दिन और होरा बल: सूर्योदय का वार, असमान घंटे और पूरा गणना-लेखा

दिन और होरा बल की 45 और 60 विरूप गणना समझें। पूरे 24 होरा उदाहरण, सटीक सीमाएँ, समय-क्षेत्र और सात ग्रहों के लेखे से पद्धति जाँचें।

ज्योतिष और हिंदू परंपरालेख · 14 मिनटRead in English ↗

लेखन और प्रकाशन: Astrogyana

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दिन बल और होरा बल कैसे निकलते हैं?

Astrogyana की parashari-motion-shadbala-2026.2 पद्धति में सूर्योदय से शुरू होने वाले वार का स्वामी 45 विरूप दिन बल पाता है। जन्म के समय चल रही होरा का स्वामी 60 विरूप होरा बल पाता है। सूर्योदय से सूर्यास्त और सूर्यास्त से अगले सूर्योदय की अवधियाँ अलग-अलग बारह भागों में बँटती हैं। इसलिए होरा हमेशा साठ मिनट की नहीं होती।

दोनों स्वामी एक ग्रह हों तो उसी को इन दो मदों से 105 विरूप मिलेंगे। अलग हों तो 45 और 60 अलग ग्रहों के खाते में जाएँगे। यह काल बल के केवल दो अंश हैं; इन्हें पूरा षड्बल या सफलता का प्रतिशत न समझें। यहाँ बताई गई संख्याएँ नामित गणना-पद्धति का वर्णन हैं। उनके आधार पर फलित विचार ज्योतिष की व्याख्यात्मक परंपरा का विषय है।

नीचे की समय-सारिणी जानबूझकर बनाई गई है। वह किसी शहर के वास्तविक सूर्योदय का दावा नहीं करती। तारीख केवल सोमवार की पहचान और अगले वार का क्रम जाँचने के लिए चुनी गई है। वास्तविक कुंडली के लिए उस स्थान और दिन की वास्तविक सौर घटनाएँ चाहिए।

पहले वह सूर्योदय चुनें जिससे दिन शुरू हुआ

जन्म-क्षण t के लिए सूर्योदय R, उसके बाद सूर्यास्त S और अगला सूर्योदय R₂ खोजें। शर्तें हैं R ≤ t < R₂ तथा R < S < R₂। यह गणना पहले सूर्योदय को शामिल करती है और अगले सूर्योदय को पुराने दिन में शामिल नहीं करती। R की स्थानीय तारीख का वार दिन-स्वामी तय करता है।

सूर्योदय की स्थानीय तारीख से दिन का स्वामी
वारस्वामीदिन बल
रविवारसूर्य45
सोमवारचंद्र45
मंगलवारमंगल45
बुधवारबुध45
गुरुवारगुरु45
शुक्रवारशुक्र45
शनिवारशनि45

नागरिक कैलेंडर में मंगलवार सुबह 02:00 पर हुआ जन्म इस नियम में सोमवार के सूर्योदय वाले दिन का भाग हो सकता है। घड़ी की तारीख और दिन बल का सौर दिन अलग प्रश्नों के उत्तर हैं। एक को दूसरे की जगह चुपचाप रख देने से स्वामी बदल जाएगा। वास्तविक मंगलवार के सूर्योदय पर नया चक्र शुरू होगा और मंगल दिन-स्वामी बनेगा।

Astrogyana का कुंडली निर्माण भाग सूर्योदय-सूर्यास्त के क्षणों को जन्म-स्थान के समय-क्षेत्र में बदलता है। उसी स्थानीय संदर्भ से दिन चुना जाता है। सूर्योदय को केवल UTC में लिखकर उसका वार पढ़ने पर कभी पिछली तारीख मिल सकती है। इसलिए क्षण और स्थानीय कैलेंडर, दोनों जानकारी सुरक्षित रखना आवश्यक है।

होरा-स्वामियों का दोहरता क्रम

क्रम है शनि → गुरु → मंगल → सूर्य → शुक्र → बुध → चंद्र → फिर शनि। सूर्योदय की पहली होरा दिन-स्वामी से शुरू करें। उसके बाद इस क्रम में चलते हुए दिन की बारह और रात की बारह होराएँ भरें। सूर्यास्त पर अवधि बदलती है, लेकिन ग्रहों का क्रम दोबारा पहले ग्रह से शुरू नहीं होता।

