नतोन्नत बल क्या है और यहाँ कौन-सी गणना की जा रही है?
नतोन्नत बल, काल बल के भीतर दिन-रात से जुड़ा एक योगदान है। Astrogyana के वर्तमान षड्बल प्रोफाइल में UTC की घड़ी और स्थान के पूर्व-धन भौगोलिक देशांतर से स्थानीय माध्य सौर घंटा निकाला जाता है। चंद्र, मंगल और शनि का अंक माध्य मध्यरात्रि पर अधिकतम होता है; सूर्य, गुरु और शुक्र को उसका पूरक मिलता है, जो माध्य मध्याह्न पर अधिकतम है। बुध को पूरे चक्र में 60 विरूप मिलते हैं।
यह लेख उसी नामित पद्धति को घंटे, देशांतर और उदाहरणों सहित खोलता है। यह पारंपरिक ज्योतिषीय ढाँचे का संख्यात्मक घटक है। इसे भौतिक ऊर्जा, वास्तव में दिखाई देने वाले दिन के प्रकाश या किसी घटना की संभावना का माप न समझें।
रोमन लिपि में Natonnata और Nathonatha जैसे अलग रूप मिलते हैं। Maitreya का काल बल दस्तावेज़ इन्हीं तीन ग्रह-समूहों का परिचय देता है। नीचे की स्पष्ट अंकगणित Astrogyana के स्थानीय माध्य समय वाले प्रोफाइल का वर्णन है; समूहों के परिचय से हर सॉफ्टवेयर की सभी गणना-शर्तें प्रमाणित नहीं होतीं।
पहले UTC समय और भौगोलिक देशांतर सही लिखें
UTC समय को दशमलव घंटे में बदलें: घंटे + मिनट/60 + सेकंड/3600। भौगोलिक देशांतर अंशों में लें, पूर्व को धन और पश्चिम को ऋण चिह्न दें। इस घटक के ये दो इनपुट हैं। ग्रह का राशिचक्रीय देशांतर, अयनांश और प्रेक्षक का अक्षांश अलग सूचनाएँ हैं; इनमें से किसी को स्थान के देशांतर की जगह नहीं रख सकते।
यदि मूल जन्म-समय स्थानीय नागरिक घड़ी में दिया है, तो उसकी तारीख, स्थान और उस समय लागू ऐतिहासिक समय-क्षेत्र को पहले समझें। उससे सही UTC क्षण मिलेगा। नीचे के उदाहरण घोषित समय-अंतर या पहले से दिए UTC घंटे लेते हैं; वे किसी वास्तविक स्थान का ऐतिहासिक समय-क्षेत्र निर्धारित करने का दावा नहीं करते।
पूरा UTC दिनांक रिकॉर्ड में बना रहने दें, भले इस सूत्र में केवल घड़ी का घंटा निकाला जाए। समय-क्षेत्र बदलने और बाकी कुंडली बनाने के लिए तारीख चाहिए। एक घटक को केवल घंटा चाहिए, इसलिए पूरे चार्ट से तारीख हटा देना सही निष्कर्ष नहीं है।
दो सूत्र और चौबीस घंटे की सीमा
U को UTC का दशमलव घंटा तथा λ को पूर्व-धन देशांतर मानें। पहले t = mod24(U + λ/15) निकालें। यहाँ mod24 का अर्थ उत्तर को 0 ≤ t < 24 की सीमा में लाना है। जिस प्रोग्रामिंग भाषा में ऋण संख्या का शेष ऋण रह सकता है, वहाँ ((x % 24) + 24) % 24 जैसा रूप उपयोगी है।
इसके बाद N = 5 × |12 − t| और D = 60 − N विरूप निकालें। N रात्रि-समूह और D दिन-समूह की संख्या है। नाम इस पद्धति के समूह बताते हैं; सूत्र यह परीक्षण नहीं करता कि उस स्थान के क्षितिज से वास्तविक सूर्य अभी ऊपर है या नीचे।
