पाराशरी D2 होरा की राशि कैसे निकालें?
यहाँ समझाई गई सूर्य–चंद्र की दो-राशि पद्धति में प्रत्येक जन्मराशि को 15° के दो अर्धभागों में बाँटते हैं। विषम क्रमांक की राशि में पहला भाग सूर्य की होरा होकर सिंह में और दूसरा चंद्र की होरा होकर कर्क में जाता है। सम क्रमांक की राशि में क्रम उलट जाता है। ठीक 15° से दूसरा अर्धभाग शुरू होता है।
यह लेख दिए हुए देशांतर से D2 की राशि निकालने की विधि है। इसमें बारह राशियों की पूरी सारणी, बीस मौलिक जाँच-उदाहरण और अनिश्चित इनपुट को परखने की कार्यपत्रिका है। गणना एक पारंपरिक ज्योतिषीय नियम का परिणाम देती है; उससे किसी फलादेश का सही होना अपने आप सिद्ध नहीं होता।
पहले तय करें कि किस होरा-पद्धति की तुलना हो रही है
बृहत्पाराशरहोराशास्त्र के छठे अध्याय की होरा-चर्चा में राशि का आधा भाग और विषम–सम राशियों में सूर्य–चंद्र के क्रम का उलटना मिलता है। प्रचलित दो-राशि विन्यास में सूर्य की होरा का स्थान सिंह और चंद्र की होरा का स्थान कर्क लिया जाता है। पूरे लेख में यही घोषित नियम इस्तेमाल किया गया है।
नीचे संदर्भित पी. वी. आर. नरसिंह राव का लेख इस परिचित विन्यास के साथ दूसरी होरा-विधियों पर भी चर्चा करता है। इसलिए केवल “D2” लिखा देखना किसी सॉफ्टवेयर की पूरी सेटिंग पहचान लेना नहीं है। बारह राशियाँ दिखाने वाला दूसरा चार्ट कोई अलग घोषित विधि लगा सकता है; उसे बिना जाँच के अंकगणित की भूल न कहें।
तुलना से पहले वास्तविक नियम लिख लें। राशि-चक्र का आधार, लागू होने पर अयनांश और मूल देशांतर भी समान रखें। उसके बाद जन्मराशि, अर्धभाग, होरा-स्वामी और अंतिम राशि की तुलना करें। बीच के चरण न देखने पर केवल दो अलग अंतिम चित्र मिलेंगे, पर अंतर शुरू कहाँ हुआ यह पता नहीं चलेगा।
दो अर्धभाग, चौबीस खंड और दो गंतव्य राशियाँ
एक राशि 30° की है। उसका पहला अर्धभाग 0° से 15° के ठीक पहले तक और दूसरा 15° से 30° के ठीक पहले तक है। एक अर्धभाग में 900 कोणीय मिनट या 54,000 कोणीय सेकंड होते हैं। यहाँ मिनट और सेकंड कोण की इकाइयाँ हैं, घड़ी का समय नहीं।
बारह जन्मराशियों में कुल चौबीस अर्धभाग मिलते हैं। इस विशेष विन्यास में वे केवल कर्क या सिंह में जाते हैं। इसलिए “चौबीस खंड” का अर्थ चौबीस भावों की कुंडली नहीं है। इसी प्रकार दो गंतव्य राशियों का अर्थ यह नहीं कि मूल आकाशीय देशांतर में अब बाकी दस राशियाँ नहीं रहीं।
सूर्य और चंद्र इन दो प्रकार की होरा के स्वामी हैं। किसी भी ग्रह के देशांतर या गणना से प्राप्त लग्न-देशांतर को इसी नियम से वर्गीकृत किया जा सकता है। सूर्य की होरा मिलने का अर्थ इनपुट ग्रह का सूर्य होना नहीं है। चंद्र की होरा भी उस ग्रह के पास वास्तविक चंद्रमा होने का कथन नहीं है।
बारह जन्मराशियों के लिए पूरी सारणी
| जन्मराशि | क्रमांक | 0° ≤ d < 15° | 15° ≤ d < 30° |
|---|---|---|---|
| मेष | 1 | सूर्य → सिंह | चंद्र → कर्क |
