त्रिभाग बल कैसे निकाला जाता है?
सूर्योदय से सूर्यास्त की अवधि के तीन बराबर भाग करें और सूर्यास्त से अगले सूर्योदय की अवधि के अलग तीन बराबर भाग करें। दिन के भागों के स्वामी क्रम से बुध, सूर्य और शनि हैं; रात के चंद्र, शुक्र और मंगल। इस त्रिभाग बल पद्धति में जन्म वाले भाग के स्वामी को 60 विरूप, गुरु को सदा 60 विरूप और बाकी पाँच ग्रहों को शून्य मिलता है।
यह काल बल का एक घटक है और काल बल, षड्बल का हिस्सा है। संख्या पारंपरिक ज्योतिष की एक गणना बताती है। इसे ग्रह की भौतिक ऊर्जा, व्यक्ति का मूल्य या भविष्य में किसी घटना की वैज्ञानिक संभावना समझना उचित नहीं होगा। शून्य और साठ का अर्थ इसी घटक के भीतर है।
ग्रह-क्रम Maitreya के त्रिभाग बल विवरण से मेल खाता है। नीचे सीमा चुनने और सौर घटनाएँ माँगने के नियम Astrogyana के वर्तमान कार्यान्वयन को स्पष्ट करते हैं। दिए गए समय गणना सिखाने के लिए बनाए गए हैं; वे किसी शहर का वास्तविक सूर्योदय पूर्वानुमान नहीं हैं।
जन्म को घेरने वाली तीन सौर घटनाएँ पहले खोजें
जन्म का क्षण उसकी तारीख और सही समय-क्षेत्र अंतर सहित रखें। फिर ऐसा सूर्योदय R, उसके बाद सूर्यास्त S और अगला सूर्योदय R₂ चुनें जिनके लिए R ≤ जन्म < R₂ तथा R < S < R₂ हो। केवल नागरिक तारीख देखकर चक्र चुनना पर्याप्त नहीं: मध्यरात्रि के बाद लेकिन सूर्योदय से पहले जन्म पिछली नागरिक तारीख को शुरू हुई रात में आता है।
जन्म S से पहले है तो आरंभ R और अंत S लें। जन्म S पर या उसके बाद है तो आरंभ S और अंत R₂ लें। जन्म < S की शर्त के कारण ठीक सूर्यास्त रात में शामिल होता है। ठीक अगले सूर्योदय पर नया चक्र शुरू होता है, जिसके पूरे संदर्भ के लिए उसका सूर्यास्त और उसके बाद का सूर्योदय भी चाहिए।
तीनों घटनाएँ एक स्थान और एक जैसी सूर्योदय परिभाषा से लें। अलग क्षितिज-मान, स्थान या गणना-स्रोत से समय बदल सकता है। रिकॉर्ड में मूल घटना-समय रखने से बाद में यह पता लगाया जा सकता है कि दो परिणामों का अंतर गणित का है या उनके आधारभूत समय अलग हैं।
बीता अंश और आरंभ को शामिल करने का नियम
चुनी हुई अवधि का आरंभ A, अंत B और जन्म-क्षण t हो। सभी को एक समय-पैमाने पर रखें। f = (t − A)/(B − A) बीता हुआ अंश है। शून्य से गिना भाग k = floor(3f) और पाठक को दिखने वाला भाग k+1 होगा। सही अंतराल में 0 ≤ f < 1 है, इसलिए k केवल 0, 1 या 2 हो सकता है।
चार सीमाएँ A, A+(B−A)/3, A+2(B−A)/3 और B हैं। हर भाग अपना आरंभ शामिल करता है तथा अंत को अगले भाग के लिए छोड़ता है। इसे आधा-खुला अंतराल कह सकते हैं। ठीक सीमा पर क्षण एक बार, नए भाग में गिना जाता है; न कोई क्षण छूटता है, न दो स्वामी एक साथ मिलते हैं।
बीती अवधि निकालते समय स्पष्ट समय-क्षेत्र वाले क्षण, जैसे UTC timestamps, काम में लें। यदि बीच में नागरिक घड़ी का अंतर बदलता है तो केवल दीवार-घड़ी के अंकों को घटाना भ्रमित कर सकता है। घड़ी में समय दोहर सकता है या आगे छलाँग लगा सकता है; सही तरह पहचाने गए वास्तविक क्षणों का क्रम फिर भी स्पष्ट रहता है।