पाँच का गुणक क्यों? माध्य सौर दिन के किसी आधे हिस्से में बारह घंटे, साठ विरूप की पूरी सीमा के बराबर रखे गए हैं। इसलिए एक घंटे पर पाँच विरूप का परिवर्तन है। निरपेक्ष मान मध्याह्न से बराबर पहले और बाद के समय को बराबर अंक देता है। N, D और बुध का स्थिर 60, सभी शून्य से साठ की सीमा में रहते हैं।
एक अंक पढ़ने से पहले पूरा चक्र देखें
| माध्य सौर घंटा | N | D | बुध |
|---|---|---|---|
| 0 | 60 | 0 | 60 |
| 3 | 45 | 15 | 60 |
| 6 | 30 | 30 | 60 |
| 9 | 15 | 45 | 60 |
| 12 | 0 | 60 | 60 |
| 15 | 15 | 45 | 60 |
| 18 | 30 | 30 | 60 |
| 21 | 45 | 15 | 60 |
| 24 | 60 | 0 | 60 |
माध्य मध्यरात्रि पर N=60 और D=0 है। माध्य मध्याह्न पर N=0 और D=60 है। माध्य 06:00 तथा 18:00 पर दोनों 30 हैं। अंतिम 24-घंटे वाली पंक्ति अगले चक्र का 00:00 है; उसे रखने से दिखाई देता है कि आधी रात की सीमा पर अंक लगातार जुड़ते हैं।
यह समय का त्रिकोणीय भार है, साइन वक्र या वास्तविक सूर्योदय से सूर्यास्त तक बराबर अनुपात नहीं। t=09:00 और t=15:00 दोनों पर N=15 आता है, जबकि घड़ी चक्र के अलग आधे भागों से गुजर रही है। दूसरी रिपोर्ट में समय का आधार अलग हो तो पहले वही मिलाएँ, उसके बाद जोड़-घटाव की गलती तलाशें।
हर इनपुट पर N+D=60 होना सुविधाजनक जाँच है। उससे पूरक गणना की जाँच होती है, पर देशांतर का चिह्न, UTC में बदला समय या मूल जन्म-रिकॉर्ड सही होने का प्रमाण नहीं मिलता। दो गलत इनपुट से भी ऐसे अंक निकल सकते हैं जिनका योग बहुत साफ-सुथरे ढंग से साठ हो।
सात उदाहरण और तारीख की दोनों दिशाओं में मोड़
| UTC घंटा | पूर्व-धन देशांतर ° | बिना मोड़ा घंटा | 0–24 में t | N | D |
|---|---|---|---|---|---|
| 6 | 82.5 | 11.5 | 11.5 | 2.5 | 57.5 |
| 6.5 | 82.5 | 12 | 12 | 0 | 60 |
| 18.5 | 82.5 | 24 | 0 | 60 | 0 |
| 23.5 | 30 | 25.5 | 1.5 | 52.5 | 7.5 |
| 1 | -45 | -2 | 22 | 50 | 10 |
| 12 | -75 | 7 | 7 | 25 | 35 |
| 6 | 0 | 6 | 6 | 30 | 30 |
UTC 06:00 और 82.5° पूर्व पर देशांतर 5.5 घंटे जोड़ता है। माध्य सौर समय 11.5 घंटे, यानी 11:30 है। N=5×0.5=2.5 और D=57.5। उसी देशांतर पर UTC को आधा घंटा आगे, 06:30 करने से माध्य मध्याह्न मिलता है।
UTC 23:30 और 30° पूर्व पर बिना मोड़ा उत्तर 25.5 घंटे है। चौबीस घटाने पर अगले माध्य-सौर चक्र का 01:30 मिलता है। अंक t=1.5 से निकलेगा, इसलिए N=52.5 है। यदि माध्य-सौर तारीख भी दिखानी हो तो दिन का आगे जाना अलग सँभालें; मूल UTC या नागरिक रिकॉर्ड को चुपचाप बदल न दें।
UTC 01:00 और 45° पश्चिम पर बिना मोड़ा उत्तर −2 घंटे है, जो पिछले माध्य-सौर चक्र के 22:00 के बराबर है। ऋण शेष को वैसे ही सूत्र में रखने से |12−t| बारह से बड़ा हो सकता है और अंक साठ से ऊपर चला जाएगा। बल निकालने से पहले घंटे को सही सीमा में लाना अनिवार्य है।
