विंशांश D20 की राशि कैसे निकाली जाती है?
हर 30° जन्मराशि को 1°30′ के बीस बराबर भागों में बाँटें। चर जन्मराशि में मेष से, स्थिर में धनु से और द्विस्वभाव में सिंह से आगे गिनें। ग्रह जिस भाग में है, उससे D20 की राशि मिलती है। मूल निरयण देशांतर लें; पहले से निकटतम कला तक पूर्णांकित प्रदर्शन पर निर्भर न रहें।
यह आरंभिक नियम बृहत्पाराशर होराशास्त्र 6.17 और नीचे दिए पाठ्यपुस्तक-संदर्भ में मिलता है। Astrogyana की वर्ग-गणना भी यही आरंभिक राशियाँ लेती है। यह लेख राशि निकालना समझाता है। भाग-संख्या, परिणाम की राशि, भाव और व्याख्या रिपोर्ट के अलग-अलग विवरण हैं।
पहले जन्मराशि का स्वभाव पहचानें
| जन्मराशि का स्वभाव | राशियाँ | D16 का आरंभ | D20 का आरंभ |
|---|---|---|---|
| चर | मेष, कर्क, तुला, मकर | मेष | मेष |
| स्थिर | वृषभ, सिंह, वृश्चिक, कुंभ | सिंह | धनु |
| द्विस्वभाव | मिथुन, कन्या, धनु, मीन | धनु | सिंह |
D20 में स्थिर राशि का आरंभ धनु से होता है, जबकि D16 की इसी पद्धति में सिंह से। द्विस्वभाव राशि के लिए स्थिति उलटी है। केवल D16 की सारणी में वर्ग की संख्या बदल देने से D20 की सही गणना नहीं बनती।
आगे गिनने का अर्थ सामान्य राशि-क्रम है: मेष, वृषभ, मिथुन आदि; मीन के बाद फिर मेष। आरंभिक राशि को पहला स्थान गिनें। धनु से पहले तीन परिणाम धनु, मकर और कुंभ हैं। धनु को शून्यवाँ स्थान मानकर छोड़ देने से हर परिणाम एक राशि आगे हो जाएगा।
बीस भागों की पूरी मिलान-सारणी
यहाँ d जन्मराशि के भीतर का देशांतर है: 0° से लेकर 30° से कम तक। हर भाग ठीक 5,400 विकला का है; 1°30′ अर्थात 90 कला। सीमा पर आया मान अगले भाग को शुरू करता है।
| भाग | राशि में अंतराल | चर राशि से | स्थिर राशि से | द्विस्वभाव राशि से |
|---|---|---|---|---|
| 1 | 0°00′00″ ≤ d < 1°30′00″ | मेष | धनु | सिंह |
| 2 | 1°30′00″ ≤ d < 3°00′00″ | वृषभ | मकर | कन्या |
| 3 | 3°00′00″ ≤ d < 4°30′00″ | मिथुन | कुंभ | तुला |
| 4 | 4°30′00″ ≤ d < 6°00′00″ | कर्क | मीन | वृश्चिक |
| 5 | 6°00′00″ ≤ d < 7°30′00″ | सिंह | मेष | धनु |
| 6 | 7°30′00″ ≤ d < 9°00′00″ | कन्या | वृषभ | मकर |
| 7 | 9°00′00″ ≤ d < 10°30′00″ | तुला | मिथुन | कुंभ |
| 8 | 10°30′00″ ≤ d < 12°00′00″ | वृश्चिक | कर्क | मीन |
| 9 | 12°00′00″ ≤ d < 13°30′00″ | धनु | सिंह | मेष |
