परिमाण से तारे की दूरी कैसे मिलती है?
एक ही प्रकाशीय बैंड में दृश्य परिमाण m, निरपेक्ष परिमाण M और अवशोषण A दिए हों तो अवशोषण-सुधारित दूरी-मापांक μ₀=m−M−A है। दूरी पारसेक में d=10^((μ₀+5)/5) होती है। उदाहरण के लिए m=12.4, M=3.4 और A=0.6 पर μ₀=8.4 तथा दूरी लगभग 478.63 pc मिलती है।
केवल दिख रही चमक से यह उत्तर नहीं निकाला जा सकता। तारे के निरपेक्ष परिमाण का स्वतंत्र आधार और बीच के पदार्थ से प्रकाश कम होने का अनुमान भी चाहिए। तारा दूर होने से मंद दिख सकता है, स्वयं कम प्रकाश देने से मंद हो सकता है, या रास्ते की धूल से उसका प्रकाश घट सकता है। सूत्र इन कारणों का संबंध बताता है; वह अपने आप उनकी अलग-अलग माप नहीं करता।
इस लेख के संख्यात्मक तारे अभ्यास के लिए बनाए गए हैं। अधिक दशमलव गणना दोहराने में मदद करते हैं। असली प्रेक्षण की दूरी कितनी सटीक लिखी जाए, यह इनपुट की अनिश्चितता तय करेगी।
बैंड, परिमाण-प्रणाली और इकाई साथ रखें
निरपेक्ष परिमाण उस परिमाण को कहते हैं जो स्रोत 10 पारसेक पर, बीच के अवरोध के बिना, दिखाता। दृश्य परिमाण हम तक पहुँची चमक बताता है। बड़ी परिमाण-संख्या कम चमक का संकेत है; इसलिए सकारात्मक अवशोषण m को बढ़ाता है। कई बैंड हों तो mX, MX और AX लिखकर एक ही X बैंड का संबंध स्पष्ट रखें।
दृश्य और निरपेक्ष परिमाण की अंशांकन-प्रणाली भी एक होनी चाहिए। AB प्रणाली का मान और Vega आधारित मान बिना उचित परिवर्तन के सीधे साथ न रखें। पूरे स्पेक्ट्रम की ऊर्जा दर्शाने वाला बोलोमेट्रिक परिमाण किसी एक फ़िल्टर में मापे गए परिमाण का स्वतः विकल्प नहीं है।
यदि m−M में अवशोषण बचा है, तो वह दृश्य दूरी-मापांक है। m−M−A को अवशोषण-सुधारित या वास्तविक दूरी-मापांक कहते हैं। नोटबुक में दोनों का नाम अलग रखें। दो स्तंभों पर केवल दूरी-मापांक लिखने से कभी सुधार दो बार लग जाता है और कभी दोनों में ही छूट जाता है।
फ्लक्स से सूत्र निकालें
F₁₀ उस फ्लक्स को मानें जो यही स्रोत 10 pc पर बिना अवशोषण देता। स्थानीय व्युत्क्रम-वर्ग मॉडल में F/F₁₀=(10 pc/d)²×10^(−0.4A) होगा। परिमाण की परिभाषा m−M=−2.5 log₁₀(F/F₁₀) लगाने पर दूरी वाला भाग 5 log₁₀(d/10 pc) बनता है और प्रकाश-क्षय वाला भाग +A।
इसलिए m−M=5 log₁₀(d/10 pc)+A है। पहले A घटाएँ, फिर पाँच से भाग दें, आधार दस की घात लें और 10 pc से गुणा करें। ऊपर दिया पारसेक वाला संख्यात्मक सूत्र इसी से मिलता है। लघुगणक के भीतर अनुपात इकाई-रहित है; केवल दूरी का log कहने में चुनी हुई इकाई की शर्त छिपी होती है।
यदि दूरी की संख्या किलोपारसेक में लिख रहे हों, तो μ₀=5 log₁₀(d/kpc)+10 होगा। किलोपारसेक की संख्या डालकर पारसेक वाला −5 स्थिरांक बनाए रखने से इकाई में हजार गुने का अंतर आता है। इनपुट के साथ इकाई लिखना इस भूल से बचाता है।
