विस-वाइवा समीकरण से क्या निकलता है?
आदर्श न्यूटनियन दो-पिंड कक्षा में v² = μ(2/r − 1/a) दूरी r पर सापेक्ष चाल देता है। a सापेक्ष कक्षा का अर्ध-दीर्घ अक्ष और μ = G(M₁ + M₂) गुरुत्वीय प्राचल है। बड़े ग्रह के चारों ओर बहुत हल्के उपग्रह के लिए उपग्रह का द्रव्यमान प्रायः नगण्य माना जाता है।
दो उपयोगी सीमाएँ हैं: वृत्तीय चाल v꜀ = √(μ/r) और स्थानीय पलायन चाल vₑ = √(2μ/r)। पहला संबंध वृत्ताकार कक्षा का है; दूसरा अलग-थलग आदर्श मॉडल में शून्य ऊर्जा की सीमा है। किसी में भी केंद्रों की दूरी को सतह से ऊँचाई रखकर नहीं बदल सकते।
यह लेख नाममात्र पृथ्वी-प्राचल के साथ काल्पनिक कक्षाएँ लेता है। उद्देश्य मात्रा और अंकगणित स्पष्ट करना है; वास्तविक उपग्रह की स्थिति, प्रक्षेपण-पथ या पूरी प्रणोदन-आवश्यकता देना नहीं।
चाल, स्थिति और ऊर्जा को अलग पहचानें
| चिह्न | अर्थ | इकाई |
|---|---|---|
| r | दोनों केंद्रों के बीच तत्काल दूरी | km |
| a | सापेक्ष कक्षा का अर्ध-दीर्घ अक्ष | km |
| μ | G(M₁ + M₂); यहाँ हल्का उपग्रह माना है | km³/s² |
| v | सापेक्ष चाल; दिशा नहीं | km/s |
| ε | दो-पिंड ऊर्जा प्रति reduced mass | km²/s² |
चाल वेग-सदिश का परिमाण है। यह अदिश सूत्र यात्रा की दिशा, कक्षा का झुकाव, पिंड किस ओर है या वह पास आ रहा है अथवा दूर जा रहा है, नहीं बताता। उन प्रश्नों के लिए कक्षा की अतिरिक्त जानकारी चाहिए।
दीर्घवृत्त के लिए ऊर्जा का संबंध ε = v²/2 − μ/r = −μ/(2a) है। सामान्य दो-पिंड समस्या में यह प्रणाली की कक्षीय ऊर्जा को reduced mass, अर्थात घटाए गए द्रव्यमान M₁M₂/(M₁ + M₂), से भाग देने पर मिलता है। बहुत हल्के उपग्रह की सीमा में यह लगभग प्रति इकाई उपग्रह-द्रव्यमान की ऊर्जा है। बराबरी के द्रव्यमान वाले युग्म में दोनों अर्थों को मिलाने से कुल ऊर्जा गलत निकलेगी।
संरक्षित ऊर्जा से चाल का सूत्र प्राप्त करें
अनंत दूरी पर गुरुत्वीय स्थितिज ऊर्जा शून्य मानें। सापेक्ष समस्या में विशिष्ट गतिज ऊर्जा v²/2 और विशिष्ट स्थितिज ऊर्जा −μ/r है। केवल दो-पिंड गुरुत्व लागू हो तो उनका योग स्थिर रहता है।
बंधे दीर्घवृत्त के लिए यह स्थिरांक −μ/(2a) है। दोनों रूप बराबर रखकर दो से गुणा करें तो v² − 2μ/r = −μ/a, और आगे v² = μ(2/r − 1/a) मिलता है। धनात्मक वर्गमूल चाल देता है। वर्गमूल के भीतर ऋणात्मक संख्या आना उस ऊर्जा के लिए असंगत इनपुट का संकेत है।
