चंद्रमा का याम्योत्तर-पारगमन: सबसे ऊँची स्थिति और ठीक सिर के ऊपर होने का अंतर

चंद्र-पारगमन को नौ अक्षांश-स्थितियों, पाँच कोणों की सारणी और अवलोकन-क्रम से समझें। याम्योत्तर पार करना, अधिकतम ऊँचाई और खमध्य अलग पहचानें।

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लेखन और प्रकाशन: Astrogyana

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समय-सारणी में चंद्रमा के पारगमन का क्या अर्थ है?

चंद्रमा का पारगमन सामान्यतः उसके केंद्र का दर्शक की स्थानीय याम्योत्तर रेखा के ऊपरी भाग को पार करना है। यह वृत्त खगोलीय उत्तर-दक्षिण ध्रुवों और दर्शक के ठीक सिर के ऊपर खमध्य से गुजरता है। इस वृत्त को पार करने का अर्थ हर बार सिर के ठीक ऊपर, दक्षिण दिशा में या किसी तय घड़ी-समय पर होना नहीं है।

बहुत-से सामान्य अवलोकन-स्थानों पर ऊपरी पारगमन चंद्रमा के पथ के सबसे ऊँचे हिस्से के आसपास होता है। सटीक काम के लिए याम्योत्तर-पारगमन और अधिकतम ऊँचाई की परिभाषाएँ अलग हैं। उपयोगी सारणी यह स्पष्ट करती है कि वह किस घटना का समय दे रही है।

समय मिलाने से पहले चार घटनाएँ अलग करें

आकाश की चार अलग घटनाएँ
घटनाक्या देखा या गणना किया जाता है?ध्यान देने का बिंदु
चंद्रोदयक्षितिज पर चंद्रबिंब के ऊपरी किनारे का आनापहाड़ी या इमारत के ऊपर पहली झलक बाद में हो सकती है।
ऊपरी याम्योत्तर-पारगमनचंद्र-केंद्र का दर्शक की याम्योत्तर रेखा के निकटतर चाप को पार करनाऊँचाई 90° होना आवश्यक नहीं है।
अधिकतम ऊँचाईकिसी गुजरने के दौरान सबसे बड़ा उन्नतांशसटीक समय पारगमन से थोड़ा अलग हो सकता है।
खमध्य से गुजरनाठीक सिर के ऊपर 90° ऊँचाई पर पहुँचनाहर स्थान और हर तारीख को नहीं होता।

USNO की शब्दावली ऊपरी और निचले पारगमन को भी अलग करती है। ऊपरी चाप खमध्य के अधिक पास वाला है; निचला दूसरा पारगमन है। ऊपरी कहने से क्षितिज के ऊपर दिखने की गारंटी नहीं मिलती। बहुत उत्तरी स्थान पर पर्याप्त दक्षिणी निर्देशांक वाला पिंड अपने ऊपरी पारगमन पर भी नीचे रह सकता है।

पारगमन शब्द बुध के सूर्यबिंब के सामने आने जैसी दूसरी खगोलीय घटना में भी आता है। चंद्रोदय-चंद्रास्त सारणी में चंद्र-पारगमन का वह अर्थ नहीं है। किसी दूसरी घटना का अर्थ लाने से पहले अपनी सारणी का शीर्षक और उसकी परिभाषा देखें।

घोषित मॉडल से याम्योत्तर की ऊँचाई निकालें

हमारे स्वतंत्र ज्यामितीय मॉडल में चंद्रमा को दूर का बिंदु मानें जिसकी क्रांति δ एक घूर्णन के दौरान स्थिर है। दर्शक का अक्षांश φ है, उत्तर धनात्मक है और संदर्भ-क्षितिज गोलाकार पृथ्वी के अनुसार है। लंबन, अपवर्तन, चंद्र त्रिज्या, दर्शक की ऊँचाई और स्थानीय भू-आकृति हटाएँ। ऊपरी ऊँचाई h = 90° − |φ − δ| और निचली ऊँचाई h = |φ + δ| − 90° है।

