सूर्यास्त पर सूर्य चपटा क्यों दिखता है? अपवर्तन समझें

वायुमंडलीय अपवर्तन से सौर चक्र की ऊँचाई कैसे घटती है, आठ गणनाओं, नौ दबाव-ताप उदाहरणों और मूल ग्राफ से समझें। मॉडल और वास्तविक चित्र अलग रखें।

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लेखन और प्रकाशन: Astrogyana

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सूर्यास्त के पास सूर्य चपटा क्यों दिखाई दे सकता है?

वायुमंडलीय अपवर्तन नीचे दिखाई दे रहे सूर्य के निचले किनारे को ऊपरी किनारे से अधिक ऊपर उठाता है। इससे दोनों के बीच दिखाई देने वाली खड़ी दूरी घटती है। इसलिए सौर प्रतिबिंब अंडाकार लग सकता है। सूर्य ने अचानक अपना वास्तविक आकार नहीं बदला। प्रभाव इस बात पर निर्भर है कि पूरे चक्र में अपवर्तन कितना बदलता है, केवल इस पर नहीं कि पूरा चित्र कितना ऊपर खिसका।

Atmospheric Optics इस असमान उठाव को समझाता है और बताता है कि असामान्य वायुमंडलीय परतें अधिक जटिल विकृतियाँ बना सकती हैं। यहाँ सरल मामला गणना करेंगे: घोषित कोणीय आकार का गोल सूर्य और प्रकाशित अपवर्तन सन्निकटन। मूल तालिकाएँ और ग्राफ खड़ी दिशा का संपीड़न दिखाते हैं; वे किसी विशेष सूर्यास्त का फोटो या पूर्वानुमान नहीं हैं।

ज्यामितीय और दिखाई देने वाली ऊँचाई अलग रखें

ज्यामितीय ऊँचाई वह दिशा है जहाँ वायुमंडल में मुड़ाव न हो तो पिंड होगा। प्रत्यक्ष ऊँचाई उस मुड़ाव के बाद दिखने वाली दिशा है। यहाँ के सामान्य स्थितियों वाले मॉडल में प्रत्यक्ष ऊँचाई अधिक है। ज्यामितीय ऊँचाई को h और धनात्मक अपवर्तन सुधार को R(h) लिखें। दोनों की इकाइयाँ समझना गणना का पहला चरण है।

R कोणीय मिनट और h अंश में हों तो प्रत्यक्ष ऊँचाई h + R(h)/60 होगी। एक कोणीय मिनट अंश का साठवाँ भाग है। भाग देने का यह चरण छोड़ने पर मामूली सुधार साठ गुना बड़ी गलती बन जाता है। यहाँ मिनट समय के मिनट नहीं, कोण की इकाई हैं।

सूर्य के दोनों किनारों की ज्यामितीय ऊँचाई अलग है, इसलिए उनके सुधार भी अलग निकालने होंगे। केंद्र में एक सुधार जोड़ने से बिंदु जैसे केंद्र की प्रत्यक्ष स्थिति मिलेगी; उससे अपने-आप फैले हुए चक्र की ऊँचाई नहीं मिलती। आगे के उदाहरणों का मुख्य विचार यही है।

असमान उठाव ऊँचाई बदलता है; समान उठाव नहीं

बिना अपवर्तन का खड़ा व्यास D₀ और ऊपरी तथा निचले किनारे के सुधार Rᵤ तथा Rₗ लें। सभी कोण एक ही इकाई में हों तो D = D₀ + Rᵤ − Rₗ मिलेगा। निचला सुधार अधिक हो तो अंतर ऋणात्मक है और दिखाई देने वाली ऊँचाई कम होगी।

केवल समझाने के लिए काल्पनिक अंक लें: D₀ = 32′, Rₗ = 24′ और Rᵤ = 20′। दोनों किनारे ऊपर गए, लेकिन निचला चार कोणीय मिनट अधिक गया। प्रत्यक्ष खड़ा व्यास 28′ होगा, यानी 12.5% कमी। व्यास से घटने वाला मान चार मिनट का अंतर है, पूरे 24′ नहीं।