| वृषभ | 2 | चंद्र → कर्क | सूर्य → सिंह |
| मिथुन | 3 | सूर्य → सिंह | चंद्र → कर्क |
| कर्क | 4 | चंद्र → कर्क | सूर्य → सिंह |
| सिंह | 5 | सूर्य → सिंह | चंद्र → कर्क |
| कन्या | 6 | चंद्र → कर्क | सूर्य → सिंह |
| तुला | 7 | सूर्य → सिंह | चंद्र → कर्क |
| वृश्चिक | 8 | चंद्र → कर्क | सूर्य → सिंह |
| धनु | 9 | सूर्य → सिंह | चंद्र → कर्क |
| मकर | 10 | चंद्र → कर्क | सूर्य → सिंह |
| कुंभ | 11 | सूर्य → सिंह | चंद्र → कर्क |
| मीन | 12 | चंद्र → कर्क | सूर्य → सिंह |
क्रमांक मेष को एक मानकर चलता है। विषम राशियाँ 1, 3, 5, 7, 9 और 11 हैं; सम राशियाँ 2, 4, 6, 8, 10 और 12। यह चर, स्थिर और द्विस्वभाव का वर्गीकरण नहीं है। इसका विषम तारीख, दिन–रात या चार्ट खोलने के समय से भी संबंध नहीं है।
एक के बाद दूसरी पंक्ति में क्रम बदलता है। मेष की शुरुआत सूर्य से, वृषभ की चंद्र से और मिथुन की फिर सूर्य से होती है। प्रत्येक राशि का वाक्य अलग याद करने के बजाय यह अदलता क्रम समझने से हाथ की गणना सरल होती है।
पूरे देशांतर से गणना के पाँच चरण
- पूरा देशांतर L, 0° ≤ L < 360° के दायरे में लाएँ। पूरा 360° चक्र फिर 0° पर लौटता है।
- जन्मराशि पहचानें और उसके भीतर बचा कोण d निकालें, जहाँ 0° ≤ d < 30° है।
- d < 15° होने पर पहला और अन्यथा दूसरा अर्धभाग चुनें।
- जन्मराशि के एक से शुरू होने वाले क्रमांक के अनुसार विषम या सम वाला सूर्य–चंद्र नियम लगाएँ।
- सूर्य की होरा को सिंह और चंद्र की होरा को कर्क में रखें; मूल देशांतर भी साथ लिखें।
प्रोग्राम में राशि-सूचक s यदि शून्य से शुरू हो, तो मेष = 0 होगा। ऐसी स्थिति में सम s का अर्थ विषम क्रमांक वाली जन्मराशि है। “d < 15” और “s सम है” दोनों कथन एक ही सत्य-मूल्य रखते हों तो सूर्य की होरा मिलती है। शून्य और एक से शुरू होने वाले क्रम का यह अंतर भूलने पर पूरा परिणाम उलट सकता है।
दो उदाहरण: तुला 26°45′ और वृश्चिक 11°45′
एक काल्पनिक पूरा देशांतर 206°45′ लें। यह सातवीं राशि तुला में आता है और राशि के भीतर d = 26°45′ बचता है। तुला विषम क्रमांक की राशि है और कोण उसके दूसरे अर्धभाग में है। इसलिए चंद्र की होरा और अंतिम D2 राशि कर्क मिलेगी।
अब पूरा देशांतर 221°45′ लें। यह आठवीं राशि वृश्चिक में 11°45′ है। वृश्चिक सम क्रमांक का है और कोण पहले अर्धभाग में है। यहाँ भी चंद्र की होरा तथा कर्क मिलता है। दोनों मूल देशांतर 15° दूर हैं, फिर भी सारणी के अलग रास्तों से एक ही होरा-प्रकार में पहुँचते हैं।
लिखावट की एक छोटी जाँच भी करें: 26°45′ का दशमलव रूप 26.75° है, 26.45° नहीं। पैंतालीस कोणीय मिनट को साठ से भाग देने पर 0.75° मिलता है। मूल अंश–मिनट और दशमलव रूप दोनों साथ लिखने से ऐसी गलती जल्दी दिख जाती है।
बीस सीमा-जाँच: मध्यबिंदु, राशि और पूरा चक्र
| पूरा देशांतर L | जन्मराशि | राशि में d | अर्धभाग | होरा-स्वामी | D2 राशि |
|---|---|---|---|---|---|
