भांश या D27 में राशि कैसे निकाली जाती है?
जन्मकुंडली की प्रत्येक 30° राशि को 1°06′40″ के 27 बराबर भागों में बाँटें। अग्नि राशियों में मेष, पृथ्वी राशियों में कर्क, वायु राशियों में तुला और जल राशियों में मकर से आगे गिनें। पहले भाग को आरंभिक राशि ही मिलती है। मीन के बाद फिर मेष आता है।
D27 को भांश, सप्तविंशांश और नक्षत्रांश भी कहते हैं। इस लेख का उद्देश्य दिए हुए निरयन देशांतर से उसकी राशि-स्थिति दोबारा निकालना है। किसी पारंपरिक वर्ग-कुंडली का गणितीय राशि-नाम अपने-आप व्यक्ति की क्षमता, सहनशीलता या भविष्य का प्रमाण नहीं बन जाता।
यहाँ तत्व देखें, केवल सम-विषम या चर-स्थिर नहीं
| तत्व | जन्मराशियाँ | पहला D27 भाग |
|---|---|---|
| अग्नि | मेष, सिंह, धनु | मेष |
| पृथ्वी | वृषभ, कन्या, मकर | कर्क |
| वायु | मिथुन, तुला, कुंभ | तुला |
| जल | कर्क, वृश्चिक, मीन | मकर |
मिथुन, तुला और कुंभ तीनों में आरंभ तुला से होगा। वे क्रमशः द्विस्वभाव, चर और स्थिर हैं, लेकिन इससे D27 का आरंभ नहीं बदलता। इसी प्रकार तीनों जल राशियाँ मकर से आरंभ होती हैं। यहाँ चार समूहों की पद्धति लागू है।
यह D20 के तीन स्वभाव-समूहों और D24 के सम-विषम नियम से अलग है। भाग की चौड़ाई सही होने पर भी गलत आरंभ चुनने से वर्ग बदल जाएगा। दो परिणाम मिलाने से पहले वर्ग का नाम और उसकी आरंभ-पद्धति साथ लिख लें।
सभी सत्ताईस भागों की पूरी सारणी
दूसरे स्तंभ में जन्मराशि के भीतर का अंश रखें। सीमा पर बिल्कुल बराबर मान उसी पंक्ति में जाएगा जो उस सीमा से आरंभ होती है। अंतिम 30° शामिल नहीं है, क्योंकि वह अगली जन्मराशि का 0° है।
| भाग | राशि के भीतर d | अग्नि | पृथ्वी | वायु | जल |
|---|---|---|---|---|---|
| 1 | 0°00′00″ ≤ d < 1°06′40″ | मेष | कर्क | तुला | मकर |
| 2 | 1°06′40″ ≤ d < 2°13′20″ | वृषभ | सिंह | वृश्चिक | कुंभ |
| 3 | 2°13′20″ ≤ d < 3°20′00″ | मिथुन | कन्या | धनु | मीन |
| 4 | 3°20′00″ ≤ d < 4°26′40″ | कर्क | तुला | मकर | मेष |
| 5 | 4°26′40″ ≤ d < 5°33′20″ | सिंह | वृश्चिक | कुंभ | वृषभ |
| 6 | 5°33′20″ ≤ d < 6°40′00″ | कन्या | धनु | मीन | मिथुन |
| 7 | 6°40′00″ ≤ d < 7°46′40″ | तुला | मकर | मेष | कर्क |
| 8 | 7°46′40″ ≤ d < 8°53′20″ | वृश्चिक | कुंभ | वृषभ | सिंह |
| 9 | 8°53′20″ ≤ d < 10°00′00″ | धनु | मीन | मिथुन | कन्या |
| 10 | 10°00′00″ ≤ d < 11°06′40″ | मकर | मेष | कर्क | तुला |
| 11 | 11°06′40″ ≤ d < 12°13′20″ | कुंभ | वृषभ | सिंह | वृश्चिक |
| 12 | 12°13′20″ ≤ d < 13°20′00″ | मीन | मिथुन | कन्या | धनु |
