वर्ष बल और मास बल क्या हैं?
Astrogyana की parashari-motion-shadbala-2026.2 पद्धति में गणना से चुने वर्ष-स्वामी को 15 विरूप वर्ष बल और मास-स्वामी को 30 विरूप मास बल मिलता है। ये काल बल की दो मदें हैं। इनके लिए उस स्थानीय सूर्योदय की तारीख का वर्ष और नागरिक महीना लिया जाता है जिससे जन्म का सौर दिन शुरू हुआ था।
वर्ष को Y और महीने को M कहें; जनवरी 1 और दिसंबर 12 है। वर्ष का ग्रह-सूचकांक 3(Y+3) mod 7 और महीने का सूचकांक 2(12Y+M+6) mod 7 है। शून्य से गिनी सूची सूर्य, चंद्र, मंगल, बुध, गुरु, शुक्र, शनि है।
यह अनुप्रयोग में मौजूद और Maitreya के विवरण में दी गई विशिष्ट गणना-परंपरा है। इसे हर संप्रदाय के कैलेंडर या वार्षिक कुंडली की सार्वभौम विधि न समझें। नीचे आधुनिक ग्रेगोरियन तारीखों के अंकगणितीय उदाहरण हैं; किसी वर्ष या महीने के फलित भविष्य का दावा नहीं।
वर्ष निकालने से पहले आधार सूर्योदय चुनें
पहले सूर्योदय R, उसके बाद सूर्यास्त S और अगला सूर्योदय R₂ पहचानें। शर्तें हैं R ≤ जन्म < R₂ तथा R < S < R₂। फिर R की स्थानीय तारीख से Y और M लें। मध्यरात्रि के बाद लेकिन अगले सूर्योदय से पहले जन्म पिछली सूर्योदय-तारीख से जुड़ा रहता है।
महीना बदलते समय यह क्रम आवश्यक है और नए वर्ष पर और भी स्पष्ट हो जाता है। नागरिक जन्म-तारीख 1 जनवरी होने का अर्थ यह नहीं कि सूत्र में तुरंत जनवरी और नया वर्ष रख दिया जाए। सूर्योदय से पहले आधार 31 दिसंबर हो सकता है, इसलिए पिछला वर्ष और दिसंबर साथ आएँगे।
कुंडली निर्माण भाग सौर घटनाओं को जन्म-स्थान के समय-क्षेत्र में बदलता है। घटना की तुलना वास्तविक क्षणों के रूप में करें, लेकिन उसके कैलेंडर-वर्ष को पढ़ते समय स्थानीय संदर्भ बनाए रखें। वही सूर्योदय UTC में पिछली तारीख पर लिखा जा सकता है। केवल निरूपण बदलने से घटना नहीं बदलती, फिर भी गलत संदर्भ से वर्ष पढ़ने पर उत्तर बदल सकता है।
शेष को सही सात ग्रहों की सूची में रखें
| शेष | ग्रह |
|---|---|
| 0 | सूर्य |
| 1 | चंद्र |
| 2 | मंगल |
| 3 | बुध |
| 4 | गुरु |
| 5 | शुक्र |
| 6 | शनि |
यह शेष एक सूचकांक है, वार या भाव-संख्या नहीं। शेष 0 सूर्य है, खाली परिणाम नहीं। शेष 6 शनि है। कोई प्रोग्राम एक से गिनती करता हो तो उसे स्पष्ट रूप से समायोजित करें। बिना सूत्र बदले सूची के आगे खाली स्थान जोड़ देने से पूरे आवंटन में खिसकाव आ सकता है।
यह सूची शनि, गुरु, मंगल से शुरू होने वाले होरा-क्रम से अलग है। वर्ष और महीने के सूत्रों में उनके अपने चक्रीय कदम पहले से मौजूद हैं। अंत में होरा वाली सूची लगा देना सरलीकरण नहीं, दूसरी पद्धति बना देना होगा। सूची का नाम और शून्य-बिंदु लेखे में साथ लिखना उपयोगी है।
पूरा मध्यवर्ती पूर्णांक लिखकर वर्ष-स्वामी निकालें
Y=2026 में तीन जोड़ने पर 2029 आता है। तीन से गुणा करने पर 6087 मिलता है। अब 6087=7×869+4 है, इसलिए शेष 4 और स्वामी गुरु होगा। 6087 कोई बल-अंक नहीं; यह केवल बीच की गणना है। चुने हुए स्वामी को 15 विरूप दिए जाएँगे।