दोनों सुधार 20′ होते तो इस सरल रचना में पूरा चक्र ऊपर जाता, पर उसका खड़ा व्यास नहीं घटता। इसके उलट निचला किनारा अधिक ऊपर उठने को व्यास में उसका सुधार जोड़ना नहीं कह सकते। जोड़ या घटाव तय करने से पहले दोनों सिरों का स्थान बनाना उपयोगी है।

घोषित इकाइयों वाला दोहराया जा सकने योग्य सन्निकटन

ब्रिटिश एस्ट्रोनॉमिकल एसोसिएशन दबाव और ताप के गुणकों सहित Sæmundsson का सन्निकटन देती है। इस उदाहरण में उसे इसी रूप में लिया गया है:

R(h) = 1.02 × cot[h + 10.3/(h + 5.11)] × (P/101) × [283/(273 + T)]।

R कोणीय मिनट में, h और cot के भीतर का कोण अंश में, P दबाव kPa में और T ताप °C में है। cot का अर्थ 1/tan है। प्रोग्रामिंग भाषा में tan अक्सर रेडियन लेता है, इसलिए कोष्ठक का कोण पहले बदलें। यह प्रकाशित अनुभवाधारित सन्निकटन है; मापे हुए पूरे वायुमंडल में किरण का रास्ता निकालने वाली पूर्ण गणना नहीं।

ज्यामितीय सौर व्यास 32′ स्थिर रखें। हर किनारा केंद्र से 16′ = 0.266666…° दूर होगा। केंद्र की ऊँचाई h꜀ हो तो निचले किनारे पर h꜀ − 16/60 और ऊपरी पर h꜀ + 16/60 का मान लें। यहाँ केंद्र 0.5° से 10° तक है; सबसे नीचे का ज्यामितीय किनारा भी क्षितिज से ऊपर रहता है। अभ्यास को गायब होते किनारों या क्षितिज के नीचे तक नहीं फैलाया गया है।

1° वाले उदाहरण की पूरी गणना

h꜀ = 1°, P = 101 kPa और T = 10°C चुनें। नीचे और ऊपर के ज्यामितीय किनारे लगभग 0.733333° तथा 1.266667° पर होंगे। चुने हुए सन्निकटन में इनके अपवर्तन सुधार 23.3991′ और 20.2616′ मिलते हैं। पहले ऊँचाई अंश में रखें और सुधार को साठ से भाग देकर ही जोड़ें।

निचली प्रत्यक्ष ऊँचाई लगभग 0.733333 + 23.3991/60 = 1.123318° है। ऊपरी लगभग 1.266667 + 20.2616/60 = 1.604360° है। घटाने पर करीब 0.481041°, यानी 28.8625′ मिलता है। यही उत्तर सीधे 32 + 20.2616 − 23.3991 से भी निकलता है।

घोषित 32′ ज्यामितीय व्यास के सापेक्ष कमी लगभग 9.80% है। यह मॉडल से निकला अंक है। किसी शहर का मापन, हर सूर्यास्त का दावा या सूर्य का भौतिक व्यास इतने प्रतिशत बदलने का कथन नहीं। अंतिम दशमलव तक समानता चाहें तो बीच के मान जल्दी गोल न करें।

एक ही मॉडल वायुमंडल में आठ ऊँचाइयाँ

आठ मूल गणनाएँ: 32′ का ज्यामितीय व्यास, 101 kPa और 10°C; सारे R और D कोणीय मिनट में
केंद्र h, अंशनिचला Rऊपरी Rदिखने वाली ऊँचाई Dऊँचाई में कमी
0.527.031423.182128.150712.03%
1.023.399120.261628.86259.80%
1.520.438017.882929.44487.98%
2.018.027015.933029.90606.54%
3.014.418312.971130.55284.52%
5.010.07729.299631.22252.43%
8.06.79636.413531.61711.20%
10.05.54275.278731.73600.83%

0.5° केंद्र पर मॉडल की प्रत्यक्ष ऊँचाई करीब 28.1507′ है, जबकि 10° पर करीब 31.7360′ है। दोनों किनारों के सुधारों का अंतर घटने पर व्यास बिना अपवर्तन के मान के पास आता है। अंतर छोटा होने पर भी दोनों सुधार धनात्मक हो सकते हैं। इसलिए छोटा आकार-परिवर्तन और छोटा कुल उठाव एक ही बात नहीं।

