त्रिज्या और तापमान से प्रकाशिता कैसे निकलती है?
गोलाकार तारे के लिए प्रभावी तापमान वाला संबंध है L=4πR²σT_eff⁴। यहाँ L कुल विकिरण शक्ति अर्थात प्रकाशिता है, R त्रिज्या है और σ स्टेफान–बोल्ट्ज़मान नियतांक है। त्रिज्या स्थिर रखकर तापमान दोगुना करने से प्रकाशिता सोलह गुनी होती है। तापमान स्थिर रखकर त्रिज्या दोगुनी करने से प्रकाशिता चार गुनी होती है।
दूर स्थित प्रेक्षक को मिलने वाला फ्लक्स अलग राशि है। सभी दिशाओं में समान उत्सर्जन और बीच में अवशोषण न होने पर f_bol=L/(4πd²) होगा। दूरी बदलने से स्रोत की दिखाई देने वाली चमक बदलती है, स्रोत की अपनी कुल शक्ति नहीं। इस लेख के सभी संख्यात्मक तारे निर्मित उदाहरण हैं; किसी नामित वास्तविक तारे के माप नहीं।
यह संबंध वर्णक्रम के शिखर वाले अध्ययन को आगे बढ़ाता है। कृष्णिका मॉडल में शिखर का तरंगदैर्घ्य तापमान का संकेत दे सकता है। लेकिन केवल तापमान से ऐसे तारे की कुल शक्ति नहीं निकलेगी जिसका आकार अज्ञात हो। एक ही तापमान पर छोटी और बड़ी सतह अलग कुल शक्ति छोड़ेंगी।
सतही फ्लक्स, प्रकाशिता और प्राप्त फ्लक्स अलग रखें
| राशि | इकाई | अर्थ |
|---|---|---|
| F_surface | W m⁻² | तारे की प्रति इकाई सतह से निकलती कुल शक्ति |
| L | W | पूरे तारे की सभी तरंगदैर्घ्यों में विकिरण शक्ति |
| f_bol | W m⁻² | प्रेक्षक तक प्रति इकाई क्षेत्र पहुँचता कुल फ्लक्स |
दोनों फ्लक्स की इकाई समान है, लेकिन वे अलग स्थानों पर परिभाषित हैं। F_surface उत्सर्जन वाली सतह पर है। f_bol वहाँ है जहाँ प्रेक्षक विकिरण ग्रहण करता है। इकाई समान होने से दोनों की संख्या समान नहीं हो जाती। दूर पहुँचने तक वही शक्ति बहुत बड़े गोले पर फैल चुकी होती है।
बोलोमेट्रिक का अर्थ पूरे वर्णक्रम में समाकलित है। किसी दृश्य-प्रकाश फ़िल्टर से मिला माप केवल उस पट्टी का फ्लक्स है। उसे अपने आप f_bol नहीं मान सकते। गरम और ठंडे तारे अपने कुल विकिरण का अलग अंश उस फ़िल्टर में भेज सकते हैं। इसलिए समान दृश्य चमक कुल विकिरण शक्ति की समानता सिद्ध नहीं करती।
वर्णक्रमीय रेडियन्स में प्रति ठोस कोण और प्रायः प्रति तरंगदैर्घ्य या प्रति आवृत्ति की अतिरिक्त इकाई होती है। कृष्णिका रेडियन्स को आवृत्ति पर समाकलित करने से σT⁴/π मिलता है, जबकि बाहर की ओर पूरे अर्धगोले का सतही फ्लक्स σT⁴ है। किसी सॉफ्टवेयर मॉडल में अतिरिक्त π दिखे तो पहले यही इकाई और कोण वाला अंतर देखें।
केल्विन और स्पष्ट सौर रूपांतरण नियतांक लें
यहाँ σ=5.670374419×10⁻⁸ W m⁻² K⁻⁴ लिया गया है। ये NIST के नियतांक के प्रदर्शित अंक हैं। तापमान निरपेक्ष पैमाने अर्थात केल्विन में होना चाहिए। सेल्सियस की संख्या की चौथी घात लेने पर गणना की इकाई गलत होगी, चाहे उत्तर पहली नजर में उचित लगे।
नाममात्र सौर त्रिज्या Rᴺ☉=6.957×10⁸ m और नाममात्र सौर प्रकाशिता Lᴺ☉=3.828×10²⁶ W हैं। IAU का Resolution B3 इन्हें एकरूप रूपांतरण के लिए सटीक परिभाषित करता है। इसका अर्थ यह नहीं कि भौतिक सूर्य अपरिवर्तित है या उसके गुण बिना अनिश्चितता माप लिए गए हैं। ऊपर लगा N यहाँ नाममात्र रूपांतरण राशि की पहचान है।