उसी दीर्घवृत्त में r घटने पर स्थितिज ऊर्जा अधिक ऋणात्मक होती है और गतिज ऊर्जा बढ़ती है। कुल ऊर्जा समान रहती है। अंदर की ओर आते समय चाल बढ़ाने के लिए उपग्रह को अपने-आप इंजन चलाना आवश्यक नहीं। गुरुत्वीय बल चाल बदलता है और ऊर्जा के दोनों रूप आपस में बदलते हैं।
घोषित पृथ्वी-मॉडल और उसकी इकाइयाँ
IAU का नाममात्र पार्थिव गुरुत्वीय प्राचल 3.986004 × 10¹⁴ m³/s² लें। किलोमीटर वाली इकाई में यह 398600.4 km³/s² है। रूपांतरण में एक अरब से भाग आता है, क्योंकि लंबाई की इकाई घन में है। मीटर वाला प्राचल और किलोमीटर वाली दूरियाँ मिलाने से km/s में सही उत्तर नहीं मिलेगा।
यहाँ μ घोषित नाममात्र रूपांतरण मान है; पृथ्वी के पूरे वास्तविक गुरुत्वीय क्षेत्र का वर्तमान अत्यंत सूक्ष्म अनुमान नहीं। उदाहरण में वायुमंडलीय घर्षण, चपटी आकृति, प्रणोदन तथा चंद्र-सूर्य के विक्षोभ छोड़े गए हैं। दूरी km, चाल km/s और ऊर्जा km²/s² में दी है।
मुख्य उदाहरण में a = 14000 km और e = 0.5 है। निकटतम त्रिज्या a(1 − e) = 7000 km तथा दूरस्थ त्रिज्या a(1 + e) = 21000 km है। यही इस विशेष दीर्घवृत्त में पहुँची जा सकने वाली दूरी की सीमा बनाती है।
एक कक्षा के अलग स्थानों पर चाल और ऊर्जा
| r (km) | दीर्घवृत्त v (km/s) | वृत्तीय v (km/s) | पलायन v (km/s) | ε (km²/s²) |
|---|---|---|---|---|
| 7000 | 9.241990 | 7.546053 | 10.671730 | -14.235729 |
| 9000 | 7.752832 | 6.654993 | 9.411582 | -14.235729 |
| 10500 | 6.888572 | 6.161326 | 8.713431 | -14.235729 |
| 14000 | 5.335865 | 5.335865 | 7.546053 | -14.235729 |
| 17500 | 4.133143 | 4.772543 | 6.749395 | -14.235729 |
| 19000 | 3.672394 | 4.580280 | 6.477495 | -14.235729 |
| 21000 | 3.080663 | 4.356716 | 6.161326 | -14.235729 |
निकटतम बिंदु पर 2/7000 − 1/14000 = 3/14000 km⁻¹ है। इसे μ से गुणा करके वर्गमूल लें तो 9.241990 km/s मिलता है। दूरस्थ बिंदु पर चाल 3.080663 km/s है। दशमलव गोल करने से पहले दोनों का अनुपात ठीक तीन है।
इन दोनों चरम बिंदुओं पर अनुपात 21000/7000 भी है, क्योंकि वहाँ वेग त्रिज्या के लंबवत है। इसे हर स्थान पर चाल दूरी के व्युत्क्रम के समान है का सामान्य नियम न बनाएँ। चरम बिंदुओं से अलग जगह वेग का त्रिज्यीय घटक भी हो सकता है।
हर पंक्ति में ε = -14.235729 km²/s² समान है। वृत्तीय और पलायन वाले स्तंभ उसी दूरी पर तुलना के मान हैं। दीर्घवृत्त पर चल रहे एक उपग्रह के पास एक साथ ये तीन अलग चालें नहीं हैं।
दीर्घवृत्त और वृत्तीय चाल के वक्र कहाँ मिलते हैं?
