दशमांश D10 की राशि कैसे निकालते हैं?
ग्रह की जन्मराशि के दस बराबर 3° भाग करें। विषम क्रमांक की जन्मराशि हो तो भागों की गिनती उसी राशि से शुरू करें। सम क्रमांक की राशि हो तो उससे नौवीं राशि से शुरू करें। आरंभ को पहला भाग मानकर हर अगले भाग के लिए राशिचक्र में एक राशि आगे चलें। सही भाग और सही आरंभ, दोनों जरूरी हैं।
यह Astrogyana की वर्तमान D10 गणना में अपनाई पाराशरी राशि-आवंटन पद्धति है। इससे निरयण जन्म-निर्देशांक का वर्ग-स्थान मिलता है। सही स्थान गणना का परिणाम है; उससे नौकरी, पदोन्नति की तारीख या करियर का निश्चित परिणाम सिद्ध नहीं होता।
विषम और सम राशि के क्रमांक हैं
मेष को 1 से गिनकर मीन को 12 रखें। विषम समूह है मेष, मिथुन, सिंह, तुला, धनु और कुंभ। सम समूह है वृषभ, कर्क, कन्या, वृश्चिक, मकर और मीन। ग्रह की राशि का क्रमांक लें, भाव संख्या, अंश संख्या या सूची में ग्रह का क्रम नहीं।
वृषभ दूसरी राशि है, इसलिए उसकी गिनती उससे नौवीं राशि से शुरू होगी: वृषभ एक, मिथुन दो, कर्क तीन, सिंह चार, कन्या पाँच, तुला छह, वृश्चिक सात, धनु आठ और मकर नौ। सम का अर्थ गिनती की दिशा उलट देना नहीं है।
नीचे जुड़े होराशास्त्र के अध्याय 6, श्लोक 13 में यह नियम है। पी. वी. आर. नरसिंह राव की पुस्तक का खंड 6.2.10 भी इसे समझाता है। दूसरे वर्गों के आरंभ अलग होते हैं। इसलिए D10 का नियम D10 नाम के साथ ही रखें।
मेष और वृषभ के सभी दस भाग मिलाएँ
| भाग | राशि के भीतर अंतराल | मेष से D10 | वृषभ से D10 |
|---|---|---|---|
| 1 | 0° ≤ d < 3° | मेष | मकर |
| 2 | 3° ≤ d < 6° | वृषभ | कुंभ |
| 3 | 6° ≤ d < 9° | मिथुन | मीन |
| 4 | 9° ≤ d < 12° | कर्क | मेष |
| 5 | 12° ≤ d < 15° | सिंह | वृषभ |
| 6 | 15° ≤ d < 18° | कन्या | मिथुन |
| 7 | 18° ≤ d < 21° | तुला | कर्क |
| 8 | 21° ≤ d < 24° | वृश्चिक | सिंह |
| 9 | 24° ≤ d < 27° | धनु | कन्या |
| 10 | 27° ≤ d < 30° | मकर | तुला |
यहाँ d जन्मराशि के भीतर की स्थिति है। हर अंतराल अपनी निचली सीमा शामिल करता है और ऊपरी सीमा बाहर रखता है। ठीक 3° दूसरा भाग, ठीक 6° तीसरा और ठीक 27° दसवाँ भाग शुरू करता है। 30° पर जन्मराशि बदलती है और अगली राशि के नियम से प्रक्रिया फिर शुरू होती है।
मेष 7°10′ और वृषभ 7°10′ दोनों तीसरे भाग में हैं। लेकिन मेष वाली स्थिति मिथुन और वृषभ वाली मीन में जाती है। राशि के भीतर अंश समान होने से D10 लक्ष्य भी समान होना जरूरी नहीं है।
यह दो जन्मराशियों की पूरी तुलना है, दस भावों की सूची नहीं। मेष का स्तंभ मेष और वृषभ का स्तंभ मकर से चलता है। दोनों को मेष से पढ़ने पर विषम-सम का अंतर मिट जाएगा।
पूरे देशांतर से तीन चरणों में गणना
