॥ असतो मा सद्गमय ॥

ज्योतिष और परंपरा का अध्ययन

कुंडली, ग्रह, भाव, मंत्र, पर्व और पंचांग पर स्पष्ट, विस्तृत और संदर्भ-सचेत लेख। एक विषय से शुरू करें, एक-एक कदम।

धर्मग्रंथ और दर्शन

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12 मिनट का अध्ययन

भगवद्गीता 3.21 का अर्थ: उदाहरण से नेतृत्व, आचरण और साझा मानक

गीता 3.21 का संस्कृत पाठ, पदार्थ, अध्याय-संदर्भ और रामानुज की नामित व्याख्या पढ़ें। जिम्मेदार प्रभाव, सुधार और रोजमर्रा के उदाहरण विस्तार से समझें।

11 मिनट का अध्ययन

भगवद्गीता 2.50: योगः कर्मसु कौशलम् का अर्थ और कर्म में कुशलता

गीता 2.50 का संस्कृत पाठ, पदार्थ, संदर्भ और रामानुज की नामित व्याख्या पढ़ें। कर्म-कौशल, समता और जिम्मेदार अभ्यास को विस्तृत उदाहरणों से समझें।

11 मिनट का अध्ययन

भगवद्गीता 4.38 का अर्थ: ज्ञान, योग की तैयारी और समय के साथ बोध

न हि ज्ञानेन सदृशं को संस्कृत, पद-अर्थ, अध्याय के संदर्भ और शंकरभाष्य के साथ पढ़ें। मौलिक अभ्यास और सामान्य गलत पढ़तें समझें।

13 मिनट का अध्ययन

भगवद्गीता 2.70 का अर्थ: समुद्र, कामना और स्थिर प्रज्ञा

आपूर्यमाणमचलप्रतिष्ठं का संस्कृत पाठ, पदार्थ, अध्याय-संदर्भ और शंकरभाष्य पढ़ें। समुद्र की उपमा को मौलिक उदाहरणों और चिंतन-प्रश्नों से समझें।

13 मिनट का अध्ययन

गीता 6.35 का अर्थ: अभ्यास, वैराग्य और चंचल मन

असंशयं महाबाहो का पूरा श्लोक, पदार्थ और 6.33–36 का संवाद पढ़ें। शंकरभाष्य तथा मौलिक अध्ययन-उदाहरणों से अभ्यास और वैराग्य का संबंध समझें।

14 मिनट का अध्ययन

भगवद्गीता 18.26: धृति, उत्साह और सात्त्विक कर्ता

गीता 18.26 के संस्कृत पाठ, सरल हिंदी अर्थ और शंकर भाष्य में सात्त्विक कर्ता समझें। धृति और उत्साह को आसक्ति तथा अहंकार से अलग पढ़ें।

14 मिनट का अध्ययन

गीता 4.22 का अर्थ: संतोष, मत्सर और कर्म से न बँधना

गीता 4.22 का संस्कृत पाठ, पदार्थ, शंकरभाष्य का संन्यासी-संदर्भ और संतोष, तुलना, समता तथा निष्क्रियता के अंतर विस्तार से पढ़ें।

14 मिनट का अध्ययन

गीता 3.27 का अर्थ: प्रकृति, अहंकार और कर्ता होने की धारणा

गीता 3.27 का पूरा संस्कृत पाठ, पद-अर्थ, 3.25–30 का प्रसंग और देह-इन्द्रियों से पहचान पर शंकरभाष्य की व्याख्या विस्तार से पढ़ें।

14 मिनट का अध्ययन

भगवद्गीता 5.10 का अर्थ: कमल-पत्र, कर्मार्पण और आसक्ति

गीता 5.10 का संस्कृत पाठ, पद-अर्थ, 5.8–12 का संदर्भ और शंकर की व्याख्या पढ़ें। कमल-पत्र की उपमा को जिम्मेदार कर्म के उदाहरण से समझें।

14 मिनट का अध्ययन

गीता 2.62–63 का अर्थ: आसक्ति, क्रोध और विवेक का क्रम

दोनों श्लोकों का संस्कृत पाठ, आठ पद-समूह, बाधित इच्छा और स्मृति पर शंकर की व्याख्या पढ़ें। आधुनिक उदाहरण से मनन और सुधार की जगह समझें।

13 मिनट का अध्ययन

भगवद्गीता 10.10 का अर्थ: बुद्धियोग, भक्ति और अनुग्रह

तेषां सततयुक्तानां का अर्थ संस्कृत, लिप्यंतरण, पद-विवेचन और 10.8–11 के संदर्भ से समझें। शंकर भाष्य तथा आधुनिक जीवन के सावधान उदाहरण सहित।

14 मिनट का अध्ययन

भगवद्गीता 12.16 का अर्थ: अनपेक्षा, दक्षता और निष्पक्षता

अनपेक्षः शुचिर्दक्ष का अर्थ संस्कृत, पद-विवेचन और शंकर भाष्य से समझें। उदासीनता, सर्वारम्भपरित्याग और भक्ति के संबंध का विस्तृत अध्ययन।

13 मिनट का अध्ययन

भगवद्गीता 6.19 का अर्थ: निवात दीपक और संयत चित्त

यथा दीपो निवातस्थो का संस्कृत पाठ, पद-अर्थ, संधि और शंकर भाष्य पढ़ें। दीपक की उपमा को अध्याय के आध्यात्मिक संदर्भ और सीमित आधुनिक उदाहरण से समझें।

13 मिनट का अध्ययन

भगवद्गीता 6.32 का अर्थ: आत्मौपम्य, समदृष्टि और सुख-दुःख

आत्मौपम्येन सर्वत्र का संस्कृत पाठ, पद-अर्थ और शंकर भाष्य पढ़ें। अपने समान दूसरों का सुख-दुःख देखने को संदर्भ और सावधान आधुनिक उदाहरण से समझें।

14 मिनट का अध्ययन

भगवद्गीता 18.46 का अर्थ: स्वकर्म से उपासना और सिद्धि

स्वकर्मणा तमभ्यर्च्य का संस्कृत पाठ, पद-अर्थ और शंकर भाष्य पढ़ें। ईश्वर की व्यापकता, स्वकर्म, ज्ञान की योग्यता और सावधान आधुनिक अनुप्रयोग समझें।

13 मिनट का अध्ययन

भगवद्गीता 17.20 का अर्थ: प्रत्युपकार की अपेक्षा के बिना सात्त्विक दान

गीता 17.20 का संस्कृत, IAST, पद-अर्थ और शंकर भाष्य पढ़ें। दान, प्रत्युपकार, देश-काल-पात्र और स्पष्ट आधुनिक उदाहरण से अर्थ समझें।

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