घंटा कोण से ऊँचाई और दिगंश: स्थानीय आकाश की पूरी गणना

विषुवांश, नाक्षत्र समय और स्थान से आकाशीय ऊँचाई तथा दिगंश निकालें। मूल चित्र, पूर्व-उत्तर-ऊपर सदिश और शीर्ष-बिंदु के उदाहरण सहित समझें।

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लेखन और प्रकाशन: Astrogyana

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घंटा कोण और क्रांति से स्थानीय दिशा कैसे मिलती है?

अपने भौगोलिक अक्षांश, पिंड की क्रांति और उसके स्थानीय घंटा कोण से विषुवतीय दिशा को क्षितिज वाली दिशा में बदलें। ऊँचाई h क्षितिज के ऊपर या नीचे का कोण है। इस लेख में दिगंश A वास्तविक उत्तर से घड़ी की दिशा में बढ़ता है: उत्तर 0°, पूर्व 90°, दक्षिण 180° और पश्चिम 270°। गणना में आकाश के चारों ओर की स्थिति तथा विषुवत-वृत्त से उत्तर-दक्षिण की स्थिति दोनों चाहिए।

केवल विषुवांश से यह नहीं पता चलता कि अपने आकाश में कहाँ देखें। अलग समय पर पृथ्वी अलग घूर्णन-स्थिति में है और अलग स्थानों के प्रेक्षकों के क्षितिज अलग हैं। स्थानीय नाक्षत्र समय और देशांतर विषुवतीय निर्देशांक को उस स्थानीय परिस्थिति से जोड़ते हैं।

नीचे का मॉडल क्रांति +20° और अक्षांश +30° स्थिर रखता है। यह बिना वायुमंडलीय अपवर्तन के काल्पनिक दिशाएँ देता है। इसे किसी तारीख का सूर्य या चंद्र पूर्वानुमान अथवा नौवहन समाधान न समझें।

पहले चिह्न, इकाई और उत्तर की परिभाषा तय करें

φ भौगोलिक अक्षांश है, उत्तर के लिए धनात्मक। λ भौगोलिक देशांतर है, पूर्व के लिए धनात्मक। यह पृथ्वी पर प्रेक्षक का देशांतर है; विषुवतीय निर्देशांक वाले लेख का क्रांतिवृत्तीय देशांतर नहीं। एक ही यूनानी अक्षर का उपयोग दो अलग मात्राओं को समान नहीं बना देता।

क्रांति δ खगोलीय विषुवत-वृत्त से उत्तर में धनात्मक है। यहाँ घंटा कोण H स्थानीय याम्योत्तर के पश्चिम में धनात्मक है। ऋणात्मक H दिशा को उसके दैनिक वृत्त के पूर्वी हिस्से में और धनात्मक H पश्चिमी हिस्से में रखता है, समतुल्य सीमा-दिशाओं को छोड़कर।

हमारा दिगंश वास्तविक उत्तर से है, चुंबकीय उत्तर से नहीं। कुछ सॉफ्टवेयर दक्षिण को शून्य या बढ़ने की दूसरी दिशा लेते हैं। संख्या के साथ परंपरा भी लिखें। दूसरे निर्देशांक-नियम का सही परिणाम 180° अलग या विपरीत चिह्न वाला हो सकता है।

नाक्षत्र समय से स्थानीय घंटा कोण निकालें

US Naval Observatory के विवरण के अनुसार, Greenwich apparent sidereal time तथा RA को घंटों में और देशांतर को अंशों में रखने पर:

H = 15 × (GAST − RA) + λपूर्व

दूसरा तरीका है स्थानीय नाक्षत्र समय = GAST + λपूर्व/15 निकालना, फिर RA घटाकर प्राप्त कोणीय घंटों को अंशों में बदलना। दोनों में वही गणना हो रही है। अंशों में लिखे देशांतर को घंटों में लिखे समय में सीधे न जोड़ें। पहले इकाई समान करनी होगी।

