहित और P को ऊपर परिभाषित Julian वर्षों में लिखें तो P = k√(a³/m) है। यहाँ k = 1.000018886746 है। सामान्य कक्षा-अभ्यास में एक से यह अंतर छोटा है, पर इकाई का अर्थ बताते समय इसे छिपाना ठीक नहीं।
a = 1 au तथा m = 1 पर मॉडल 365.256898 दिन देता है। यह ठीक 365.25 दिन नहीं है। इसे पृथ्वी के वर्ष की अत्यंत सटीक भविष्यवाणी भी न कहें, क्योंकि इसमें नाममात्र सौर प्राचल, घोषित आदर्श इनपुट और अलग-थलग दो-पिंड मॉडल लिया गया है।
तीन कुल प्राचलों के लिए अवधि निकालें
हर पंक्ति में सापेक्ष अर्ध-दीर्घ अक्ष समान है और पूरी प्रणाली का प्राचल बदलता है। a = 4 au तथा m = 2 लें। पहले a³/m = 64/2 = 32 होगा। इसका वर्गमूल लेकर k से गुणा करने पर 5.656961 Julian वर्ष मिलते हैं।
| a (au) | m = 0.5 | m = 1 | m = 2 |
|---|---|---|---|
| 0.25 | 0.176780 | 0.125002 | 0.088390 |
| 0.5 | 0.500009 | 0.353560 | 0.250005 |
| 1 | 1.414240 | 1.000019 | 0.707120 |
| 2 | 4.000076 | 2.828481 | 2.000038 |
| 3 | 7.348608 | 5.196251 | 3.674304 |
| 4 | 11.313922 | 8.000151 | 5.656961 |
| 5 | 15.811687 | 11.180551 | 7.905843 |
| 10 | 44.722204 | 31.623374 | 22.361102 |
m = 1 स्थिर रखकर a को 1 से 2 au करने पर अवधि 2√2 अर्थात लगभग 2.828427 गुनी होती है। a स्थिर रखकर m को दोगुना करने पर अवधि √2 से भाग होती है। अनुपात याद रखने से लंबी सारणी याद करने की आवश्यकता घटती है, क्योंकि समान इकाई का गुणांक अनुपात में कट जाता है।
सारणी में छह दशमलव गणना मिलाने के लिए हैं। यह घोषित काल्पनिक इनपुट की अंकगणितीय सटीकता है, किसी वास्तविक तारे की माप की निश्चितता नहीं।
कक्षा का आकार और कुल द्रव्यमान अवधि को कैसे बदलते हैं?
चित्र के दोनों अक्ष रैखिक हैं। वक्र ऊपर की ओर मुड़ते हैं क्योंकि अवधि a की 3/2 घात के अनुपात में बढ़ती है। नीला वक्र सबसे ऊपर है: समान आकार पर सबसे कम कुल गुरुत्वीय प्राचल सबसे लंबी अवधि देता है। 4 au पर उसकी अवधि लाल वक्र की दो गुनी है, क्योंकि प्राचलों में चार गुना अंतर है।
तीनों प्रणालियाँ जानबूझकर काल्पनिक रखी गई हैं। चित्र से बिंदु पढ़ने पर किसी वास्तविक ग्रह का नाम, उसकी उत्केंद्रता या उसकी वर्तमान स्थिति नहीं मिलती। अधिक अंक चाहिए हों तो सारणी उपयोग करें; चित्र की रेखा की मोटाई सटीक माप का विकल्प नहीं।
समान अक्ष पर उत्केंद्रता बदलें तो क्या होगा?