अलग से अपनाया गया नाममात्र सौर प्रभावी तापमान 5772 K है। यहाँ के σ, नाममात्र त्रिज्या और नाममात्र प्रकाशिता से समीकरण हल करें तो लगभग 5772.003429 K मिलता है। यह सूक्ष्म अंतर अलग-अलग गोल करके अपनाए गए नियतांकों का परिणाम है। नीचे की तालिकाएँ पहले SI इकाइयों में शक्ति निकालती हैं और फिर Lᴺ☉ से भाग देती हैं। सभी नाममात्र राशियों पर एक और सटीक समानता जबरन नहीं लगाई गई है।
त्रिज्या और व्यास भी अलग रखें। यदि इनपुट व्यास हो तो पहले आधा करें। व्यास को त्रिज्या की जगह रखकर वर्ग करने से सतह का क्षेत्रफल और प्रकाशिता चार गुने निकलेंगे। इकाइयाँ सही होने पर भी यह ज्यामितीय गलती बच सकती है।
6000 K का उदाहरण SI इकाइयों में पूरा करें
काल्पनिक तारे की त्रिज्या 6.957×10⁸ m और प्रभावी तापमान 6000 K लें। पहले प्रति वर्ग मीटर निकलती शक्ति निकालें: σT⁴≈7.348805247×10⁷ W m⁻²। अब पूरे गोले का क्षेत्रफल 4πR²≈6.082104402×10¹⁸ m² होगा।
दोनों का गुणन L≈4.469620074×10²⁶ W देता है। नाममात्र सौर प्रकाशिता से भाग देने पर लगभग 1.167612350 Lᴺ☉ मिलता है। क्षेत्रफल की वर्ग मीटर इकाई सतही फ्लक्स की प्रति वर्ग मीटर इकाई से कटती है और वाट बचता है। किसी वास्तविक सूची से तुलना करने से पहले यह आयामी जाँच करें।
पूरी उत्सर्जक सतह के लिए 4πR² चाहिए। सामने से दिखते गोल चक्र का प्रक्षेपित क्षेत्रफल πR² अलग ज्यामिति है। उसे यहाँ रखने पर कुल शक्ति चार गुना कम निकलेगी। किसी ग्रह द्वारा तारे का प्रकाश रोकने या ग्रहण करने के प्रश्न में प्रक्षेपित क्षेत्रफल उपयोगी हो सकता है; इसीलिए दोनों सूत्रों का प्रसंग पढ़ना जरूरी है।
आकार और तापमान का असर अलग-अलग देखें
| R/Rᴺ☉ | T (K) | F_surface (W m⁻²) | L (W) | L/Lᴺ☉ |
|---|---|---|---|---|
| 0.5 | 3000 | 4.593003279e+6 | 6.983781366e+24 | 0.018243943 |
| 1 | 3000 | 4.593003279e+6 | 2.793512546e+25 | 0.072975772 |
| 2 | 3000 | 4.593003279e+6 | 1.117405019e+26 | 0.291903087 |
| 0.5 | 6000 | 7.348805247e+7 | 1.117405019e+26 | 0.291903087 |
| 1 | 6000 | 7.348805247e+7 | 4.469620074e+26 | 1.167612350 |
| 2 | 6000 | 7.348805247e+7 | 1.787848030e+27 | 4.670449398 |
| 1 | 9000 | 3.720332656e+8 | 2.262745163e+27 | 5.911037520 |
| 2 | 9000 | 3.720332656e+8 | 9.050980651e+27 | 23.644150080 |
पहली तीन पंक्तियों का सतही फ्लक्स समान है क्योंकि तापमान समान है। कुल प्रकाशिता बदलती है क्योंकि सतह का क्षेत्रफल बदलता है। अब एक ही त्रिज्या पर 3000 K और 6000 K की पंक्तियाँ मिलाएँ। तापमान दोगुना और शक्ति सोलह गुनी होगी।
इसलिए कोई अधिक गरम वस्तु हर ठंडी वस्तु से अधिक प्रकाशमान ही होगी, यह निष्कर्ष सही नहीं। पर्याप्त बड़े आकार की ठंडी वस्तु छोटी गरम वस्तु से अधिक कुल शक्ति दे सकती है। तापमान प्रति इकाई सतह का उत्सर्जन तय करता है; त्रिज्या बताती है कि ऐसी सतह कितनी है।
तालिका में अधिक अंक रखने का उद्देश्य गणना दोहराना है। उनसे यह दावा नहीं होता कि वास्तविक तारों के तापमान और आकार इतने दशमलव स्थानों तक ज्ञात हैं। अंकगणित की शुद्धता और माप की शुद्धता अलग हैं। वास्तविक परिणाम को उसके इनपुट की अनिश्चितता के अनुरूप ही लिखना चाहिए।
तीन स्थिर-त्रिज्या वक्र कैसे पढ़ें?
