चंद्र लंबन क्या है?
देखने का स्थान बदलने पर चंद्रमा की दिखाई दिशा में आने वाला अंतर चंद्र लंबन है। भूकेन्द्रीय स्थिति पृथ्वी के केंद्र से और स्थलकेन्द्रीय स्थिति किसी खास निरीक्षण-स्थान से ली जाती है। चंद्रमा इतना पास है कि दोनों दृष्टि-बिंदुओं का अंतर महत्वपूर्ण है। एक ही क्षण के उसी चंद्रमा के लिए दोनों दिशाएँ सही हो सकती हैं।
संख्याएँ मिलाने से पहले देखें कि हर निरीक्षक कहाँ है। केवल समय समान होने से पृथ्वी-केंद्र की स्थिति और सतह से दिखती स्थिति बराबर नहीं हो जातीं।
दृष्टि-बिंदु का छोटा प्रयोग करें
दूर के दरवाजे की धार के सामने अपनी उँगली रखें। सिर और उँगली स्थिर रखते हुए पहले एक आँख से, फिर दूसरी से देखें। पृष्ठभूमि के सामने उँगली खिसकती दिखाई देती है क्योंकि दृष्टि-रेखा दूसरी जगह से शुरू होती है। उँगली को अधिक दूर करने पर यह अंतर घटता है।
यह देखने की जगह बदलने का उदाहरण है, वस्तु के चलने का नहीं। चंद्रमा की तुलना में दो आँखों की जगह पृथ्वी का केंद्र और निरीक्षण-स्थान आते हैं। आधार-दूरी और लक्ष्य की दूरी बड़ी हैं, पर दृष्टि-रेखा के दोनों सिरे स्पष्ट रखने की आवश्यकता वही है।
दो शहरों की तस्वीरों में ऊँचाई का कच्चा अंतर सीधे लंबन का माप न मानें। उनके स्थानीय क्षितिज अलग दिशाओं में हो सकते हैं। समय, चित्र का घुमाव और कैमरे का पैमाना भी अलग हो सकता है। सावधान तुलना पहले दिशाओं को समान संदर्भ में लाती है।
समकोण त्रिभुज से क्षितिजीय लंबन समझें
R = 6,378 किमी त्रिज्या वाली आदर्श गोल पृथ्वी लें। पृथ्वी के केंद्र से चंद्रमा के केंद्र की दूरी d है। वायुमंडल, स्थान की ऊँचाई, पृथ्वी का चपटा आकार और चंद्रमा का कोणीय अर्धव्यास छोड़ दें। यह ज्यामिति समझाने का मॉडल है, आज रात का चंद्रोदय निकालने की पूरी विधि नहीं।
चंद्र-केंद्र को निरीक्षक के ज्यामितीय क्षितिज पर रखें। निरीक्षक से चंद्रमा की रेखा पृथ्वी की त्रिज्या वाली रेखा पर लंबवत होगी। इस समकोण त्रिभुज में पृथ्वी-केंद्र और निरीक्षक की दृष्टि-रेखाओं के बीच का कोण sin π = R/d देता है, इसलिए π = arcsin(R/d)। यहाँ π क्षितिजीय लंबन का नाम है, 3.14159 वाली संख्या नहीं।
| मॉडल दूरी d: किमी | R/d | क्षितिजीय लंबन: अंश | वही कोण: कोणीय मिनट |
|---|---|---|---|
| 360000 | 0.017716667 | 1.015143 | 60.908600 |
| 384400 | 0.016592092 | 0.950700 | 57.042027 |
| 405000 | 0.015748148 | 0.902340 | 54.140383 |
बीच की पंक्ति लगभग 0.95°, अर्थात 57 कोणीय मिनट देती है। अमेरिकी नौसेना वेधशाला की चंद्रोदय परिभाषा में क्षितिजीय लंबन लगभग 54 से 61 कोणीय मिनट बताया गया है। हमारी चुनी दूरियाँ परिमाण और बदलाव की दिशा दिखाती हैं; वे किसी खास महीने की न्यूनतम, अधिकतम या वर्तमान दूरी नहीं हैं।
R स्थिर रखकर d घटाने पर कोण बढ़ता है। बताई केंद्र-से-केंद्र दूरी की जगह सतह-से-चंद्रमा दूरी रख देने पर त्रिभुज बदल जाएगा और यही सूत्र लागू नहीं रहेगा।