सोमवार में शुरुआत चंद्र से होगी। पहली सात होराएँ चंद्र, शनि, गुरु, मंगल, सूर्य, शुक्र और बुध हैं। आठवीं फिर चंद्र की होगी। यहाँ सातवीं होरा का अर्थ सूर्योदय के बाद सातवाँ समय-अंतराल है। इसका अर्थ नागरिक घड़ी के सात बजे नहीं है।

सात ग्रहों के चक्र में चौबीस कदम का शेष तीन कदम के बराबर है। इसलिए अगले सूर्योदय की पहली होरा सोमवार के चंद्र से आगे बढ़कर मंगलवार के मंगल तक पहुँचती है। इसी संबंध को सभी सात वारों पर जाँचा जा सकता है। यह क्रम का गणितीय परीक्षण है, किसी घटना का पूर्वानुमान नहीं।

स्वामी से पहले समय-अंतराल की गणना करें

जन्म दिन में हो तो A=R और B=S लें। रात में हो तो A=S और B=R₂ लें। सभी क्षणों को एक समय-पैमाने पर रखकर बीता अंश f=(t−A)/(B−A) निकालें। उस आधे चक्र में शून्य से गिना स्थान floor(12f) होगा, जिसकी सीमा 0 से 11 है। रात के लिए इसमें 12 जोड़ने पर पूरे दिन का शून्य-आधारित स्थान j मिलता है।

शनि से शुरू ग्रह-सूची में दिन-स्वामी का स्थान w हो तो वर्तमान होरा-स्वामी का स्थान (w+j) mod 7 होगा। पाठक को दिखने वाला होरा नंबर j+1 है। इन दोनों गिनतियों को अलग रखें: ग्रहों की सूची सात पर घूमती है, दिन की होरा-संख्या चौबीस तक जाती है।

हर भाग में आरंभ शामिल है और अंत शामिल नहीं। ठीक सीमा पर नया भाग लागू होगा। सूर्यास्त पर पहली रात्रि होरा लें। अगले सूर्योदय पर पुराने चक्र को छोड़कर नया दिन चुनें। यदि मूल समय में सेकंड उपलब्ध हैं तो केवल मिनट तक गोल की गई स्क्रीन-घड़ी देखकर निर्णय न करें। सीमा से पहले और बाद के क्षण एक जैसे दिख सकते हैं।

65 मिनट की दिन की होराओं वाला पूरा सोमवार

निर्मित उदाहरण में सोमवार 26 अक्टूबर 2026 को सूर्योदय 05:30, सूर्यास्त 18:30 और मंगलवार का अगला सूर्योदय 05:30 रखें। सभी समयों में स्थिर +05:30 अंतर है। आगे मंगलवार का चक्र जाँचने के लिए उसका सूर्यास्त भी 18:30 दिया गया है। ये सुविधाजनक अभ्यास-आँकड़े हैं, पंचांग की वास्तविक सौर तालिका नहीं।

दिन तेरह घंटे अर्थात 780 मिनट का है। एक होरा 780/12=65 मिनट होगी। रात ग्यारह घंटे अर्थात 660 मिनट की है; एक रात्रि होरा 660/12=55 मिनट होगी। नीचे सभी चौबीस भाग दिए गए हैं ताकि आधी रात के आर-पार क्रम अपनी आँखों से जाँचा जा सके।

निर्मित सोमवार: सभी 24 होराएँ; (+1) अगली नागरिक तारीख है
होराआरंभ शामिलअंत शामिल नहींमिनटस्वामी
105:3006:3565चंद्र
206:3507:4065शनि
307:4008:4565गुरु
408:4509:5065मंगल
509:5010:5565सूर्य
610:5512:0065शुक्र
712:0013:0565बुध
813:0514:1065चंद्र
914:1015:1565शनि
1015:1516:2065गुरु
1116:2017:2565मंगल
1217:2518:3065सूर्य
1318:3019:2555शुक्र
1419:2520:2055बुध
1520:2021:1555चंद्र
1621:1522:1055शनि
1722:1023:0555गुरु
1823:0500:00 (+1)55मंगल
1900:00 (+1)00:55 (+1)55सूर्य
2000:55 (+1)01:50 (+1)55शुक्र
2101:50 (+1)02:45 (+1)55बुध
2202:45 (+1)03:40 (+1)55चंद्र
2303:40 (+1)04:35 (+1)55शनि
2404:35 (+1)05:30 (+1)55गुरु