ऊर्ध्व अक्ष लघुगणकीय है। बराबर ऊपर जाने का अर्थ बराबर अनुपात है, बराबर अतिरिक्त वाट नहीं। किसी भी तापमान पर दो नाममात्र सौर त्रिज्या वाला वक्र एक त्रिज्या वाले से चार गुना ऊँचा मान देता है। आधी त्रिज्या वाला उसका चौथाई है। यहाँ तीनों वक्रों को समान शिखर पर सामान्यीकृत नहीं किया गया है।
हर रेखा अलग स्थिर त्रिज्या की तुलना है। इसे किसी एक तारे के जीवन का विकास-पथ न मानें; विकास में त्रिज्या भी बदल सकती है। इस चित्र में तापमान दाईं ओर बढ़ रहा है। प्रचलित हर्ट्ज़स्प्रुंग–रसेल आरेख में तापमान की दिशा अक्सर उलटी होती है। नाम पहचानने के बाद भी वास्तविक अक्ष और इकाइयाँ पढ़ें।
अनुपात से एक ही शक्ति के कई समाधान दिखते हैं
दो गोलाकार स्रोतों के लिए L₂/L₁=(R₂/R₁)²(T₂/T₁)⁴ है। समान भौतिक नियतांक अनुपात में कट जाता है। वाट की लंबी गणना से पहले प्रभाव की दिशा और मात्रा जाँचने का यह सुविधाजनक तरीका है।
| R₂/R₁ | T₂/T₁ | L₂/L₁ |
|---|---|---|
| 1 | 1 | 1 |
| 2 | 1 | 4 |
| 1 | 2 | 16 |
| 0.5 | 2 | 4 |
| 4 | 0.5 | 1 |
अंतिम पंक्ति में प्रकाशिता वही रहती है। चार गुनी त्रिज्या से सतह सोलह गुनी होती है; आधे तापमान से सतही फ्लक्स सोलहवाँ भाग रह जाता है। इसलिए केवल समान कुल शक्ति मिलने पर एक अनोखी त्रिज्या या तापमान तय नहीं होता। कोई अतिरिक्त स्वतंत्र जानकारी चाहिए।
लघुगणक लेने पर log L में 2 log R, 4 log T और एक स्थिर पद जुड़ते हैं। प्रकाशिता स्थिर हो तो त्रिज्या तापमान की ऋण दूसरी घात के अनुपात में है। तापमान का अनुमान दस प्रतिशत बढ़ाएँ और प्रकाशिता वही रखें, तो निकली त्रिज्या का अनुपात 1/1.1²≈0.826446 होगा। केवल दस प्रतिशत जोड़-घटाव वाला अनुमान यहाँ पर्याप्त नहीं।
प्रकाशिता और तापमान से त्रिज्या निकालें
समीकरण को उलटने पर R=√[L/(4πσT_eff⁴)] मिलता है। यदि प्रकाशिता नाममात्र सौर इकाइयों में दी हो तो पहले उसे वाट में बदलें। SI सूत्र से उत्तर मीटर में आएगा। अंत में Rᴺ☉ से भाग देकर चाहें तो सौर त्रिज्या के रूप में लिखें।
| L/Lᴺ☉ | T (K) | R (m) | R/Rᴺ☉ |
|---|---|---|---|
| 1 | 3000 | 2.575328623e+9 | 3.701780398 |
| 1 | 6000 | 6.438321558e+8 | 0.925445100 |
| 10 | 6000 | 2.035976043e+9 | 2.926514364 |
| 100 | 4500 | 1.144590499e+10 | 16.452357326 |
एक नाममात्र सौर प्रकाशिता और 3000 K पर त्रिज्या लगभग 3.701780398 नाममात्र सौर त्रिज्याएँ है। उसी शक्ति पर तापमान 6000 K करने से त्रिज्या चार गुना छोटी होगी। उलटी गणना पहले निकाले अनुपात की अलग जाँच करती है।