काल्पनिक समय और देशांतर इनपुट से स्थानीय घंटा कोण
GAST: घंटेRA: घंटेपूर्व-धन देशांतर: अंशकच्चा H: अंशलपेटा H: अंश
810451515
810-45-75-75
23.5130367.57.5
66000
0120-180-180

पहली पंक्ति में GAST 8h, RA 10h और स्थान 45° पूर्व है। स्थानीय नाक्षत्र समय 11h है, इसलिए दिशा याम्योत्तर से एक कोणीय घंटा या 15° पश्चिम में है। वही पिंड और समय रखते हुए स्थान 45° पश्चिम कर दें तो H = −75° होगा। यह अंतर देशांतर से आया, पिंड का RA बदलने से नहीं।

तीसरी पंक्ति में कच्चा 367.5° लपेटने पर 7.5° है। यहाँ प्रदर्शन-सीमा −180° ≤ H < 180° है। ठीक सीमा पर −180° या +180° दोनों समतुल्य हैं, यदि चुनी परंपरा बताई जाए।

पूर्व, उत्तर और ऊपर के घटक बनाएँ

सदिश रूप में दिशाओं के चिह्न साफ दिखाई देते हैं और दिगंश का सही चतुर्थांश मिलता है। इकाई लंबाई वाली इनपुट दिशा के लिए लें:

E = −cos δ sin H
N = sin δ cos φ − cos δ cos H sin φ
U = sin δ sin φ + cos δ cos H cos φ

फिर h = atan2(U, √(E² + N²)) और A = atan2(E, N) लें। A को 0° ≤ A < 360° में रखें। अधिकतर भाषाओं में atan2(y, x) होता है, इसलिए दिगंश के लिए जानबूझकर पूर्व वाला घटक पहले और उत्तर वाला बाद में रखा है। अपनी गणित-लाइब्रेरी का क्रम जाँचें।

ऊँचाई का यही सूत्र sin h = sin δ sin φ + cos δ cos φ cos H के बराबर है। सदिश वाला रूप क्षैतिज दिशा भी बचाता है। केवल E/N का arctan लेने पर चतुर्थांश खो सकता है; समान अनुपात वाली विपरीत दिशाएँ अलग नहीं पहचानी जाएँगी।

त्रिकोणमितीय फलनों में अपेक्षित इकाई का ध्यान रखें। कोड में पहले अंश से रेडियन करें, फिर उलटे फलनों के परिणाम को अंशों में बदलें। यह अक्षों की दिशा बदलने की क्रिया है; इससे न वातावरण जुड़ता है, न प्रेक्षक का मूल अपने आप बदलता है।

अक्षांश 30° उत्तर और क्रांति 20° उत्तर की पूरी सारणी

φ = +30°, δ = +20°: बिना अपवर्तन की दिशा-सारणी
H: अंशऊँचाई h: अंशदिगंश A: अंशपूर्व Eउत्तर Nऊपर U
-180-40.0000000.0000000.0000000.766044-0.642788
-135-23.85552546.5964410.6644630.628430-0.404432
-909.84655272.5047590.9396930.2961980.171010
-4548.28396193.1040710.664463-0.0360330.746452
080.000000180.0000000.000000-0.1736480.984808
4548.283961266.895929-0.664463-0.0360330.746452
909.846552287.495241-0.9396930.2961980.171010
135-23.855525313.403559-0.6644630.628430-0.404432
180-40.0000000.0000000.0000000.766044-0.642788

H = 0° पर E शून्य और N ऋणात्मक है, इसलिए दिशा ठीक दक्षिण है। ऊँचाई 80° मिलती है। H = −45° पर E धनात्मक है और दिशा पूर्वी ओर है; +45° पर E ऋणात्मक और दिशा पश्चिमी ओर। दोनों ऊँचाइयाँ समान हैं क्योंकि cos(−H) = cos H, लेकिन दिगंश दोनों ओर का अंतर दिखाता है।

