पक्ष बल कैसे निकालते हैं?
चंद्र के देशांतर में से सूर्य का देशांतर घटाएँ, अंतर को एक वृत्त की सीमा में लाएँ और 0° से 180° वाला छोटा कोण चुनें। उसे तीन से भाग देने पर 0 से 60 विरूप के बीच आधार बल B मिलेगा। यहाँ Astrogyana के घोषित स्थिर समूह-प्रोफाइल में चंद्र, बुध, गुरु और शुक्र को B तथा सूर्य, मंगल और शनि को 60 − B दिया जाता है।
पक्ष बल काल बल का चंद्र-कला से जुड़ा घटक है। काल बल स्वयं षड्बल के छह मुख्य समूहों में से एक है। इसलिए यह संख्या पूरा ग्रह-बल नहीं है। सूर्य–चंद्र की एक ही जोड़ी सभी ग्रहों के लिए आधार संख्या देती है; चुना हुआ समूह तय करता है कि किस ग्रह को कौन-सी पूरक शाखा मिलेगी।
यह पारंपरिक ज्योतिष-ढाँचे की गणना है। सही अंक से चुने नियम का सही उपयोग पता चलता है। अकेली संख्या किसी घटना की निश्चितता या व्यक्ति के भाग्य और स्वभाव का अंतिम निर्णय नहीं देती।
दोनों देशांतर समान संदर्भ और समय के हों
सूर्य का देशांतर λS और चंद्र का λM लिखें। दोनों एक ही क्षण तथा समान राशि-संदर्भ के होने चाहिए। केवल राशियों के नाम देखने की जगह पूरे मूल अंक रखें। “सूर्य मीन में और चंद्र मेष में” कहने से उनके बीच का सटीक कोण तय नहीं होता; राशियों के भीतर की स्थिति भी चाहिए।
यहाँ अंतर क्रांतिवृत्त के चारों ओर के देशांतरों का है। यह सामान्यतः आकाश में दोनों पिंडों की पूरी त्रिविमीय दूरी नहीं है, क्योंकि उनके क्रांतिवृत्तीय अक्षांश शामिल नहीं हैं। किसी खगोलीय ऐप के angular separation वाले खाने से तुलना करते समय यह अंतर महत्वपूर्ण है।
Astrogyana की वर्तमान गणना एक ही चार्ट से दोनों निरयण देशांतर लेती है। गणना-पद्धति पृष्ठ बड़े प्रोफाइल का संदर्भ देता है। यह लेख उसी नियम को खोलता है; कोई नया सॉफ्टवेयर विकल्प नहीं जोड़ता और चंद्र का वर्गीकरण चुपचाप नहीं बदलता।
पहले वृत्त में लाएँ, फिर छोटा कोण, फिर समूह
पूरा क्रम इस तरह लिख सकते हैं:
E = normalize(λM − λS), जहाँ 0° ≤ E < 360°
d = min(E, 360° − E)
B = d / 3
पूरक बल = 60 − B
कच्चा अंतर −330° हो तो सामान्यीकृत E = 30° है। +330° हो तो छोटा कोण फिर 30° है। छोटा कोण चुनने से युति से दूरी बचती है, लेकिन चक्र के किस ओर स्थिति है, यह सूचना हट जाती है। शुक्ल और कृष्ण पक्ष अलग पहचानने के लिए E को अलग सुरक्षित रखें।
पूरा 360° अंतर 0° के बराबर है और B = 0 देता है। विपक्ष पर E = 180° और B = 60 है। इस बिना-दोगुना किए घटक में कोई शाखा 60 से ऊपर या शून्य से नीचे नहीं जानी चाहिए। ऐसे परिणाम सामान्यीकरण छूटने या गलत घटाव का संकेत हो सकते हैं।