तापमान निकालना हो तो T_eff=[L/(4πσR²)]¹ᐟ⁴ लें। किसी समीकरण को उलटने से नई माप-सूचना नहीं बनती। यदि प्रकाशिता और त्रिज्या दोनों अज्ञात हों, तो एक प्राप्त फ्लक्स से दोनों एक साथ तय नहीं होते। दूरी और किसी दूसरी स्वतंत्र बाधा की जरूरत बनी रहती है।
स्रोत की शक्ति से प्रेक्षक का फ्लक्स निकालें
अगले अभ्यास में L को ठीक एक नाममात्र सौर प्रकाशिता रखें और 1 au=149597870700 m लें। सभी दिशाओं में समान उत्सर्जन, स्रोत की त्रिज्या से बहुत बड़ी दूरी और बीच में अवशोषण न होने की शर्तें हैं। तालिका आने वाली किरणों के लंबवत सतह पर फ्लक्स देती है; किसी पूरे ग्रह पर औसत नहीं।
| d (au) | f_bol (W m⁻²) | 1 au के सापेक्ष |
|---|---|---|
| 1 | 1361.166465409 | 1.0000 |
| 2 | 340.291616352 | 0.2500 |
| 5 | 54.446658616 | 0.0400 |
| 10 | 13.611664654 | 0.0100 |
1 au पर निकली संख्या लगभग 1361.166465 W m⁻² है। IAU का अलग से गोल किया नाममात्र सौर irradiance 1361 W m⁻² है। फिर वही रूपांतरण का छोटा अंतर दिखाई देता है। तालिका Lᴺ☉ से व्युत्क्रम-वर्ग गणना है; सूर्य-प्रकाश का नया प्रेक्षण नहीं।
दूरी दोगुनी करने पर फ्लक्स चौथाई और दस गुनी करने पर सौवाँ भाग होता है। उलटी गणना L=4πd²f_bol है। बीच का अवशोषण, पूरे वर्णक्रम का माप न मिलना, साथ के अनसुलझे तारे का प्रकाश या दिशाओं में असमान उत्सर्जन प्रकाशिता के अनुमान को प्रभावित कर सकते हैं। अधिक दशमलव लिखने से इन मॉडल-संबंधी समस्याओं का समाधान नहीं होता।
मान्यताओं के साथ अनिश्चितता आगे बढ़ाएँ
त्रिज्या और तापमान की छोटी, स्वतंत्र अनिश्चितताओं के लिए सापेक्ष प्रकाशिता-अनिश्चितता लगभग √[(2σ_R/R)²+(4σ_T/T)²] है। स्वतंत्र प्रकाशिता और तापमान से निकली त्रिज्या के लिए यह √[(σ_L/(2L))²+(2σ_T/T)²] होगी। उपस्क्रिप्ट वाला σ किसी इनपुट की अनिश्चितता है। विकिरण नियम का बिना उपस्क्रिप्ट σ भौतिक नियतांक है।
| निकली राशि | इनपुट अनिश्चितताएँ | लगभग सापेक्ष अनिश्चितता |
|---|---|---|
| L | R: 2%; T: 1% | 5.656854% |
| R | L: 5%; T: 1% | 3.201562% |
तापमान की चौथी घात के कारण छोटा तापमान-अंतर भी महत्वपूर्ण हो सकता है। ये प्रतिशत स्वतंत्र इनपुट मानने पर मानक अनिश्चितता का प्रसार हैं। ये सबसे खराब संभव सीमा नहीं हैं और अपने आप किसी निश्चित भरोसा-अंतराल का अर्थ नहीं देते।
यदि प्रकाशिता और तापमान एक ही आँकड़ों के फिट से निकले हैं, तो उनकी त्रुटियाँ सहसंबद्ध हो सकती हैं। तब सहप्रसरण को शामिल करना चाहिए। पहले एक मान ली गई त्रिज्या से प्रकाशिता निकालकर उसी प्रकाशिता से त्रिज्या वापस निकालना स्वतंत्र माप नहीं; वह गणना की आपसी संगति का परीक्षण है।