| 0°00′00″ | मेष | 0°00′00″ | 1 | सूर्य | सिंह |
| 14°59′59″ | मेष | 14°59′59″ | 1 | सूर्य | सिंह |
| 15°00′00″ | मेष | 15°00′00″ | 2 | चंद्र | कर्क |
| 29°59′59″ | मेष | 29°59′59″ | 2 | चंद्र | कर्क |
| 30°00′00″ | वृषभ | 0°00′00″ | 1 | चंद्र | कर्क |
| 44°59′59″ | वृषभ | 14°59′59″ | 1 | चंद्र | कर्क |
| 45°00′00″ | वृषभ | 15°00′00″ | 2 | सूर्य | सिंह |
| 59°59′59″ | वृषभ | 29°59′59″ | 2 | सूर्य | सिंह |
| 60°00′00″ | मिथुन | 0°00′00″ | 1 | सूर्य | सिंह |
| 74°59′59″ | मिथुन | 14°59′59″ | 1 | सूर्य | सिंह |
| 75°00′00″ | मिथुन | 15°00′00″ | 2 | चंद्र | कर्क |
| 89°59′59″ | मिथुन | 29°59′59″ | 2 | चंद्र | कर्क |
| 90°00′00″ | कर्क | 0°00′00″ | 1 | चंद्र | कर्क |
| 105°00′00″ | कर्क | 15°00′00″ | 2 | सूर्य | सिंह |
| 206°45′00″ | तुला | 26°45′00″ | 2 | चंद्र | कर्क |
| 221°45′00″ | वृश्चिक | 11°45′00″ | 1 | चंद्र | कर्क |
| 344°59′59″ | मीन | 14°59′59″ | 1 | चंद्र | कर्क |
| 345°00′00″ | मीन | 15°00′00″ | 2 | सूर्य | सिंह |
| 359°59′59″ | मीन | 29°59′59″ | 2 | सूर्य | सिंह |
| 360°00′00″ | मेष | 0°00′00″ | 1 | सूर्य | सिंह |
पहली तीन पंक्तियाँ मेष की 15° सीमा अलग करके दिखाती हैं। 14°59′59″ और 15°00′00″ में केवल एक कोणीय सेकंड है, लेकिन दोनों अलग अर्धभाग में हैं। यही जाँच वृषभ में दोहराएँ: सीमा का आकार वही है, पर सूर्य–चंद्र का क्रम उलट जाता है।
345° के आसपास की पंक्तियाँ मीन के दूसरे अर्धभाग को जाँचती हैं, इसलिए सारे उदाहरण केवल मेष तक सीमित नहीं हैं। अंतिम पंक्ति ठीक 360° को मेष 0° में लौटाती है। इससे चक्र में वापस लाने की गलती और अर्धभाग के नियम की गलती अलग पहचानी जा सकती हैं। ये गणना के लिए बनाए हुए निर्देशांक हैं, वास्तविक जन्मकुंडलियों का संग्रह नहीं।
जन्मराशि बदलने पर भी D2 राशि वही रह सकती है
मेष 29°59′59″ चंद्र की होरा में है। एक कोणीय सेकंड आगे वृषभ 0°00′00″ आता है और वह भी चंद्र की होरा में है। जन्मराशि और अर्धभाग का क्रमांक बदल गए, लेकिन अंतिम D2 राशि कर्क ही रही।
अगली सीमा पर वृषभ का अंत सूर्य की होरा में और मिथुन की शुरुआत भी सूर्य की होरा में होती है। इसलिए दोनों ओर सिंह रहता है। बदलते हुए विषम–सम क्रम के कारण हर जन्मराशि-सीमा पर यही संरचना है, मीन से मेष पर भी। इसके विपरीत किसी राशि के भीतर 15° पार करने पर गंतव्य राशि बदलती है।
दो-राशि नियम की जाँच में यह विशेषता उपयोगी है। इससे बाकी कुंडली में जन्मराशि के परिवर्तन को अनदेखा नहीं करना चाहिए। स्थिर D2 परिणाम केवल इस विशेष वर्गीकरण की स्थिरता बताता है; उसी इनपुट-सीमा पर दूसरे गणितीय या ज्योतिषीय घटक बदल सकते हैं।
अनिश्चित इनपुट का पूरा अंतराल देखें
| जन्म देशांतर का अंतराल | क्या बदलता है? | संभव D2 राशियाँ |
|---|---|---|
| मेष 10°00′00″ ± 30″ | पहले अर्धभाग में रहता है | सिंह |
