सिद्धांश D24 की राशि कैसे निकालते हैं?
हर 30° जन्मराशि को 1°15′ के 24 बराबर भागों में बाँटें। विषम क्रमांक की जन्मराशि का पहला भाग सिंह को और सम क्रमांक की जन्मराशि का पहला भाग कर्क को दें। अगले प्रत्येक भाग पर एक राशि आगे बढ़ें। पूरे 24 भागों में बारह राशियों के दो चक्र पूरे होते हैं।
सिद्धांश को चतुर्विंशांश भी कहते हैं। संदर्भित पाराशरी नियम आरंभ की राशियाँ बताता है; नीचे उसी नियम के अपने गणना-उदाहरण हैं। Astrogyana की वर्ग-गणना में भी यही राशि-आवंटन है। दो रिपोर्ट मिलाते समय परिणाम के साथ उनकी पद्धति भी पढ़ें।
एक भाग 1.25° है, 1.15° नहीं
सटीक चौड़ाई है: 30° ÷ 24 = 1.25° = 1°15′ = 75 कलाएँ = 4,500 विकलाएँ। दशमलव में 1.15° लिखने का अर्थ 1°09′ होता है। उसे भाग की चौड़ाई बनाने पर सीमाएँ खिसक जाएँगी और गलत सारणी बनेगी।
यहाँ d जन्मराशि के भीतर का अंश है: शून्य से शुरू होकर 30° से ठीक पहले तक। पहला भाग 0° को शामिल करता है और 1°15′ से पहले समाप्त होता है। ठीक 1°15′ पर दूसरा भाग, ठीक 15° पर तेरहवाँ भाग शुरू होता है। 30° होने पर पहले अगली जन्मराशि में जाएँ, फिर उसकी सम-विषम स्थिति दोबारा देखें।
विषम राशियाँ हैं मेष, मिथुन, सिंह, तुला, धनु और कुंभ: क्रमांक 1, 3, 5, 7, 9, 11। सम राशियाँ वृषभ, कर्क, कन्या, वृश्चिक, मकर और मीन हैं। यहाँ सम-विषम का संबंध राशि के क्रमांक से है; अंश की संख्या, वार या भाव की संख्या से नहीं।
पूरी सारणी: बारह पंक्तियों में सभी 24 भाग
| भागों की जोड़ी | पहला अंतराल | दूसरा अंतराल | विषम जन्मराशि में D24 | सम जन्मराशि में D24 |
|---|---|---|---|---|
| 1 / 13 | 0°00′ ≤ d < 1°15′ | 15°00′ ≤ d < 16°15′ | सिंह | कर्क |
| 2 / 14 | 1°15′ ≤ d < 2°30′ | 16°15′ ≤ d < 17°30′ | कन्या | सिंह |
| 3 / 15 | 2°30′ ≤ d < 3°45′ | 17°30′ ≤ d < 18°45′ | तुला | कन्या |
| 4 / 16 | 3°45′ ≤ d < 5°00′ | 18°45′ ≤ d < 20°00′ | वृश्चिक | तुला |
| 5 / 17 | 5°00′ ≤ d < 6°15′ | 20°00′ ≤ d < 21°15′ | धनु | वृश्चिक |
| 6 / 18 | 6°15′ ≤ d < 7°30′ | 21°15′ ≤ d < 22°30′ | मकर | धनु |
| 7 / 19 | 7°30′ ≤ d < 8°45′ | 22°30′ ≤ d < 23°45′ | कुंभ | मकर |
| 8 / 20 | 8°45′ ≤ d < 10°00′ | 23°45′ ≤ d < 25°00′ | मीन | कुंभ |
| 9 / 21 | 10°00′ ≤ d < 11°15′ | 25°00′ ≤ d < 26°15′ | मेष | मीन |
| 10 / 22 | 11°15′ ≤ d < 12°30′ | 26°15′ ≤ d < 27°30′ | वृषभ | मेष |
| 11 / 23 | 12°30′ ≤ d < 13°45′ | 27°30′ ≤ d < 28°45′ | मिथुन | वृषभ |
| 12 / 24 | 13°45′ ≤ d < 15°00′ | 28°45′ ≤ d < 30°00′ | कर्क | मिथुन |
d जिस अंतराल में आता है, वह पंक्ति चुनें। फिर जन्मराशि के सम या विषम होने के अनुसार आखिरी दो में से सही स्तंभ पढ़ें। हर निचली सीमा शामिल है और ऊपरी सीमा बाहर है। उदाहरण के लिए d = 18° तीसरी पंक्ति के दूसरे अंतराल में है। हर विषम जन्मराशि के लिए इसका परिणाम तुला और हर सम जन्मराशि के लिए कन्या होगा।