पूरे चक्र में सममिति देखें
| E: 0–360° देशांतर अंतर | d: छोटा कोण | B = d/3 | 60 − B |
|---|---|---|---|
| 0 | 0 | 0 | 60 |
| 30 | 30 | 10 | 50 |
| 60 | 60 | 20 | 40 |
| 90 | 90 | 30 | 30 |
| 120 | 120 | 40 | 20 |
| 150 | 150 | 50 | 10 |
| 180 | 180 | 60 | 0 |
| 210 | 150 | 50 | 10 |
| 240 | 120 | 40 | 20 |
| 270 | 90 | 30 | 30 |
| 300 | 60 | 20 | 40 |
| 330 | 30 | 10 | 50 |
E = 60° पर B = 20 है और E = 300° पर भी 20 है। दोनों चक्र के अलग हिस्सों में हैं, फिर भी उनका छोटा कोण समान है। इसी तरह 90° और 270° दोनों 30 देते हैं। इसलिए केवल आधार बल देखकर महीने का पक्ष नहीं बताया जा सकता; उसके लिए मूल सामान्यीकृत अंतर चाहिए।
दोनों शाखाओं का योग हमेशा 60 है। यह चुने पैमाने का बीजगणितीय संबंध है, ग्रहों के बीच किसी भौतिक पदार्थ का आदान-प्रदान नहीं। पूरक शाखा इसी तरह परिभाषित है। दो ग्रहों के बाकी षड्बल घटक बहुत अलग हो सकते हैं, भले ही उनके पक्ष-बल अंकों का जोड़ 60 हो।
0° से 180° के बीच B रैखिक रूप से बढ़ता और 180° से 360° के बीच घटता है। युति और विपक्ष के पास सूत्र की रेखा में मोड़ है। इसे वास्तविक चंद्र की चमक या गति में अचानक छलाँग न समझें। यह गणना का टुकड़ों में परिभाषित पैमाना है।
शून्य सीमा सहित चार पूरे उदाहरण
| सूर्य λS | चंद्र λM | E | d | B | 60 − B |
|---|---|---|---|---|---|
| 350 | 20 | 30 | 30 | 10 | 50 |
| 20 | 350 | 330 | 30 | 10 | 50 |
| 275 | 95 | 180 | 180 | 60 | 0 |
| 40 | 40 | 0 | 0 | 0 | 60 |
सूर्य 350° और चंद्र 20° हों तो सीधा घटाव −330° है। एक वृत्त जोड़कर E = 30° लें। तब d = 30°, B = 10 और पूरक बल 50 है। सामान्यीकरण से पहले −330 को तीन से भाग देने पर गलत ऋणात्मक बल आएगा।
दोनों देशांतरों का क्रम उलटने पर E = 330° मिलता है, लेकिन छोटा कोण फिर 30° ही है। केवल B देखने वाला परीक्षण इसलिए उलटे इनपुट को नहीं पकड़ सकता। चक्र की दिशा फिर भी उलट गई है और बिना मोड़े अंतर की जरूरत वाली दूसरी गणना में इसका प्रभाव होगा।
विपक्ष के उदाहरण में सूर्य 275° और चंद्र 95° हैं। कच्चा अंतर −180° सामान्यीकृत होकर 180° है। समान देशांतर वाली युति आधार बल शून्य देती है। ये शिक्षण के लिए बनाए गए गणितीय इनपुट हैं, किसी जन्म या वास्तविक तारीख की चंद्र-कला का दावा नहीं।
सात ग्रहों की पंक्तियों में अंक कैसे लगेंगे?