दोपहर 12:00 से शुरू होरा बुध की है। सूर्यास्त पर पहली रात्रि होरा शुक्र की है। मध्यरात्रि में सूर्य की होरा आती है, लेकिन दिन-स्वामी अभी चंद्र ही है। ये तीन बिंदु तीन सामान्य गलतियाँ पकड़ते हैं: स्थिर साठ मिनट मानना, सूर्यास्त पर ग्रह-क्रम रीसेट करना और नागरिक मध्यरात्रि पर दिन-स्वामी बदल देना।

ठीक सीमाओं को अलग से जाँचें

ये जाँच-क्षण उसी निश्चित समय-अंतर और उन्हीं निर्मित सौर घटनाओं पर आधारित हैं। सीमा पर केवल एक सेकंड बढ़ने से होरा-स्वामी बदल सकता है। दिन-स्वामी अगले सूर्योदय तक वही रहेगा। अंतिम पंक्ति मंगलवार के नए चक्र की है; उसे निकालने के लिए मंगलवार का सूर्यास्त और बुधवार का सूर्योदय भी उपलब्ध होना चाहिए।

सोमवार 26 अक्टूबर 2026 के निर्मित चक्र में सीमा-जाँच
स्थानीय तारीख और समयदिन-स्वामीहोराहोरा-स्वामी
2026-10-26 05:30:00चंद्र1चंद्र
2026-10-26 06:34:59चंद्र1चंद्र
2026-10-26 06:35:00चंद्र2शनि
2026-10-26 11:59:59चंद्र6शुक्र
2026-10-26 12:00:00चंद्र7बुध
2026-10-26 18:29:59चंद्र12सूर्य
2026-10-26 18:30:00चंद्र13शुक्र
2026-10-26 23:59:59चंद्र18मंगल
2026-10-27 00:00:00चंद्र19सूर्य
2026-10-27 05:29:59चंद्र24गुरु
2026-10-27 05:30:00मंगल1मंगल

हर कुंडली में मध्यरात्रि को होरा की सीमा न मानें। इस सरल उदाहरण में संयोग से ऐसा होता है। सूर्यास्त या अगले सूर्योदय का समय बदलने पर 00:00 किसी होरा के बीच में आ सकता है। उसी प्रकार होरा की सीमा का किसी पूरे नागरिक घंटे पर पड़ना जरूरी नहीं। वास्तविक अवधि को बारह भागों में बाँटना प्राथमिक नियम है।

बाकी बल जोड़ने से पहले दोनों मदों का लेखा बनाएँ

सोमवार 12:10 का जन्म सातवीं होरा में है, जिसका अंतराल 12:00 से 13:05 तक है। चंद्र को दिन बल मिलेगा और बुध को होरा बल। शून्य वाले ग्रहों को भी लेखे में रखें, जिससे वास्तविक शून्य को लापता जानकारी न समझ लिया जाए।

सोमवार दोपहर 12:10: केवल दिन और होरा का लेखा
ग्रहदिनहोरायोगरूप में योग
सूर्य0000
चंद्र450450.75
मंगल0000
बुध060601
गुरु0000
शुक्र0000
शनि0000

सात ग्रहों में इन दोनों स्तंभों का कुल 105 विरूप अर्थात 1.75 रूप है। यह आवंटन की जाँच है, किसी एक ग्रह के लिए आवश्यक न्यूनतम बल नहीं। सोमवार 05:30 पर दोनों भूमिकाएँ चंद्र की होंगी, इसलिए उसे 45+60=105 मिलेंगे और शेष ग्रहों को इन दो मदों से शून्य मिलेगा।

दिन बल हर नई होरा पर फिर से जुड़ता नहीं है। पूरे सूर्योदय-चक्र में संबंधित ग्रह को उसका 45 ही रहता है। इसी तरह सक्रिय होरा के लिए 60 मिलता है; इसे बीत चुकी होराओं की संख्या से गुणा नहीं किया जाता। पूर्ण षड्बल देखने से पहले काल बल की दूसरी मदें और बाकी पाँच बल-समूह अलग से जोड़े जाएँगे।

किसी ग्रह का इस छोटे लेखे में शून्य होना यह नहीं कहता कि उसका स्थान बल, दिग्बल या नैसर्गिक बल भी शून्य है। छोटे उप-योग को कुल के बराबर पढ़ने से रिपोर्ट का अर्थ गलत हो जाता है। पहले स्तंभ का नाम पढ़ें, फिर संख्या की इकाई और अंत में संबंधित कुल।

दूसरे कैलकुलेटर में स्वामी अलग क्यों हो सकता है?