दूरी की सीढ़ी से चिह्न और पैमाना जाँचें
| दूरी (pc) | μ₀ (mag) |
|---|---|
| 1 | -5.000000 |
| 2 | -3.494850 |
| 5 | -1.505150 |
| 10 | 0.000000 |
| 20 | 1.505150 |
| 50 | 3.494850 |
| 100 | 5.000000 |
| 1000 | 10.000000 |
| 10000 | 15.000000 |
10 pc पर μ₀ शून्य है और 100 pc पर पाँच। दूरी दस गुनी करने पर मापांक पाँच मैग्नीट्यूड बढ़ता है। दूरी दुगनी होने पर लगभग 1.50515 मैग्नीट्यूड जुड़ते हैं। ये दो संबंध किसी नई गणना की त्वरित जाँच देते हैं।
शून्य से कम मापांक भी सही हो सकता है: अवशोषण-सुधारित ऋणात्मक μ₀ का अर्थ 10 pc से कम सकारात्मक दूरी है। सीमित वास्तविक घात के लिए दूरी ऋणात्मक नहीं निकलती। इसी प्रकार ऋणात्मक निरपेक्ष परिमाण उस बैंड में अधिक प्रकाशवान स्रोत बता सकता है; वह अपने आप त्रुटि-संकेत नहीं है।
अवशोषण घटाने का पूरा उदाहरण
| m | M | A | μ₀ = m − M − A | दूरी (pc) |
|---|---|---|---|---|
| 10 | 5 | 0 | 5.000 | 100.000000 |
| 12.4 | 3.4 | 0.6 | 8.400 | 478.630092 |
| 8 | -2 | 1 | 9.000 | 630.957344 |
| 6 | 7 | 0.1 | -1.100 | 6.025596 |
| 15 | 5 | 0 | 10.000 | 1000.000000 |
दूसरी पंक्ति में पहले दृश्य मापांक 12.4−3.4=9.0 निकालें। फिर 0.6 घटाने पर वास्तविक मापांक 8.4 है। घात (8.4+5)/5=2.68 होगी और 10^2.68=478.630092 pc। मध्यवर्ती मान लिखने से स्पष्ट रहता है कि सुधार किस दिशा में लगाया गया।
A छोड़ देने पर घात 2.8 और दूरी 630.957344 pc हो जाती है। अब दिखाई दे रही सारी मंदता दूरी पर डाल दी गई है। गलत उत्तर सही दूरी का 1.318256739 गुना है, अर्थात लगभग 31.83 प्रतिशत अधिक। अवशोषण-सुधार करने से इस उदाहरण की दूरी घटती है।
मिली दूरी को आगे के सूत्र M+5 log₁₀(d/10 pc)+A में रखकर जाँचें कि m वापस आता है या नहीं। इससे गलत जगह रखा +5, आधार दस की जगह लिया प्राकृतिक log और उलटा सुधार-चिह्न पकड़ में आते हैं। यह जाँच अकेले साबित नहीं करती कि चुने हुए M और A असली तारे के लिए उचित हैं।
अवशोषण छूटने की दूरी-त्रुटि देखें
| A (mag) | बचा फ्लक्स-अंश | गलत / सही दूरी | अधिक अनुमान (%) |
|---|---|---|---|
| 0 | 1.000000 | 1.000000 | 0.000000 |
| 0.2 | 0.831764 | 1.096478 | 9.647820 |
| 0.5 | 0.630957 | 1.258925 | 25.892541 |
| 0.6 | 0.575440 | 1.318257 | 31.825674 |
| 1 | 0.398107 | 1.584893 | 58.489319 |
| 2 | 0.158489 | 2.511886 | 151.188643 |
| 3 | 0.063096 | 3.981072 | 298.107171 |