| 10 | 13°30′00″ ≤ d < 15°00′00″ | मकर | कन्या | वृषभ |
| 11 | 15°00′00″ ≤ d < 16°30′00″ | कुंभ | तुला | मिथुन |
| 12 | 16°30′00″ ≤ d < 18°00′00″ | मीन | वृश्चिक | कर्क |
| 13 | 18°00′00″ ≤ d < 19°30′00″ | मेष | धनु | सिंह |
| 14 | 19°30′00″ ≤ d < 21°00′00″ | वृषभ | मकर | कन्या |
| 15 | 21°00′00″ ≤ d < 22°30′00″ | मिथुन | कुंभ | तुला |
| 16 | 22°30′00″ ≤ d < 24°00′00″ | कर्क | मीन | वृश्चिक |
| 17 | 24°00′00″ ≤ d < 25°30′00″ | सिंह | मेष | धनु |
| 18 | 25°30′00″ ≤ d < 27°00′00″ | कन्या | वृषभ | मकर |
| 19 | 27°00′00″ ≤ d < 28°30′00″ | तुला | मिथुन | कुंभ |
| 20 | 28°30′00″ ≤ d < 30°00′00″ | वृश्चिक | कर्क | मीन |
भाग बीस हैं, लेकिन परिणाम के लिए राशियाँ बारह। बारह भागों में एक पूरा चक्र होने के बाद आठ राशियाँ दोबारा आती हैं। हर स्तंभ की पहली आठ परिणाम-राशियाँ दो-दो बार और बाकी चार एक-एक बार आती हैं। यह नियम से बनी पुनरावृत्ति है, हटाने योग्य दोहरी पंक्ति नहीं।
राशि के भीतर ठीक 30° हो तो पहले उसे अगली जन्मराशि में ले जाएँ और उसका स्वभाव दोबारा देखें। पुरानी राशि में इक्कीसवाँ भाग बनाना सही नहीं होगा।
पूरे देशांतर से एक उदाहरण हल करें
काल्पनिक निरयण देशांतर L = 217°30′ लें। वृश्चिक 210° से शुरू होता है, इसलिए राशि के भीतर d = 7°30′ है। वृश्चिक स्थिर राशि है, अतः आरंभ धनु से होगा।
- L को 0° ≤ L < 360° में सामान्यीकृत करें।
- जन्मराशि पहचानकर उसका आरंभ घटाएँ: 217°30′ − 210° = 7°30′।
- शून्य से गिना भाग-सूचकांक निकालें: floor(7.5 ÷ 1.5) = 5। दिखाई जाने वाली भाग-संख्या 6 है।
- धनु को पहला गिनते हुए छह राशियाँ लें: धनु, मकर, कुंभ, मीन, मेष, वृषभ।
- D20 की राशि वृषभ लिखें और साथ में मूल निर्देशांक तथा पद्धति सुरक्षित रखें।
217°29′59″ पर स्थिति अभी भाग 5 में है और मेष देती है। केवल एक विकला बढ़कर 217°30′00″ होने पर सीमा पार होती है और राशि बदलती है। यदि सेकंड हटा दिए गए हों तो “वृश्चिक में 7°30′” वाला गोल मान सीमा के किसी भी ओर के मूल निर्देशांक को दिखा सकता है।
पूरी विकला में गणना कर रहे हों तो शून्य से गिने भाग के लिए floor(d ÷ 5400) लें। इकाई एक होनी चाहिए: डिग्री में लिखे कोण को सीधे 5,400 से भाग देने पर डिग्री और विकला की इकाइयाँ असंगत रूप से मिल जाएँगी।