| Y | 3(Y+3) | शेष mod 7 | स्वामी |
|---|---|---|---|
| 2024 | 6081 | 5 | शुक्र |
| 2025 | 6084 | 1 | चंद्र |
| 2026 | 6087 | 4 | गुरु |
| 2027 | 6090 | 0 | सूर्य |
| 2028 | 6093 | 3 | बुध |
| 2029 | 6096 | 6 | शनि |
| 2030 | 6099 | 2 | मंगल |
Y में एक बढ़ने पर सूचकांक सात के चक्र में तीन कदम आगे जाता है। सात वर्ष बढ़ने पर मध्यवर्ती संख्या 21 बढ़ेगी, जो सात से पूरा विभाजित है। इसलिए शेष फिर वही आएगा। तीन के लगातार कदम सातों शेषों तक पहुँचते हैं; इसी कारण सात वर्ष के चक्र में सभी ग्रह एक बार आते हैं।
वर्ष-स्वामी की जगह 1 जनवरी का वार न रख दें। वह तारीख के वार-चक्र पर आधारित अलग एल्गोरिद्म होगा। यहाँ की तालिका बताए गए पूर्णांक सूत्र से बनी है। यह बीते वारों की गिनती नहीं करती और वर्ष के पहले नागरिक दिन से ग्रह नहीं चुनती।
मास के सूत्र में वर्ष को छोड़ें नहीं
अक्टूबर 2026 के आधार के लिए 12×2026+10+6=24328 होगा। दोगुना करने पर 48656 मिलता है और 48656=7×6950+6 है। इसलिए मास-स्वामी शनि को 30 विरूप मिलेंगे। महीने के सूत्र में वर्ष भी शामिल है; हर वर्ष का अक्टूबर स्थायी रूप से एक ही ग्रह का नहीं होता।
| M | महीना | 2(12Y+M+6) | शेष | स्वामी |
|---|---|---|---|---|
| 1 | जनवरी | 48638 | 2 | मंगल |
| 2 | फ़रवरी | 48640 | 4 | गुरु |
| 3 | मार्च | 48642 | 6 | शनि |
| 4 | अप्रैल | 48644 | 1 | चंद्र |
| 5 | मई | 48646 | 3 | बुध |
| 6 | जून | 48648 | 5 | शुक्र |
| 7 | जुलाई | 48650 | 0 | सूर्य |
| 8 | अगस्त | 48652 | 2 | मंगल |
| 9 | सितंबर | 48654 | 4 | गुरु |
| 10 | अक्टूबर | 48656 | 6 | शनि |
| 11 | नवंबर | 48658 | 1 | चंद्र |
| 12 | दिसंबर | 48660 | 3 | बुध |
एक ही वर्ष में महीना एक आगे बढ़ाने पर शेष सात के चक्र में दो आगे जाता है। अगले वर्ष के उसी महीने पर जाने से मध्यवर्ती संख्या 24 बढ़ती है, जो शेष में तीन के बराबर है। दिसंबर से अगले जनवरी जाने पर भी केवल दो का कदम है, क्योंकि वर्ष बढ़ना और महीने का 12 से 1 होना मिलकर मूल महीने की गिनती में एक कदम बनाते हैं।
कुछ प्रोग्रामिंग प्रणालियाँ जनवरी को 0 कहती हैं। इस सूत्र में रखने से पहले उसे M=1 करें। यह बदलाव भूलने पर महीने का ग्रह-सूचकांक दो स्थान बदल जाएगा। इसी तरह चंद्र महीने की संख्या या दूसरे संवत् का वर्ष सीधे रखने से इनपुट-पद्धति बदल जाती है।
महीने, वर्ष और लीप दिन की सीमाएँ
इन निर्मित समय-सारिणियों में हर स्थानीय सूर्योदय 06:00, सूर्यास्त 18:00 और समय-अंतर स्थिर +05:30 है। आसपास की पूरी तारीखों के रिकॉर्ड दिए गए हैं ताकि सही सौर चक्र बन सके। तालिका किसी वास्तविक शहर के सूर्योदय का दावा नहीं करती।
| स्थानीय जन्म-समय | आधार सूर्योदय की तारीख | Y | M | वर्ष-स्वामी | मास-स्वामी |
|---|---|---|---|---|---|
| 2026-11-01 00:00:00 | 2026-10-31 | 2026 | 10 | गुरु | शनि |
