कुंडली में पुष्कल योग: चंद्र राशि स्वामी, लग्नेश और केंद्र के नियम तथा उदाहरण
जन्म-कुंडली में पुष्कल योग की परख: चंद्र-राशि स्वामी और लग्नेश का केंद्र या मित्र राशि में संबंध, लग्न में बली ग्रह, लग्न पर दृष्टि और उदाहरण।
॥ असतो मा सद्गमय ॥
जन्म-कुंडली में पुष्कल योग की परख: चंद्र-राशि स्वामी और लग्नेश का केंद्र या मित्र राशि में संबंध, लग्न में बली ग्रह, लग्न पर दृष्टि और उदाहरण।
ज्योतिष में महाभाग्य योग की गणना: स्थानीय सूर्योदय-सूर्यास्त से दिन-रात्रि जन्म और लग्न, सूर्य व चंद्र की विषम (ओज) या सम (युग्म) राशि समरूपता के नियम।
वैदिक ज्योतिष में दोष का शास्त्रीय विश्लेषण: जन्म-कुंडली के ग्रह दोष, अष्टकूट मिलान दोष और पंचांग मुहूर्त दोष के नियम, परिहार व व्यावहारिक जाँच।
कुंडली में शकट योग (शकट दोष) की गणना: गुरु से 6, 8, 12वें भाव में चंद्रमा, फलदीपिका के लग्न-केंद्र भंग नियम, नाभस शकट भेद और उदाहरण।
कुंडली के कठिन (अव, दरिद्र, केमद्रुम व दुःस्थान) योगों की शास्त्रीय जाँच: बृहत् पाराशर होरा शास्त्र और फलदीपिका के योग-भंग नियम व संतुलित अध्ययन।
अष्टकूट कुंडली मिलान में वर्ण कूट की गणना: 1 अंक का चंद्र-राशि तत्व वर्गीकरण, 4x4 गुण सारणी, राशीश मैत्री नियम और सामाजिक वर्ण से स्पष्ट अंतर।
कुंडली मिलान में वश्य कूट का संपूर्ण मार्गदर्शक: 2 अंक के पाँच राशि वर्ग, धनु-मकर का 15-अंश विभाजन, 5x5 अंक सारणी और व्यावहारिक उदाहरण।
प्रथम भाव (लग्न) में बृहस्पति का शास्त्रीय विश्लेषण: पूर्ण पूर्व दिग्बल, 5-7-9 धर्म-त्रिकोण दृष्टियाँ, हंस महापुरुष योग और 12 लग्नों में फल।
चतुर्थ भाव (सुख भाव) में गुरु का अध्ययन: केंद्र बल, अष्टम-दशम-द्वादश भावों पर 5-7-9 दृष्टि, हंस योग, केंद्राधिपति नियम और 12 लग्नों में फल।
पंचम भाव (सुत व विद्या भाव) में गुरु की व्याख्या: त्रिकोण बल, कारको भावनाशाय सिद्धांत, नवम-एकादश-लग्न पर दृष्टि और 12 लग्नों के उदाहरण।
अष्टम भाव (रंध्र व आयु भाव) में बृहस्पति: गहन शोध, दीर्घायु, विपरीत राजयोग, द्वादश-द्वितीय-चतुर्थ भावों पर दृष्टि और 12 लग्नों में फल।
नवम भाव (धर्म व भाग्य भाव) में गुरु का विश्लेषण: भाग्य कारक नियम, लग्न-तृतीय-पंचम भावों पर 5-7-9 दृष्टि, राजयोग और 12 लग्नों में फल।
एकादश भाव (लाभ भाव) में बृहस्पति का शास्त्रीय विश्लेषण: उपचय वृद्धि, तृतीय-पंचम-सप्तम भावों पर गुरु दृष्टि, वसुमती योग और बारह लग्नों में फल।
वैदिक ज्योतिष में प्रथम भाव (तनु/लग्न भाव) का संपूर्ण मार्गदर्शक: केंद्र-त्रिकोण द्वैत नियम, सूर्य कारकत्व, गुरु-बुध दिग्बल और बारह लग्नों का विश्लेषण।
वैदिक ज्योतिष में नवम भाव (धर्म/भाग्य भाव) का शास्त्रीय अध्ययन: पंचम से पंचम त्रिकोण सिद्धांत, गुरु-सूर्य कारकत्व, राजयोग और बारह लग्नों के नियम।
वैदिक ज्योतिष में चाप (कार्मुक) योग की दोनों शास्त्रीय परिभाषाएँ: दशम से लग्न तक आकृति नाभस चाप और उच्च लग्नेश व चतुर्थेश-दशमेश परिवर्तन नियम।
कुंडली में राजलक्षण योग की प्रामाणिक जाँच: लग्न या केंद्र में गुरु, शुक्र, बुध और बली चंद्रमा की स्थिति, अस्त दोष सीमा और कुंडली उदाहरण।
कुंडली मिलान के जन्म विवरण, गणना पद्धति, आठ कूटों के अंक और अपवाद जाँचें। काल्पनिक 28.5/36 रिपोर्ट से पूरी प्रक्रिया समझें।
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