| 13 | 13°20′00″ ≤ d < 14°26′40″ | मेष | कर्क | तुला | मकर |
| 14 | 14°26′40″ ≤ d < 15°33′20″ | वृषभ | सिंह | वृश्चिक | कुंभ |
| 15 | 15°33′20″ ≤ d < 16°40′00″ | मिथुन | कन्या | धनु | मीन |
| 16 | 16°40′00″ ≤ d < 17°46′40″ | कर्क | तुला | मकर | मेष |
| 17 | 17°46′40″ ≤ d < 18°53′20″ | सिंह | वृश्चिक | कुंभ | वृषभ |
| 18 | 18°53′20″ ≤ d < 20°00′00″ | कन्या | धनु | मीन | मिथुन |
| 19 | 20°00′00″ ≤ d < 21°06′40″ | तुला | मकर | मेष | कर्क |
| 20 | 21°06′40″ ≤ d < 22°13′20″ | वृश्चिक | कुंभ | वृषभ | सिंह |
| 21 | 22°13′20″ ≤ d < 23°20′00″ | धनु | मीन | मिथुन | कन्या |
| 22 | 23°20′00″ ≤ d < 24°26′40″ | मकर | मेष | कर्क | तुला |
| 23 | 24°26′40″ ≤ d < 25°33′20″ | कुंभ | वृषभ | सिंह | वृश्चिक |
| 24 | 25°33′20″ ≤ d < 26°40′00″ | मीन | मिथुन | कन्या | धनु |
| 25 | 26°40′00″ ≤ d < 27°46′40″ | मेष | कर्क | तुला | मकर |
| 26 | 27°46′40″ ≤ d < 28°53′20″ | वृषभ | सिंह | वृश्चिक | कुंभ |
| 27 | 28°53′20″ ≤ d < 30°00′00″ | मिथुन | कन्या | धनु | मीन |
भाग 13–24 में पहले बारह भागों की राशि-सूची दोहरती है। भाग 25–27 में पहले तीन गंतव्य एक बार और आते हैं। फिर भी कुल 27 अलग अंश-खंड हैं; राशि दोहरने से खंड आपस में नहीं मिल जाते। हर तत्व के स्तंभ में तीन राशियाँ तीन बार और बाकी नौ राशियाँ दो बार आती हैं।
सीमाएँ सटीक रखने वाली पाँच चरणों की गणना
- पूर्ण निरयन देशांतर को 0° ≤ L < 360° में लाएँ। ठीक 360° को 0° मानें।
- जन्मराशि और उसके भीतर का शेष निकालें। उदाहरण के लिए 224° का अर्थ वृश्चिक 14° है, क्योंकि वृश्चिक 210° पर आरंभ होता है।
- राशि के भीतर के अंश को चाप-सेकंड में बदलें। एक राशि 108,000″ और एक D27 भाग ठीक 4,000″ है।
- भाग क्रमांक = floor(राशि के भीतर चाप-सेकंड ÷ 4,000) + 1 निकालें।
- तत्व के अनुसार आरंभिक राशि चुनकर भाग क्रमांक से एक कम कदम आगे बढ़ें; बारह राशियों के बाद चक्र दोहराएँ।
काल्पनिक 224° उदाहरण में 14° = 50,400″ है। 4,000 से भाग देने पर 12.6 मिलता है, इसलिए यह भाग 13 है। वृश्चिक जल राशि है: मकर से शुरू करके बारह कदम आगे बढ़ने पर फिर मकर आता है।
वृश्चिक में सीमा जाँचने के लिए 13°20′00″ लें। यह 48,000″ है और भाग 13, अर्थात मकर, आरंभ करता है। एक चाप-सेकंड पहले 13°19′59″ भाग 12 में था और धनु देता था। केवल 13°20′ दिखाने वाला गोल किया हुआ परिणाम मूल स्थिति सीमा के किस ओर थी, यह नहीं बताता।
अपनी गणना जाँचने के लिए अठारह स्थितियाँ
| पूर्ण देशांतर | जन्मराशि | राशि के भीतर | भाग | D27 राशि |
|---|---|---|---|---|