गणना जाँचने के लिए सोलह निर्देशांक
| पूरा निरयण देशांतर | जन्मराशि | राशि के भीतर | भाग | D20 राशि |
|---|---|---|---|---|
| 0°00′00″ | मेष | 0°00′00″ | 1 | मेष |
| 1°29′59″ | मेष | 1°29′59″ | 1 | मेष |
| 1°30′00″ | मेष | 1°30′00″ | 2 | वृषभ |
| 17°59′59″ | मेष | 17°59′59″ | 12 | मीन |
| 18°00′00″ | मेष | 18°00′00″ | 13 | मेष |
| 28°29′59″ | मेष | 28°29′59″ | 19 | तुला |
| 28°30′00″ | मेष | 28°30′00″ | 20 | वृश्चिक |
| 29°59′59″ | मेष | 29°59′59″ | 20 | वृश्चिक |
| 30°00′00″ | वृषभ | 0°00′00″ | 1 | धनु |
| 31°29′59″ | वृषभ | 1°29′59″ | 1 | धनु |
| 31°30′00″ | वृषभ | 1°30′00″ | 2 | मकर |
| 60°00′00″ | मिथुन | 0°00′00″ | 1 | सिंह |
| 73°29′59″ | मिथुन | 13°29′59″ | 9 | मेष |
| 73°30′00″ | मिथुन | 13°30′00″ | 10 | वृषभ |
| 359°59′59″ | मीन | 29°59′59″ | 20 | मीन |
| 360°00′00″ | मेष | 0°00′00″ | 1 | मेष |
इन स्थितियों में पहली आंतरिक सीमा, भाग 13 में आरंभिक राशि की वापसी, अंतिम भाग, जन्मराशि का बदलना, द्विस्वभाव राशि और 360° का चक्र पूरा होना शामिल है। मानों को सीमाओं के पास रखने से एक स्थान आगे-पीछे गिनने की गलती साफ होती है।
एक विकला का अंतर गणित जाँचने का साधन है। इसका अर्थ किसी वास्तविक जन्म-समय या ग्रह-स्थिति को इतनी सटीकता से ज्ञात मानना नहीं। दो रिपोर्ट अलग हों तो पहले पूरा सुरक्षित मूल निर्देशांक मिलाएँ; उसके बाद ही यह निष्कर्ष निकालें कि उनकी राशि-गणना की पद्धति अलग है।
देशांतर को बीस से गुणा करके स्वतंत्र जाँच
इस घोषित D20 राशि-नियम के लिए H = (20 × L) modulo 360° निकालें। H जिस सामान्य राशि में आए, वही D20 परिणाम है। उदाहरण में 20 × 217.5° = 4,350°; बारह पूरे चक्र घटाने पर 30° मिलता है, जो वृषभ का आरंभ है।
इसका कारण देखें। L = 30k + d लिखें; k जन्मराशि का शून्य से गिना सूचकांक है। H का राशि-सूचकांक (20k + floor(20d ÷ 30)) modulo 12 होगा। तीन स्वभावों में 20k modulo 12 क्रमशः 0, 8 और 4 देता है, अर्थात मेष, धनु और सिंह। बचा हुआ पद भाग-सूचकांक देता है।
यह घोषित नियम की गणितीय व्युत्पत्ति है। इससे यह सामान्य दावा नहीं निकलता कि हर वर्ग केवल अपनी संख्या का हार्मोनिक है। D30 के असमान भाग इस सामान्यीकरण के स्पष्ट प्रतिउदाहरण देते हैं।
अलग जन्म-देशांतर एक ही D20 स्थिति क्यों देते हैं?
