॥ शुभमस्तु ॥
गृह प्रवेश मुहूर्त जून 2027
गृह प्रवेश मुहूर्त: 6 शुभ तिथियाँ
1 जून – 30 जून 2027 · नई दिल्ली
जिन तिथियों को परिवार को भेजना है, उन्हें चुनें।
- 5जूनशनिवार
- 14जूनसोमवार
- 16जूनबुधवार
- 21जूनसोमवार
- 23जूनबुधवार
- 24जूनगुरुवार
छोड़ी गई तिथियाँ और कारण (24)
- मंगलवार इस कार्य के लिए वर्जित
- 1 जून, 8 जून, 15 जून, 22 जून, 29 जून
- तिथि, नक्षत्र और योग का शुभ मेल नहीं
- 2 जून, 3 जून, 4 जून, 7 जून, 9 जून, 10 जून, 11 जून, 12 जून, 17 जून, 18 जून, 19 जून, 25 जून, 26 जून, 28 जून, 30 जून
- रविवार इस कार्य के लिए वर्जित
- 6 जून, 13 जून, 20 जून, 27 जून
जून 2027 में नई दिल्ली के लिए गृह प्रवेश के 6 शुभ मुहूर्त हैं: 5 जून, 14 जून, 16 जून, 21 जून, 23 जून, 24 जून।
गृह प्रवेश मुहूर्त कैसे देखा जाता है
नए घर में प्रवेश के लिए स्थिर और मृदु नक्षत्र, शुभ तिथि और सोम, बुध, गुरु या शुक्रवार अच्छे माने जाते हैं। चातुर्मास, खरमास और गुरु-शुक्र अस्त में गृह प्रवेश टाला जाता है।
- नक्षत्र: रोहिणी, मृगशिरा, उत्तरा फाल्गुनी, चित्रा, अनुराधा, उत्तराषाढ़ा, धनिष्ठा, शतभिषा, उत्तरा भाद्रपद, रेवती
- रविवार और मंगलवार को गृह प्रवेश नहीं
- चातुर्मास, खरमास, गुरु-शुक्र अस्त और अधिक मास वर्जित
- भद्रा और राहुकाल हटाए गए
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
क्या किराए के घर में भी मुहूर्त देखना चाहिए?
नए बने घर के पहले प्रवेश में मुहूर्त का सबसे अधिक महत्व है। किराए के या पुराने घर में बहुत से परिवार केवल शुभ वार और राहुकाल से बचना ही पर्याप्त मानते हैं।
क्या एक ही तिथि हर शहर में शुभ होती है?
तिथि और नक्षत्र पूरे भारत में लगभग एक जैसे रहते हैं, पर सूर्योदय, राहुकाल और समय-खंड शहर के अनुसार बदलते हैं। इसलिए अपना शहर चुनें।
अंतिम तिथि कैसे तय करें?
यह सूची सामान्य पंचांग नियमों पर आधारित है। अंतिम निर्णय से पहले अपने कुल-पुरोहित या पंडित जी से वर-वधू या परिवार की कुंडली के साथ मिलान अवश्य कराएँ।
ये तिथियाँ कैसे चुनी गईं
हर दिन सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण और चंद्र राशि के सटीक बदलने के समय NASA JPL DE440s पंचांग गणना और लाहिड़ी अयनांश से निकाले जाते हैं। फिर कार्य के नियमों से मिलान होता है, और भद्रा, व्यतीपात, वैधृति, राहुकाल और यमगंड का समय हटाया जाता है।
- पूरे दिन वर्जित
- चातुर्मास, खरमास, गुरु-शुक्र अस्त, अधिक मास (कार्य के अनुसार)
- अतिरिक्त अंक
- सर्वार्थ सिद्धि, अमृत सिद्धि, गुरु-पुष्य, रवि-पुष्य, अभिजित मुहूर्त, शुक्ल पक्ष
- व्यक्तिगत (वैकल्पिक)
- चंद्र बल और तारा बल
- लग्न शुद्धि और कुंडली मिलान इसमें शामिल नहीं हैं; इन्हें पंडित जी से देखवाएँ।