कर्णवेध मुहूर्त
कर्णवेध संस्कार, पंचांग के तिथि-नक्षत्र नियम, नई दिल्ली का उदाहरण और सुरक्षित कान छेदन के जरूरी प्रश्न समझें।
॥ असतो मा सद्गमय ॥
कर्णवेध संस्कार, पंचांग के तिथि-नक्षत्र नियम, नई दिल्ली का उदाहरण और सुरक्षित कान छेदन के जरूरी प्रश्न समझें।
लग्न मालिका की गणना, आरंभिक भाव के आधार पर बारह नाम और इस ग्रह-क्रम को संबंधित नाभस योग से अलग पहचानने का तरीका जानें।
मृदंग योग का नियम, लग्नेश और सहायक ग्रहों का बल कैसे जाँचें तथा पारंपरिक पद-वर्णन को गारंटी क्यों न मानें—जानें।
धूम और गुलिक जैसे उपग्रहों, गणना की सेटिंग के महत्त्व और “उपग्रह दोष” को एक सार्वभौमिक कुंडली-निदान न मानने का तरीका समझें।
हिंदू पंचांग में अग्निवास का अर्थ, तिथि-वार की प्रचलित गणना, हवन में इसके उपयोग और स्थानीय अनुष्ठान-परंपरा पूछने की आवश्यकता जानें।
द्यूत क्रीड़ा कब होती है, स्थानीय पंचांग से इसका समय कैसे देखें और दीवाली के इस खेल को बिना जुए के आनंदपूर्ण कैसे रखें—जानें।
जानें कि दीवाली लक्ष्मी पूजा अमावस्या के प्रदोष काल में क्यों होती है, शहर के अनुसार मुहूर्त कैसे बदलता है और घर की पूजा शांतिपूर्वक कैसे तय करें।
कुछ हिंदू पंचांगों में होमाहुति की प्रविष्टि का अर्थ, अग्निवास तथा वास्तविक आहुति से इसका अंतर और हवन तय करने से पहले पूछे जाने वाले सवाल जानें।
ज्वालामुखी योग के पाँच परंपरागत संयोग, तिथि और नक्षत्र की स्थानीय अवधि से समय निकालने का तरीका तथा इसे भय के बिना समझना जानें।
हिंदू पंचांग-परंपराओं में कल्पादि दिनों का अर्थ, मन्वादि और युगादि से उनका अंतर तथा स्थान के अनुसार तारीख बदलने का कारण जानें।
तमिल पंचांग में करि दिन के पाँच अवसर, संक्रांति और चंद्र तिथियों से उनकी गणना तथा स्थानीय शहर का पंचांग जाँचने का तरीका जानें।
हिंदू पंचांग के मन्वादि दिनों का अर्थ, 2026 का स्थान-आधारित उदाहरण और सूर्योदय से स्थानीय तारीख तय होने का तरीका जानें।
चौदह मन्वादि तिथियों, उनके चंद्र-मास और पक्ष, मन्वंतर के अर्थ और स्थानीय पंचांग का उदाहरण समझें।
पंचांग दिन शुद्धि में क्या जाँचा जाता है, यह पाँच पंचांग-अंगों से कैसे अलग है और किसी दोष को निश्चित भविष्यवाणी माने बिना समय कैसे परखें—जानें।
जानें कि कुछ मुहूर्त-परंपराएँ विवाह के लिए किन नौ नित्य योगों की जाँच करती हैं, विषघटी का क्या अर्थ है और एक योग दंपति का भविष्य क्यों तय नहीं करता।
आश्विन की शरद नवरात्रि, उसकी तिथि-आधारित गणना, घटस्थापना, नवदुर्गा-पूजा और विजयादशमी तक अलग-अलग समुदायों के उत्सव जानें।
वार्षिक पंचांग में युगादि दिनों का अर्थ, सत्य, त्रेता, द्वापर और कलियुग से जुड़ी तिथियाँ और इन्हें उगादि नववर्ष से अलग पहचानना जानें।
मेष लग्न में मंगल कुंडली के केंद्र में आता है। भाव-स्वामित्व और लग्न को स्थिर व्यक्तित्व न मानने का तरीका समझें।
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