एक ही देखे गए m और माने गए M पर, बिना सुधार की दूरी तथा सही दूरी का अनुपात 10^(A/5) है। A=1 पर बचा फ्लक्स लगभग 0.398107 है, जबकि दूरी का गुणक लगभग 1.584893। आधे से कम प्रकाश बचने पर भी दूरी उस अंश की सीधी उलटी संख्या नहीं बनती, क्योंकि व्युत्क्रम-वर्ग संबंध में वर्गमूल आता है।
चित्र में बाकी शर्तें स्थिर रखकर छोड़े गए सुधार को बदला गया है। यह नहीं कहता कि किसी निश्चित दूरी के हर तारे के सामने बराबर धूल होगी। अलग दिशाओं और अलग स्रोत-दूरियों में बीच का पदार्थ बदल सकता है। इस वक्र में धूल का त्रिविमीय नक्शा शामिल नहीं है।
लालिमा और कुल अवशोषण में अंतर
B और V बैंड के लिए रंग-अधिकता E(B−V)=AB−AV है। यह दो बैंडों के अवशोषण का अंतर बताती है, V में हुई पूरी मंदता नहीं। RV=AV/E(B−V) चुने हुए अवशोषण नियम का अनुपात है। इसलिए किसी सूची का E(B−V) मान सीधे दूरी-सूत्र में AV की जगह न डालें।
Gaia का तकनीकी विवरण तरंगदैर्ध्य पर निर्भर अवशोषण और बैंड-परिवर्तन समझाता है। एक फ़िल्टर का सुधार दूसरे फ़िल्टर के लिए स्वतः सही नहीं होता। अपने A के साथ उसका स्रोत, बैंड, मॉडल की मान्यताएँ और अनिश्चितता लिखें।
कभी अवशोषण का अनुमान स्वयं दूरी पर निर्भर होता है। तब दोनों अज्ञात जुड़े हैं और संयुक्त फिट या स्पष्ट पुनरावृत्त प्रक्रिया चाहिए। केवल पसंद की दूरी पाने के लिए A चुनना चक्रीय तर्क है। उसके बाद घात की गणना सही होने से आरंभिक धारणा स्वतंत्र प्रमाण नहीं बनती।
परिमाण की जोड़-त्रुटि दूरी का गुणक बनती है
| Δμ (mag) | d(new) / d(old) |
|---|---|
| -0.5 | 0.794328 |
| -0.2 | 0.912011 |
| -0.1 | 0.954993 |
| 0 | 1.000000 |
| 0.1 | 1.047129 |
| 0.2 | 1.096478 |
| 0.5 | 1.258925 |
μ में Δμ जुड़ने पर दूरी 10^(Δμ/5) से गुणित होती है। बराबर सकारात्मक और नकारात्मक बदलाव दूरी में बराबर जोड़-घटाव नहीं देते; उनके गुणक एक-दूसरे के व्युत्क्रम होते हैं। +0.5 mag से दूरी लगभग 25.89 प्रतिशत बढ़ती है, जबकि −0.5 mag से लगभग 20.57 प्रतिशत घटती है।
त्रुटि किस इनपुट में है, इससे दिशा बदलती है। बाकी मान स्थिर हों तो m बढ़ाने से दूरी बढ़ेगी। M बढ़ाने का अर्थ कम आंतरिक प्रकाश वाला स्रोत मानना है, इसलिए दूरी घटेगी। A बढ़ाने पर मंदता का अधिक भाग बीच के पदार्थ को सौंपा जाएगा और दूरी भी घटेगी।
एक साझा अंशांकन-त्रुटि बहुत से प्रेक्षणों पर साथ असर डाल सकती है। अधिक प्रेक्षणों का औसत लेने से वह आवश्यक रूप से समाप्त नहीं होती। पहले पहचानें कि अनिश्चितता किसी एक फ्लक्स माप की है, निरपेक्ष परिमाण के अंशांकन की है, अवशोषण मॉडल की है या सबमें साझा शून्य-बिंदु की।
अनिश्चितता का स्पष्ट लेखा बनाएँ
इनपुट त्रुटियाँ स्वतंत्र हों तो σμ²=σm²+σM²+σA²। उदाहरण में σm=0.03 mag, σM=0.15 mag और σA=0.05 mag रखें। कुल प्रसरण 0.0259 mag² और σμ लगभग 0.160934769 mag होगा। इस लेखे में सबसे बड़ा योगदान निरपेक्ष परिमाण की अनिश्चितता का है।