| 2026-11-01 05:59:59 | 2026-10-31 | 2026 | 10 | गुरु | शनि |
| 2026-11-01 06:00:00 | 2026-11-01 | 2026 | 11 | गुरु | चंद्र |
| 2027-01-01 00:00:00 | 2026-12-31 | 2026 | 12 | गुरु | बुध |
| 2027-01-01 05:59:59 | 2026-12-31 | 2026 | 12 | गुरु | बुध |
| 2027-01-01 06:00:00 | 2027-01-01 | 2027 | 1 | सूर्य | शुक्र |
| 2028-02-29 12:00:00 | 2028-02-29 | 2028 | 2 | बुध | बुध |
| 2028-03-01 05:59:59 | 2028-02-29 | 2028 | 2 | बुध | बुध |
| 2028-03-01 06:00:00 | 2028-03-01 | 2028 | 3 | बुध | शुक्र |
1 नवंबर को 05:59:59 पर अक्टूबर का आधार अभी लागू है और मास-स्वामी शनि है। 06:00 पर नवंबर का चंद्र लागू होता है। नए वर्ष पर पुराना वर्ष और दिसंबर अगले सूर्योदय तक साथ बने रहते हैं। केवल महीना मध्यरात्रि पर बदल देना अलग-अलग आधार तारीखों के दो इनपुट मिला देगा।
लीप दिन एक वास्तविक नागरिक तारीख और एक अतिरिक्त सूर्योदय-चक्र जोड़ता है, तेरहवाँ महीना नहीं। 29 फ़रवरी 2028 को M=2 ही है। 1 मार्च के सूर्योदय से पहले आधार 29 फ़रवरी है; बाद में M=3 होता है। सही लगातार तारीखें ढूँढ़ने में लीप वर्ष आवश्यक है, जबकि दोनों सूत्र साधारण Y और M पर ही चलते हैं।
अलग स्वामी और साझा स्वामी, दोनों के लेखे जाँचें
अक्टूबर 2026 के सूर्योदय-दिन में गुरु वर्ष वाला योगदान और शनि महीने वाला योगदान पाएगा। सितंबर 2026 में गुरु दोनों भूमिकाएँ रखता है। अलग स्तंभ रखना जरूरी है, ताकि एक ग्रह के दो स्वामी होने पर कोई एक मद दूसरी को मिटा न दे।
| ग्रह | वर्ष बल | मास बल | योग | रूप |
|---|---|---|---|---|
| सूर्य | 0 | 0 | 0 | 0 |
| चंद्र | 0 | 0 | 0 | 0 |
| मंगल | 0 | 0 | 0 | 0 |
| बुध | 0 | 0 | 0 | 0 |
| गुरु | 15 | 0 | 15 | 0.25 |
| शुक्र | 0 | 0 | 0 | 0 |
| शनि | 0 | 30 | 30 | 0.5 |
| ग्रह | वर्ष बल | मास बल | योग | रूप |
|---|---|---|---|---|
| सूर्य | 0 | 0 | 0 | 0 |
| चंद्र | 0 | 0 | 0 | 0 |
| मंगल | 0 | 0 | 0 | 0 |
| बुध | 0 | 0 | 0 | 0 |
| गुरु | 15 | 30 | 45 | 0.75 |
| शुक्र | 0 | 0 | 0 | 0 |
| शनि | 0 | 0 | 0 | 0 |
दोनों लेखों में सात ग्रहों को कुल 15+30=45 विरूप अर्थात 0.75 रूप मिलते हैं। एक ग्रह सभी 45 पा सकता है। दो मदों को संयुक्त राशि की दो प्रतियाँ मानकर कुल 90 नहीं किया जा सकता। यहाँ शून्य का अर्थ केवल इन दोनों भूमिकाओं का उस ग्रह के पास न होना है; अन्य बल-मदें फिर भी गैर-शून्य हो सकती हैं।
यह गणना हर पूरे हुए वर्ष पर 15 या हर बीते महीने पर 30 जमा नहीं करती। ये वर्तमान कुंडली के आवंटन हैं। वर्ष वाला शेष एक प्राप्तकर्ता चुनता है और महीने वाला शेष दूसरा, जो पहले के समान भी हो सकता है। चयन की संख्या, मिलने वाले विरूप और पूरा षड्बल तीन अलग स्तर हैं।
गलतियाँ पकड़ने वाली तीन संगति-जाँच
पहली जाँच आवृत्ति की है। उसी नागरिक महीने में सात वर्ष बाद दोनों स्वामी समान होने चाहिए। वर्ष का पूर्णांक 21 और महीने का पूर्णांक 168 बढ़ता है; दोनों सात से विभाजित हैं। यह सूत्रों के इनपुट का संबंध है। इससे वास्तविक सूर्योदय-क्षण, ग्रह-स्थिति या पूरी कुंडली एक जैसी नहीं हो जाती।