| मेष 14°59′50″ ± 20″ | 15° सीमा पार होती है | सिंह, कर्क |
| मेष 29°59′50″ ± 20″ | मेष से वृषभ; D2 वही | कर्क |
दूसरा अंतराल मेष 14°59′30″ से 15°00′10″ तक जाता है। उसमें दोनों होरा-प्रकार संभव हैं। केवल बीच के मान का परिणाम लिख देने से यह तथ्य छिप जाएगा कि उपलब्ध इनपुट दूसरा गंतव्य भी स्वीकार करता है।
तीसरा अंतराल वृषभ में प्रवेश करता है, फिर भी पूरे अंतराल में चंद्र की होरा रहती है। इसलिए “सीमा के पास” कहना पर्याप्त नहीं; किस सीमा की बात हो रही है, यह भी लिखना होगा। जन्मराशि का किनारा और होरा का 15° मध्यबिंदु एक जैसे व्यवहार नहीं करते। सारणी में दोनों अंतिम बिंदु शामिल हैं और कोणीय अनिश्चितता काल्पनिक है; यह किसी जन्मसमय की विश्वसनीयता का अनुमान नहीं है।
मान लें स्क्रीन 14°59′59.6″ को गोल करके 15°00′00″ दिखा रही है। अंदर का मूल मान अभी मध्यबिंदु से नीचे है। उपलब्ध बिना गोल किए मान से गणना करें और प्रदर्शित सटीकता अलग बताएँ। परिणाम में अधिक दशमलव जोड़ने से मूल रिकॉर्ड में अनुपस्थित सटीकता पैदा नहीं हो जाती।
पूरे देशांतर को दो से गुणा करना अलग विधि क्यों है?
वृषभ 7°30′ लें, जिसका पूरा देशांतर 37.5° है। यहाँ की विधि में यह सम राशि का पहला अर्धभाग है, इसलिए चंद्र की होरा और कर्क मिलता है। पूरे देशांतर के दूसरे हार्मोनिक में 2 × 37.5° mod 360° = 75° आता है, जो मिथुन में है।
हार्मोनिक में मेष के दो आधे भाग क्रमशः मेष और वृषभ, फिर वृषभ के दो भाग मिथुन और कर्क में जाते हैं। इस प्रकार बारहों गंतव्य राशियाँ आती हैं। दोनों विधियाँ जन्मराशि के आधे भाग बनाती हैं, फिर भी एक को दूसरी के स्थान पर चुपचाप नहीं लगाया जा सकता।
यह लेख अंतिम राशि बताता है; उस राशि के भीतर परिवर्तित अंश, भाव-निर्माण या ग्रहबल की पूरी विधि नहीं देता। किसी दूसरे चार्ट में ये अतिरिक्त आँकड़े हों तो उसके नियम अलग से प्राप्त करें। केवल एक ही D2 नाम देखकर सभी स्तंभों की गणना समान मान लेना उचित तुलना नहीं होगी।
जन्मकुंडली की D2 होरा और दैनिक ग्रह-होरा का अंतर
दैनिक होरा-सारणी दिन और रात के समय-अंतरालों को ग्रह-घंटों में बाँटती है तथा उनके स्वामी क्रम से रखती है। उसके लिए स्थान, तारीख और स्थानीय सूर्योदय–सूर्यास्त की सीमाएँ चाहिए। दैनिक होरा पढ़ने वाला लेख उस समय-आधारित गणना को समझाता है।
D2 होरा किसी ग्रह के राशि-देशांतर और जन्मराशि के अर्धभाग से शुरू होती है। वह यह नहीं पूछती कि अभी कौन-सी ग्रह-होरा चल रही है। दैनिक कैलेंडर की तारीख बदलना पहले से दिए हुए देशांतर का D2 वर्गीकरण बदलने की विधि नहीं है।
साझा शब्द के कारण खोज में भ्रम हो सकता है। राशि-विभाजन पूछते समय “D2 कुंडली” जोड़ें और समय-अंतराल पूछते समय “दैनिक होरा” या “ग्रह-घंटा” लिखें। इनपुट की इकाई सामने रखने से अधिकांश भ्रम तुरंत स्पष्ट हो जाता है।
इस गणना से क्या पता चलता है, और क्या नहीं?