आखिरी दो स्तंभ ढककर किनारों के सुधार से उनकी गणना करें। अंतिम दिखे अंक तक परिणाम मिलाने के लिए बिना गोल किए मान चाहिए। चार दशमलव अंकगणित का विवरण देते हैं; वे यह नहीं कहते कि स्थानीय हवा या चित्र के किनारों की जानकारी उतनी सटीक है। माप की अनिश्चितता को अंकगणित की सटीकता से अलग रखें।

तालिका केवल खड़ा व्यास निकालती है। इसमें क्षैतिज अपवर्तन, पूरा प्रत्यक्ष दीर्घवृत्त, चमक या रंग नहीं निकाले गए। ऊँचाई को 32′ से भाग देने पर घोषित ज्यामितीय व्यास के सापेक्ष अनुपात मिलता है, पूरी तरह गणित से मिली प्रत्यक्ष चौड़ाई के सापेक्ष अनुपात नहीं।

इस सूत्र में दबाव और ताप बदलने का असर

एक ही 1° केंद्र-ऊँचाई पर नौ मॉडल स्थितियाँ; ये वास्तविक मौसम का पूर्वानुमान नहीं
दबाव P, kPaताप T, °Cदिखने वाली ऊँचाई, मिनटऊँचाई में कमी
90029.10189.06%
901029.20428.74%
903029.38878.16%
101028.747510.16%
1011028.86259.80%
1013029.06969.16%
105028.618710.57%
1051028.738210.19%
1053028.95359.52%

सूत्र में सुधार P/101 और 283/(273 + T) के साथ बदलता है। निश्चित ज्यामितीय ऊँचाई पर दबाव कम करने से दोनों किनारों के सुधार का मॉडल-अंतर घटता है। ताप बढ़ाने से भी बताए गुणक के कारण अंतर कम होता है। तब प्रत्यक्ष खड़ा व्यास 32′ के पास होगा। यह सूत्र के भीतर नियंत्रित बदलाव का परिणाम है।

दबाव की इकाई सही रखें। 101 kPa का अर्थ 1,010 hPa है। kPa माँगने वाली जगह 1,010 लिखने से दबाव गुणक दस गुना बड़ा हो जाएगा। ताप वाले भाग में सूत्र का दिया 273 स्थिरांक है; तालिका इसी सन्निकटन को दोहराती है, चुपचाप उसका दूसरा संस्करण नहीं लगाती।

सतह के दबाव और ताप की एक जोड़ी हवा का पूरा ऊर्ध्वाधर ताप-विन्यास नहीं बताती। ये गुणक ताप-व्युत्क्रमण, परतदार मरीचिका या दाँतेदार सौर किनारा दोबारा नहीं बना सकते। नौ पंक्तियाँ सूत्र में चुने हुए परिवर्तन हैं, वास्तविक वातावरण की नौ सुनिश्चित तस्वीरें नहीं। इसे मौसम की गारंटी की तरह पढ़ने से मॉडल का उद्देश्य बदल जाता है।

प्रत्यक्ष खड़े व्यास का मूल ग्राफ

0.5 से 10 अंश ज्यामितीय केंद्र-ऊँचाई पर सूर्य की तीन गणितीय ऊँचाई-वक्र रेखाएँ, सभी 32 कोणीय मिनट से नीचे; घोषित मॉडल में कम दबाव या अधिक ताप से खड़ा संपीड़न घटता है।
प्रकाशित Sæmundsson सन्निकटन, स्थिर 32′ ज्यामितीय चक्र और तीन घोषित दबाव-ताप जोड़ियों से मूल गणना। हर वक्र में 191 नमूने हैं। मॉडल केवल खड़ी ऊँचाई का है, स्थानीय मौसम का पूर्वानुमान नहीं।

क्षैतिज धुरी को ज्यामितीय केंद्र-ऊँचाई पढ़ें, घड़ी का समय नहीं। काली संदर्भ रेखा बिना अपवर्तन का 32′ व्यास है। केंद्र ऊपर होने पर वक्र उसके पास आते हैं। वक्रों का अंतर चुने हुए गुणकों को समझाता है; वह एक वास्तविक सूर्यास्त में बदलता मौसम नहीं दिखाता।