| e | rₚ (au) | rₐ (au) | P (Julian वर्ष) |
|---|---|---|---|
| 0 | 2.000000 | 2.000000 | 2.828481 |
| 0.2 | 1.600000 | 2.400000 | 2.828481 |
| 0.5 | 1.000000 | 3.000000 | 2.828481 |
| 0.8 | 0.400000 | 3.600000 | 2.828481 |
e = 0.8 वाली कक्षा में दूरी 0.4 से 3.6 au तक बदलती है, फिर भी समान कुल प्राचल वाली 2 au की वृत्ताकार कक्षा जितनी अवधि है। दूरस्थ दूरी बढ़ने के साथ निकटतम दूरी घटती है और a स्थिर रहता है। यही स्थिरता इस तुलना की शर्त है।
इसके विपरीत यदि निकटतम दूरी स्थिर रखकर उत्केंद्रता बढ़ाएँ तो a = rₚ/(1 − e) बढ़ता है और अवधि भी बदलती है। इसलिए केवल अवधि उत्केंद्रता से स्वतंत्र है कहना अधूरा है। पहले बताएँ कि कौन-सी बाकी मात्राएँ स्थिर रखी गई हैं। ऊपर की चार पंक्तियाँ इसी शर्त को साफ दिखाती हैं।
e = 1 या उससे अधिक पर इसी तरह लौटकर आने वाली बंधी दीर्घवृत्तीय अवधि नहीं मिलती। अबद्ध पिंड का गुजरना आवर्ती चक्कर नहीं। अनुपयुक्त या ऋणात्मक अक्ष वर्गमूल में डालने से कोई वास्तविक दोहराव-अवधि पैदा नहीं होती।
युग्म तारे में दोनों अर्ध-दीर्घ अक्ष जोड़ें
एक काल्पनिक युग्म लें जिसके घटकों के गुरुत्वीय प्राचल 1.5 और 0.5 नाममात्र सौर इकाइयाँ हैं तथा सापेक्ष a = 4 au है। कुल प्राचल 2 है। द्रव्यमान-केंद्र की शर्त से a₁ = aM₂/(M₁ + M₂) = 1 au तथा a₂ = aM₁/(M₁ + M₂) = 3 au मिलते हैं।
दोनों तारे अपनी-अपनी द्रव्यमान-केंद्र वाली कक्षाओं का चक्कर समान 5.656961 वर्षों में लगाते हैं। अधिक भारी घटक छोटी दीर्घवृत्तीय कक्षा पर चलता है। सापेक्ष अक्ष दोनों अक्षों का योग है, अकेला कोई एक अक्ष नहीं।
| गणना में लिया a | a (au) | m | निकली अवधि (वर्ष) |
|---|---|---|---|
| सापेक्ष a₁ + a₂ | 4 | 2 | 5.656961 |
| गलती से केवल a₁ | 1 | 2 | 0.707120 |
| गलती से केवल a₂ | 3 | 2 | 3.674304 |
| a सही, साथी का द्रव्यमान छोड़ा | 4 | 1.5 | 6.532096 |
केवल a₁ = 1 au को कुल प्राचल के साथ रख देने से अवधि आठ गुना कम निकलती है। सही 4 au लेकर भी 0.5 इकाई वाले साथी को छोड़ देने पर परिणाम गलत होता है, पर दूसरी दिशा में। किसी छोटे ग्रह का द्रव्यमान कभी उपेक्षित किया जा सकता है; युग्म तारों में वही अनुमान बिना जाँच आगे नहीं बढ़ाना चाहिए।
जहाँ स्थिरांक कटते हों वहाँ अनुपात उपयोग करें
समान मॉडल मानने वाली दो प्रणालियों के लिए P₂/P₁ = √[(a₂/a₁)³(μ₁/μ₂)] है। एक जैसी मात्राओं की इकाइयाँ समान हों तो इससे अनावश्यक रूपांतरण बचता है। कैलकुलेटर से निकले परिणाम की स्वतंत्र जाँच भी हो जाती है।
| a₂/a₁ | μ₂/μ₁ | P₂/P₁ |
|---|---|---|