मिनट और सेकंड बचाकर सात ग्रहों की पूरी बही
निर्मित इनपुट UTC 09:15:30 और 12.25° पूर्व लें। U=9+15/60+30/3600=9.258333… घंटे है। देशांतर 12.25/15=0.816666… घंटे, यानी 49 मिनट जोड़ता है। इसलिए t=10.075 घंटे अथवा 10:04:30 मिलता है।
माध्य मध्याह्न से अंतर 1.925 घंटे है। N=1.925×5=9.625 विरूप और D=50.375। अपने-अपने समूह के ग्रह इसी साझा संख्या को लेते हैं। चंद्र के लिए अलग नतोन्नत घंटा निकालने में उसका अपना राशिचक्रीय देशांतर इस्तेमाल नहीं हो रहा।
| ग्रह | शाखा | विरूप | रूप |
|---|---|---|---|
| सूर्य | D | 50.375 | 0.839583 |
| चंद्र | N | 9.625 | 0.160417 |
| मंगल | N | 9.625 | 0.160417 |
| बुध | 60 | 60 | 1.000000 |
| गुरु | D | 50.375 | 0.839583 |
| शुक्र | D | 50.375 | 0.839583 |
| शनि | N | 9.625 | 0.160417 |
अंतिम स्तंभ में विरूप को साठ से भाग देकर रूप बनाए गए हैं। सूर्य के 50.375 विरूप इस घटक में लगभग 0.839583 रूप हैं। यह सूर्य का पूरा षड्बल नहीं और न आवश्यक संदर्भ-बल से उसका अनुपात है। इकाई और अनुपात वाला लेख इन अलग क्रियाओं को समझाता है।
समय-क्षेत्र का अंतर दो बार क्यों नहीं जोड़ना चाहिए?
| नागरिक घंटा | माना UTC अंतर | UTC घंटा | देशांतर ° | माध्य सौर घंटा |
|---|---|---|---|---|
| 12 | 5.5 | 6.5 | 82.5 | 12 |
| 7.5 | 1 | 6.5 | 82.5 | 12 |
| 6.5 | 0 | 6.5 | 82.5 | 12 |
| 12 | 5.5 | 6.5 | 75 | 11.5 |
पहली तीन पंक्तियाँ एक ही UTC क्षण और एक ही देशांतर को तीन काल्पनिक नागरिक घड़ियों से लिखती हैं। सभी UTC 06:30 और फिर माध्य सौर मध्याह्न देती हैं। केवल घड़ी का लेबल बदलने से वास्तविक क्षण या स्थानीय माध्य समय का बल नहीं बदल जाता।
यदि जन्म-घड़ी 12:00 और माना हुआ अंतर UTC+05:30 है, तो 5.5 घंटे घटाकर पहले UTC 06:30 निकालें। उसके बाद देशांतर वाला पद जोड़ें। UTC मिलने के बाद समय-क्षेत्र फिर न जोड़ें। इसी तरह मूल नागरिक घंटे को सीधे U बताकर सूत्र में रखना भी गलत है।
चौथी पंक्ति में नागरिक घड़ी और माना समय-अंतर वही हैं, लेकिन देशांतर बदला है। 75° पूर्व पर माध्य सौर समय 11:30 मिलता है। एक नागरिक समय-क्षेत्र कई देशांतरों तक फैला हो सकता है, इसलिए समान घड़ी पढ़ने का अर्थ समान स्थानीय माध्य सौर समय नहीं। गणना में घड़ी के साथ स्थान भी चाहिए।
माध्य, स्पष्ट और नाक्षत्र समय को अलग रखें
Astrogyana का यह घटक UTC की घड़ी में देशांतर/15 जोड़ने की घोषित माध्य-समय पद्धति लेता है। इसमें समय-समीकरण का सुधार नहीं जोड़ा जाता। स्पष्ट सौर समय वास्तविक दिखाई देने वाले सूर्य से जुड़ा है और माध्य सौर समय से अलग हो सकता है। इसलिए t=12 पर अधिकतम अंक आने का अर्थ यह नहीं कि उसी नागरिक मिनट में दिखाई देने वाला सूर्य स्थानीय मध्याह्न रेखा पार करेगा।