रैखिक त्रुटि-प्रसार से σd/d≈(ln 10/5)σμ मिलता है। यहाँ अनुपात 0.0741132, अर्थात लगभग 7.41 प्रतिशत है। 478.63 pc वाले उदाहरण में μ₀−σμ तथा μ₀+σμ को ठीक घातीय सूत्र में रखने पर लगभग 444.44 और 515.45 pc मिलते हैं। मध्य दूरी से दोनों अंतर बराबर नहीं हैं।
जब तक सांख्यिकीय मॉडल भरोसे का स्तर स्थापित न करे, इन मानों को संवेदनशीलता की सीमाएँ समझें। सहसंबंध हो तो सहप्रसरण भी जोड़ें: Var(μ)=Var(m)+Var(M)+Var(A)−2Cov(m,M)−2Cov(m,A)+2Cov(M,A)। एक ही फिट से मिले M और A स्वतंत्र न हों, तो केवल वर्गों को जोड़ने वाली छोटी विधि पर्याप्त नहीं होगी।
रिपोर्ट में लगभग 479 pc लिखकर साथ में अपनाए गए परिमाण, अवशोषण और अनिश्चितता की मान्यताएँ देना उपयोगी है। बिना संदर्भ 478.630092 pc लिखना ऐसी सटीकता का संकेत दे सकता है जो मूल प्रेक्षणों से कभी स्थापित ही नहीं हुई।
उपयुक्त लंबन माप से अलग जाँच
| p (mas) | दूरी (pc) | M = m − A − 10 + 5 log₁₀(p) |
|---|---|---|
| 100 | 10 | 9.800000 |
| 50 | 20 | 8.294850 |
| 10 | 100 | 4.800000 |
| 2 | 500 | 1.305150 |
| 1 | 1000 | -0.200000 |
मिलीआर्कसेकंड में सकारात्मक लंबन p के लिए सरल ज्यामितीय संबंध d=1000/p pc है। इसे परिमाण के सूत्र में रखने पर M=m−A−10+5 log₁₀(p) मिलता है, जहाँ p की संख्या mas में है। तालिका में m=10 और A=0.2 स्थिर हैं ताकि लंबन बदलने का संबंध साफ दिखे।
सटीक सकारात्मक लंबन के लिए उसका अंशांकन ध्यान में रखते हुए सीधा व्युत्क्रम उपयोगी तुलना है। शून्य, ऋणात्मक या बहुत अनिश्चित मापा गया लंबन असंभव भौतिक दूरी निकालने की अनुमति नहीं देता। लंबन और दूरी की अनिश्चितता वाला लेख बताता है कि कब सांख्यिकीय अनुमान चाहिए।
प्रकाशीय दूरी और लंबन से मिली दूरी का असहमत होना जाँच का अवसर है। तुरंत किसी सूत्र को गलत मानने के बजाय अवशोषण, निरपेक्ष परिमाण के आधार, बदलती चमक, मिले-जुले प्रकाश और प्रेक्षण की त्रुटियों की समीक्षा करें। केवल दोनों उत्तर मिलाने के लिए कोई इनपुट बदलना स्वतंत्र जाँच का उद्देश्य नष्ट कर देता है।
अलग न दिखने वाला साथी तारा दूरी बदल सकता है
मानें दो एक जैसे तारे दूरबीन में अलग नहीं दिखते और हर एक का निरपेक्ष परिमाण वही है जो आपने अकेले तारे के लिए लिया। संयुक्त फ्लक्स दुगना होगा। इसलिए संयुक्त परिमाण 2.5 log₁₀(2)≈0.752574989 mag कम, अर्थात अधिक चमकीला होगा। उसे अकेले तारे का प्रकाश मान लेने पर दूरी सही मान की 1/√2≈0.707107 गुनी निकलेगी।