E = 240° पर छोटा कोण 120° है। इसलिए B = 40 विरूप और 60 − B = 20 विरूप है। नीचे Astrogyana की स्थिर समूह-सदस्यता से पंक्तियाँ भरी गई हैं।
| ग्रह | लागू शाखा | विरूप | रूप |
|---|---|---|---|
| सूर्य | 60 − B | 20 | 0.333333 |
| चंद्र | B | 40 | 0.666667 |
| मंगल | 60 − B | 20 | 0.333333 |
| बुध | B | 40 | 0.666667 |
| गुरु | B | 40 | 0.666667 |
| शुक्र | B | 40 | 0.666667 |
| शनि | 60 − B | 20 | 0.333333 |
सूर्य–चंद्र कोण केवल एक बार निकलता है। हर ग्रह के अपने देशांतर से अलग चंद्र-दूरी नहीं निकाली जा रही। गुरु का पक्ष बल गुरु और चंद्र के कोण से नहीं मिलता; गुरु B वाले समूह में है, इसलिए उसे साझा आधार संख्या 40 दी गई है।
रूप वाला खाना विरूप को 60 से भाग देने पर मिलता है। 40 विरूप लगभग 0.666667 रूप और 20 विरूप लगभग 0.333333 रूप हैं। यह किसी ग्रह के आवश्यक पूर्ण षड्बल के मुकाबले अनुपात नहीं है। इकाई और संदर्भ-अनुपात का लेख इन अलग तुलनाओं को समझाता है।
दूसरा सॉफ्टवेयर चंद्र या बुध को अलग अंक क्यों दे सकता है?
Maitreya का काल बल दस्तावेज़ यही मुड़ा हुआ चरण-पैमाना समझाते हुए चंद्र का वर्ग पक्ष के अनुसार और बुध का संबंध-संयोग के अनुसार बदलने की चर्चा करता है। यहाँ प्रयुक्त Astrogyana प्रोफाइल चंद्र तथा बुध को B समूह में स्थिर रखता है। इस फर्क को केवल “शुभ ग्रह” कहकर छिपाना ठीक नहीं।
E = 240° वाले अभ्यास में कृष्ण-पक्ष के चंद्र को दूसरे वर्ग में रखने की वैकल्पिक पद्धति अपनाएँ तो चंद्र को 40 के बजाय पूरक 20 मिलेगा। कोण वही है; तुलना केवल वर्गीकरण की है। इससे सभी ग्रहों की शाखाएँ उलट देने या E दोबारा निकालने का नियम नहीं बनता।
बुध-संयोग वाले विकल्प में संयोग की परिभाषा भी चाहिए। केवल उसका नाम जानने से अनुमत दूरी या अन्य शर्तें तय नहीं होतीं। रिपोर्टों की तुलना से पहले प्रोफाइल लिखें। इसी तरह किसी स्रोत में चंद्र के अंक दोगुने हों तो पहले देखें कि किस घटक को दोगुना कहा है; गुणक हर पंक्ति पर न लगा दें।
दोनों देशांतरों का समान शून्य बदलने से क्या होगा?
| समान बदलाव | सूर्य | चंद्र | E | B |
|---|---|---|---|---|
| 0 | 350 | 20 | 30 | 10 |
| 40 | 30 | 60 | 30 | 10 |
| -24 | 326 | 356 | 30 | 10 |
दोनों देशांतरों में समान स्थिर संख्या जोड़ने या घटाने से उनका वृत्तीय अंतर नहीं बदलता। इसलिए मिलते सायन देशांतरों में से समान अयनांश घटाने वाली क्रिया इस विशेष सूर्य–चंद्र अंतर को बचाती है। केवल साझा शून्य-बिंदु बदलने से पक्ष बल अपने आप नहीं बदलेगा।