नौ स्वतंत्र आदर्श स्थितियाँ; ऋणात्मक ऊँचाई का अर्थ क्षितिज के नीचे
अक्षांश φ (°)क्रांति δ (°)ऊपरी ऊँचाई (°)निचली ऊँचाई (°)ऊपरी बिंदु की ओर
0090-90खमध्य
102575-55उत्तर
28-2537-87दक्षिण
28062-62दक्षिण
282587-37दक्षिण
602555-5दक्षिण
7025455दक्षिण
70-25-5-45दक्षिण
-33-2582-32उत्तर

φ = 28° और δ = 25° पर ऊपरी ऊँचाई 87° है: बहुत ऊँची, लेकिन खमध्य से अभी 3° दूर। उसी अक्षांश पर δ = −25° हो तो केवल 37° है। केवल चंद्रकला का नाम यह नहीं बताता कि कौन-सी क्रांति लागू होगी।

70° उत्तर और δ = 25° पर निचली मॉडल-ऊँचाई भी 5° है; इसलिए स्थिर निर्देशांक वाले पूरे चक्र में बिंदु ऊपर रहता है। δ = −25° पर ऊपरी ऊँचाई −5° है, इसलिए मॉडल में उदय नहीं होता। वास्तविक चंद्रमा की क्रांति बदलती है; कोई पंक्ति स्थायी स्थिति नहीं बताती।

क्या चंद्रमा का ऊपरी पारगमन उत्तर की ओर हो सकता है?

हाँ। मॉडल में δ और φ की तुलना करें। δ बड़ा हो तो ऊपरी बिंदु खमध्य के उत्तर में, छोटा हो तो दक्षिण में है। दोनों बराबर हों तो बिंदु खमध्य तक पहुँचता है। ठीक उस स्थिति में क्षैतिज दिगंश की कोई एक दिशा निर्धारित नहीं होती।

φ = 10°, δ = 25° वाली पंक्ति में उत्तरी ओर 75° ऊँचाई है। φ = −33°, δ = −25° में भी ऊपरी पारगमन उत्तर की ओर है और ऊँचाई 82°। इसलिए “उत्तरी गोलार्ध में हमेशा दक्षिण देखें” हर स्थिति का नियम नहीं है।

याम्योत्तर की उत्तर-दक्षिण दिशा चंद्रोदय के दिगंश से भी अलग है। उदय-बिंदु क्षितिज की घटना है; ऊपरी बिंदु पहले या बाद का याम्योत्तर-पारगमन। एक दिशा को पूरे दिखाई देने वाले पथ का नाम न बनाएँ।

पाँच स्थितियों से स्थिर मॉडल का सबसे ऊँचा बिंदु समझें

घंटा-कोण H स्थानीय याम्योत्तर के पूर्व या पश्चिम में बिंदु की स्थिति बताता है। ऊपरी पारगमन पर वह शून्य है। स्थिर φ और δ के लिए संबंध है: sin(h) = sin(φ)sin(δ) + cos(φ)cos(δ)cos(H)।

स्थिर मॉडल: φ = 28°, δ = 10°; कोणों को घड़ी के समय न मानें
घंटा-कोण H (°)ज्यामितीय ऊँचाई h (°)
-6031.08
-3056.57
072.00
3056.57
6031.08

दोनों ओर बराबर ऊँचाई मिलती है, क्योंकि cos(−H) = cos(H)। H = 0° पर कोसाइन वाला पद सबसे बड़ा है और इस स्थिति में ऊँचाई 72° होती है। इससे पारगमन और पथ के ऊँचे हिस्से का संबंध समझ आता है; हर पारगमन को 90° मानना जरूरी नहीं।

सारणी के घंटा-कोण डिग्री में हैं, बीते हुए घड़ी के घंटे नहीं। वास्तविक अवलोकन में पृथ्वी के घूमने के साथ चंद्रमा की अपनी चाल भी उसके निर्देशांक बदलती है। उसे स्थिर तारा मानकर इन पंक्तियों के कोणीय अंतर को सटीक स्थानीय समय-सारणी में नहीं बदल सकते।

अधिकतम ऊँचाई और पारगमन का सटीक समय अलग क्यों हो सकता है?

