वीन के नियम से तापमान कैसे निकालते हैं?
आदर्श कृष्णिका यानी ब्लैकबॉडी का वर्णक्रम जब प्रति इकाई तरंगदैर्घ्य ऊर्जा-विकिरण घनत्व के रूप में दिया हो, तब वीन विस्थापन नियम λmax T = b है। b ≈ 2.897771955×10⁶ nm·K लें। इसलिए शिखर तरंगदैर्घ्य नैनोमीटर में हो तो T = 2,897,771.955/λmax होगा।
काल्पनिक शिखर 500 nm पर हो तो T ≈ 5795.54 K मिलता है। इसके लिए ऊष्मीय सतत वर्णक्रम का तरंगदैर्घ्य-घनत्व शिखर चाहिए। किसी भी चमकीली उत्सर्जन रेखा, अवशोषण रेखा के केंद्र या कैमरे के एक रंगीन पिक्सेल का स्थान सीधे इस सूत्र में नहीं डालते।
इस लेख में इकाइयों से गणना बनती है, तीन मूल प्लांक वक्रों की तुलना होती है और स्पष्ट किया गया है कि आवृत्ति के प्रति इकाई वाला शिखर दूसरी संख्या क्यों देता है। सारे उदाहरण आदर्श मॉडल हैं; इन्हें किसी नामित तारे का वास्तविक मापन नहीं बताया गया है।
कृष्णिका मॉडल क्या बताता है?
आदर्श कृष्णिका ऊष्मीय विकिरण का संदर्भ है, जिसका साम्यावस्था वर्णक्रम तापमान से निर्धारित होता है। उसका वर्णक्रम चौड़ा है। वह केवल एक रंग पर नहीं, अनेक तरंगदैर्घ्यों में विकिरण देता है। शिखर चुनी हुई प्रस्तुति में सबसे अधिक वर्णक्रमीय घनत्व बताता है, अकेले उत्सर्जित तरंगदैर्घ्य को नहीं।
तारकीय सतत वर्णक्रम की NASA व्याख्या बताती है कि तारे पूर्ण कृष्णिका नहीं होते, फिर भी उनके समग्र वर्णक्रम की आकृति समझाने में कृष्णिका वक्र उपयोगी है। सरल सूत्र को तारकीय तापमान का परिचय बनाते समय यही सीमा याद रखनी चाहिए।
तारे के वर्णक्रम में अवशोषण रेखाएँ और आदर्श सतत वक्र से अलग संरचना भी होती है। इसलिए शिखर से निकला तापमान मॉडल पर निर्भर अनुमान है। वह वायुमंडल की हर गहराई का तापमान अपने-आप नहीं होता और तारे के केंद्र का सीधा मापन तो बिल्कुल नहीं है।
गणना से पहले ऊर्ध्वाधर अक्ष पढ़ें। केवल तीव्रता या चमक लिखा होना पर्याप्त नहीं, यदि साथ में यह स्पष्ट न हो कि घनत्व किस तरंगदैर्घ्य या आवृत्ति अंतराल के प्रति है।
केल्विन और तरंगदैर्घ्य की इकाइयाँ मिलाएँ
NIST की नियतांक तालिका में तरंगदैर्घ्य विस्थापन नियतांक 2.897771955…×10⁻³ m·K है। यही लगभग 2897.771955 μm·K या 2,897,771.955 nm·K है। ये इकाई-परिवर्तन हैं, तीन अलग भौतिक नियम नहीं।
λmax = 0.5 μm हो तो 2897.771955 को 0.5 से भाग दें। λmax = 500 nm हो तो 2,897,771.955 को 500 से भाग दें। तापमान समान आएगा। माइक्रोमीटर वाले नियतांक के साथ नैनोमीटर की संख्या लगाने से हजार गुने की गलती हो जाएगी।