Maitreya का विवरण दूसरी पद्धतियों का भी उल्लेख करता है: पूरे सूर्योदय-से-सूर्योदय समय को चौबीस बराबर भागों में बाँटना, या 06:00 से स्थिर साठ मिनट के घंटे लेना। Astrogyana की यहाँ नामित पद्धति दिन के बारह और रात के बारह भाग अलग निकालती है। एक ही जन्म-क्षण इन नियमों में अलग अंतराल में आ सकता है।

एक ही 06:33 क्षण, तीन स्पष्ट रूप से अलग नियम
नियमपहली सीमाहोरा-स्वामी
दिन और रात अलग-अलग 12 भाग06:35चंद्र
05:30 से अगले 05:30 के 24 बराबर भाग06:30शनि
06:00 से स्थिर 60 मिनट के भाग07:00चंद्र

स्थिर 06:00 वाली तुलना में पहले भाग का स्वामी स्पष्ट रूप से सोमवार का चंद्र रखा गया है। यह नियम समझाने की काल्पनिक तुलना है, किसी अन्य उत्पाद की सेटिंग का दावा नहीं। किसी एक क्षण पर दो तरीकों का स्वामी समान मिलना यह सिद्ध नहीं करता कि उनकी पूरी समय-सारिणी भी समान है।

दो रिपोर्टों की तुलना में पद्धति का नाम, सौर घटनाएँ, समय-अंतर और जन्म-क्षण लिख लें। पहले देखें कि दोनों ने वही दिन चुना है या नहीं। फिर होरा की सीमा और ग्रह-क्रम मिलाएँ। अंत में 45 और 60 का आवंटन देखें। मध्यवर्ती चरण सामने होने से अंतिम संख्या का फर्क समझना आसान होता है।

समय-क्षेत्र, मध्यरात्रि और घड़ी का बदलता अंतर

सोमवार 05:30 का +05:30 समय सोमवार 00:00 UTC है। लेकिन उसी अंतर पर सोमवार 05:00 का सूर्योदय रविवार 23:30 UTC में लिखा जाएगा। यह दूसरा उदाहरण बताता है कि सूर्योदय का UTC वार सीधे पढ़ना स्थानीय दिन बल के लिए पर्याप्त नहीं। स्थानीय रूप में वह सोमवार ही है।

मुख्य उदाहरण में सोमवार 12:10 (+05:30), UTC में 06:40 है। जन्म-क्षण के दोनों सही निरूपणों से वही होरा मिलनी चाहिए, बशर्ते सौर घटनाओं का स्थानीय कैलेंडर-संदर्भ सुरक्षित हो। केवल प्रदर्शन का समय-क्षेत्र बदलने से जन्म का वास्तविक क्षण नहीं बदलता।

यदि सूर्यास्त और सूर्योदय के बीच स्थानीय घड़ी का अंतर बदलता है, तो अवधि वास्तविक टाइमस्टैम्प घटाकर निकालें। दीवार की घड़ी पर दिखने वाला अंतर बीते हुए सेकंड से अलग हो सकता है। इस लेख के अभ्यास में अंतर स्थिर है। इसकी 55 मिनट की रात्रि होराएँ ऐसे दिन पर सीधे लागू न करें जहाँ घड़ी आगे या पीछे हुई हो।

सौर घटनाएँ या जन्म-समय अस्पष्ट हों तो

वर्तमान क्रियान्वयन को लगातार स्थानीय तारीखों के दो सूर्योदय और उनके बीच सही सूर्यास्त चाहिए। जिन दिए गए दैनिक रिकॉर्ड में सूर्योदय या सूर्यास्त नहीं है, वे पहले छँट जाते हैं। इसलिए अगली तारीख के रिकॉर्ड का पूरा होना भी आवश्यक है, तभी उसका सूर्योदय अंतिम सीमा बनता है। ऐसा चक्र न बन पाए तो परिणाम अनुपलब्ध होता है; सात ग्रहों के शून्य बल की रिपोर्ट नहीं।