दूसरी जाँच लगातार महीनों की है, जिसमें दिसंबर से जनवरी भी शामिल हो। मास-स्वामी का सूचकांक हर बार सात के चक्र में दो आगे बढ़े। दिसंबर की रीसेट पर कोई असंगत छलाँग दिखे तो अक्सर वर्ष और महीने को साथ न बदलने की गलती होती है।
तीसरी जाँच लेखे के स्तंभ जोड़ना है। एक वर्ष योगदान 15 और एक मास योगदान 30 होना चाहिए। दोनों एक ग्रह को मिल सकते हैं, इसलिए गैर-शून्य पंक्तियाँ एक या दो होंगी। दो अलग प्राप्तकर्ता अनिवार्य मान लेने पर सितंबर 2026 जैसे वैध साझा-स्वामी उदाहरण गलत घोषित हो जाएँगे।
स्थानीय तारीख और वास्तविक क्षण का काम अलग रखें
अलग निर्मित उदाहरण में 1 जनवरी 2027 को सूर्योदय 05:00 और अंतर +05:30 मानें। वही क्षण UTC में 31 दिसंबर 2026 को 23:30 है। स्थानीय आधार Y=2027 और M=1 देगा, इसलिए वर्ष-स्वामी सूर्य और मास-स्वामी शुक्र होगा। UTC में दिख रहे पिछले वर्ष को सीधे लेने से यहाँ गलत इनपुट जाएगा।
जन्म-क्षण की केवल प्रदर्शन शैली बदलने पर सौर घटनाओं के सापेक्ष उसका स्थान नहीं बदलना चाहिए। लेकिन घटनाओं की तारीख पढ़ने से पहले स्थानीय संदर्भ हटा देने पर Y और M बदल सकते हैं। इसलिए दो काम अलग करें: घटनाओं की तुलना एक समय-पैमाने पर और कैलेंडर के वर्ष-महीने की पहचान अपेक्षित स्थानीय क्षेत्र में।
यहाँ उदाहरणों का समय-अंतर स्थिर रखा गया है। जहाँ अंतर बदलता है, हर घटना के टाइमस्टैम्प में उस क्षण का सही अंतर होना चाहिए। चयन को लगातार स्थानीय सूर्योदय-तारीखें भी चाहिए। बीच की तारीख का रिकॉर्ड गायब हो तो उसे साधारण एक-दिन के चक्र की तरह जोड़ना उचित नहीं।
वर्ष-मास बल को दूसरी कैलेंडर विधियों से न मिलाएँ
| शब्द या प्रणाली | इस लेख से संबंध |
|---|---|
| वर्ष बल | नामित षड्बल पद्धति का 15 विरूप योगदान |
| मास बल | नामित षड्बल पद्धति का 30 विरूप योगदान |
| वर्षफल या सौर-वापसी कुंडली | अलग वार्षिक कुंडली और उसके नियम |
| अमांत या पूर्णिमांत चंद्र मास | अलग पंचांग-आधारित महीने की नाम-व्यवस्था |
| संवत् या शक वर्ष | इन सूत्रों में सीधे रखने का वैकल्पिक इनपुट नहीं |
वार्षिक कुंडली की चर्चा में वर्ष शब्द आता है, लेकिन यह लेख सौर-वापसी, मुंथा या वार्षिक कुंडली का स्वामी नहीं निकालता। यहाँ पंद्रह विरूप का योगदान जन्म-कुंडली के बल की एक मद है। किसी रिपोर्ट में वर्ष-स्वामी लिखा हो तो उसकी पद्धति पहचाने बिना दूसरी रिपोर्ट से सीधे तुलना नहीं करनी चाहिए।
इसी प्रकार इस पद्धति का नागरिक महीना पर्वों के पंचांग में आने वाला चंद्र मास नहीं है। उस अलग प्रश्न के लिए अमांत और पूर्णिमांत का लेख पढ़ें। दोनों प्रणालियों में महीना शब्द आने से उनके इनपुट और निष्कर्ष अपने आप एक-दूसरे में नहीं बदले जा सकते।
सौर घटना या जन्म का समय अस्पष्ट हो तो