प्रभावी तापमान का सही अर्थ और सीमा
प्रभावी तापमान ऐसा तापमान है जिसके लिए कुल बाहरी सतही फ्लक्स σT_eff⁴ के बराबर हो। वास्तविक तारे के वर्णक्रम में अवशोषण रेखाएँ और कृष्णिका से अंतर हो सकते हैं, फिर भी उसका उपयोगी प्रभावी तापमान परिभाषित किया जा सकता है। इसलिए कुल प्रकाशिता का यह संबंध यह नहीं कहता कि हर तरंगदैर्घ्य पर उसका वर्णक्रम आदर्श कृष्णिका जैसा है।
रंग तापमान, चमक तापमान और भीतर के केंद्र का तापमान अलग प्रश्नों से जुड़े हैं। वर्णक्रम के किसी एक भाग से फिट किया तापमान प्रभावी तापमान की जगह रखने से पहले मॉडल जाँचें। बहुत असमान सतह या तेजी से घूमते स्रोत में क्षेत्रफल और तापमान-वितरण का अधिक विस्तृत वर्णन चाहिए हो सकता है।
वीन का नियम शिखर से तापमान का संबंध समझाता है। परिमाण और फ्लक्स चमक की तुलना सिखाते हैं। पैरालैक्स और दूरी की अनिश्चितता दूरी की अलग जानकारी देता है। पहले मापी गई राशि पहचानें, फिर मॉडल लिखें, इकाइयों के साथ गणना करें और उत्तर के साथ उसकी अनिश्चितता बताएँ।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
तारे की प्रकाशिता का सूत्र क्या है?
गोलाकार तारे के लिए L=4πR²σT_eff⁴ है। त्रिज्या उत्सर्जक क्षेत्रफल देती है और प्रभावी तापमान कुल बाहरी सतही फ्लक्स तय करता है। SI इकाइयाँ या एकसमान परिभाषित अनुपात लें।
तापमान दोगुना हो तो प्रकाशिता भी दोगुनी होगी?
त्रिज्या वही हो तो निरपेक्ष तापमान दोगुना करने से प्रकाशिता सोलह गुनी होगी। तापमान वही रखकर त्रिज्या दोगुनी करने से प्रकाशिता चार गुनी होती है।
क्या ठंडा तारा अधिक प्रकाशमान हो सकता है?
हाँ। उसका उत्सर्जक क्षेत्रफल पर्याप्त बड़ा हो तो कम सतही फ्लक्स के बावजूद कुल शक्ति अधिक हो सकती है। केवल तापमान से कुल प्रकाशिता तय नहीं होती।
प्रकाशिता से त्रिज्या कैसे निकालें?
स्वतंत्र रूप से ज्ञात प्रभावी तापमान के साथ R=√[L/(4πσT_eff⁴)] लें। अकेली प्रकाशिता पर्याप्त नहीं, क्योंकि अलग त्रिज्या और तापमान के जोड़े समान शक्ति दे सकते हैं।
दिखाई देने वाली चमक और प्रकाशिता एक ही हैं?
नहीं। प्रकाशिता स्रोत की अपनी विकिरण शक्ति है। प्राप्त बोलोमेट्रिक फ्लक्स दूरी और बीच के प्रभावों पर भी निर्भर है। बिना अवशोषण और समान दिशात्मक उत्सर्जन में वह L/(4πd²) है।
क्या नाममात्र सौर नियतांक सूर्य के सटीक माप हैं?
वे IAU द्वारा अपनाए गए सटीक रूपांतरण गुणक हैं, जिन्हें सौर गुणों के अनुमानों के पास चुना गया है। वे भौतिक सूर्य के अपरिवर्तित या बिना अनिश्चितता ज्ञात होने का दावा नहीं करते।