- जन्मराशि पहचानकर उसके आरंभ का देशांतर घटाएँ और भीतर की स्थिति निकालें।
- भीतर के अंशों को 3° से भाग दें, पूरा भाग लें और एक जोड़कर 1 से 10 तक का भाग क्रमांक पाएँ।
- विषम-सम के अनुसार आरंभ चुनें और उस राशि को एक मानकर आवश्यक संख्या तक गिनें।
134°30′ के लिए सिंह 120° पर शुरू होता है। बचा 14°30′, जो 12° से 15° से कम वाले पाँचवें भाग में है। सिंह विषम है। सिंह, कन्या, तुला, वृश्चिक, धनु गिनने पर D10 राशि धनु मिलती है।
231° के लिए वृश्चिक का आरंभ 210° घटाएँ। ठीक 21° बचता है, जो आठवाँ भाग है। वृश्चिक सम होने से उसकी नौवीं राशि कर्क से शुरू करें। कर्क से आठ राशियाँ गिनने पर कुंभ आता है। दोनों उदाहरणों में भाग निकालने का काम एक जैसा, लेकिन आरंभ का नियम अलग है।
आठ स्थितियाँ और उनके बीच के सभी परिणाम
| पूरा निरयण देशांतर | D1 राशि | भीतर की स्थिति | भाग | गिनती का आरंभ | D10 राशि |
|---|---|---|---|---|---|
| 2°59′59″ | मेष | 2°59′59″ | 1 | मेष | मेष |
| 3°00′00″ | मेष | 3°00′00″ | 2 | मेष | वृषभ |
| 32°59′59″ | वृषभ | 2°59′59″ | 1 | मकर | मकर |
| 33°00′00″ | वृषभ | 3°00′00″ | 2 | मकर | कुंभ |
| 134°30′00″ | सिंह | 14°30′00″ | 5 | सिंह | धनु |
| 231°00′00″ | वृश्चिक | 21°00′00″ | 8 | कर्क | कुंभ |
| 299°59′59″ | मकर | 29°59′59″ | 10 | कन्या | मिथुन |
| 330°00′00″ | मीन | 0°00′00″ | 1 | वृश्चिक | वृश्चिक |
ये स्वतंत्र शिक्षण स्थितियाँ हैं, किसी वास्तविक जन्मकुंडली के ग्रह नहीं। अंतिम दो पंक्तियाँ चक्र में लौटने की गिनती भी जाँचती हैं: सम मकर का आरंभ कन्या है और उससे दसवाँ लक्ष्य मिथुन है। मीन का पहला भाग वृश्चिक से शुरू होता है।
पंक्ति को उल्टी जाँच से भी देखें। सम जन्मराशि और लिखा D10 परिणाम मिलने पर पहले सही नौवीं राशि का आरंभ बनाएँ, फिर चुना भाग मिलाएँ। इससे भाग की गणना सही होने पर भी गलत आरंभ पकड़ सकते हैं।
3° के पास एक कोणीय सेकंड क्यों महत्वपूर्ण है?
पहली दो पंक्तियों में एक कोणीय सेकंड का अंतर है। मेष 2°59′59″ पहले भाग में है और मेष 3°00′00″ दूसरे में। वृषभ की जोड़ी वही सीमा अलग D10 लक्ष्यों के साथ दिखाती है। निकटतम मिनट तक गोल प्रदर्शन दोनों को 3°00′ जैसा दिखा सकता है।
मूल सटीक मान से गणना करें और बाद में प्रदर्शन गोल करें। जन्मराशि की सीमा पर विषम-सम नियम लगाने से पहले पूरा देशांतर सामान्यीकृत करें। उदाहरण के लिए 330° मीन 0° है, कुंभ 30° नहीं।
यह संवेदनशीलता निर्देशांक की सीमा से जुड़ी है। इससे यह नहीं निकलता कि जन्म समय का हर छोटा अंतर हर ग्रह का D10 बदल देता है। विशेष स्थिति बदलेगी या नहीं, यह सीमा से उसकी दूरी और मूल निर्देशांक के वास्तविक बदलाव पर निर्भर है।
दसवाँ हार्मोनिक अपने आप यह D10 क्यों नहीं है?