एक पंक्ति के दोनों अंतरालों की शुरुआत में 15° का अंतर है। बारह भाग मिलकर 12 × 1°15′ = 15° पूरे करते हैं और राशियों का एक पूरा चक्र समाप्त होता है। इसलिए भाग तेरह से चौबीस, भाग एक से बारह के परिणाम दोहराते हैं। यह जाँच का उपयोगी गुण है; कोई दूसरी वैकल्पिक पद्धति नहीं।
पूरे देशांतर से चार चरणों में गणना करें
- पूरा निरयण देशांतर 0° ≤ L < 360° के भीतर सामान्यीकृत करें।
- जन्मराशि पहचानें और उसके प्रारंभिक देशांतर को घटाकर राशि के भीतर का d निकालें।
- d को 1.25° से भाग दें, दशमलव का शेष हिस्सा छोड़ें और एक जोड़ें। यह भाग क्रमांक p है।
- विषम जन्मराशि के लिए सिंह और सम के लिए कर्क से शुरू करें; p − 1 राशि-स्थान आगे बढ़ें।
काल्पनिक देशांतर 286°15′ लें। मकर 270° पर शुरू होता है, इसलिए d = 16°15′ बचता है। 1°15′ के तेरह पूरे अंतराल बीत चुके हैं, अतः p = 14। मकर सम राशि है। कर्क से तेरह स्थान आगे जाने पर सिंह मिलता है। कर्क को पहला परिणाम मानकर चौदह राशियाँ गिनने पर भी वही उत्तर आएगा।
शून्य से शुरू सूचकांक में मेष = 0 और मीन = 11 रखें। q = floor(d ÷ 1.25) हो तो परिणाम का सूचकांक (start + q) mod 12 है। विषम जन्मराशि में start = 4 और सम में start = 3 होगा। राशि का सामान्य क्रमांक और शून्य-आधारित सूचकांक एक अंक से अलग हैं; इन्हें मिलाने से परिणाम खिसक जाएगा।
दस स्थितियों से सीमा और पुनरावृत्ति जाँचें
| पूरा निरयण देशांतर | जन्मराशि | राशि के भीतर | भाग | D24 राशि |
|---|---|---|---|---|
| 240°00′00″ | धनु | 0°00′00″ | 1 | सिंह |
| 241°14′59″ | धनु | 1°14′59″ | 1 | सिंह |
| 241°15′00″ | धनु | 1°15′00″ | 2 | कन्या |
| 243°00′00″ | धनु | 3°00′00″ | 3 | तुला |
| 254°59′59″ | धनु | 14°59′59″ | 12 | कर्क |
| 255°00′00″ | धनु | 15°00′00″ | 13 | सिंह |
| 258°00′00″ | धनु | 18°00′00″ | 15 | तुला |
| 286°14′59″ | मकर | 16°14′59″ | 13 | कर्क |
| 286°15′00″ | मकर | 16°15′00″ | 14 | सिंह |
| 360°00′00″ | मेष | 0°00′00″ | 1 | सिंह |
241°14′59″ और 241°15′00″ में केवल एक विकला का अंतर है, लेकिन वे भाग की सीमा पार करते हैं। 254°59′59″ से 255°00′00″ वाली जोड़ी बारहवें से तेरहवें भाग में जाती है। भागों की गिनती आगे बढ़ती रहती है, जबकि राशि-क्रम फिर सिंह पर लौटता है।
243° और 258° दोनों धनु में हैं और उनके बीच 15° हैं। भाग क्रमांक तीन और पंद्रह होने पर भी दोनों D24 में तुला देते हैं। अंतिम पंक्ति में 360° को पहले 0° मेष माना गया है; उसके बाद विषम राशि वाला नियम लगाया है।
क्या D1 और D24 से मूल अंश वापस मिल सकता है?