13 घंटे के दिन और 11 घंटे की रात का पूरा उदाहरण
मान लें सूर्योदय 05:30, सूर्यास्त 18:30 और अगला सूर्योदय अगली तारीख को 05:30 है। इस उदाहरण में समय-क्षेत्र अंतर नहीं बदलता। दिन 13 घंटे अर्थात 780 मिनट है। उसका एक तिहाई 260 मिनट, यानी 4 घंटे 20 मिनट होगा। रात 11 घंटे अर्थात 660 मिनट है; उसका तिहाई 220 मिनट, यानी 3 घंटे 40 मिनट है।
| भाग | आरंभ शामिल | अंत शामिल नहीं | अवधि | 60 विरूप का स्वामी |
|---|---|---|---|---|
| दिन 1 | 05:30 | 09:50 | 4h 20m | बुध |
| दिन 2 | 09:50 | 14:10 | 4h 20m | सूर्य |
| दिन 3 | 14:10 | 18:30 | 4h 20m | शनि |
| रात 1 | 18:30 | 22:10 | 3h 40m | चंद्र |
| रात 2 | 22:10 | अगला दिन 01:50 | 3h 40m | शुक्र |
| रात 3 | अगला दिन 01:50 | अगला दिन 05:30 | 3h 40m | मंगल |
05:30 में 4:20 जोड़ने पर 09:50 और फिर 14:10 मिलता है। सूर्यास्त में 3:40 जोड़ने पर 22:10 और फिर अगली तारीख का 01:50 आता है। अंतिम रात्रि-सीमा 05:30 है। इस तरह छह भाग पूरा सूर्योदय-से-सूर्योदय चक्र ढकते हैं, लेकिन सभी छह की अवधि समान नहीं है।
पूरे चौबीस घंटे को छह बराबर चार-घंटे के हिस्सों में बाँटने से यहाँ गलत सीमाएँ बनेंगी। नियम दिन के भीतर समान तिहाई और रात के भीतर समान तिहाई का है। गुरु को हर गणना में मिलने वाले साठ को समय की कोई अतिरिक्त सातवीं अवधि भी न समझें; वह ग्रह-स्कोर का अलग स्थिर नियम है।
ठीक सीमा पर कौन-सा स्वामी मिलेगा?
| घड़ी | सौर भाग | स्वामी |
|---|---|---|
| 09:49:59 | दिन 1 | बुध |
| 09:50:00 | दिन 2 | सूर्य |
| 14:09:59 | दिन 2 | सूर्य |
| 14:10:00 | दिन 3 | शनि |
| 18:29:59 | दिन 3 | शनि |
| 18:30:00 | रात 1 | चंद्र |
| 22:10:00 | रात 2 | शुक्र |
| 00:00:00 (+1) | रात 2 | शुक्र |
| 01:50:00 (+1) | रात 3 | मंगल |
| 05:30:00 (+1) | अगला दिन 1 | बुध |
09:49:59 अभी दिन के पहले भाग में है। 09:50:00 पर f=260/780=1/3 और floor(3f)=1 मिलता है। शून्य से गिनने पर 1 दूसरा भाग है, इसलिए सूर्य चुना जाता है। इस सीमा पर बुध और सूर्य को तीस-तीस विरूप बाँटने का नियम नहीं है; स्वामी का चुनाव एक से दूसरे पर बदलता है।
मध्यरात्रि में नागरिक तारीख बदलती है, लेकिन रात्रि का भाग फिर से शुरू नहीं होता। इस उदाहरण में 23:59 और 00:00 दोनों शुक्र के भाग में हैं। दूसरी ओर 18:30 पर तारीख वही रहती है, फिर भी दिन से रात का चयन बदल जाता है। अलग-अलग सीमाओं का काम अलग है।
तालिका की अंतिम पंक्ति मानती है कि नए सूर्योदय वाले चक्र की आवश्यक घटनाएँ उपलब्ध हैं। पुराने चक्र में f=1 डालकर आगे न बढ़ें; उससे k=3 निकलेगा, जो तीन स्वामियों की सूची से बाहर है। पहले नया अंतराल चुनें और फिर उसके भीतर बीता अंश निकालें।
मध्यरात्रि के बाद जन्म पर सातों ग्रहों का बल