H = ±90° पर ऊँचाई लगभग +9.847° है, शून्य नहीं। याम्योत्तर से छह कोणीय घंटे दूर होना हमेशा उदय या अस्त का क्षण नहीं बताता। क्षितिज कहाँ कटेगा, यह क्रांति और प्रेक्षक के अक्षांश से भी तय होता है।

±180° पर इस मॉडल की ऊँचाई −40° और दिगंश 0° है। दोनों सिरों पर वही निचली याम्योत्तर-दिशा दोहराई गई है। ऋणात्मक ऊँचाई आदर्श क्षितिज के नीचे की वैध गणितीय दिशा है; उसका अर्थ उस स्थान पर पिंड का दिखाई देना नहीं।

ऊँचाई और क्षैतिज दिशा को साथ देखें

अक्षांश 30 अंश उत्तर और क्रांति 20 अंश उत्तर के स्थिर मॉडल में घंटा कोण माइनस 180 से प्लस 180 अंश: ऊपर ऊँचाई मध्य में 80 अंश और दोनों सिरों पर माइनस 40 अंश है; नीचे पूर्व और उत्तर के सदिश घटक दिशा के साथ बदलते हैं।
मूल गणितीय चित्र। घंटा कोण स्थिति का कोण है; क्षैतिज अक्ष नागरिक घड़ी या वास्तविक तारीख नहीं दिखाता। नीचे के घटक इकाई-रहित हैं।

ऊपर के पैनल में H = −180° से +180° तक 361 नमूने हैं। नीचे उन्हीं नमूनों पर E और N हैं। धनात्मक E पूर्व और ऋणात्मक E पश्चिम का घटक है। धनात्मक N उत्तर और ऋणात्मक N दक्षिण का घटक है। दोनों इकाई सदिश के बिना इकाई वाले संख्यात्मक हिस्से हैं।

नीचे दिगंश को 360° से 0° पर सीधी रेखा से जोड़ने के बजाय घटक दिखाए हैं। दोनों कोण एक ही उत्तर-दिशा का नाम हैं; संख्या में छलाँग पिंड के अचानक कूदने का संकेत नहीं होगी। इस मॉडल में घटक लगातार बदलते रहते हैं।

क्षैतिज अक्ष स्थानीय याम्योत्तर से कोणीय स्थिति है। इसे नागरिक घड़ी का कार्यक्रम बनाने के लिए युग या तारीख, नाक्षत्र समय और पिंड के बदलते विषुवतीय निर्देशांक चाहिए। खासकर वास्तविक चंद्र-प्रेक्षण में पूरे दिन के लिए RA तथा क्रांति स्थिर मान लेना उचित नहीं।

याम्योत्तर पर दिशा उत्तर, दक्षिण या ठीक सिर के ऊपर हो सकती है

याम्योत्तर, शीर्ष और अधोबिंदु के स्वतंत्र उदाहरण
φ (°)δ (°)H (°)h (°)A (°)
30-20040.000000180.000000
3020080.000000180.000000
3030090.000000अपरिभाषित
3060060.0000000.000000
30-30180-90.000000अपरिभाषित

पहली दो पंक्तियों में ऊपरी याम्योत्तर-दिशा शीर्ष-बिंदु से दक्षिण में है। क्रांति +60° और अक्षांश +30° होने पर वही दिशा उत्तर में है। इसलिए याम्योत्तर पार करना हर स्थान पर “ठीक दक्षिण” नहीं कहता। मान लेने की जगह उत्तर वाला घटक देखें।

φ = δ = +30° तथा H = 0° पर दिशा ठीक शीर्ष-बिंदु पर है। ऊँचाई 90° है, लेकिन दिगंश अपरिभाषित, क्योंकि क्षैतिज ओर इशारा करने की कोई दिशा बची नहीं। अधोबिंदु पर −90° ऊँचाई के साथ भी वही समस्या है। अपरिभाषित मान को सही उत्तर-दिशा वाले शून्य से अलग दिखाना चाहिए।