ऊपर की सममिति स्थिर निर्देशांक पर निर्भर थी। वास्तव में चंद्रमा की क्रांति गुजरते समय बदलती है। इसलिए केंद्र के याम्योत्तर पार करते क्षण भी ऊँचाई में थोड़ा परिवर्तन हो सकता है। JPL Horizons पारगमन और अधिकतम उन्नतांश को अलग घटनाएँ मानता है।

सामान्य तैयारी में ऊपरी पारगमन पथ के ऊँचे हिस्से का उपयोगी संकेत है। सटीक तस्वीर या माप के लिए संबंधित समय-अंतराल में दर्शक-केंद्रित ऊँचाई और दिगंश लें तथा बताएँ कि वायुमंडलीय अपवर्तन शामिल है या नहीं। लंबन का लेख समझाता है कि पृथ्वी-केंद्रित निर्देशांक अपने-आप दर्शक की प्रत्यक्ष दिशा क्यों नहीं होता।

सारणी के नमूनों का अंतर भी महत्वपूर्ण है। Horizons के सामान्य घटना-चिह्न वाले मोड में चिह्न पिछली आउटपुट-अवधि के भीतर हुई घटना बताता है। मान लें काल्पनिक पाँच-मिनट सारणी में 22:15 की पंक्ति पर चिह्न है; उससे अपने-आप घटना का समय ठीक 22:15:00 नहीं निकलता। परिणाम में सेकंड जोड़ने से पहले सेवा के समय-अंतराल संबंधी निर्देश पढ़ें।

चंद्रोदय और चंद्रास्त का औसत केवल अनुमान क्यों है?

USNO निम्न और मध्य अक्षांशों पर पारगमन को उदय-अस्त के लगभग बीच में बताता है। लगभग शब्द आवश्यक है। बदलते चंद्र-निर्देशांक और क्षितिज की घटनाओं की परिभाषाएँ इस मध्यबिंदु को सार्वभौमिक सटीक गणना नहीं बनने देतीं। ऊँचे अक्षांशों पर एक उदय और बाद के अस्त के बीच कई याम्योत्तर-पारगमन हो सकते हैं।

साधारण अंकगणित में भी पूरी तारीख चाहिए। काल्पनिक अभिलेख में उदय एक तारीख को 20:40 और अस्त अगली तारीख को 08:20 मानें। अंतर 11 घंटे 40 मिनट है; मध्यबिंदु दूसरी तारीख का 02:30 है। तारीख आगे बढ़ाए बिना केवल दोनों घड़ी-संख्याओं का औसत 14:30 देगा, जो अलग परिणाम है।

इस उदाहरण का कोई समय वास्तविक चंद्र-पारगमन नहीं निकाला गया है। यह खगोलीय अनुमान से पहले सही तारीख-गणना दिखाता है। आधी रात पार करने वाली सारणियों के लिए तारीख-सीमा का लेख देखें।

चंद्रकला का पारगमन के समय से क्या संबंध है?

कला और पारगमन का मोटा संबंध; किसी तारीख की समय-सारणी नहीं
चंद्रकलासूर्य के पारगमन से संबंध
अमावस्या के आसपाससौर मध्याह्न के आसपास
प्रथम चतुर्थांश के आसपाससौर मध्याह्न से लगभग 6 घंटे बाद
पूर्णिमा के आसपाससौर मध्याह्न से लगभग 12 घंटे पहले या बाद
अंतिम चतुर्थांश के आसपाससौर मध्याह्न से लगभग 6 घंटे पहले

स्थानीय सौर मध्याह्न सूर्य का याम्योत्तर-पारगमन है; जरूरी नहीं कि नागरिक घड़ी पर ठीक 12:00 हो। ये मोटे अंतर समझाते हैं कि पूर्ण चंद्रमा प्रायः रात के मध्य में और प्रथम चतुर्थांश शाम के आसपास ऊँचा क्यों होता है।