पहला बिंदु 0.5° है, पारंपरिक सूर्यास्त का क्षण नहीं। किनारा गायब होने तक इन्हें बढ़ाने वाले ग्राफ में क्षितिज, सन्निकटन की लागू सीमा और वातावरण का अतिरिक्त विचार चाहिए। चित्र को सही समझने के लिए उसका घोषित क्षेत्र याद रखना भी जरूरी है। खाली 0°–0.5° भाग में मन से परिणाम न जोड़ें।

चपटापन और सूर्यास्त का समय जुड़े हुए अलग प्रश्न हैं

हांगकांग वेधशाला क्षितिज के पास प्रचलित छूट में करीब 16′ सौर अर्धव्यास और 34′ औसत अपवर्तन बताती है। दोनों मिलकर प्रत्यक्ष ऊपरी किनारा क्षितिज पर होने पर ज्यामितीय सौर केंद्र को लगभग −50′ पर रखते हैं। यह औसत स्थितियों वाला समय-निर्धारण नियम है, हर प्रेक्षक के एक जैसे चक्र देखने की भविष्यवाणी नहीं।

पूरे 50′ को केवल अपवर्तन मानकर उसमें 16′ अर्धव्यास फिर न जोड़ें। संयुक्त छूट में अर्धव्यास पहले से है। यह सामान्य छूट हमारी तालिका की तरह क्षितिज से ऊपर दोनों किनारों पर अलग सूत्र लगाने वाली क्रिया भी नहीं है। मिलते-जुलते अंक होने से दोनों गणनाओं की परिभाषा समान नहीं हो जाती।

विषुव और दिनमान वाला लेख समय का परिणाम खोलता है, जबकि भोर और सूर्योदय अन्य सीमाएँ अलग करता है। Astrogyana के स्थानीय सूर्य समय दैनिक संदर्भ देते हैं। सूची में दिया सूर्यास्त-समय दिखाई देने वाले चक्र के आकार का पूर्वानुमान नहीं है।

किसी पहले से उपलब्ध चित्र में क्या जाँचें?

  1. उचित सौर-अवलोकन व्यवस्था से लिया मौजूदा चित्र लें; मापन दोहराने के लिए सूर्य को घूरकर न देखें।
  2. जाँचें कि क्षितिज या बादल ने निचले किनारे का कोई हिस्सा तो नहीं काटा।
  3. चित्र को क्षैतिज और खड़ी दिशाओं में अलग अनुपात से खींचा गया हो तो उसे पहचानें।
  4. मूल पिक्सेल-अनुपात बचाएँ और लेंस-सुधार या आकार बदलने का विवरण रखें।
  5. दोनों किनारे एक समान तरीके से मापें; सुविधाजनक पिक्सेल चुनने के बजाय धुंधलापन, अधिक चमक और अनिश्चितता लिखें।
  6. मापे संपीड़न की तुलना मॉडल के सीमित प्रश्न से करें, उससे पूरा मौसम निकालने का दावा न करें।

कटा हुआ निचला किनारा अधूरी जानकारी है, पूरा व्यास नहीं। कैमरे की अधिक चमक, फोकस और वायुमंडलीय अशांति सीमा को अविश्वसनीय भी बना सकते हैं। प्रभावशाली अंडाकार चित्र समझाने के लिए उपयोगी हो सकता है, पर सटीक संख्यात्मक जाँच के लिए जरूरी नहीं उपयुक्त हो।

NASA के सौर-अवलोकन निर्देश अपनाएँ। साधारण धूप के चश्मे सीधे सूर्य देखने के लिए उपयुक्त नहीं हैं। प्रकाशीय उपकरण में सामने सही सौर फिल्टर चाहिए; दूरबीन के पीछे ग्रहण-चश्मा पहन लेने से वह व्यवस्था सुरक्षित नहीं होती। उचित ढंग से लिए पुराने चित्र का अध्ययन करने पर पाठक को इस लेख के लिए अपनी ओर से अवलोकन व्यवस्था बनाने की जरूरत नहीं है।