इस नियम में दोनों राशियाँ मिलकर दो अंतराल बताती हैं, कोई एक निश्चित अंश नहीं। जन्मराशि धनु और D24 तुला हो तो तीसरी पंक्ति के अनुसार 2°30′ ≤ d < 3°45′ या 17°30′ ≤ d < 18°45′ संभव है। काल्पनिक 3° और 18° दोनों सही बैठते हैं।
जन्मराशि मकर और D24 सिंह हो तो विकल्प हैं 1°15′ ≤ d < 2°30′ और 16°15′ ≤ d < 17°30′। सम राशि का स्तंभ पता होने पर भी दोनों अंतराल बने रहते हैं। इसलिए अकेली प्रदर्शित D24 राशि से सटीक देशांतर या सही जन्मसमय प्रमाणित नहीं होता।
D12 के एक चक्र से मिलने वाली जानकारी की सीमा अलग है। किसी वर्ग-सारणी को उलटकर मूल स्थिति निकालने से पहले गिनें कि एक परिणाम कितनी बार आता है।
रिपोर्ट जाँचें और अंकगणित की सीमा समझें
दोनों रिपोर्ट में निरयण संदर्भ, मूल देशांतर और आवंटन-पद्धति समान रखें। सीमा के पास बिना गोल किए निर्देशांक सुरक्षित रखें: स्क्रीन पर 16°15′ दिखता मान वास्तव में उससे थोड़ा कम हो सकता है। अधिक दशमलव दिखाना अनिश्चित जन्म-विवरण को सटीक नहीं बनाता।
D24 का यह परिणाम राशि है। भाव बताने के लिए D24 लग्न और घोषित भाव-पद्धति भी चाहिए। उस लग्न की राशि निकालने के लिए जन्म लग्न के देशांतर पर यही विभाजन लागू करें। “चौदहवाँ भाग” पढ़कर उसे चौदहवाँ भाव न मानें।
कुंडली रिपोर्ट में मूल विवरण और स्थान देखें। D4 तथा D7 से तुलना करके अलग आवंटन-नियम समझें। सही अंकगणित घोषित पद्धति का पालन दिखाता है; वह बुद्धिमत्ता का माप या परीक्षा के परिणाम की भविष्यवाणी नहीं है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
D24 के एक भाग की सटीक चौड़ाई कितनी है?
1°15′, यानी दशमलव में 1.25 अंश। यह 75 कलाएँ या 4,500 विकलाएँ हैं।
D24 में गिनती कहाँ से शुरू होती है?
इस पाराशरी पद्धति में विषम क्रमांक की जन्मराशि के लिए सिंह और सम क्रमांक की जन्मराशि के लिए कर्क से। दोनों में राशियों की गिनती आगे चलती है।
राशि के भीतर ठीक 15° किस भाग में है?
तेरहवें भाग में। इसका परिणाम पहले भाग जैसा है: विषम जन्मराशि के लिए सिंह और सम जन्मराशि के लिए कर्क।
दो अलग अंशों की D24 राशि समान क्यों हो सकती है?
चौबीस भाग बारह राशियों के दो चक्र पूरे करते हैं। एक ही जन्मराशि में 15° के अंतर वाली दो स्थितियाँ समान परिणाम देती हैं, यदि दोनों उसी राशि के भीतर हों।
क्या D24 राशि से जन्म का मूल अंश पता चलता है?
नहीं। जन्मराशि ज्ञात होने पर भी हर D24 परिणाम 1°15′ के दो अलग अंतरालों से बन सकता है। हर अंतराल में कई निर्देशांक संभव हैं।
क्या D24 राशि और D24 भाव एक ही हैं?
नहीं। राशि विभाजन-नियम से निकलती है। भाव बताने के लिए D24 लग्न और रिपोर्ट की भाव-पद्धति भी चाहिए।