शीर्ष के पास दिशा में छोटा बदलाव दिगंश में बड़ा अंतर बना सकता है। यह निर्देशांक की विशेष सीमा है; आवश्यक नहीं कि पिंड बहुत तेजी से चला हो या दूरबीन में दोष हो। पूरा सदिश और ऊँचाई साथ देखने से संख्या का अर्थ साफ होता है।

अलग अक्षांशों पर वही घंटा कोण अलग दिशा देगा

δ = +20°, H = −45° स्थिर रखकर अक्षांश बदलें
φ (°)h (°)A (°)
-3023.85552546.596441
041.64114362.763687
3048.28396193.104071
6038.934359121.327185

इन पंक्तियों में क्रांति और घंटा कोण समान हैं। केवल प्रेक्षक का अक्षांश बदला है। हर प्रेक्षक का क्षितिज तल अलग है, इसलिए ऊँचाई और दिगंश दोनों बदलते हैं। दूसरे शहर का आकाश-स्क्रीनशॉट अपने स्थान पर देखने की सीधी दिशा नहीं बन जाता।

देशांतर और अक्षांश की भूमिकाएँ अलग हैं। देशांतर Greenwich नाक्षत्र समय से स्थानीय घंटा कोण बनाने में आता है; अक्षांश क्षितिज-घूर्णन में आता है। H पहले ही अपने स्थान के लिए निकाला गया हो तो ऊँचाई के सूत्र में देशांतर फिर जोड़ना उसी समायोजन को दो बार करना होगा।

पास के पिंड के लिए स्थान बदलने से लंबन के कारण इनपुट दिशा भी बदल सकती है। यहाँ की सारणी इनपुट दिशा स्थिर रखकर केवल क्षितिज के झुकाव का प्रभाव अलग दिखाती है। अतिरिक्त प्रेक्षक-विस्थापन को शामिल करने का दावा नहीं करती।

उलटी गणना से स्वतंत्र जाँच करें

उत्तर से घड़ी-दिशा वाले h और A से E = cos h sin A, N = cos h cos A तथा U = sin h फिर बनाएँ। विषुवतीय मात्राएँ वापस पाने के लिए:

sin δ = N cos φ + U sin φ
cos δ cos H = U cos φ − N sin φ
cos δ sin H = −E

पहले से δ और तीसरे तथा दूसरे व्यंजकों के atan2 से H लें। सामान्य दिशा-सारणी में वापस मिली क्रांति +20° तथा घंटा कोण मूल के बराबर, पूरा वृत्त जोड़ने-घटाने तक, होना चाहिए। खगोलीय ध्रुव पर H स्वयं अपरिभाषित है; इसलिए यह कोण-जाँच उस विशेष स्थिति से दूर करें।

E² + N² + U² = 1 भी जाँचें। घूर्णन इकाई सदिश की लंबाई बचाता है। इससे कुछ लिखने की गलतियाँ वही ऊँचाई-सूत्र दो बार चलाए बिना मिल सकती हैं। ये परीक्षण ज्यामिति की संगति बताते हैं; दिए गए खगोलीय निर्देशांक किसी तारीख के लिए कितने सही हैं, यह अलग जाँच है।

संदर्भ-फ्रेम और दृश्य सुधार अलग दर्ज करें

GAST apparent sidereal time है। इसे उसी उपयुक्त apparent संदर्भ के विषुवतीय निर्देशांकों के साथ जोड़ें। किसी कैटलॉग के J2000 mean निर्देशांक को बिना तैयारी apparent-of-date समय से मिला देना अलग मॉडलों का मिश्रण होगा। जरूरी उपयोग में पूर्वगमन, न्यूटेशन और अन्य तैयारी इस सरल स्थानीय घूर्णन से पहले आती है।

इसी तरह केवल अपना अक्षांश डालने से पृथ्वीकेंद्रीय चंद्र-दिशा अपने आप स्थानकेंद्रीय नहीं बनती। पास के पिंड के लिए लंबन का अलग हिसाब चाहिए हो सकता है। सूर्य या चंद्र के किनारे से संबंधित घटना में केंद्र अथवा किनारा और अर्धव्यास का नियम भी स्पष्ट चाहिए।

