प्रथम भाव में सूर्य
प्रथम भाव: पहचान, vitality, शरीर, स्वभाव, confidence और दुनिया से मिलने का तरीका।
॥ असतो मा सद्गमय ॥
प्रथम भाव: पहचान, vitality, शरीर, स्वभाव, confidence और दुनिया से मिलने का तरीका।
नवम भाव: धर्म, higher learning, teachers, father figures, ethics, तीर्थ और worldview।
द्वितीय भाव: वाणी, परिवार के मूल्य, भोजन, बचत, ज्ञान और संचित संसाधन।
षष्ठ भाव: सेवा, routine, health, work, ऋण, conflict और daily problems का management।
दशम भाव: career, public responsibility, authority, achievement, reputation और visible contribution।
तृतीय भाव: संवाद, कौशल, भाई-बहन, आसपास की यात्राएँ, writing और दैनिक साहस।
द्वादश भाव: आराम, retreat, foreign places, खर्च, नींद, solitude और control छोड़ना।
प्रथम भाव: पहचान, appearance, vitality, स्वभाव और दुनिया से मिलने का तरीका।
चतुर्थ भाव: घर, माता, inner ease, roots, property, comforts और private life।
द्वितीय भाव: वाणी, परिवार के मूल्य, भोजन, बचत, आवाज़, taste और संचित resources।
तृतीय भाव: संवाद, writing, कौशल, भाई-बहन, आसपास की यात्राएँ, media और daily creativity।
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