इन समान घटकों वाली स्पष्ट मान्यताओं में दूरी लगभग 29.29 प्रतिशत कम आँकी जाती है। यह अवशोषण छोड़ने से अलग प्रभाव है, क्योंकि वह दूरी को अधिक दिखाता है। दोनों घटक बराबर न हों तो पहले उनके फ्लक्स जोड़ें और उसके बाद संयुक्त परिमाण निकालें। परिमाणों का साधारण औसत सही तरीका नहीं है।
संयुक्त चमक और फ्लक्स वाला लेख यह जोड़ समझाता है। गणना से पहले तय करें कि अपनाया गया M एक घटक का है या पूरे देखे गए तंत्र का। दृश्य और निरपेक्ष परिमाण एक ही वस्तु या तंत्र को दर्शाएँ, तभी दूरी-संबंध का उपयोग संगत होगा।
दोहराई जा सकने वाली गणना का रिकॉर्ड
- स्रोत या अनसुलझे तंत्र और माप का बैंड पहचानें।
- m, M का स्वतंत्र आधार और दोनों की परिमाण-प्रणाली लिखें।
- उसी बैंड का A, उसका स्रोत और अनिश्चितता रखें।
- दृश्य तथा सुधारे गए मापांक अलग स्तंभों में रखें।
- पारसेक में दूरी निकालकर आगे वाले सूत्र में जाँचें।
- त्रुटि-प्रसार, सहसंबंध और उचित पूर्णांकन करें।
- उपलब्ध स्वतंत्र प्रमाण से तुलना करें।
यह स्थानीय तारकीय दूरी की व्याख्या है। बहुत दूर की आकाशगंगाओं में प्रेक्षित और स्रोत-विश्राम बैंडों का संबंध तथा ब्रह्मांडीय प्रभाव अतिरिक्त विचार माँगते हैं। इसी तरह प्रकाशिता और त्रिज्या का लेख कुल उत्सर्जन समझाता है; उसे किसी एक फ़िल्टर के परिमाण से जोड़ने के लिए स्पेक्ट्रम की और जानकारी चाहिए।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
अवशोषण सहित दूरी-मापांक का सूत्र क्या है?
एक ही बैंड और परिमाण-प्रणाली में μ₀=m−M−A है। पारसेक में दूरी 10^((μ₀+5)/5) होगी। पहले अवशोषण घटाएँ और उसके बाद मापांक को दूरी में बदलें।
अवशोषण छोड़ने से दूरी पर क्या प्रभाव पड़ता है?
निरपेक्ष परिमाण का माना हुआ मान स्थिर हो तो दूरी 10^(A/5) गुनी अधिक निकलती है। 0.6 mag छोड़ने पर लगभग 1.3183 गुना, यानी 31.83 प्रतिशत अधिक अनुमान मिलता है।
क्या दूरी-मापांक ऋणात्मक हो सकता है?
हाँ। शून्य से कम अवशोषण-सुधारित मापांक 10 pc से कम सकारात्मक दूरी बताता है। ऋणात्मक परिमाण या मापांक का अर्थ ऋणात्मक भौतिक दूरी नहीं है।
क्या केवल दृश्य परिमाण से दूरी मिल जाएगी?
नहीं। निरपेक्ष परिमाण का उचित आधार और अवशोषण का अनुमान भी चाहिए। अलग आंतरिक प्रकाश तथा अलग अवशोषण वाले स्रोत अलग दूरियों से एक जैसी चमक दे सकते हैं।
क्या E(B−V) ही दूरी-सूत्र में घटाना चाहिए?
सीधे नहीं। E(B−V) दो बैंडों के अवशोषण का अंतर है। दूरी के लिए माप वाले बैंड का कुल अवशोषण चाहिए, जिसे बताई गई अवशोषण-पद्धति से प्राप्त करें।
बराबर चमक वाले अनसुलझे युग्म से कितनी भूल हो सकती है?
संयुक्त प्रकाश को एक घटक का प्रकाश मानकर उसी घटक का निरपेक्ष परिमाण लेने पर दूरी सही दूरी की 1/√2 गुनी होगी। इन मान्यताओं में यह लगभग 29.29 प्रतिशत कम है।