USNO की नौवहन-डेटा सहायता अपवर्तन, अर्धव्यास और लंबन को अलग सुधारों के रूप में सूचीबद्ध करती है। इससे हर योगदान अलग लिखने का महत्व समझ आता है। केवल “समायोजित ऊँचाई” कहने से यह पता नहीं चलता कि कौन-सा सुधार लगा। अपवर्तन का लेख ज्यामितीय और दृश्य ऊँचाई का अंतर खोलता है।

दोहराई जा सकने वाली दिशा-गणना का क्रम

  1. प्रेक्षण का क्षण, स्थान, RA, क्रांति और निर्देशांक-संदर्भ लिखें।
  2. मिलती नाक्षत्र-समय परंपरा लें और पूर्व-धन देशांतर स्पष्ट करें।
  3. घंटे तथा अंश अलग रखते हुए H निकालें और उसकी सीमा तय करें।
  4. E, N, U से atan2 द्वारा ऊँचाई और उत्तर से घड़ी-दिशा वाला दिगंश लें।
  5. सदिश लंबाई, उलटी गणना और अपरिभाषित दिगंश की संभावना जाँचें।
  6. प्रेक्षण से तुलना से पहले अपवर्तन, लंबन और किनारे के सुधार अलग लिखें।

नाक्षत्र समय का लेख समय-इनपुट का आधार देता है। स्थानीय सूर्य-घटनाओं के लिए तारीख और स्थान सहित सूर्य उपकरण देखें। यहाँ की सारणी ज्यामिति का अभ्यास है, उस तारीख-विशेष की गणना का विकल्प नहीं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

स्थानीय घंटा कोण क्या है?

यह स्थानीय याम्योत्तर से पिंड की कोणीय स्थिति है। यहाँ यह पश्चिम की ओर बढ़ता है। GAST और RA घंटों में हों तो H = 15 × (GAST − RA) + पूर्व-धन भौगोलिक देशांतर है।

यहाँ दिगंश किस दिशा से गिना गया है?

वास्तविक उत्तर से घड़ी की दिशा में: उत्तर 0°, पूर्व 90°, दक्षिण 180° और पश्चिम 270°। दूसरे सॉफ्टवेयर का शून्य या बढ़ने का क्रम अलग हो सकता है।

क्या 90° घंटा कोण हमेशा सूर्यास्त या चंद्रास्त है?

नहीं। यहाँ अक्षांश +30° और क्रांति +20° पर ±90° घंटा कोण में ऊँचाई लगभग +9.847° है। क्षितिज काटने का स्थान अक्षांश और क्रांति दोनों से तय होता है।

ठीक सिर के ऊपर दिगंश अपरिभाषित क्यों है?

शीर्ष-बिंदु पर क्षैतिज प्रक्षेप की लंबाई शून्य है, इसलिए उत्तर-पूर्व का कोई अनोखा bearing नहीं बचता। ऊँचाई 90° रहती है। अपरिभाषित दिगंश को सामान्य उत्तर-दिशा वाला शून्य न दिखाएँ।

क्या इस गणना में वायुमंडलीय अपवर्तन शामिल है?

नहीं। मॉडल इनपुट दिशा को स्थानीय क्षितिज-फ्रेम में घुमाता है। अपवर्तन, लंबन, केंद्र या किनारे का चुनाव और संदर्भ-फ्रेम की तैयारी अलग क्रियाएँ हैं।

क्या चित्र वास्तविक सूर्य या चंद्र की समय-सारणी है?

नहीं। इसमें क्रांति और अक्षांश स्थिर रखकर घंटा कोण के नमूने हैं। वास्तविक तारीख की सारणी को युग, नाक्षत्र समय और बदलते आकाशीय निर्देशांक भी चाहिए।

स्रोत और संदर्भ

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