r = a पर विस-वाइवा का वर्गमूल-अंतर्गत मान μ/a बन जाता है। इसलिए दीर्घवृत्त की चाल उस त्रिज्या की वृत्तीय चाल के बराबर है। इतनी समानता से कक्षा वृत्ताकार नहीं बन जाती। दीर्घवृत्तीय पिंड का वहाँ सामान्यतः त्रिज्यीय वेग शून्य नहीं है, जबकि वृत्त की गति पूरी अनुप्रस्थ है।
r, a से कम हो तो दीर्घवृत्त की चाल वृत्तीय संदर्भ से अधिक है। a से आगे वह उससे कम होती है। पलायन सीमा पूरे चित्र में दोनों से ऊपर है, क्योंकि दीर्घवृत्त की विशिष्ट ऊर्जा ऋणात्मक है।
हरा वक्र कई अलग वृत्तीय कक्षाओं की तुलना करता है। वह एक ही वृत्तीय उपग्रह का सभी त्रिज्याओं से बाहर की ओर गुजरता मार्ग नहीं है। यह अंतर स्पष्ट रखने से संभव चालों का ग्राफ वास्तविक अंतरिक्ष-पथ समझने की भूल नहीं होती।
ऊँचाई में संदर्भ त्रिज्या जोड़ना जरूरी है
400 km ऊँचाई का अर्थ गुरुत्वीय सूत्र में r = 400 km नहीं है। IAU की नाममात्र भूमध्यवृत्तीय त्रिज्या R = 6378.1 km को शिक्षण के लिए गोलाकार संदर्भ मानें तो r = R + h होगा। इसलिए 400 km ऊँचाई पर 6778.1 km की दूरी लगती है।
| ऊँचाई h (km) | r = R + h (km) | वृत्तीय चाल (km/s) | पलायन चाल (km/s) |
|---|---|---|---|
| 400 | 6778.1 | 7.668579 | 10.845008 |
| 1000 | 7378.1 | 7.350157 | 10.394691 |
| 2000 | 8378.1 | 6.897570 | 9.754637 |
| 10000 | 16378.1 | 4.933295 | 6.976733 |
संदर्भ त्रिज्या इसलिए बताई है क्योंकि वास्तविक पृथ्वी पूर्ण गोला नहीं। सटीक कार्य में संदर्भ सतह, निर्देशांक प्रणाली और स्थानीय स्थिति अलग पहचाननी होती है। इस उदाहरण में ऊँचाई की गलती समझाने के लिए घोषित भूमध्यवृत्तीय गोलाकार संदर्भ पर्याप्त है; इसे पूरा भू-मापन मॉडल नहीं कहा गया है।
मुख्य कक्षा की 7000 km निकटतम त्रिज्या इस संदर्भ सतह से 621.9 km ऊपर है। ऊँचाई लिख देने से गणना में लगने वाली केंद्र की दूरी 7000 km नहीं बदलती।
ऋणात्मक, शून्य और धनात्मक ऊर्जा
| चाल v (km/s) | ε (km²/s²) | C₃ = 2ε (km²/s²) | ऊर्जा की स्थिति |
|---|---|---|---|
| 6.000000 | -38.942914 | -77.885829 | ऋणात्मक / बंधी ऊर्जा |
| 7.546053 | -28.471457 | -56.942914 | ऋणात्मक / बंधी ऊर्जा |
| 9.000000 | -16.442914 | -32.885829 | ऋणात्मक / बंधी ऊर्जा |
| 10.671730 | 0.000000 | 0.000000 | शून्य / परवलय सीमा |
| 12.000000 | 15.057086 | 30.114171 | धनात्मक / अबद्ध ऊर्जा |
अनंत पर स्थितिज ऊर्जा शून्य रखने पर ऋणात्मक ऊर्जा बंधी दो-पिंड ऊर्जा की स्थिति है, शून्य परवलयिक पलायन सीमा है और धनात्मक ऊर्जा अनंत पर बची चाल के साथ पलायन की अनुमति देती है। गैर-त्रिज्यीय बिंदु-पिंड गति में ये क्रमशः दीर्घवृत्त, परवलय और अतिपरवलय से जुड़ते हैं।
ऊर्जा अकेले विस्तृत ग्रह के चारों ओर उपयोगी कक्षा की गारंटी नहीं देती। ऋणात्मक ऊर्जा वाला पथ सतह को काट सकता है। अंदर की ओर जा रहा धनात्मक ऊर्जा वाला पिंड भी निकलने से पहले टकरा सकता है। अदिश वर्गीकरण के साथ स्थिति, वेग की दिशा और ग्रह का भौतिक आकार देखना जरूरी है।