आकार, रंग और बड़ा महसूस होना अलग रखें

खड़ा कोणीय व्यास घटने का कथन प्रतिबिंब की ज्यामिति का है। लाल रंग वातावरण से होकर पहुँची रोशनी से जुड़ता है। क्षितिज का सूर्य बड़ा महसूस होने की अनुभूति अलग बोध-संबंधी प्रश्न है। एक अवलोकन को बाकी दोनों का पूरा कारण बताना सही नहीं। “बड़ा लगता है” और “खड़ी ऊँचाई कम मापी गई” साथ भी हो सकते हैं।

असामान्य ताप-परतें इस सुचारु मॉडल से अधिक जटिल आकार बना सकती हैं। ऊँचे स्थान के प्रेक्षक की वातावरण से गुजरती दृष्टि-रेखा भी अलग है। इसलिए ग्राफ हर फोटो का कारण तय नहीं कर सकता। इसका भरोसेमंद पाठ सीमित है: दोनों किनारों के सुधार मिलाएँ, इकाई और चिह्न बचाएँ तथा गणितीय प्रतिबिंब को भौतिक सूर्य से अलग रखें।

पूरक ज्यामितीय उदाहरण के लिए शून्य छाया दिवस सूर्य को क्षितिज के बजाय खमध्य के पास देखता है। दोनों स्थितियाँ दिखाती हैं कि अवलोकन के मॉडल में सूर्य कहाँ है और कौन-सा प्रभाव निकालना है, यह बताना क्यों जरूरी है। सही प्रश्न तय होने पर ही संख्या का अर्थ स्पष्ट होता है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

क्या सूर्यास्त पर सूर्य वास्तव में अंडाकार हो जाता है?

यहाँ बताया अचानक दिखने वाला चपटापन वायुमंडलीय प्रतिबिंब की विकृति है। असमान अपवर्तन निचले किनारे को ऊपरी से अधिक उठाता है। इसका अर्थ सूर्य का भौतिक आकार आपके क्षितिज के पास पहुँचते ही बदलना नहीं है।

निचला किनारा अधिक ऊपर क्यों उठता है?

सामान्य क्षितिज-समीप स्थितियों में कम ज्यामितीय ऊँचाई पर अपवर्तन बढ़ता है। इसलिए निचले सौर किनारे को अधिक सुधार मिलता है। वास्तविक हवा की परतें यहाँ के सरल सुचारु मॉडल से अधिक जटिल व्यवहार बना सकती हैं।

क्या अधिक ऊपर उठना हमेशा अधिक चपटापन है?

अपने-आप नहीं। खड़ा संपीड़न दोनों किनारों के सुधारों के अंतर पर निर्भर है। समान सुधार दोनों को बराबर ऊपर ले जाएगा और इस रचना में उनके बीच की दूरी नहीं बदलेगी।

क्या 9.80% कमी हर सूर्यास्त का सही मान है?

नहीं। वह 1° ज्यामितीय केंद्र, 32′ चक्र, 101 kPa और 10°C वाले हमारे उदाहरण का मान है, जो एक प्रकाशित सन्निकटन से निकला है। स्थानीय अवलोकन उसकी ज्यामिति, वातावरण और मापन-गुणवत्ता पर निर्भर करेगा।

क्या ग्राफ से सूर्यास्त का समय निकाल सकते हैं?

नहीं। क्षैतिज धुरी ज्यामितीय ऊँचाई है, समय नहीं, और वक्र 0.5° से शुरू होते हैं। समय के लिए तारीख, स्थान, समय व्यवस्था और क्षितिज की परिभाषा चाहिए। यह ग्राफ केवल प्रत्यक्ष खड़ा व्यास निकालता है।

क्या धुंधला या लाल सूर्य सीधे देखना सुरक्षित है?

कम चमक दिखाई देना सौर-अवलोकन की सुरक्षा का परीक्षण नहीं है। उचित सौर फिल्टर के निर्देश अपनाएँ और बिना फिल्टर के प्रकाशीय उपकरण के साथ सामान्य ग्रहण-चश्मा न मिलाएँ। इस तुलना-अभ्यास के लिए पहले से उचित तरीके से लिया चित्र पर्याप्त है।

स्रोत और संदर्भ

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