| 0°00′00″ | मेष | 0°00′00″ | 1 | मेष |
| 1°06′39″ | मेष | 1°06′39″ | 1 | मेष |
| 1°06′40″ | मेष | 1°06′40″ | 2 | वृषभ |
| 13°19′59″ | मेष | 13°19′59″ | 12 | मीन |
| 13°20′00″ | मेष | 13°20′00″ | 13 | मेष |
| 26°39′59″ | मेष | 26°39′59″ | 24 | मीन |
| 26°40′00″ | मेष | 26°40′00″ | 25 | मेष |
| 28°53′19″ | मेष | 28°53′19″ | 26 | वृषभ |
| 28°53′20″ | मेष | 28°53′20″ | 27 | मिथुन |
| 29°59′59″ | मेष | 29°59′59″ | 27 | मिथुन |
| 30°00′00″ | वृषभ | 0°00′00″ | 1 | कर्क |
| 59°59′59″ | वृषभ | 29°59′59″ | 27 | कन्या |
| 60°00′00″ | मिथुन | 0°00′00″ | 1 | तुला |
| 89°59′59″ | मिथुन | 29°59′59″ | 27 | धनु |
| 90°00′00″ | कर्क | 0°00′00″ | 1 | मकर |
| 224°00′00″ | वृश्चिक | 14°00′00″ | 13 | मकर |
| 359°59′59″ | मीन | 29°59′59″ | 27 | मीन |
| 360°00′00″ | मेष | 0°00′00″ | 1 | मेष |
29°59′59″ और 30°00′00″ की जोड़ी खास उपयोगी है। यहाँ जन्मराशि के साथ आरंभ-पद्धति भी बदलती है। मेष का अंतिम भाग D27 मिथुन है, जबकि वृषभ का पहला भाग कर्क है। आगे 60° और 90° की सीमाएँ इसी तरह वायु तथा जल समूह आरंभ करती हैं। पुरानी राशि की भाग-गिनती अगली राशि में जारी न रखें।
अंतिम पंक्ति देशांतर को मानक चक्र में लौटाना दिखाती है; कोई तेरहवीं राशि नहीं बनाती। 359°59′59″ मीन में है और D27 मीन देता है। 360°00′00″ मेष के पहले भाग पर वापस आता है। इन छोटी जोड़ियों से पता चलता है कि केवल गोल किए हुए अंश देखकर रिपोर्टों की तुलना क्यों अधूरी रहती है।
पूर्ण देशांतर को 27 से गुणा करने की जाँच क्यों सही बैठती है?
स्वतंत्र अंकगणितीय जाँच है H = (27 × L) mod 360°। H जिस राशि में आता है, वह यहाँ बताई D27 पद्धति की राशि से मेल खाएगा। यह इसी नियम की समानता है; इससे हर वर्ग के लिए ऐसी ही हार्मोनिक गणना सही नहीं मान सकते।
समझने के लिए जन्मराशि का क्रमांक k मेष के लिए 0 और मीन के लिए 11 रखें। तब L = 30k + d और 27L = 810k + 27d होगा। 360° का शेष लेने पर पहला पद 90k के बराबर है। इसलिए लगातार जन्मराशियों के आरंभ 0°, 90°, 180° और 270° आते हैं, फिर चार राशियों के बाद दोहरते हैं। ये मेष, कर्क, तुला और मकर हैं।
बचा हुआ 27d प्रत्येक 30°/27 अंतर पर एक गंतव्य राशि आगे जाता है। L = 224° में 27 × 224° = 6,048° है; शेष 288°, अर्थात मकर 18° मिलता है। राशि ऊपर निकले भाग 13 से मेल खाती है। यह व्युत्पन्न अंश गणितीय मानचित्र के भीतर की स्थिति है; किसी दूसरे आकाश में ग्रह का प्रत्यक्ष भौतिक स्थान नहीं।
D27 केवल जन्म-नक्षत्र का क्रमांक क्यों नहीं है?