सारणी का C₃, ε का दोगुना है। दोनों को एक मानने से इकाइयाँ सही दिखते हुए भी दो गुना गलती होती है। पलायन सीमा पर आदर्श ऊर्जा ठीक शून्य है; वर्गमूल के कंप्यूटर गणित से बचा बहुत छोटा दशमलव कोई नई भौतिक खोज नहीं है।
वास्तविक वर्गमूल मिलना आवश्यक है, पर्याप्त नहीं
| r (km) | 2/r − 1/a | 7000–21000 km में? | निष्कर्ष |
|---|---|---|---|
| 5000 | 0.000328571429 | नहीं | ऊर्जा अनुमति देती है, यह उत्केंद्रता नहीं |
| 7000 | 0.000214285714 | हाँ | इस दीर्घवृत्त पर संभव |
| 14000 | 0.000071428571 | हाँ | इस दीर्घवृत्त पर संभव |
| 21000 | 0.000023809524 | हाँ | इस दीर्घवृत्त पर संभव |
| 27000 | 0.000002645503 | नहीं | ऊर्जा अनुमति देती है, यह उत्केंद्रता नहीं |
| 28000 | 0.000000000000 | नहीं | शून्य चाल; इस दीर्घवृत्त का बिंदु नहीं |
| 30000 | -0.000004761905 | नहीं | वर्गमूल के भीतर ऋणात्मक मान |
a = 14000 km पर r = 27000 km रखने से वर्गमूल के भीतर संख्या धनात्मक रहती है। फिर भी घोषित e = 0.5 वाला दीर्घवृत्त केवल 21000 km तक जाता है। बड़ी दूरी उसी ऊर्जा के साथ तभी संभव है जब अलग कोणीय संवेग और उत्केंद्रता चुनी जाए।
r = 5000 km का उदाहरण निकट दिशा में यही बात दिखाता है। ऊर्जा के समीकरण में सभी ज्यामितीय शर्तें शामिल नहीं हैं। किसी निकली चाल को विशेष कक्षा का परिणाम कहने से पहले उसके निकटतम और दूरस्थ बिंदु की सीमा भी जाँचें।
पलायन चाल और अनंत पर बची चाल अलग हैं
निकलते पथ के लिए v² = 2μ/r + v∞² लिखें। स्थानीय चाल v में उस दूरी की पलायन-आवश्यकता और अनंत दूरी पर बचने वाली अतिरिक्त ऊर्जा दोनों शामिल हैं। इसलिए इस आदर्श अतिपरवलयिक मामले में C₃ = v∞² = 2ε है।
| v∞ (km/s) | C₃ (km²/s²) | ε (km²/s²) | स्थानीय चाल (km/s) |
|---|---|---|---|
| 0 | 0 | 0 | 8.928610 |
| 1 | 1 | 0.5 | 8.984435 |
| 3 | 9 | 4.5 | 9.419134 |
| 5 | 25 | 12.5 | 10.233283 |
r = 10000 km तथा v∞ = 3 km/s पर स्थानीय चाल 9.419134 km/s है। C₃ = 9 km²/s² और ε = 4.5 km²/s² है। बाहर जाते समय पिंड धीमा पड़ता है, लेकिन अंततः रुकने के बजाय उसकी चाल 3 km/s के पास जाती है।
शून्य अतिरिक्त चाल वाली पंक्ति परवलयिक सीमा है। अतिपरवलय में signed semimajor axis की परंपरा a < 0 भी उपयोग होती है, जिससे −μ/(2a) धनात्मक बनता है। सॉफ्टवेयर में अक्ष रखने से पहले स्रोत की चिह्न-परंपरा देखें; कुछ विवरण उसी अक्ष का धनात्मक परिमाण लिखते हैं।
पलायन चाल पूरी अतिरिक्त वेग-वृद्धि नहीं है
| r (km) | पहले वृत्तीय चाल | पलायन चाल | अतिरिक्त Δv (km/s) |
|---|---|---|---|
| 7000 | 7.546053 | 10.671730 | 3.125677 |
| 10000 | 6.313481 | 8.928610 | 2.615129 |
| 21000 | 4.356716 | 6.161326 | 1.804611 |
पहले से वृत्तीय चाल पर चल रहे उपग्रह में पूरी पलायन चाल फिर जोड़नी नहीं पड़ती। उसी त्रिज्या पर तुरंत, गति की दिशा में, स्पर्शरेखीय वृद्धि मानें तो आदर्श अतिरिक्त मात्रा Δv = (√2 − 1)√(μ/r) है। 7000 km पर यह 3.125677 km/s है, जो चाल को 7.546053 से 10.671730 km/s बनाती है।
