दुरधरा योग: चंद्रमा के दोनों ओर (द्वितीय व द्वादश भाव) ग्रह और उदाहरण
चंद्रमा से द्वितीय और द्वादश दोनों भावों में ग्रह होने पर बनने वाले दुरधरा (दुरुधरा) योग, 10 ग्रह-युग्म, कर्तरी भेद और कुंडली उदाहरण समझें।
॥ असतो मा सद्गमय ॥
चंद्रमा से द्वितीय और द्वादश दोनों भावों में ग्रह होने पर बनने वाले दुरधरा (दुरुधरा) योग, 10 ग्रह-युग्म, कर्तरी भेद और कुंडली उदाहरण समझें।
सूर्य से द्वितीय राशि में बनने वाले वेशी योग, बुध-शुक्र की कोणीय दूरी, राशि-संधि पर अस्त (दग्ध) जाँच और कुंडली उदाहरण विस्तार से समझें।
सूर्य से द्वादश राशि में बनने वाले वाशी (वोशी) योग, प्राची-उदित ग्रह स्थिति, अंश-दूरी से अस्त जाँच तथा वेशी-उभयचारी से अंतर उदाहरण सहित जानें।
२०°००′ मिथुन से ३°२०′ कर्क तक पुनर्वसु नक्षत्र के अंश, चारों चरणों के नवांश, अदिति प्रतीक और ९०° राशि-सीमा के पार गुरु दशा की गणना समझें।
६°४०′ से २०°००′ मिथुन तक आर्द्रा नक्षत्र के अंश, धनु से मीन तक चार नवांश चरण, रुद्र प्रतीक और १८-वर्षीय राहु महादशा-शेष की सटीक गणना समझें।
१६°४०′ से ३०°००′ कर्क तक आश्लेषा नक्षत्र के अंश, चारों चरण, नाग प्रतीक, १७-वर्षीय बुध दशा और १२०°००′ कर्क–सिंह गंडांत सीमा का नियम समझें।
१०°००′ से २३°२०′ कन्या तक हस्त नक्षत्र के अंश, मेष से कर्क तक चार नवांश चरण, सविता प्रतीक और १०-वर्षीय चंद्र महादशा-शेष की गणना उदाहरण सहित समझें।
३°२०′ से १६°४०′ वृश्चिक तक अनुराधा नक्षत्र के अंश, सिंह से वृश्चिक तक चार नवांश चरण, मित्र प्रतीक और १९-वर्षीय शनि महादशा-शेष की गणना समझें।
वैदिक ज्योतिष में उभयचारी योग की जाँच: सूर्य से द्वितीय और द्वादश दोनों राशियों में चंद्र-रहित ग्रह, अस्त-अंश जाँच, कर्तरी भेद और कुंडली उदाहरण।
कुंडली में चंद्र और लग्न अधि योग का विश्लेषण: छठे, सातवें और आठवें भाव में बुध, गुरु व शुक्र के सात विन्यास, अपवाद नियम और कुंडली उदाहरण।
कुंडली में चंद्र-मंगल योग की परख: चंद्रमा-मंगल युति व परस्पर सप्तम दृष्टि, उच्च-नीच राशि के प्रभाव, अंश दूरी और व्यावहारिक कुंडली उदाहरण।
वैदिक ज्योतिष में अमला (अमला कीर्ति) योग: लग्न या चंद्रमा से दशम भाव में नैसर्गिक शुभ ग्रह, पाप-ग्रह निषेध नियम और कुंडली उदाहरण समझें।
जन्म-कुंडली में वसुमती योग की गणना: लग्न या चंद्रमा से उपचय भावों (3, 6, 10, 11) में शुभ ग्रह, पूर्ण व आंशिक नियम और उदाहरण जानें।
१३°२०′ से २६°४०′ सिंह तक पूर्वा फाल्गुनी नक्षत्र के अंश, सिंह से वृश्चिक तक चार नवांश चरण, भग प्रतीक और २०-वर्षीय शुक्र महादशा की गणना समझें।
२६°४०′ सिंह से १०°००′ कन्या तक उत्तरा फाल्गुनी नक्षत्र के अंश, धनु से मीन तक चार नवांश चरण, अर्यमा प्रतीक और १५०°००′ राशि-सीमा की गणना समझें।
६°४०′ से २०°००′ तुला तक स्वाति नक्षत्र के अंश, धनु से मीन तक चार नवांश चरण, वायु प्रतीक और १८-वर्षीय राहु महादशा-शेष की सटीक गणना समझें।
२०°००′ तुला से ३°२०′ वृश्चिक तक विशाखा नक्षत्र के अंश, मेष से कर्क तक चार नवांश चरण, इंद्राग्नि प्रतीक और २१०°००′ राशि-सीमा की गणना समझें।
१६°४०′ से ३०°००′ वृश्चिक तक ज्येष्ठा नक्षत्र के अंश, धनु से मीन तक चार नवांश चरण, इंद्र प्रतीक, १७-वर्षीय बुध दशा और २४०°००′ गंडांत नियम समझें।
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