तापमान निरपेक्ष होना चाहिए। पहले T(K) = t(°C)+273.15 से सेल्सियस को केल्विन में बदलें। काल्पनिक वस्तु 26.85°C पर है तो उसका तापमान 300 K है और तरंगदैर्घ्य शिखर लगभग 9.659 μm होगा। भाग में 26.85 डालना दूसरी ही तापावस्था की गणना है।
केल्विन का चिह्न K है, उसके साथ डिग्री चिह्न नहीं लगाया जाता। नियतांक में बहुत दशमलव उपलब्ध होने का अर्थ यह नहीं कि देखे गए मोटे शिखर से उतनी ही सटीक ताप-संख्या मिल सकती है। मापन की सटीकता और नियतांक की सटीकता अलग प्रश्न हैं।
सात तापमानों के शिखर निकालें
| T (K) | λmax (nm) | λmax (μm) |
|---|---|---|
| 300 | 9659.239850 | 9.659239850 |
| 1000 | 2897.771955 | 2.897771955 |
| 3000 | 965.923985 | 0.965923985 |
| 4500 | 643.949323 | 0.643949323 |
| 6000 | 482.961993 | 0.482961992 |
| 10000 | 289.777196 | 0.289777196 |
| 20000 | 144.888598 | 0.144888598 |
3000 K और 6000 K के उदाहरण उलटे अनुपात को साफ करते हैं। तापमान दोगुना होने से शिखर तरंगदैर्घ्य लगभग 965.924 nm से आधा होकर 482.962 nm हो जाता है। दोनों में केल्विन और एक ही वर्णक्रमीय घनत्व की परिभाषा ली गई है।
300 K मॉडल का शिखर दृश्य तरंगदैर्घ्यों से बहुत आगे है, जबकि 20,000 K मॉडल का शिखर काफी छोटा है। इससे यह नहीं निकलता कि पूरा वर्णक्रम शिखर के केवल एक ओर है। विस्तृत वितरण अपने अधिकतम से दूर भी बना रहता है।
जाँच के लिए हर तापमान को उसके बिना गोल किए नैनोमीटर शिखर से गुणा करें। गुणनफल b लौटना चाहिए। छपी हुई गोल संख्याओं से बहुत छोटा अंतर आए तो वह गोलाई का प्रभाव हो सकता है; उससे नियतांक तापमान के साथ बदलने नहीं लगा।
सतत वर्णक्रम के शिखर से तापमान वापस पाएँ
| λmax (nm) | T (K) |
|---|---|
| 400 | 7244.429888 |
| 500 | 5795.543910 |
| 700 | 4139.674221 |
| 1000 | 2897.771955 |
| 10000 | 289.777196 |
500 nm के उदाहरण में SI इकाइयाँ उपयोग करना चाहें तो 500 nm = 5×10⁻⁷ m लिखें। फिर T = 2.897771955×10⁻³/(5×10⁻⁷) = 5795.54391 K है। इसी तापमान को λmax = b/T में रखने पर 500 nm वापस मिलना चाहिए।
1000 nm पर निकला तापमान आधा होगा। यह व्युत्क्रम संबंध से सीधे निकलता है और गलती पकड़ने की सरल जाँच है। इस परिभाषा में लंबा शिखर तरंगदैर्घ्य अधिक गर्म कृष्णिका नहीं बताता।
तालिका यह दावा नहीं करती कि 500 nm पर कोई भी रेखा दिखे तो स्रोत का तापमान यही है। अलग वर्णक्रमीय रेखा किसी विशेष परमाण्विक संक्रमण से जुड़ी हो सकती है। पहले पहचानें कि देखा हुआ शिखर वास्तव में विस्तृत ऊष्मीय सतत वर्णक्रम का अधिकतम है या कोई दूसरी संरचना।
शिखर का संबंध प्लांक नियम से कैसे बनता है?