| 2 | 1 | 2.828427 |
| 3 | 1 | 5.196152 |
| 1 | 2 | 0.707107 |
| 1 | 4 | 0.500000 |
| 2 | 8 | 1.000000 |
| 0.5 | 1 | 0.353553 |
दो गुना आकार और आठ गुना प्राचल वाली पंक्ति में अवधि समान आती है। कारण यह है कि आकार का घन आठ गुना हुआ और μ भी आठ गुना हुआ। यदि उसी उदाहरण में अवधि दो गुनी आ रही हो तो संभव है दूरी को रैखिक ढंग से लगाया गया हो या घात छूट गई हो।
मापी गई कक्षा से कुल द्रव्यमान का अनुमान
सूत्र उलटने पर μ = 4π²a³/P² मिलता है। इस लेख की इकाइयों में m = k²a³/P² है। इसलिए काल्पनिक a = 4 au तथा P = 5 Julian वर्ष वाली कक्षा m = 2.560097 देती है। यह पूरी प्रणाली का प्राचल है; इससे दोनों घटकों के अलग द्रव्यमान अपने-आप नहीं मिलते।
द्रव्यमान-अनुपात निकालने के लिए और जानकारी चाहिए, जैसे दोनों द्रव्यमान-केंद्र वाले अक्ष या उपयुक्त वेग-माप के साथ कक्षीय मॉडल। पहले युग्म में a₁/a₂ = 1/3 से M₂/M₁ = 1/3 मिलता है। इसे कुल के साथ रखने पर 0.5 और 1.5 इकाई का विभाजन संभव होता है।
दिखाई देने वाले युग्म की कोणीय कक्षा के लिए दूरी और अभिविन्यास का उपयुक्त फिट भी चाहिए। छोटे कोण के संबंध में सही फिट किया सापेक्ष कोणीय अक्ष आर्कसेकंड में लें और पारसेक में दूरी से गुणा करें तो भौतिक अक्ष au में मिलता है। एक तस्वीर की प्रक्षेपित दूरी वही फिट किया अक्ष नहीं। तारकीय लंबन और पारसेक का लेख दूरी रूपांतरण अलग समझाता है।
दूरी की छोटी त्रुटि द्रव्यमान में अधिक क्यों दिखती है?
लघुगणकीय अवकलन से dP/P = (3/2)da/a − (1/2)dμ/μ मिलता है। उलटी समस्या में dμ/μ = 3da/a − 2dP/P है। ये छोटे परिवर्तन के प्रथम-क्रम संबंध हैं। बड़ी त्रुटियों के लिए इन्हें पूर्णतः सटीक सूत्र नहीं माना जाता।
| परिवर्तन | अवधि पर प्रथम-क्रम प्रभाव | द्रव्यमान-प्राचल के अनुमान पर प्रभाव |
|---|---|---|
| a में +1% | लगभग +1.5%, μ स्थिर | लगभग +3%, P स्थिर |
| μ में +1% | लगभग −0.5%, a स्थिर | μ इनपुट है |
| P में +1% | P मापा इनपुट है | लगभग −2%, a स्थिर |
मानें a में स्वतंत्र एक-मानक-विचलन अनिश्चितता 2 प्रतिशत और P में 1 प्रतिशत है। तब μ की प्रथम-क्रम सापेक्ष अनिश्चितता √[(3 × 0.02)² + (2 × 0.01)²] = 0.063246, अर्थात लगभग 6.32 प्रतिशत है। यहाँ अक्ष की घन-निर्भरता प्रमुख योगदान देती है।
वास्तविक कक्षा फिट में a और P की त्रुटियाँ सहसंबद्ध हो सकती हैं। तब प्रसरण में −12 Cov(a,P)/(aP) का पद भी आता है। स्वतंत्र मानकर वर्गों का जोड़ लेना गलत अनिश्चितता दे सकता है। यदि कक्षा का छोटा भाग ही देखा गया हो तो कई कक्षाएँ स्वीकार्य हो सकती हैं। अधिक दशमलव लिखना उस अनुपस्थित जानकारी को पूरा नहीं करता।