होरा-कुंडली की पारंपरिक व्याख्या संसाधन और धन से जोड़ी जाती है। यह व्याख्यात्मक संबंध गणितीय परिणाम से अलग है। केवल कर्क या सिंह मिल जाना किसी व्यक्ति की आय, खर्च करने की प्रवृत्ति या भविष्य की परिस्थिति स्थापित नहीं करता।
अनेक मूल देशांतर इन दो में से किसी एक राशि में जाते हैं। इसलिए D2 में एक ही राशि में दिखते दो ग्रह जन्म-आकाश में एक-दूसरे के पास हों, यह आवश्यक नहीं। उस समानता को मापी हुई भौतिक युति न कहें। मूल देशांतर सुरक्षित रखें और जन्मकुंडली का संबंध अलग देखें।
इस कार्यपत्रिका का उपयोग पुनः जाँच सकने योग्य गणना है: दूसरा पाठक वही इनपुट और घोषित नियम लेकर आपका वर्गीकरण जाँच सके। यह धन का निर्णय लेने की विधि या किसी व्यक्ति के मूल्य को आँकने का पैमाना नहीं है।
दो कैलकुलेटर मिलाने की छह-खंड कार्यपत्रिका
- होरा-पद्धति का नाम और अंतिम राशि देने वाला नियम लिखें।
- राशि-चक्र का आधार और लागू अयनांश लिखें।
- उपलब्ध सटीकता तक पूरा देशांतर उतारें।
- जन्मराशि, क्रमांक और राशि के भीतर का कोण लिखें।
- अर्धभाग, होरा-स्वामी और अंतिम राशि लिखें।
- फलादेश की तुलना से पहले ठीक मध्यबिंदु और पास का संभावित इनपुट जाँचें।
शुरुआती देशांतर अलग हों तो पहले उसी अंतर का कारण खोजें। देशांतर समान हों लेकिन अर्धभाग अलग हों तो गोलाई और अंतिम बिंदु का नियम जाँचें। अर्धभाग समान हो पर अंतिम राशि अलग मिले तो विधि और विषम–सम क्रम देखें।
आगे अंश, नक्षत्र और पाद तथा D60 की संवेदनशीलता पढ़ें। अपनी गणना के नोट साथ रखकर कुंडली उपकरण की जाँच करें।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
D2 होरा का एक भाग कितना बड़ा है?
एक भाग जन्मराशि के भीतर 15 अंश, अर्थात 900 कोणीय मिनट या 54,000 कोणीय सेकंड का है। एक राशि में ऐसे दो भाग होते हैं।
इस पाराशरी होरा-विधि में कौन-सी राशियाँ आती हैं?
सूर्य की होरा सिंह और चंद्र की होरा कर्क में जाती है। अन्य नामित होरा-विधियों का विन्यास अलग हो सकता है, इसलिए नियम स्पष्ट करें।
ठीक 15 अंश किस अर्धभाग में आएगा?
ठीक 15 अंश दूसरे अर्धभाग की शुरुआत है। पहले भाग में 15 अंश से नीचे के मान आते हैं, वह अंतिम बिंदु नहीं।
क्या हर जन्मराशि-सीमा पर D2 बदलता है?
इस दो-राशि नियम में नहीं। एक राशि की अंतिम होरा अगली राशि की शुरुआती होरा भी है। गंतव्य राशि भीतर के 15 अंश मध्यबिंदु पर बदलती है।
क्या D2 होरा वर्तमान ग्रह-होरा ही है?
नहीं। D2 राशि-देशांतर का वर्गीकरण है। दैनिक ग्रह-होरा स्थानीय दिन और रात की सीमाओं से समय-अंतराल बनाती है।
क्या केवल D2 राशि से किसी का धन निश्चित बताया जा सकता है?
गणना घोषित ज्योतिषीय नियम का परिणाम देती है। उससे धन, भावी आय या उचित आर्थिक निर्णय स्वतंत्र रूप से स्थापित नहीं होता।