तरंगदैर्घ्य के रूप में प्लांक नियम Bλ(T) = 2hc²/[λ⁵(exp(hc/(λkT))−1)] है, जहाँ निर्वात तरंगदैर्घ्य λ मीटर में है। h प्लांक नियतांक, c प्रकाश की चाल और k बोल्ट्ज़मान नियतांक है। यह प्रति इकाई तरंगदैर्घ्य, क्षेत्रफल और घन कोण का वर्णक्रमीय विकिरण घनत्व है।
x = hc/(λkT) रखें। तरंगदैर्घ्य-घनत्व के गैर-शून्य शिखर पर अवकलन से 5(1−e⁻ˣ) = x मिलता है। उसका धनात्मक गैर-शून्य हल लगभग 4.965114232 है। इसे रखने पर b = hc/(kx) बनता है; इसीलिए λmax T एक नियतांक है।
समीकरण का सीमांत हल x = 0 भी है, लेकिन वह यहाँ खोजा जाने वाला सीमित तरंगदैर्घ्य का अधिकतम नहीं है। संख्यात्मक विधि में केवल शून्य अंतिम बिंदु स्वीकार करने के बजाय सही धनात्मक हल चुनना चाहिए।
इस मॉडल में h = 6.62607015×10⁻³⁴ J·s, c = 299792458 m/s और k = 1.380649×10⁻²³ J/K हैं। प्रति मीटर निकले घनत्व को प्रति नैनोमीटर में बदलने के लिए 10⁻⁹ से गुणा करें। यह स्थिर इकाई-परिवर्तन तरंगदैर्घ्य शिखर का स्थान नहीं बदलता।
तीन मूल कृष्णिका वक्रों की तुलना
| λ (nm) | 3000 K | 4500 K | 6000 K |
|---|---|---|---|
| 300 | 0.005617977 | 0.152546995 | 0.519973715 |
| 500 | 0.261510791 | 0.843901419 | 0.997140803 |
| 700 | 0.754180770 | 0.983835241 | 0.748121514 |
| 1000 | 0.997140803 | 0.671585718 | 0.373950489 |
| 1500 | 0.671585718 | 0.279402341 | 0.124795437 |
| 2000 | 0.373950489 | 0.124795437 | 0.050445156 |
तीनों की खींची ऊँचाई बराबर है क्योंकि हर वक्र को उसके अपने अधिकतम से भाग दिया गया। इससे स्थान का बदलाव देखना आसान है, पर यह चित्र नहीं बताता कि किसी एक तरंगदैर्घ्य पर कौन-सी सतह कितनी निरपेक्ष विकिरण मात्रा देती है।
नमूने 5 nm के अंतर पर हैं, इसलिए नमूनों का सबसे ऊँचा बिंदु विश्लेषणात्मक शिखर से थोड़ा हट सकता है। चित्र के नीचे गोल विश्लेषणात्मक शिखर हैं, जबकि तालिका छह निश्चित तरंगदैर्घ्यों पर दोहराए जा सकने वाले मॉडल मान देती है।
चित्र में सामान्यीकरण का तरीका लिखना जरूरी है। यह जानकारी न हो तो समान ऊँचाई से गलती से समान ऊर्जा-निर्गम समझा जा सकता है। इस चित्र से वैसा निष्कर्ष नहीं निकलता।
आवृत्ति और तरंगदैर्घ्य के शिखर व्युत्क्रम क्यों नहीं हैं?
Astropy के कृष्णिका दस्तावेज़ Bλ और Bν के अलग घनत्व तथा अलग शिखर स्पष्ट करते हैं। प्रति इकाई आवृत्ति में वही विकिरण जिन खंडों में बँटता है, वे प्रति इकाई तरंगदैर्घ्य के खंडों के समान नहीं हैं।
ν = c/λ होने पर मिलती SI इकाइयों में Bλ = Bν c/λ² है। गुणक तरंगदैर्घ्य के साथ बदलता है, इसलिए चर बदलने से ऊँचाई का क्रम और अधिकतम का स्थान भी बदल सकता है। केवल क्षैतिज अक्ष पर दूसरा नाम लिख देने से यह घनत्व-परिवर्तन पूरा नहीं होता।
| T (K) | Bλ का λmax (nm) | Bν का νmax (THz) | c/νmax (nm) |
|---|---|---|---|
| 3000 | 965.923985 | 176.367772710 | 1699.814277 |
| 4500 | 643.949323 | 264.551659065 | 1133.209518 |
| 6000 | 482.961993 | 352.735545420 | 849.907138 |