अर्थ बनाए रखते हुए गणना का क्रम
- लिखें कि बंधी दो-पिंड कक्षा का सन्निकटन लिया जा रहा है या नहीं।
- सापेक्ष अर्ध-दीर्घ अक्ष पहचानें और उसकी इकाई दर्ज करें।
- दोनों द्रव्यमान लें या एक को नगण्य मानने का आधार दें।
- उपलब्ध हो तो μ सीधे लें और नाममात्र स्थिरांक घोषित करें।
- अवधि को स्पष्ट समय-इकाई में बदलें, केवल अनिर्दिष्ट वर्ष न लिखें।
- आकार तथा द्रव्यमान के अनुपात से परिणाम जाँचें।
- इनपुट की माप और अनिश्चितता के अनुसार परिणाम गोल करें।
औसत गति n = 2π/P औसत कोणीय फेज की दर है। उत्केंद्र कक्षा में वास्तविक स्थिति-कोण की तात्कालिक दर सामान्यतः वही नहीं होती। अवधि अकेले यह भी नहीं बताती कि पिंड अभी कहाँ है। उसके लिए समय का संदर्भ, कक्षीय फेज और अन्य कक्षा-अवयव चाहिए।
व्यावहारिक आकाश-अवलोकन में स्थानीय सूर्योदय और सूर्यास्त दूसरी तरह का समय-संदर्भ देते हैं। युग्म तारा तस्वीर में अलग दिखेगा या नहीं, उसमें उपकरण और वातावरण की भूमिका है; दूरबीन की विभेदन सीमा इस विषय को समझाती है। अवलोकन का समय या एक जोड़ी की तस्वीर अपने-आप गतिशील कक्षा का पूर्ण समाधान नहीं बनती।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
क्या केप्लर का तीसरा नियम हमेशा P² = a³ है?
नहीं। पूरा दो-पिंड सूत्र P² = 4π²a³/[G(M₁ + M₂)] है। छोटा सूत्र au, वर्षों और लगभग एक सौर द्रव्यमान की पूरी प्रणाली में उपयोगी सन्निकटन है।
युग्म तारे में कौन-सा अर्ध-दीर्घ अक्ष लें?
सापेक्ष अक्ष a = a₁ + a₂ लें। दोनों घटकों के द्रव्यमान-केंद्र वाले अक्ष अलग मात्राएँ हैं, हालांकि दोनों की कक्षीय अवधि समान है।
क्या उत्केंद्रता से अवधि बदलती है?
सापेक्ष अर्ध-दीर्घ अक्ष और कुल गुरुत्वीय प्राचल स्थिर हों तो आदर्श दीर्घवृत्तीय अवधि उत्केंद्रता से स्वतंत्र है। निकटतम दूरी स्थिर रखने पर अक्ष बदलता है और अवधि बदल सकती है।
1 au पर लेख में ठीक एक वर्ष क्यों नहीं आता?
यहाँ निश्चित au, IAU का नाममात्र सौर द्रव्यमान-प्राचल और 365.25 दिन का Julian वर्ष लिया गया है। इनका गुणांक लगभग 1.000018886746 है, ठीक एक नहीं।
क्या युग्म की एक तस्वीर से कुल द्रव्यमान मिल जाएगा?
केवल प्रक्षेपित दूरी पर्याप्त नहीं। अवधि और भौतिक सापेक्ष अक्ष के लिए कक्षा का समाधान चाहिए। कोणीय कक्षा के साथ दूरी और अभिविन्यास का उपयुक्त मॉडल भी चाहिए।
क्या कक्षा से दोनों घटकों का द्रव्यमान अलग मिल जाता है?
अवधि और सापेक्ष अक्ष से कुल गुरुत्वीय प्राचल मिलता है। उसे दोनों घटकों में बाँटने के लिए द्रव्यमान-अनुपात की अतिरिक्त जानकारी आवश्यक है।