मौजूदा क्रियान्वयन को सूर्योदय, सूर्यास्त और अगले सूर्योदय का वैध चक्र चाहिए। लगातार सूर्योदय-तारीखें चुनने से पहले अधूरे दैनिक रिकॉर्ड छाँटे जाते हैं। सही संदर्भ न बन सके तो षड्बल अनुपलब्ध है। यह स्थिति सात ग्रहों में शून्य वर्ष और मास बल भरकर नहीं बदली जाती।
मुख्य उदाहरण में 1 जनवरी का जन्म 05:58 से 06:02 के बीच बताया गया हो तो आधार-सीमा पार होती है। वर्ष और मास, दोनों प्राप्तकर्ता बदल सकते हैं। दो संभावित लेखे और अस्पष्टता का कारण बताएँ। दोनों का औसत निकालना नई भार-पद्धति होगा, मूल असतत नियम का निश्चित उत्तर नहीं।
इस लेख के सूत्र-उदाहरण आधुनिक सकारात्मक ग्रेगोरियन वर्षों तक सीमित हैं। ऐतिहासिक कैलेंडर-परिवर्तन, अलग संवत् की वर्ष-संख्या और असामान्य तारीख-प्रणाली को पहले स्पष्ट रूप से संभालना होगा। तारीख की गलत व्याख्या को सही भाग-शेष भी ठीक नहीं कर सकता।
जाँच के लिए सात चरणों का रिकॉर्ड रखें
- स्थान, जन्म-क्षण और तय समय-क्षेत्र लिखें।
- सही सौर चक्र तथा आधार सूर्योदय की स्थानीय तारीख रखें।
- उसी तारीख से वर्ष Y और एक से गिना नागरिक महीना M लें।
- दोनों मध्यवर्ती पूर्णांक और उनके शेष लिखें।
- सूर्य से शनि वाली सूची में ग्रह चुनें।
- 15 और 30 अलग दें तथा कुल 45 विरूप जाँचें।
- इसके बाद शेष बल-मदों के साथ संयोजन करें।
दिन और होरा बल वार तथा वर्तमान होरा के योगदान जोड़ता है। इकाई और अनुपात का लेख कुल पढ़ना समझाता है। युद्ध बल का लेखा आगे होने वाला एक समय-संबंधी पुनर्वितरण दिखाता है। इन संबंधों से गणना जाँची जा सकती है, बिना किसी छोटे उप-योग को व्यक्ति का पूरा मूल्यांकन मान लिए।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
इस पद्धति में वर्ष और मास बल के सूत्र क्या हैं?
वर्ष के लिए 3(Y+3) mod 7 और मास के लिए 2(12Y+M+6) mod 7 लें। शून्य से सूची सूर्य से शनि तक है। Y और M स्थानीय आधार सूर्योदय से आते हैं और जनवरी 1 है।
दोनों स्वामियों को कितने विरूप मिलते हैं?
वर्ष-स्वामी को 15 और मास-स्वामी को 30 विरूप मिलते हैं। सात ग्रहों में कुल आवंटन 45 विरूप अर्थात 0.75 रूप होता है।
क्या एक ग्रह को दोनों मदें मिल सकती हैं?
हाँ। सितंबर 2026 के आधार में इस नियम से गुरु वर्ष और मास, दोनों स्वामी है। उसे इन दो मदों से कुल 45 विरूप मिलते हैं।
क्या नए वर्ष की मध्यरात्रि पर इनपुट बदल जाते हैं?
नए स्थानीय सूर्योदय से पहले जन्म 31 दिसंबर के आधार सूर्योदय का वर्ष और महीना ले सकता है। बताई गई आरंभ-सहित सीमा में आधार अगले सूर्योदय पर बदलता है।
क्या मास बल में अमांत या पूर्णिमांत महीना लिया जाता है?
यह क्रियान्वयन आधार सूर्योदय की तारीख से नागरिक महीने की संख्या लेता है। अमांत और पूर्णिमांत अलग चंद्र-मास व्यवस्था हैं; यहाँ सीधे बदलकर रखने वाले इनपुट नहीं।
क्या वर्ष बल और वर्षफल एक ही हैं?
नहीं। यहाँ नामित जन्म-षड्बल पद्धति का 15 विरूप वाला अंश समझाया गया है। वर्षफल या सौर-वापसी कुंडली के अलग इनपुट और वार्षिक नियम होते हैं।