अधिक सटीक खगोलीय गणना में UTC और UT1 भी अलग समय-माप हैं। यहाँ UTC आधारित माध्य-घड़ी का वह नियम बताया जा रहा है जो इस प्रोफाइल में लागू है; इसे पृथ्वी के घूर्णन का अति-सूक्ष्म खगोलीय पुनर्निर्माण नहीं कहा गया है। किसी विशिष्ट खगोलीय गणना से तुलना में यह सीमा बनाए रखें।
नाक्षत्र समय एक और अलग राशि है; वह मध्याह्न रेखा को तारों की विषुवतीय निर्देशांक प्रणाली से जोड़ता है। U की जगह नाक्षत्र घंटे रख देने से सूत्र का अर्थ बदल जाएगा। इन नामों के कारण मतभेद हो तो नाक्षत्र समय और जन्म-घड़ी तथा सौर मध्याह्न और घड़ी के बारह बजे साथ पढ़ें।
अक्षांश और वास्तविक दिन का प्रकाश फिर भी कहाँ काम आते हैं?
बताए गए नतोन्नत सूत्र में अक्षांश का पद नहीं है। समान देशांतर और UTC घंटे वाले दो स्थानों को इसलिए समान घटक अंक मिलेंगे, चाहे वहाँ दिन के प्रकाश की वास्तविक स्थितियाँ अलग हों। यह चुने हुए सूत्र का गुण है, जन्म-कुंडली में अक्षांश महत्वहीन होने का प्रमाण नहीं।
काल बल के दूसरे घटकों को सूर्योदय, सूर्यास्त और अगला सूर्योदय चाहिए। आसपास की ये घटनाएँ उपलब्ध न हों तो Astrogyana का पूरा षड्बल परिणाम अनुपलब्ध हो सकता है, भले नतोन्नत की अकेली अंकगणित स्पष्ट हो। एक पंक्ति हाथ से निकाल लेने पर गायब पूरी रिपोर्ट अपने आप पूरी नहीं हो जाती।
06:00 और 18:00 को सार्वभौम सूर्योदय-सूर्यास्त भी न कहें। लंबा गर्मियों का दिन, छोटा सर्दियों का दिन या ध्रुवीय स्थिति इस घटक की सीमा को अपने आप नहीं खींचती। वास्तविक घटना-समय के लिए सही तारीख और स्थान के साथ सूर्योदय-सूर्यास्त उपकरण देखें।
राउंडिंग, छोटे इनपुट अंतर और काम की जाँच
मध्याह्न और मध्यरात्रि के मोड़ से दूर, माध्य समय का एक मिनट N और D को विपरीत दिशाओं में 1/12 विरूप बदलता है। देशांतर का एक अंश चार मिनट के बराबर है, इसलिए वहाँ स्थानीय ढाल एक-तिहाई विरूप प्रति अंश है। किसी मोड़ को पार करते समय उसी चिह्न वाली ढाल आगे न चलाएँ; निरपेक्ष मान का सूत्र फिर लगाएँ।
11:59:30 पर N=1/24 विरूप, यानी लगभग 0.041667 है। समय को पहले 12:00 राउंड कर देंगे तो उत्तर शून्य आएगा। प्रदर्शित अंक बहुत पास लग सकते हैं, फिर भी लेखा-जाँच में पूरे इनपुट बचाकर केवल अंतिम उत्तर राउंड करना बेहतर है। अधिक दशमलव छापने से अनिश्चित मूल जन्म-समय सटीक नहीं बनता।
एक मध्यरात्रि, एक मध्याह्न, एक ऋण घंटे वाला और एक अगले दिन में जाने वाला उदाहरण जाँचें। फिर ग्रह-समूह, खासकर बुध का स्थिर 60, मिलाएँ। अंत में नागरिक रिकॉर्ड, UTC क्षण, देशांतर और पद्धति-संस्करण दूसरी रिपोर्ट से मिलाकर देखें। इससे इनपुट का मतभेद और सूत्र का मतभेद अलग दिखने लगते हैं।
पूरा षड्बल पढ़ते समय इस अंक को कहाँ रखें?