दोनों जगह 27 आने पर भी विभाजन अलग हैं। समान नक्षत्रों की प्रचलित योजना पूरे 360° चक्र को 13°20′ के 27 खंडों में बाँटती है। D27 प्रत्येक 30° राशि को 1°06′40″ के 27 खंडों में बाँटता है। पूरे राशिचक्र में ऐसे 324 इनपुट-खंड होते हैं।
एक समान नक्षत्र 48,000″ लंबा है, अर्थात D27 की बारह चौड़ाइयों के बराबर। नक्षत्र का 3°20′ वाला एक पाद 12,000″ है, अर्थात तीन D27 चौड़ाइयों के बराबर। यह कोणीय जालियों का संबंध है; D27 की राशि, नक्षत्र का नाम और पाद-संख्या एक ही जानकारी नहीं हैं।
नवांश का लेख 3°20′ वाली जाली को अलग समझाता है। किसी रिपोर्ट में “नक्षत्र स्वामी” लिखा हो तो देखें कि वह ग्रह-स्वामी, अधिदेवता या D27 के किसी क्षेत्र का नाम है। मिलते-जुलते शब्द अलग अवधारणाएँ बता सकते हैं।
राशि-नियम और अधिदेवता-सूची को अलग पढ़ें
बृहत्पाराशरहोराशास्त्र के अध्याय 6 के श्लोक 24–26 में भांश के अधिदेवता और अंत में मेष से आरंभ चर राशियों का क्रम आता है। नरसिंह राव की पुस्तक का खंड 6.2.16 ऊपर प्रयुक्त चार तत्वों वाले आरंभ स्पष्ट करता है। नीचे स्रोतों से इन कथनों को सारणी के साथ पढ़ सकते हैं।
अधिदेवता का नाम अपने-आप गंतव्य राशि नहीं होता और राशि अपने-आप भाव-संख्या नहीं होती। भाव बताने के लिए लग्न तथा संबंधित भाव-पद्धति भी चाहिए। दो रिपोर्टों में अंतर दिखाई दे तो पहले निश्चित करें कि दोनों में एक ही प्रकार की जानकारी मिलाई जा रही है।
फलित पढ़ने से पहले पाँच जाँचें
- बिना गोल किया हुआ देशांतर मिलाएँ और निरयन संदर्भ-सेटिंग समान रखें।
- आरंभ चुनने से पहले जन्मराशि तथा उसका तत्व जाँचें।
- सीमाएँ चाप-सेकंड में देखें; 1°06′40″ को 1.0640 दशमलव अंश न मानें।
- उसी इनपुट पर पूरी सारणी और स्वतंत्र 27L वाला शेष मिलाएँ।
- इनपुट की अनिश्चितता स्पष्ट रखें; सीमा के पास की स्थिति के लिए शर्त सहित निष्कर्ष लिखें।
सही अंकगणित अनिश्चित जन्मसमय को निश्चित नहीं कर सकता, न किसी राशि-नाम को स्वास्थ्य या व्यक्ति के मूल्य का प्रमाण बनाता है। कुंडली में उपलब्ध स्थान देखें और गणना से निकली जानकारी को उसके ऊपर किए गए फलित से अलग समझें।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
D27 का एक भाग कितना बड़ा है?
ठीक 30°/27, अर्थात 1°06′40″ या 4,000 चाप-सेकंड। इसे 1.0640 दशमलव अंश नहीं पढ़ना चाहिए।
D27 में कौन-सी राशियाँ तुला से आरंभ होती हैं?
वायु राशियाँ मिथुन, तुला और कुंभ। अग्नि का आरंभ मेष, पृथ्वी का कर्क और जल का मकर है।
किसी राशि के भीतर ठीक 13°20′ पर क्या होता है?
भाग 13 आरंभ होता है, क्योंकि 48,000 चाप-सेकंड में बारह भाग पूरे हो चुके हैं। जन्मराशि के तत्व से चुने आरंभ से गिनती करें।
क्या कोई गंतव्य राशि दो से अधिक बार आ सकती है?
हाँ। 27 भागों में बारह राशियों के दो पूरे चक्र और तीन अतिरिक्त भाग आते हैं। हर तत्व के पहले तीन गंतव्य तीन बार आते हैं।
क्या D27 और 27 नक्षत्र एक ही हैं?
नहीं। समान नक्षत्र पूरे राशिचक्र को 27 खंडों में बाँटते हैं। D27 हर जन्मराशि में 27 भाग बनाता है, इसलिए पूरे चक्र में 324 भाग होते हैं।
क्या हार्मोनिक सूत्र से D27 जाँच सकते हैं?
यहाँ समझाई तत्व-आधारित पद्धति में पूर्ण देशांतर के 27 गुने का 360° से शेष जिस राशि में हो, वह सारणी से मेल खाता है। हर वर्ग के लिए यह समानता न मानें।