L में 18° जोड़ने से 20L में 360° जुड़ता है। पूरा चक्र हटाने के बाद हार्मोनिक निर्देशांक समान रहता है। उदाहरण के लिए L = 14° और L = 32° दोनों H = 280° देते हैं, जो मकर में है। जन्म की स्थितियाँ अलग हैं: मेष में 14° और वृषभ में 2°।
आमने-सामने के देशांतर भी इस आवंटन में समान हो सकते हैं। 180° का अंतर बीस से गुणा करने पर दस पूरे चक्र है। इसलिए L = 194° भी H = 280° देता है। रिपोर्ट में अप्रत्याशित रूप से समान दिखती स्थितियों को जाँचने में ये संबंध उपयोगी हैं।
उलटा निष्कर्ष सही नहीं है। केवल D20 की राशि से जन्मराशि निश्चित नहीं मिलती, जीवन का विवरण तो और भी नहीं। पूरे हार्मोनिक निर्देशांक के लिए भी राशिचक्र में कई मूल देशांतर संभव हैं।
राशि, भाव और अधिदेवता को अलग पढ़ें
बीस भाग संख्यात्मक अंतराल हैं। परिणाम की राशि राशिचक्र का एक नाम है। भाव के लिए D20 लग्न और भाव-पद्धति भी चाहिए। बृहत्पाराशर होराशास्त्र आरंभिक राशि-नियम के बाद विषम और सम जन्मराशियों के अधिदेवताओं की सूचियाँ देता है। वे पाठ की एक अन्य परत हैं, राशि-नामों का विकल्प नहीं।
इसलिए किसी रिपोर्ट में भाग-संख्या, राशि और देवता का अलग नाम होना अपने-आप विरोधाभास नहीं। तुलना से पहले स्तंभ का शीर्षक पढ़ें। इस लेख की सारणियाँ राशि निकालती हैं; हर देवता-नाम को किसी भाव या निश्चित घटना में नहीं बदलतीं।
दो रिपोर्ट मिलाने की व्यावहारिक सूची
- जन्म-संबंधी आँकड़े और दोनों रिपोर्टों का निरयण संदर्भ मिलाएँ।
- 1°30′ का सही अंतराल पहचानने के लिए पर्याप्त मूल देशांतर-सटीकता रखें।
- जन्मराशि का स्वभाव और मेष–धनु–सिंह का आरंभिक क्रम जाँचें।
- सारणी के परिणाम को पूरे देशांतर के हार्मोनिक से अलग गणना करके मिलाएँ।
- इसके बाद भाव-नाम और अलग व्याख्यात्मक कथनों की तुलना करें।
मूल आँकड़ा अनिश्चित हो तो उसके संभावित अंतराल को देखें। पूरा अंतराल एक ही भाग में रहे तो उस राशि का आवंटन स्थिर रहता है। सीमा पार हो तो आवंटन अनिश्चित है। हर ग्रह और लग्न के लिए जन्म-समय के इतने ही मिनटों को एक D20 भाग मान लेने का कोई एक सार्वभौमिक हिसाब नहीं है।
कुंडली रिपोर्ट, देशांतर पढ़ने का लेख और D16 की तुलना साथ लें। गणनाओं का मेल अंकगणितीय पद्धति जाँचता है; किसी व्यक्ति की भक्ति का स्तर या निश्चित आध्यात्मिक फल सिद्ध नहीं करता।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
D20 का एक भाग कितना बड़ा है?
ठीक 1°30′, अर्थात 90 कला या 5,400 विकला। ऐसे बीस भाग एक 30° जन्मराशि को पूरा करते हैं।
D20 की गिनती किन राशियों से शुरू होती है?
चर जन्मराशि में मेष, स्थिर में धनु और द्विस्वभाव में सिंह से। आरंभिक राशि को पहला परिणाम गिनें।
क्या D20 और D16 का आरंभ एक जैसा है?
नहीं। चर का आरंभ दोनों में मेष है, लेकिन स्थिर और द्विस्वभाव के आरंभ आपस में बदलते हैं। दोनों के भागों की चौड़ाई भी अलग है।
ठीक 1°30′ किस भाग में आता है?
भाग 2 के आरंभ में। निचली सीमा अपने भाग में शामिल है और ऊपरी सीमा अगले भाग में जाती है।
मेष के 14° और वृषभ के 2° का D20 एक क्यों हो सकता है?
उनके पूरे देशांतर 18° अलग हैं। बीस से गुणा करने पर अंतर पूरा 360° चक्र है; दोनों का घटा हुआ निर्देशांक 280°, अर्थात मकर, मिलता है।
क्या सही D20 से किसी का आध्यात्मिक स्तर सिद्ध होता है?
नहीं। लेख पारंपरिक राशि-आवंटन की गणना जाँचता है। सही अंकगणित किसी की भक्ति पर निर्णय या निश्चित आध्यात्मिक फल का प्रमाण नहीं है।