इससे यह निष्कर्ष नहीं निकलता कि पूरे कुंडली-हिसाब में अयनांश अप्रासंगिक है। राशि-स्थान, वर्ग-सीमाएँ और दूसरी गणनाएँ बदल सकती हैं। यहाँ केवल दो देशांतरों के अंतर की एक विशेष अपरिवर्तनशीलता बताई गई है। सप्तवर्गज बल का लेख अलग इनपुट और प्राप्त राशियों पर आधारित घटक दिखाता है।
केवल एक देशांतर का संदर्भ बदलना साझा परिवर्तन नहीं है। सूर्य 350° एक संदर्भ से लें और चंद्र का मान पहले ही 24° घटा हुआ दूसरे संदर्भ से हो, तो जोड़ी मेल नहीं खाएगी। समय भी मिलना चाहिए; अलग क्षणों के मान केवल “निरयण” नाम होने से सही जोड़ी नहीं बन जाते।
यह चंद्र के प्रकाशित भाग का प्रतिशत नहीं है
| E: अंश | B/60 × 100 | (1 − cos E)/2 × 100 |
|---|---|---|
| 30 | 16.6667 | 6.6987 |
| 60 | 33.3333 | 25.0000 |
| 90 | 50.0000 | 50.0000 |
| 120 | 66.6667 | 75.0000 |
| 150 | 83.3333 | 93.3013 |
| 180 | 100.0000 | 100.0000 |
तीसरे खाने में सरल ज्यामितीय अनुमान k = (1 − cos E)/2 है। यहाँ देशांतर-अंतर को चरण-कोण का अनुमान माना गया है और अक्षांश तथा सीमित दूरी के विवरण छोड़े गए हैं। यह अत्यंत सटीक चंद्र-प्रकाशित-अंश गणना नहीं है। इसका उद्देश्य घुमावदार ज्यामितीय फलन और रैखिक बल-पैमाने का अंतर दिखाना है।
60° पर B अपने अधिकतम का एक तिहाई है, जबकि सरल प्रकाश-अंश मॉडल एक चौथाई देता है। 90° पर दोनों आधा देते हैं। किसी विशेष बिंदु पर समान संख्या मिलने से दोनों मात्राएँ हर स्थान पर समान नहीं हो जातीं। सारणी के शीर्षक इसलिए ध्यान से पढ़ें।
वास्तविक दृश्य चमक पर प्रकाश-प्रकीर्णन और देखने की स्थितियाँ भी असर डालती हैं। न सामान्यीकृत बल और न यह सरल अंश बताते हैं कि कैमरे में चंद्र कितना चमकीला दिखेगा। संख्यात्मक ज्योतिषीय अंक को भौतिक रोशनी का माप कहना अलग दावा होगा।
छोटे कोण, राउंडिंग और दो घटकों में उपयोग
मोड़ से दूर संबंधित दूरी में 0.1° परिवर्तन से B में 0.1 ÷ 3, यानी लगभग 0.033333 विरूप का अंतर आता है। एक चापमिनट 1/60 अंश है, इसलिए उसके लिए परिमाण 1/180 विरूप है। वृद्धि होगी या कमी, यह विपक्ष के किस ओर इनपुट है, उससे तय होता है।
ठीक मोड़ के पास दोनों ओर के मान अलग निकालें। E = 179.9° और 180.1° दोनों B ≈ 59.966667 देते हैं। मूल चरण अलग होने पर भी छोटे कोण से प्राप्त बल समान हो सकता है। एक ही चिह्न वाली ढाल को मोड़ के पार लागू करना सही नहीं।
Astrogyana के मौजूदा पूर्ण बल-प्रोफाइल में चंद्र की चेष्टा पंक्ति भी चरण से मिली संख्या लेती है। यह पूर्ण सूत्र में दो अलग नाम वाले घटकों में उपयोग है। पक्ष बल की पंक्ति के भीतर अंक दोगुना करने का कारण नहीं। कुल जोड़ की जाँच करते समय घटकों का क्रम और नाम बचाएँ।
अनुपलब्ध रिपोर्ट और शून्य अंक अलग हैं