इस संख्या को काल बल के नतोन्नत खाने में रखें, जहाँ दूसरे योगदान अपनी गणना के साथ जुड़ते हैं। इसे एक बार अलग षड्बल श्रेणी बनाकर और फिर काल बल में दोबारा न जोड़ें। पूरा योग घोषित छह-भाग वाले ढाँचे से बनता है; हर विवरण-पंक्ति नया स्वतंत्र कुल नहीं है।
पास का पक्ष बल लेख माध्य सौर घंटे की जगह सूर्य–चंद्र कोण लेता है। समान इकाई और ग्रहों के नाम होने से दोनों सूत्र एक-दूसरे की जगह नहीं रखे जा सकते। हर इनपुट और उप-योग का अपना नाम साथ बनाए रखें।
इस बही का उपयोग कुंडली रिपोर्ट समझने और गणना के बारे में सटीक प्रश्न पूछने में करें। अकेला अधिक या कम योगदान किसी के चरित्र, काम के लिए उपयुक्तता या भविष्य को तय नहीं करता। यहाँ उपयोगी निष्कर्ष इतना है कि घोषित इनपुट से घोषित पद्धति में वह घटक कैसे निकला।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
Astrogyana में नतोन्नत बल कैसे निकलता है?
UTC के दशमलव घंटे में पूर्व-धन भौगोलिक देशांतर/15 जोड़कर t को 0–24 घंटे में लाएँ। N=5×|12−t| और D=60−N विरूप हैं। चंद्र, मंगल, शनि N लेते हैं; सूर्य, गुरु, शुक्र D लेते हैं; बुध 60 लेता है।
क्या स्थानीय जन्म-घड़ी सीधे सूत्र में रख सकते हैं?
केवल तब जब वह पहले से आवश्यक UTC इनपुट हो। अन्यथा नागरिक तारीख, समय और ऐतिहासिक समय-क्षेत्र से UTC निकालें, फिर भौगोलिक देशांतर एक बार लगाएँ। समय-क्षेत्र और देशांतर का सुधार अलग हैं।
क्या इसमें वास्तविक सूर्योदय और सूर्यास्त आते हैं?
Astrogyana का बताया नतोन्नत घटक माध्य सौर घड़ी लेता है, दिन के प्रकाश का अनुपात नहीं। षड्बल के दूसरे घटकों को आसपास की सौर घटनाएँ चाहिए, इसलिए उनके बिना पूरा परिणाम अनुपलब्ध रह सकता है।
बुध को हमेशा साठ विरूप क्यों मिलते हैं?
इस नतोन्नत पद्धति में बुध का स्थिर अधिकतम यही रखा गया है। इससे उसका पूरा षड्बल अधिकतम या दूसरे सभी घटक स्थिर नहीं हो जाते।
क्या माध्य मध्याह्न और स्पष्ट सौर मध्याह्न बराबर हैं?
सामान्यतः नहीं। इस प्रोफाइल की नतोन्नत घड़ी में समय-समीकरण नहीं लगाया गया है। इसका घोषित माध्य-समय आधार UTC है; पृथ्वी-घूर्णन की सूक्ष्म गणना UT1 को अलग रख सकती है।
क्या कम नतोन्नत अंक खराब भविष्य बताते हैं?
अकेले इस उप-योग से ऐसा फल नहीं निकलता। यह घोषित पद्धति का एक पारंपरिक घटक है, संभावना, भौतिक ऊर्जा या व्यक्ति का पूरा आकलन नहीं।