चतुर्थांश D4 की राशि कैसे निकालते हैं?
जन्मराशि के 30° को 7°30′ के चार बराबर भागों में बाँटें। पहला भाग उसी राशि को, दूसरा उससे चौथी, तीसरा सातवीं और चौथा दसवीं राशि को दें। जन्मराशि को एक मानकर राशिचक्र में आगे गिनें।
यह उद्धृत स्रोतों की पाराशरी D4 पद्धति है, जो Astrogyana की वर्ग-गणना में भी लागू है। चतुर्थांश को तुर्यांश भी कहते हैं। चार संख्या विभाजन बताती है; इसका अर्थ हर ग्रह को चौथे भाव में रखना नहीं है।
चार अंतराल और गिनती की सामान्य चूक
| भाग | राशि के भीतर का अंतराल | जन्मराशि से गिनती | आगे बढ़े राशि-स्थान |
|---|---|---|---|
| 1 | 0°00′ ≤ d < 7°30′ | 1 | 0 |
| 2 | 7°30′ ≤ d < 15°00′ | 4 | 3 |
| 3 | 15°00′ ≤ d < 22°30′ | 7 | 6 |
| 4 | 22°30′ ≤ d < 30°00′ | 10 | 9 |
यहाँ d जन्मराशि के भीतर का अंश है। अंतिम दो स्तंभ एक नियम को दो गिनतियों में लिखते हैं। “सिंह से चौथी” में सिंह एक, कन्या दो, तुला तीन और वृश्चिक चार है। इसलिए आगे तीन राशि-स्थान बढ़ते हैं, चार नहीं।
अंतराल की चौड़ाई सटीक है: 7.5 दशमलव अंश, 7°30′ के बराबर है क्योंकि आधा अंश तीस कोणीय मिनट है। इसके स्थान पर 7.30 दशमलव अंश लिखें तो वह 7°18′ होगा। दशमलव अंश और अंश-मिनट की लिखावट अलग रखें।
ठीक 7°30′ पर दूसरा, 15° पर तीसरा और 22°30′ पर चौथा भाग चुनें। 30° अगली जन्मराशि का आरंभ है; वर्गीकरण से पहले उसे सामान्यीकृत करना होगा।
बारह राशियों की पूरी आवंटन-सारणी
| जन्मराशि | भाग 1 | भाग 2 | भाग 3 | भाग 4 |
|---|---|---|---|---|
| मेष | मेष | कर्क | तुला | मकर |
| वृषभ | वृषभ | सिंह | वृश्चिक | कुंभ |
| मिथुन | मिथुन | कन्या | धनु | मीन |
| कर्क | कर्क | तुला | मकर | मेष |
| सिंह | सिंह | वृश्चिक | कुंभ | वृषभ |
| कन्या | कन्या | धनु | मीन | मिथुन |
| तुला | तुला | मकर | मेष | कर्क |
| वृश्चिक | वृश्चिक | कुंभ | वृषभ | सिंह |
| धनु | धनु | मीन | मिथुन | कन्या |
| मकर | मकर | मेष | कर्क | तुला |
| कुंभ | कुंभ | वृषभ | सिंह | वृश्चिक |
| मीन | मीन | मिथुन | कन्या | धनु |
जन्मराशि की पंक्ति और अंश-अंतराल का स्तंभ मिलाएँ। D7 के विपरीत इस D4 पद्धति में विषम-सम होने से आरंभ का नियम नहीं बदलता। हर पंक्ति अपनी राशि से शुरू होकर तीन-तीन राशि-स्थान आगे जाती है।
उदाहरण के लिए कुंभ की पंक्ति कुंभ, वृषभ, सिंह और वृश्चिक है। गिनती मीन के बाद मेष से जारी रहती है; राशिचक्र के अंत में रुकती नहीं। कुंडली के चित्र की दिशा या शैली से राशि-क्रम नहीं बदलता।
पूरे देशांतर से चार चरणों में परिणाम
- पूरा निरयण देशांतर 0° से 360° के बीच सामान्यीकृत करें; 360° इसमें शामिल नहीं है।
- जन्मराशि पहचानकर उसका शुरुआती देशांतर घटाएँ।
- बचे अंश को चार में से एक अंतराल में रखें।
- उस जन्मराशि से संबंधित पहली, चौथी, सातवीं या दसवीं राशि पढ़ें।
काल्पनिक देशांतर 195° लें। तुला 180° पर शुरू होती है, इसलिए d = 15° बचता है। यह निचली सीमा तीसरे भाग में आती है। तुला से सातवीं राशि मेष है, अतः D4 राशि मेष मिलेगी।
संक्षिप्त गणना में मेष = 0 रखते हुए जन्मराशि का सूचक k और शून्य से तीन तक भाग का सूचक q लें। लक्ष्य का सूचक (k + 3q) mod 12 होगा। मेष = 1 से मीन = 12 वाले क्रमांक में लौटते समय ही एक जोड़ें।
सीमाएँ जाँचने वाले आठ निर्देशांक
| पूरा निरयण देशांतर | जन्मराशि | राशि के भीतर | भाग | D4 राशि |
|---|---|---|---|---|
| 127°29′59″ | सिंह | 7°29′59″ | 1 | सिंह |
| 127°30′00″ | सिंह | 7°30′00″ | 2 | वृश्चिक |
| 194°59′59″ | तुला | 14°59′59″ | 2 | मकर |
| 195°00′00″ | तुला | 15°00′00″ | 3 | मेष |
| 322°29′59″ | कुंभ | 22°29′59″ | 3 | सिंह |
| 322°30′00″ | कुंभ | 22°30′00″ | 4 | वृश्चिक |