इस कोणीय घटक के लिए दो वैध देशांतर पर्याप्त हैं। पूरी षड्बल रिपोर्ट को अन्य घटकों के लिए और संदर्भ चाहिए, जिसमें वर्तमान पद्धति के स्थानीय सूर्य-समय भी शामिल हैं। जरूरी सूर्योदय या सूर्यास्त उपलब्ध न हो तो पूरी रिपोर्ट अनुपलब्ध हो सकती है, भले ही पक्ष बल का यह हिसाब परिभाषित हो।
अनुपलब्ध पूर्ण रिपोर्ट को सभी ग्रहों के शून्य बल में न बदलें। दूसरी ओर युति पर वैध B = 0 इसी सूत्र का सही परिणाम है, गायब सूचना नहीं। एक घटक का शून्य पूरे षड्बल, ग्रह की स्थिति या व्यक्ति के चरित्र का निर्णय नहीं देता।
उच्च बल और दूसरे स्थान-संबंधी घटक अलग गणना-प्रश्न पूछते हैं। पूरा योग पढ़ने से पहले उन्हें उनकी अपनी पंक्तियों में पूरा करना होगा।
जाँच के लिए छोटी वर्कशीट
- समान क्षण, देशांतर-संदर्भ, सूर्य और चंद्र के मूल अंक लिखें।
- सामान्यीकृत E निकालें और छोटे कोण d के साथ सुरक्षित रखें।
- B तथा 60 − B निकालकर दोनों की 0 से 60 वाली सीमा जाँचें।
- चंद्र और बुध का वर्गीकरण तथा कोई घोषित गुणक अलग लिखें।
- सात ग्रहों को अंक दें और विरूप तथा रूप साफ चिह्नित करें।
- कुंडली रिपोर्ट में पहले घटक-पंक्तियाँ मिलाएँ, उसके बाद पूर्ण कुल पर चर्चा करें।
दो देशांतर, दोनों कोणीय अंतर, समूह का नियम और अंतिम पंक्तियाँ साथ रखने से यह घटक दोहराया जा सकता है। इसके लिए संख्या को असमर्थित भविष्यवाणी में बदलना आवश्यक नहीं।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
पक्ष बल का मूल सूत्र क्या है?
चंद्र देशांतर में से सूर्य देशांतर घटाकर 0–360° में लाएँ। 0° से 180° वाला छोटा कोण d लें और तीन से भाग दें। दूसरी शाखा 60 में से इसी संख्या को घटाने पर मिलती है।
इस लेख में कौन-से ग्रह आधार बल लेते हैं?
Astrogyana के स्थिर प्रोफाइल में चंद्र, बुध, गुरु और शुक्र B लेते हैं; सूर्य, मंगल तथा शनि 60 − B। चंद्र और बुध के वैकल्पिक वर्गीकरण अलग बताकर तुलना करने चाहिए।
क्या शुक्ल और कृष्ण पक्ष में आधार अंक समान हो सकता है?
हाँ। 60° और 300° दोनों का छोटा कोण 60° है और B = 20 विरूप मिलता है। पक्ष अलग पहचानने के लिए मूल सामान्यीकृत अंतर सुरक्षित रखें।
क्या पक्ष बल चंद्र के प्रकाशित हिस्से का प्रतिशत है?
नहीं। बल का पैमाना छोटे कोण के साथ रैखिक है। सरल ज्यामितीय प्रकाशित-अंश मॉडल भी कोसाइन संबंध लेता है, इसलिए कुछ विशेष बिंदुओं पर ही अंक मिलते हैं।
क्या दोनों देशांतरों का समान मूल बदलने से पक्ष बल बदलेगा?
दोनों में समान स्थिरांक जोड़ने या घटाने से वृत्तीय अंतर बचता है। अलग संदर्भ या अलग समय के मान मिलाना इससे अलग मामला है और गलत जोड़ी बना सकता है।
शून्य पक्ष बल का अर्थ शून्य षड्बल है?
नहीं। यह काल बल का एक घटक है। वैध शून्य योगदान, अनुपलब्ध रिपोर्ट और पूरे षड्बल का कुल तीन अलग बातें हैं।