33° वाले उदाहरण में पूरे देशांतर को दस से गुणा करने पर 330°, अर्थात मीन, मिलेगा। लेकिन बताया D10 नियम कुंभ देता है, क्योंकि वृषभ 3° मकर से गिना दूसरा भाग है। इसलिए यह शॉर्टकट उस आवंटन के बराबर नहीं है।
वर्ग का नाम भागों की संख्या बताता है, पूरा आवंटन-नियम नहीं। द्रेष्काण D3 का लेख इसी अंतर का दूसरा उदाहरण देता है। नवांश का लेख अपनी अलग पद्धति समझाता है।
अलग आवंटन के लिए द्वादशांश D12 का लेख पढ़ें। उसमें विषम और सम दोनों राशियों के बारह 2°30′ भाग जन्मराशि से गिने जाते हैं। उल्टी जाँच D1–D12 जोड़ी से संभावित अंश-अंतराल देती है।
राशि और भाव को अलग रखकर कुंडली पढ़ें
D10 लग्न के लिए जन्मलग्न के निरयण देशांतर पर यही D10 नियम लगाएँ। भाव संख्या के लिए उस व्युत्पन्न लग्न और बताई भाव-पद्धति की भी जरूरत है। अकेले “कुंभ” शब्द से भाव क्रमांक नहीं मिलता।
दो कुंडली रिपोर्ट मिलाने से पहले जन्म इनपुट, समय-क्षेत्र, अयनांश, बिना गोल किए निर्देशांक और D10 पद्धति मिलाएँ। यह भी देखें कि D10 राशि के पास जन्म के अंश तो नहीं छपे हैं। वे अंश मूल जन्मकुंडली के हो सकते हैं; उन्हें आकाश की नई भौतिक स्थिति न पढ़ें।
इनपुट, नियम और परिणाम तीन अलग टिप्पणियों में लिखें। इससे अंतर समझाना आसान होगा और पारंपरिक व्याख्या को स्पष्ट गणना मिलेगी। गणना को अपने आप फलादेश मानने की जरूरत नहीं पड़ेगी।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
एक दशमांश भाग कितने अंश का है?
एक जन्मराशि 30° की है। उसके दस समान हिस्से करने पर हर D10 भाग 3° चौड़ा होता है।
सम राशि की गिनती कहाँ से शुरू होती है?
यहाँ की पद्धति में जन्मराशि को एक गिनकर उससे नौवीं राशि से शुरू होती है। उसके बाद राशिचक्र में आगे की दिशा में गिनते हैं।
क्या विषम-सम भाव की संख्या बताता है?
नहीं। यह राशि का क्रमांक है, जिसमें मेष 1 और मीन 12 है। लग्न बदलने से वृषभ सम से विषम राशि नहीं बनता।
ठीक 3° कौन-से भाग में आता है?
ठीक 3° दूसरा भाग शुरू करता है। पहला अंतराल 0° से 3° से कम और दूसरा 3° से 6° से कम है।
क्या पूरे देशांतर को दस से गुणा कर सकते हैं?
वह इस पाराशरी D10 का सामान्य विकल्प नहीं। 33° वाले उदाहरण में उस शॉर्टकट से मीन, जबकि बताई विषम-सम पद्धति से कुंभ मिलता है।
क्या D10 स्थान करियर की घटना सुनिश्चित करता है?
नहीं। यह पारंपरिक ढाँचे में निकाला गया वर्ग-स्थान है। राशि की गणना से पेशा, पदोन्नति की तारीख या परिणाम प्रमाणित नहीं होता।