Bν के लिए आवृत्ति शिखर νmax ≈ 5.878925757×10¹⁰ T Hz है। 6000 K पर यह लगभग 352.736 THz बनता है। उस आवृत्ति को तरंगदैर्घ्य में बदलें तो लगभग 850 nm मिलता है, जबकि उसी तापमान पर Bλ का शिखर लगभग 483 nm है।
यह विरोधाभास नहीं। दोनों एक ही ऊष्मीय विकिरण को अलग बैंड-चौड़ाई की परिभाषा से बताते हैं। आवृत्ति-घनत्व शिखर का व्युत्क्रम लेकर उसे तरंगदैर्घ्य वाले वीन नियम में डालने से गलत तापमान आएगा।
लघुगणकीय क्षैतिज अक्ष भी अलग प्रश्न है। वही Bλ संख्याएँ लॉग अक्ष पर खींच देने से वे अपने-आप प्रति लॉग अंतराल ऊर्जा नहीं बनतीं। बाद वाली मात्रा में λBλ आता है और उसका शिखर भी अलग होता है। इसलिए अक्ष की दूरी और ऊर्ध्वाधर मात्रा की परिभाषा दोनों पढ़ें।
शिखर स्थान, ऊँचाई और कुल निर्गम अलग तरह बढ़ते हैं
| T (K) | λmax अनुपात | Bλ शिखर-ऊँचाई अनुपात | कुल सतही निर्गम अनुपात |
|---|---|---|---|
| 3000 | 1.000000000 | 1.000000 | 1.000000 |
| 4500 | 0.666666667 | 7.593750 | 5.062500 |
| 6000 | 0.500000000 | 32.000000 | 16.000000 |
| 9000 | 0.333333333 | 243.000000 | 81.000000 |
आदर्श कृष्णिका में शिखर तरंगदैर्घ्य T⁻¹, Bλ की शिखर-ऊँचाई T⁵ और कुल सतही विकिरण निर्गम T⁴ के अनुपात में बदलते हैं। ताप दोगुना हो तो शिखर तरंगदैर्घ्य आधा, बिना सामान्यीकरण की शिखर-ऊँचाई 32 गुना और समाकलित सतही निर्गम 16 गुना होता है।
NASA Goddard की विकिरण नियमों की व्याख्या गर्म वर्णक्रम के छोटे तरंगदैर्घ्य की ओर जाने और बड़े कुल निर्गम का संबंध दिखाती है। शिखर-ऊँचाई और वक्र के नीचे क्षेत्रफल अलग हैं: पहला एक स्थान का घनत्व है, दूसरा पूरे तरंगदैर्घ्य विस्तार में समाकलन से बनता है।
कुल सतही निर्गम F = σT⁴ है। आदर्श गोलाकार स्रोत की दीप्ति L = 4πR²σT⁴ है। इसलिए त्रिज्या बदलने से तापमान और वीन शिखर बदले बिना भी कुल दीप्ति बदल सकती है। समान T पर त्रिज्या दोगुनी हो तो दीप्ति चार गुनी होगी।
निरीक्षक को मिली चमक दूरी और अन्य परिस्थितियों पर भी निर्भर है। तारकीय परिमाण और फ्लक्स का लेख यहाँ के सतही वर्णक्रम से अलग प्रेक्षणीय मात्रा समझाता है। दोनों को केवल चमक शब्द से एक न मानें।
शिखर तरंगदैर्घ्य की छोटी अनिश्चितता का प्रभाव
T = b/λ में b को ज्ञात मानें तो छोटी तरंगदैर्घ्य अनिश्चितता के लिए σT ≈ bσλ/λ² = Tσλ/λ है। T और λ की सापेक्ष अनिश्चितताओं का आकार लगभग समान है, जबकि उनके बदलाव की दिशा उलटी है।
500 nm पर 20 nm की छोटी अनिश्चितता से प्रथम-क्रम ताप अनिश्चितता लगभग 231.82 K, यानी 4% आती है। 480 और 520 nm पर सटीक तापमान केंद्रीय मान से समान दूरी पर नहीं हैं, क्योंकि व्युत्क्रम फलन सीधी रेखा नहीं है।
| λmax (nm) | T (K) | T − T(500 nm) (K) |
|---|---|---|
| 480 | 6037.024906 | 241.480996 |
| 490 | 5913.820316 | 118.276406 |
| 500 | 5795.543910 | 0.000000 |
| 510 | 5681.905794 | -113.638116 |
| 520 | 5572.638375 | -222.905535 |