| 359°59′59″ | मीन | 29°59′59″ | 4 | धनु |
| 360°00′00″ | मेष | 0°00′00″ | 1 | मेष |
हर साथ की जोड़ी में एक कोणीय सेकंड का अंतर है। पहली तीन जोड़ियाँ भीतर की तीन चौथाई-सीमाएँ पार करती हैं। अंतिम जोड़ी पूरे चक्र के अंत में मीन से मेष जाती है। ये बनाए गए अंकगणितीय उदाहरण हैं, किसी व्यक्ति का जन्म विवरण नहीं।
अंतिम इनपुट 360° से 0° बनता है। उसे काल्पनिक “तेरहवीं राशि” मानने से जन्मराशि और वर्ग दोनों गलत होंगे। इसी तरह पूरे 195° को भीतर के अंतराल में सीधे रखने से जरूरी 180° घटाना छूट जाएगा।
उपयोगी जाँच: चर-स्थिर-द्विस्वभाव समूह नहीं बदलता
सारणी को तीन समूहों में देखें। चर राशियाँ मेष, कर्क, तुला और मकर केवल आपस में आवंटित होती हैं। स्थिर वृषभ, सिंह, वृश्चिक और कुंभ दूसरा समूह हैं। मिथुन, कन्या, धनु और मीन द्विस्वभाव समूह बनाते हैं।
इसका अंकगणितीय कारण है कि हर D4 अंतर तीन का गुणज है। यह आवंटन का अपरिवर्तित गुण है, किसी के स्वभाव की भविष्यवाणी नहीं। इस नियम में कोई प्रोग्राम सिंह से कन्या दे तो अंश देखने से पहले ही परिणाम समूह-जाँच में गलत है।
समूह मिलना आवश्यक है, लेकिन पर्याप्त नहीं। सिंह 8° का परिणाम वृश्चिक होना चाहिए। कुंभ उसी समूह में होने पर भी इस इनपुट के लिए गलत होगा। समूह-जाँच से एक तरह की त्रुटि पकड़ें; फिर सही अंतराल और लक्ष्य भी जाँचें।
पूरे देशांतर को चार से गुणा करना अलग क्यों है?
सिंह 8° का पूरा देशांतर 128° है। चार से गुणा करने पर 512° मिलता है और 360° घटाने पर 152°, अर्थात कन्या बचती है। बताए D4 नियम में वृश्चिक आता है, क्योंकि सिंह 8° दूसरे चौथाई भाग में है जो सिंह से चौथी राशि को दिया जाता है।
इसलिए चौथे हार्मोनिक की राशि को सीधे इस चतुर्थांश का विकल्प नहीं बना सकते। कुछ वर्गों में हार्मोनिक से मेल होता है, जैसा D7 का लेख दिखाता है। केवल वर्ग की संख्या को पूरा नियम मानने के बजाय आवंटन जाँचें।
रिपोर्ट में राशि और भाव अलग पढ़ें
D4 लग्न पाने के लिए जन्म लग्न के देशांतर पर यही नियम लगाएँ। उसके बाद भाव बताने के लिए वह लग्न और भाव-पद्धति चाहिए। तालिका में “जन्मराशि से चौथी” राशि चुनने का निर्देश है; वह अपने आप D4 भाव का नाम नहीं है।
कुंडली रिपोर्ट मिलाते समय जन्म विवरण, समय-क्षेत्र, निरयण संदर्भ और सुरक्षित रखे निर्देशांक समान रखें। गोल प्रदर्शन सीमा के पास का मूल मान छिपा सकता है। ज्यादा दशमलव अनिश्चित जन्म विवरण को ठीक नहीं करते।
इन जाँचों से पता चलता है कि घोषित गणना का पालन हुआ या नहीं। वे सुनिश्चित घटना, संपत्ति का परिणाम या व्याख्या की सत्यता सिद्ध नहीं करतीं। D12 का अंतराल-लेख अंकगणित और व्याख्या अलग रखने का एक और अभ्यास देता है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
D4 का एक भाग कितना बड़ा है?
ठीक 7°30′, अर्थात 7.5 दशमलव अंश। चार ऐसे भाग एक 30° जन्मराशि बनाते हैं।
चार D4 भाग किन राशियों को मिलते हैं?
जन्मराशि को शामिल करके गिनी पहली, चौथी, सातवीं और दसवीं राशि को। आगे बढ़ने के अंतर शून्य, तीन, छह और नौ राशि-स्थान हैं।
क्या सम राशि में D4 की गिनती उलटती है?
नहीं। इस पाराशरी D4 पद्धति में सभी जन्मराशियाँ स्वयं से एक जैसे अंतर लेकर आगे गिनती हैं।
ठीक 22°30′ किस भाग में है?
चौथे भाग में। हर अंतराल अपनी निचली सीमा शामिल करता है और ऊपरी सीमा बाहर रखता है।
क्या चर-स्थिर समूह मिलना सही D4 राशि का प्रमाण है?
नहीं। यह आवश्यक जाँच है, लेकिन चारों संभावित लक्ष्य एक ही समूह में होते हैं। सही लक्ष्य के लिए अंश-अंतराल भी पहचानना होगा।
क्या चौथा हार्मोनिक इस D4 के बराबर है?
नहीं। उदाहरण के लिए पूरे देशांतर 128° को चार से गुणा करने पर कन्या मिलती है, जबकि बताए चतुर्थांश आवंटन में वृश्चिक आता है।