शिरोबिंदु की ओर अंतर छोटा होता है
क्षितिजीय लंबन क्षितिज वाले विशेष मामले का नाम है। यह हर ऊँचाई से घटाने वाला स्थिर कोण नहीं है। उसी गोलाकार मॉडल में hₜ निरीक्षण-स्थान से चंद्र-केंद्र की ज्यामितीय ऊँचाई और p उस ऊँचाई पर वास्तविक लंबन है। तब sin p = (R/d) cos hₜ होता है।
तुलना के लिए पृथ्वी-केंद्र से ऐसा तल लें जो उस स्थान के क्षितिज के समानांतर हो। उससे भूकेन्द्रीय दिशा की ऊँचाई hɢ कहें। इस मॉडल में hɢ = hₜ + p है। सतह से ज्यामितीय दिशा, संबंधित भूकेन्द्रीय दिशा से नीचे रहती है; शिरोबिंदु पर दोनों रेखाएँ मिल जाती हैं।
| स्थल से ज्यामितीय ऊँचाई hₜ | लंबन p | समानांतर तल से भूकेन्द्रीय ऊँचाई hɢ |
|---|---|---|
| 0.000000 | 0.950700 | 0.950700 |
| 30.000000 | 0.823321 | 30.823321 |
| 60.000000 | 0.475334 | 60.475334 |
| 90.000000 | 0.000000 | 90.000000 |
पहली पंक्ति दोनों ऊँचाइयों को शून्य नहीं मानती। चंद्र-केंद्र स्थानीय क्षितिज पर है, जबकि केंद्र वाली दृष्टि-रेखा समानांतर तल से क्षितिजीय लंबन जितनी ऊपर है। दोनों तलों को अलग रखने से चित्र की एक सामान्य गलती बचती है।
लंबन, अपवर्तन और चंद्रमा का किनारा अलग प्रश्न हैं
लंबन दृष्टि-रेखा का आरंभ बदलता है। वायुमंडलीय अपवर्तन प्रकाश का रास्ता बदलता है। कोणीय अर्धव्यास चंद्रमा के केंद्र और ऊपरी किनारे का अंतर बताता है। उदय-अस्त की गणना में ये अलग घटक हैं।
USNO की मानक उदय-अस्त परिभाषा ऊपरी किनारे और एक अपवर्तन-मान का उपयोग करती है। भूकेन्द्रीय निर्देशांक से काम करते समय लंबन भी शामिल होता है। इसलिए हमारे मॉडल की तरह केंद्र को वायुमंडल रहित ज्यामितीय क्षितिज पर रखना पूरी निरीक्षण-घटना के बराबर नहीं है।
नासा JPL का Horizons विवरण भी वायुमंडल रहित और अपवर्तित ऊँचाई अलग करता है। स्थलकेन्द्रीय ऊँचाई के लिए सतह का स्थान चाहिए। पंचांग के मान को दूरबीन या तस्वीर से मिलाने से पहले ये सेटिंग पढ़ें।
दो चंद्र-स्थितियाँ मिलाने की व्यावहारिक विधि
- समय-क्षेत्र और तारीख सहित क्षण मिलाएँ।
- आरंभ-बिंदु पहचानें: पृथ्वी का केंद्र या अक्षांश, देशांतर और ऊँचाई वाला निरीक्षण-स्थान।
- निर्देशांक और संदर्भ मिलाएँ। क्रांतिवृत्तीय देशांतर तथा स्थानीय ऊँचाई एक ही चीज नहीं हैं।
- देखें कि अपवर्तन शामिल है या नहीं और संख्या केंद्र की है या किनारे की।
- इन परंपराओं के मेल के बाद बिना गोल किए मानों की तुलना करें।
Skyfield का स्थिति-विवरण निरीक्षक का आरंभ-बिंदु स्पष्ट रखता है और स्थानीय क्षितिज के लिए भौगोलिक स्थान माँगता है। रिपोर्ट किसी दूसरे सॉफ्टवेयर से बनी हो तब भी पढ़ने का यह तरीका उपयोगी है।
भूकेन्द्रीय चंद्रकला या तिथि की गणना और स्थानीय क्षितिज की घटना अलग परंपराएँ अपना सकती हैं। किसी कला का समय अपने समय-क्षेत्र में दिखाने से उसका निर्देशांक अपने-आप स्थलकेन्द्रीय नहीं हो जाता।
एक कोण का अर्थ चंद्रोदय के तय मिनट क्यों नहीं है?