जहाँ जरूरी सूर्योदय या सूर्यास्त होता ही नहीं, वहाँ यह पद्धति कल्पित 06:00 और 18:00 नहीं भरती। अनुपलब्धता को बनाए रखें और सौर घटना का आधार जाँचें। किसी अलग ध्रुवीय क्षेत्र वाली परंपरा का उपयोग करना हो तो वह स्पष्ट नाम और नियम के साथ अलग पद्धति होगी।

सोमवार के उदाहरण में जन्म 06:33 से 06:37 के बीच बताया गया हो तो सीमा 06:35 पार होती है। दिन-स्वामी चंद्र ही रहेगा, लेकिन होरा-स्वामी चंद्र या शनि हो सकता है। दोनों लेखे बताएँ। दोनों का औसत निकालकर एक निश्चित अंक देना मूल असतत नियम का परिणाम नहीं, नया मॉडल होगा।

गणना दोहराने के सात चरण

  1. स्थान, तारीख और जन्म-समय का सही अंतर तय करें।
  2. आधार सूर्योदय, सूर्यास्त और अगला सूर्योदय स्थानीय संदर्भ सहित लिखें।
  3. जाँचें कि जन्म चुने चक्र के भीतर है।
  4. दिन या रात चुनकर बीता हुआ अंश निकालें।
  5. शून्य-आधारित भाग और ग्रह-सूची का स्थान अलग निकालें।
  6. 45 और 60 अलग स्तंभों में दें; दोनों एक ग्रह को मिलना संभव है।
  7. अन्य बल जोड़ने से पहले कुल आवंटन 105 विरूप जाँचें।

परिचय वाले होरा तालिका के लेख में समय-सारिणी पढ़ना समझाया गया है। यह साथी लेख उसी समय-सारिणी से षड्बल के दोनों आवंटन और उनके उप-योग की जाँच करता है।

त्रिभाग बल में दिन-रात के तीन भागों की तुलना पढ़ें। नतोन्नत बल स्थानीय माध्य सौर समय पर आधारित अलग गणना समझाता है। व्यापक विषय समय-संबंधी बल है, फिर भी इनकी गणना एक-दूसरे की जगह नहीं रखी जा सकती।

रूप और विरूप का लेख रिपोर्ट की इकाइयाँ स्पष्ट करता है। युद्ध बल का पूरा लेखा दिखाता है कि कुछ समय-संबंधी योगदान आगे समायोजन के आधार में कैसे आते हैं। गणना की जाँच और जीवन के फलित निष्कर्ष को अलग स्तर पर पढ़ें।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

दिन और होरा बल में कितने विरूप मिलते हैं?

दिन-स्वामी को 45 और वर्तमान होरा-स्वामी को 60 विरूप मिलते हैं। दोनों एक ग्रह हों तो उसका उप-योग 105 होगा, अन्यथा दोनों आवंटन अलग ग्रहों को मिलेंगे।

क्या मध्यरात्रि पर दिन बल का स्वामी बदलता है?

इस पद्धति में वह अगले स्थानीय सूर्योदय पर बदलता है। नागरिक मध्यरात्रि के बाद लेकिन सूर्योदय से पहले जन्म पिछली सूर्योदय-तारीख के दिन-स्वामी से जुड़ता है।

क्या हर होरा साठ मिनट की है?

नहीं। दिन और रात अलग-अलग बारह भागों में बँटते हैं। यहाँ निर्मित तेरह घंटे के दिन और ग्यारह घंटे की रात में होराएँ क्रमशः 65 और 55 मिनट की हैं।

क्या सूर्यास्त पर ग्रहों का क्रम फिर शुरू होता है?

नहीं। पहली रात्रि होरा दिन की बारहवीं होरा के बाद उसी ग्रह-क्रम को जारी रखती है। सूर्यास्त पर केवल भाग की अवधि बदलती है।

सूर्योदय का आँकड़ा न मिले तो बल शून्य मानें?

नहीं। जरूरी सही सौर चक्र न बन पाए तो यह क्रियान्वयन षड्बल को अनुपलब्ध बताता है। अनुपलब्ध जानकारी और निकला हुआ शून्य अलग स्थितियाँ हैं।

क्या 105 विरूप पूरा षड्बल है?

नहीं। यह केवल दिन और होरा की संयुक्त राशि है। पूर्ण रिपोर्ट में काल बल की शेष मदें और षड्बल के दूसरे समूह भी आते हैं।

स्रोत और संदर्भ

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