अब अगली नागरिक तारीख का 00:15 लें। पिछले सूर्यास्त 18:30 से 5 घंटे 45 मिनट, अर्थात 345 मिनट बीते। पूरी रात 660 मिनट है। इसलिए f=345/660=23/44, लगभग 0.522727 है। उसका तीन गुना 69/44, लगभग 1.568182 है। floor लेने पर 1 आता है: रात का दूसरा भाग, जिसका स्वामी शुक्र है।
| ग्रह | विरूप | रूप |
|---|---|---|
| सूर्य | 0 | 0 |
| चंद्र | 0 | 0 |
| मंगल | 0 | 0 |
| बुध | 0 | 0 |
| गुरु | 60 | 1 |
| शुक्र | 60 | 1 |
| शनि | 0 | 0 |
शुक्र और गुरु को इस घटक में 60-60 विरूप, अर्थात एक-एक रूप मिला। सात ग्रहों के त्रिभाग योगदान का योग 120 विरूप है। शेष पाँच का योगदान शून्य है। इस पद्धति की सही, उपलब्ध गणना में यह योग उपयोगी जाँच है; यह पूरी कुंडली का षड्बल योग नहीं है।
किसी ग्रह को यहाँ शून्य मिलना दूसरे घटकों से मिला उसका बल मिटा नहीं देता। इसी तरह गुरु का स्थिर साठ हर कुंडली में उसे सबसे शक्तिशाली ग्रह सिद्ध नहीं करता। घटक, पूरा योग और अपेक्षित संदर्भ बल से अनुपात अलग रखने के लिए विरूप, रूप और अनुपात का लेख पढ़ें।
भाग चुनने से पहले सेकंड को गोल न करें
एक दूसरा निर्मित उदाहरण लें: सूर्योदय 06:00:00 और सूर्यास्त 17:59:00 है। दिन की अवधि 11 घंटे 59 मिनट, अर्थात 43,140 सेकंड है। उसका तिहाई ठीक 14,380 सेकंड है: 3 घंटे 59 मिनट 40 सेकंड। इसलिए भीतर की दोनों सीमाएँ 09:59:40 और 13:59:20 होंगी।
यदि दिखाते समय पहली सीमा 10:00 कर दी गई, तो 09:59:50 का जन्म देखने में उससे पहले लगेगा। बिना गोल किए गणना में वह सूर्य के भाग में दस सेकंड भीतर है। पहले उपलब्ध शुद्धता से गणना करें, फिर स्वामी चुनें और उसके बाद प्रदर्शन के लिए समय को छोटा करें। दिखने वाले कम अंक मूल तुलना का स्थान नहीं लेते।
किसी अवधि का तिहाई पूर्ण सेकंड में भी न आए तो सीमा का भिन्नात्मक भाग बनाए रखें या बिना समय से पहले rounding किए बीती अवधियों की तुलना करें। Astrogyana का वर्तमान कोड दिए क्षणों के timestamp seconds इस्तेमाल करता है। कई दशमलव छाप देने से पुराने जन्म-रिकॉर्ड की वास्तविक शुद्धता नहीं बढ़ती।
नतोन्नत बल और होरा से इसका अंतर
नतोन्नत बल की यहाँ वर्णित पद्धति स्थानीय माध्य सौर घड़ी और लगातार बदलते त्रिकोणीय भार का उपयोग करती है। उसके दिन-रात वाले ग्रह-समूह यह नहीं कहते कि हर क्षण वास्तविक सूर्योदय-सूर्यास्त जाँचा जा रहा है। त्रिभाग में दिए गए वास्तविक सौर घटना-समयों के भीतर एक निश्चित तिहाई चुना जाता है।
होरा भी दिन और रात को अलग बाँटती है, लेकिन दोनों के बारह-बारह भाग करती है। ग्रहों का क्रम भी उसका अपना है। एक ही दिन या रात में त्रिभाग की अवधि चार होरा जितनी होगी, पर जन्म वाली होरा का स्वामी उठाकर उसे त्रिभाग का स्वामी नहीं कहा जा सकता। अवधि के मेल से स्वामी का नियम समान नहीं हो जाता।
विशेष 06:00–18:00–06:00 उदाहरण में सभी तिहाई चार घंटे के हैं। दिन की सीमाएँ 06:00, 10:00, 14:00, 18:00 और रात की 18:00, 22:00, 02:00, 06:00 हैं। यही सुविधाजनक उदाहरण चार घंटे वाला shortcut सही लगने का कारण बन सकता है। दिन और रात असमान होते ही वह सामान्य नियम नहीं रहता।