लगभग एक अंश के लंबन को हर जगह लागू होने वाला चंद्रोदय का समय-संशोधन न मानें। चंद्रमा आपके क्षितिज को किस गति से पार करता है, यह ज्यामिति और उसकी चाल पर निर्भर है। तय कोण का अंतर हर स्थान और तारीख पर एक जैसा समय-अंतर नहीं देता।
समय के प्रश्न के लिए स्थानीय चंद्रोदय और चंद्रास्त देखें। ऊपर का मॉडल समझाता है कि गणना में निरीक्षक का स्थान क्यों आता है। उसका गोलाकार पृथ्वी-रूप और चुनी दूरियाँ शिक्षण इनपुट हैं, वास्तविक पंचांग का विकल्प नहीं।
अंत में लंबन और लिब्रेशन का अंतर रखें। बदली दृष्टि-रेखा और चंद्र-सतह का बदला दृश्य ज्यामिति से जुड़े हैं, पर दोनों शब्द पूरी तरह एक ही प्रभाव के नाम नहीं हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
भूकेन्द्रीय का अर्थ क्या है?
स्थिति का संदर्भ पृथ्वी का केंद्र है। स्थलकेन्द्रीय में किसी खास निरीक्षण-स्थान को संदर्भ बनाया जाता है।
क्या चंद्र लंबन हमेशा लगभग एक अंश होता है?
नहीं। क्षितिज वाला मान लगभग इतना होता है, लेकिन वास्तविक अंतर दूरी और ऊँचाई पर निर्भर है। आदर्श गोलाकार मॉडल में शिरोबिंदु पर वह शून्य हो जाता है।
क्या लंबन से चंद्रमा सचमुच चलता है?
नहीं। यह देखने की जगह बदलने से दिशा का अंतर बताता है। एक ही क्षण में उसी वस्तु के लिए अलग दृष्टि-रेखाएँ हो सकती हैं।
क्या लंबन वायुमंडलीय अपवर्तन है?
नहीं। लंबन निरीक्षक की जगह और अपवर्तन वायुमंडल में प्रकाश के रास्ते से जुड़ा है। उदय-अस्त में दोनों का हिसाब लिया जा सकता है।
क्या हर ऊँचाई से क्षितिजीय लंबन घटा सकते हैं?
नहीं। वह क्षितिज की ज्यामिति का मान है। दूसरी ऊँचाइयों पर वास्तविक संशोधन बदलता है, जैसा तालिका दिखाती है।
क्या तालिका आज की चंद्र-स्थिति देती है?
नहीं। इसमें आदर्श गोला और चुनी दूरियाँ हैं; तारीख या वास्तविक निरीक्षण-स्थान नहीं। तारीखवार स्थिति के लिए उपयुक्त पंचांग-गणना लें।