यह घटाव तभी है जब प्रारंभिक और अंतिम वेग की दिशा समान हो। दिशा बदलनी हो तो दोनों वेग-सदिशों के अंतर का परिमाण लें। समय लेने वाली वास्तविक इंजन-क्रिया, गुरुत्वीय प्रभाव, प्रणोदन की सीमा या वातावरण के लिए अधिक पूरा हिसाब चाहिए। इसलिए सारणी धरती की सतह से प्रक्षेपण की आवश्यकता नहीं है।
यह विरोधाभास लग सकता है कि आगे की ओर वेग बढ़ाने से कक्षा ऊँची होती है, जबकि ऊँची वृत्तीय कक्षा की चाल कम है। इंजन स्थानीय कक्षीय ऊर्जा बढ़ाता है। बाहर बढ़ते समय पिंड गतिज ऊर्जा को स्थितिज ऊर्जा में बदलता है। बाद के ऊँचे बिंदु की चाल और इंजन के तुरंत बाद की चाल अलग समयों की मात्राएँ हैं।
सूत्र लगाने का विश्वसनीय क्रम
- दो-पिंड सन्निकटन और उपग्रह का द्रव्यमान नगण्य मानने की बात लिखें।
- केंद्रों की दूरी तथा सुसंगत सापेक्ष अर्ध-दीर्घ अक्ष लें।
- वर्गमूल से पहले μ और दूरी की इकाइयाँ मिलाएँ।
- केवल वर्गमूल के भीतर का चिह्न नहीं, पूरी कक्षा की दूरी-सीमा जाँचें।
- चाल और पूरे वेग-सदिश में अंतर रखें।
- अलग स्थानों पर गतिज तथा स्थितिज ऊर्जा का योग जाँचें।
- स्थानीय पलायन चाल, अनंत की अतिरिक्त चाल और Δv को अलग लिखें।
केप्लर का तीसरा नियम पूरे चक्कर की अवधि का संबंधित प्रश्न समझाता है। उपसौर और अपसौर का लेख बदलती दूरी को ग्रहों की गति से जोड़ता है। अकेली अवधि या अकेली चाल पिंड का वर्तमान कक्षीय फेज नहीं बताती।
मापी गई डॉप्लर त्रिज्यीय चाल दृष्टि-रेखा का घटक है; वह अपने-आप यहाँ की पूरी सापेक्ष चाल नहीं बनती। साधारण अवलोकन-योजना में स्थानीय सूर्योदय और सूर्यास्त अलग समय-संदर्भ देते हैं। किसी माप को कक्षा के मॉडल में लगाने से पहले उसकी परिभाषा साथ रखें।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
विस-वाइवा समीकरण क्या है?
सापेक्ष दो-पिंड गति के लिए v² = μ(2/r − 1/a) है। r केंद्रों की दूरी, a सापेक्ष अर्ध-दीर्घ अक्ष और μ = G(M₁ + M₂) है। इससे चाल मिलती है, दिशा नहीं।
क्या r में सीधे ऊँचाई रख सकते हैं?
नहीं। पहले घोषित संदर्भ त्रिज्या में ऊँचाई जोड़ें। इस लेख की 6378.1 km नाममात्र भूमध्यवृत्तीय त्रिज्या पर 400 km ऊँचाई का अर्थ r = 6778.1 km है।
पलायन चाल वृत्तीय चाल की √2 गुनी क्यों है?
एक ही दूरी और गुरुत्वीय प्राचल पर वृत्तीय चाल का वर्ग μ/r और शून्य-ऊर्जा पलायन चाल का वर्ग 2μ/r है। इसलिए चालों का अनुपात √2 है।
धनात्मक वर्गमूल मिले तो क्या बिंदु मेरी कक्षा पर होगा?
यह केवल ऊर्जा की शर्त पूरी करता है। विशेष दीर्घवृत्त में r को a(1 − e) से a(1 + e) तक होना चाहिए और वेग की दिशा उसके कोणीय संवेग से मेल खानी चाहिए।
क्या C3 और विशिष्ट कक्षीय ऊर्जा समान हैं?
यहाँ C₃ = 2ε की परंपरा है। आदर्श दो-पिंड अतिपरवलयिक पलायन में C₃ = v∞² भी है। दोनों मात्राओं की इकाई चाल का वर्ग होती है।
क्या वृत्तीय कक्षा से अतिरिक्त Δv पूरी पलायन चाल है?
आदर्श तत्काल स्पर्शरेखीय वृद्धि में अतिरिक्त Δv, पलायन चाल में से पहले की वृत्तीय चाल घटाने पर मिलता है। दूसरी दिशा, वास्तविक इंजन-समय और प्रक्षेपण के लिए अधिक मॉडलिंग चाहिए।