जन्म-समय या सौर घटना अस्पष्ट हो तो
पहले उदाहरण में जन्म 09:48 से 09:52 के बीच कहीं हुआ हो सकता है, तो यह सीमा 09:50 को पार करता है। वास्तविक क्षण के अनुसार बुध या सूर्य को बदलने वाला साठ मिल सकता है। दोनों संभावनाएँ बताना उचित है। बिना अतिरिक्त स्पष्ट पद्धति के एक निश्चित उत्तर गढ़ना या दोनों में अंक बाँट देना उस अनिश्चितता को सही तरह नहीं दिखाता।
जरूरी सौर घटनाएँ न मिलें तो वर्तमान पूरे षड्बल का कार्यान्वयन उपलब्ध नहीं होने का परिणाम देता है। वह अनुमान से सूर्योदय या सूर्यास्त नहीं बनाता। कारण घटना-डेटा की कमी भी हो सकता है या ऐसी स्थानीय स्थिति जिसमें आवश्यक घटना होती ही नहीं। गुरु के स्थिर साठ का ज्ञान बाकी रिपोर्ट का अनुपलब्ध संदर्भ पूरा नहीं करता।
सीमा के पास मतभेद हो तो स्थान, UTC परिवर्तन, मूल जन्म-रिकॉर्ड की शुद्धता, घटना की परिभाषा और तारीखें जाँचें। यदि पूरा संभावित जन्म-अंतराल हर सीमा से दूर है तो इस घटक का स्वामी शायद न बदले। इससे दूसरे सभी ग्रह-गणना घटकों की विश्वसनीयता अपने-आप सिद्ध नहीं होती।
दोबारा जाँची जा सकने वाली गणना का रिकॉर्ड
एक उपयोगी रिकॉर्ड में जन्म-क्षण, स्थान, तारीख सहित तीन सौर घटनाएँ, चुना दिन या रात, बीते सेकंड, कुल अवधि, f, भाग का स्वामी और सातों योगदान रखें। पद्धति का नाम और इकाइयाँ भी जोड़ें। तब दो रिपोर्टों के अंतर का कारण केवल “बलवान” शब्द के सहारे अनुमान लगाने के बजाय स्पष्ट रूप से समझाया जा सकता है।
चार्ट का संदर्भ कुंडली उपकरण में देखें और नामित कार्यान्वयन के लिए गणना-पद्धति पढ़ें। यहाँ के उदाहरण एक घटक सिखाते हैं। वे व्यक्तिगत भविष्यवाणी स्थापित नहीं करते और पूरे संदर्भ सहित किए जाने वाले पारंपरिक अध्ययन का स्थान नहीं लेते।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
दिन के त्रिभाग स्वामी कौन हैं?
सूर्योदय से सूर्यास्त के पहले, दूसरे और तीसरे भाग के स्वामी बुध, सूर्य और शनि हैं। जन्म वाले भाग के स्वामी को 60 विरूप और गुरु को भी 60 मिलते हैं।
रात के तीन भाग किसके हैं?
सूर्यास्त से अगले सूर्योदय के पहले, दूसरे और तीसरे भाग चंद्र, शुक्र और मंगल के हैं। रात की अपनी बीती अवधि को तीन बराबर भागों में बाँटते हैं।
क्या सभी छह भाग चार घंटे के होते हैं?
केवल तब जब दिन और रात दोनों बारह घंटे के हों। 13 घंटे के दिन का भाग 4 घंटे 20 मिनट और 11 घंटे की रात का भाग 3 घंटे 40 मिनट है।
ठीक सीमा किस भाग में आती है?
सीमा नए भाग में शामिल होती है। ठीक सूर्यास्त रात शुरू करता है और ठीक अगला सूर्योदय अगला चक्र। पिछला अंतराल अपना अंतिम क्षण शामिल नहीं करता।
क्या मध्यरात्रि पर गिनती फिर शुरू होती है?
नहीं। सूर्योदय से पहले का मध्यरात्रि-पश्चात क्षण पिछले सूर्यास्त से शुरू रात में रहता है। घटनाओं के साथ सही तारीखें रखें।
त्रिभाग बल शून्य हो तो क्या ग्रह निर्बल है?
यह केवल इस घटक का शून्य योगदान है। दूसरे षड्बल घटक, कुल बल और संदर्भ अनुपात अलग गणनाएँ हैं।