ये छोर संवेदनशीलता के उदाहरण हैं, अपने-आप कोई सांख्यिकीय विश्वास-अंतराल नहीं। वास्तविक अंतराल के लिए मापन का मॉडल चाहिए, जिसमें सतत वर्णक्रम और शिखर का अनुमान कैसे लगाया गया, यह शामिल हो। उपकरण का अंशांकन, उपलब्ध वर्णक्रमीय विस्तार और मॉडल का अंतर, b की गोलाई से अधिक प्रभाव डाल सकते हैं।
यदि प्रेक्षण शिखर के केवल एक ओर तक हैं तो सबसे बड़ा देखा बिंदु शायद उपलब्ध तरंगदैर्घ्य सीमा का अंतिम बिंदु हो। उसे मापा हुआ शिखर मानकर वीन नियम लगाना अनुपलब्ध जानकारी को छिपा देगा। पहले वक्र के दोनों ओर का संदर्भ जाँचें।
मॉडल की सीमा में अर्थ समझें
सतत वर्णक्रम से तापमान निकालना और पहचानी गई रेखा के विस्थापन से त्रिज्यीय वेग निकालना अलग काम हैं। डॉप्लर वाला लेख दूसरे प्रश्न को समझाता है। तापमान ऊष्मीय वितरण की आकृति बदलता है; गति उसका तरंगदैर्घ्य पैमाना खिसका सकती है। इसलिए देखे गए वर्णक्रम को उचित संदर्भ-तंत्र में समझना होगा।
इसी तरह केवल शिखर से त्रिज्या, दूरी या कुल दीप्ति नहीं मिलती। तापमान का अनुमान दूसरी स्वतंत्र जानकारी के साथ अधिक उपयोगी बनता है, लेकिन हर मात्रा और उसकी अनिश्चितता अलग पहचाननी चाहिए।
शिखर के तरंगदैर्घ्य को स्रोत का पूरा दिखाई देने वाला रंग भी न मानें। आँख कई तरंगदैर्घ्यों का संयुक्त प्रभाव देखती है और ऊष्मीय वर्णक्रम चौड़ा है। एक रंग का नाम मापे हुए वर्णक्रम और उसके अंशांकन का विकल्प नहीं है।
गणना के अच्छे रिकॉर्ड में चुना वर्णक्रमीय घनत्व, निर्वात तरंगदैर्घ्य की इकाई, केल्विन ताप, सामान्यीकरण हुआ या नहीं और मॉडल की धारणाएँ लिखी हों। इन्हीं विवरणों से दूसरा पाठक संख्या दोहरा सकता है और पहचान सकता है कि कहाँ अधिक पूर्ण वर्णक्रमीय विश्लेषण चाहिए।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
नैनोमीटर में वीन विस्थापन सूत्र क्या है?
प्रति इकाई तरंगदैर्घ्य कृष्णिका विकिरण के अधिकतम के लिए λmax (nm) और T (K) का गुणनफल लगभग 2,897,771.955 nm·K है। एक मात्रा ज्ञात हो तो इस नियतांक को उससे भाग देकर दूसरी निकालें।
क्या वीन नियम में सीधे सेल्सियस रख सकते हैं?
नहीं। पहले सेल्सियस ताप में 273.15 जोड़कर केल्विन पाएँ। संबंध निरपेक्ष तापमान से बनता है।
आवृत्ति और तरंगदैर्घ्य के शिखर अलग क्यों हैं?
दोनों अलग बैंड-अंतरालों के प्रति घनत्व हैं। परिवर्तन में तरंगदैर्घ्य पर निर्भर गुणक आता है, इसलिए Bν के शिखर आवृत्ति का व्युत्क्रम Bλ का शिखर नहीं होता।
चित्र के तीनों वक्र समान ऊँचे क्यों हैं?
आकृति की तुलना के लिए हर वक्र को उसके अपने शिखर से भाग दिया गया है। इससे निरपेक्ष विकिरण में ताप के साथ होने वाली वृद्धि छिपती है; समान ऊर्जा उत्सर्जन सिद्ध नहीं होता।
क्या 500 nm की रेखा से लगभग 5800 K ताप सिद्ध होता है?
नहीं। सूत्र ऊष्मीय सतत वर्णक्रम के तरंगदैर्घ्य-घनत्व शिखर पर लागू है। अकेली उत्सर्जन या अवशोषण रेखा दूसरी प्रकार की संरचना है।
क्या वीन नियम से तारे का केंद्रीय ताप या दूरी मिलती है?
नहीं। यह घोषित ऊष्मीय मॉडल में तापमान का अनुमान देता है। केंद्र की स्थितियाँ, त्रिज्या, दूरी और कुल दीप्ति के लिए अतिरिक्त भौतिक जानकारी चाहिए।