ये किसी स्थान और तारीख की गणना का विकल्प नहीं हैं। पूर्णिमा से कोई व्यक्ति सटीक कला-क्षण समझ सकता है, जबकि दूसरा कई रातों तक लगभग गोल दिखते बिंब की बात कर सकता है। चुनी हुई नागरिक तारीख का पारगमन अपने अलग समय वाली घटना है।

वास्तविक पारगमन-परिणाम छह चरणों में पढ़ें

  1. दर्शक के निर्देशांक, तारीख, समय-क्षेत्र और लागू ग्रीष्मकालीन समय-सेटिंग लिखें।
  2. चंद्र-पारगमन स्पष्ट रूप से देने वाली सेवा लें, जैसे USNO की एक-दिन सूर्य-चंद्र सारणी; केवल उदय-अस्त का समय पर्याप्त नहीं।
  3. जाँचें कि घटना ऊपरी याम्योत्तर-पारगमन है और देखें कि दिन के उजाले में होती है या रात में।
  4. कैमरे के दृश्य या किसी खाली दिशा के लिए उस समय के आसपास की ऊँचाई और दिशा भी लें।
  5. केंद्र-आधारित पारगमन को ऊपरी किनारे वाले उदय-अस्त तथा स्थानीय रुकावट से पहली झलक से अलग रखें।
  6. परिणाम की वास्तविक समय-सटीकता बनाए रखें और गणना-सेटिंग को अवलोकन के साथ दर्ज करें।

चंद्रोदय-चंद्रास्त उपकरण स्थानीय क्षितिज-घटनाएँ व्यवस्थित करने में सहायक है। नीचे के बाहरी स्रोत परिभाषाएँ और विशेष पारगमन या स्थिति-गणनाएँ देते हैं। जिस घटना का समय चाहिए, उसे देने वाली सेवा चुनें और उसकी गणना-सेटिंग अपने अवलोकन के साथ रखें।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

क्या चंद्र-पारगमन का अर्थ चंद्रमा ठीक सिर के ऊपर है?

नहीं। केंद्र स्थानीय याम्योत्तर को पार करता है। घोषित आदर्श मॉडल में खमध्य तक पहुँचने के लिए क्रांति दर्शक के अक्षांश के बराबर होनी चाहिए।

क्या ऊपरी पारगमन में चंद्रमा हमेशा दक्षिण में होता है?

नहीं। वह खमध्य के उत्तर या दक्षिण में हो सकता है। मॉडल में क्रांति और अक्षांश की तुलना करें; ठीक खमध्य पर क्षैतिज दिगंश निर्धारित नहीं होता।

क्या पारगमन और अधिकतम ऊँचाई बिल्कुल एक घटना हैं?

स्थिर निर्देशांक वाले मॉडल में वे साथ हैं, लेकिन चलते पिंड के लिए उनकी परिभाषाएँ अलग हैं। सटीक अधिकतम ऊँचाई का समय चाहिए तो उपयुक्त स्थिति-गणना लें।

क्या ऊपरी पारगमन भी क्षितिज के नीचे हो सकता है?

हाँ। ऊपरी का अर्थ खमध्य के निकटतर पारगमन से है। आदर्श उदाहरण में 70° उत्तर और −25° क्रांति पर ऊपरी ऊँचाई भी −5° है।

क्या उदय और अस्त के औसत से पारगमन निकाल सकते हैं?

तारीखों का सही हिसाब रखने पर निम्न-मध्य अक्षांशों में मोटा संकेत मिल सकता है, लेकिन यह सार्वभौमिक सटीक पद्धति नहीं। पारगमन की गणना देने वाली सेवा लें।

क्या पूर्णिमा का चंद्रमा ठीक घड़ी की आधी रात को पार होता है?

नहीं। उसका पारगमन सूर्य के पारगमन से लगभग बारह घंटे दूर होता है। सौर मध्याह्न, नागरिक घड़ी, सटीक कला-क्षण और चुनी स्थानीय तारीख अलग बातें हैं।

स्रोत और संदर्भ

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