बालादि अवस्था: अंश, सम-विषम राशि और सटीक सीमाएँ

बालादि अवस्था के पाँच छह-अंश खंड, सम-विषम राशि का क्रम, आठ उदाहरण और सीमा पर राउंडिंग की समस्या साफ गणना से समझें।

कुंडली और गणना-पद्धतियाँलेख · 13 मिनटRead in English ↗

लेखन और प्रकाशन: Astrogyana

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संपादकीय नीति · सुधार कैसे भेजें

ग्रह की बालादि अवस्था कैसे निकालते हैं?

ग्रह का राशि के भीतर अंश और उस राशि की सम-विषम संख्या लें। तीस अंश की राशि को छह-छह अंश के पाँच खंडों में बाँटें। विषम राशियों में बाल, कुमार, युवा, वृद्ध और मृत का क्रम रखें। सम राशियों में यही क्रम उलट दें। ये परंपरागत अवस्था-संज्ञाएँ हैं; ग्रह की भौतिक आयु या किसी मनुष्य की जाँच का परिणाम नहीं।

यह लेख पी. वी. आर. नरसिंह राव की पुस्तक के खंड 15.4.1 को घोषित संदर्भ बनाता है। उसमें पहली अवस्था का नाम शैशव है; यहाँ उसे प्रचलित बाल नाम के साथ दिखाया गया है। नीचे की तालिकाएँ और अभ्यास इस नियम को स्वयं जाँचने के लिए हैं। सीमा पर ठीक बराबरी आने का तरीका भी साफ बताया गया है, ताकि स्क्रीन पर गोल किए अंश चुपचाप उत्तर न बदल दें।

पाँच खंड और इस लेख का सीमा-नियम

छह अंश के पाँच खंड; हर पंक्ति में निचली सीमा शामिल, ऊपरी सीमा बाहर
राशि के भीतर अंशविषम राशिसम राशि
0° ≤ d < 6°बाल / शैशवमृत
6° ≤ d < 12°कुमारवृद्ध
12° ≤ d < 18°युवायुवा
18° ≤ d < 24°वृद्धकुमार
24° ≤ d < 30°मृतबाल / शैशव

इस कार्यपत्रक में हर खंड की निचली सीमा शामिल और ऊपरी सीमा बाहर है। इसलिए ठीक 6° दूसरे, 12° तीसरे, 18° चौथे और 24° पाँचवें खंड का आरंभ है। यह यहाँ अपनाया गया सटीक गणना-नियम है। स्रोत में छपी सामान्य अंश-सीमाओं से यह अनुमान नहीं लगाना चाहिए कि हर सॉफ्टवेयर भी बराबरी को इसी तरह रखता होगा।

राशि के भीतर वास्तविक मान 0° से शुरू होकर 30° से छोटा रहता है। ठीक 30° अगली राशि का 0° है। लेकिन यदि 29°59′59.8″ को स्क्रीन पर गोल करके 30° दिखाया गया है, तो मूल स्थिति अभी सीमा पार नहीं हुई। गणना में मूल अंश रखें; केवल सुंदर दिखने वाले छोटे अंक से निर्णय न लें।

सम-विषम राशि की संख्या है, भाव की नहीं

राशि की संख्या से सम-विषम चुनें; भाव संख्या से नहीं
राशिसंख्याक्रम3° पर21° पर
मेष1सीधाबाल / शैशववृद्ध
वृषभ2उलटामृतकुमार
मिथुन3सीधाबाल / शैशववृद्ध
कर्क4उलटामृतकुमार
सिंह5सीधाबाल / शैशववृद्ध
कन्या6उलटामृतकुमार
तुला7सीधाबाल / शैशववृद्ध
वृश्चिक8उलटामृतकुमार
धनु9सीधाबाल / शैशववृद्ध
मकर10उलटामृतकुमार
कुंभ11सीधाबाल / शैशववृद्ध
मीन12उलटामृतकुमार

मेष को एक और मीन को बारह गिनें। किसी जन्मकुंडली में मेष दूसरे भाव में हो, तब भी मेष का क्रम विषम वाला ही रहेगा। वृषभ प्रथम भाव में हो, तब भी उसकी राशि संख्या दो होने के कारण सम वाला क्रम लगेगा। लग्न से भाव गिनना और मेष से राशि संख्या गिनना दो अलग काम हैं।

पाँच संज्ञाओं का क्रम उलटने पर बीच का स्थान वही रहता है। इसलिए 12° से 18° वाला युवा खंड दोनों समूहों में समान है। बाकी चार खंडों की संज्ञाएँ बदलती हैं। यदि दो रिपोर्ट केवल बीच के अंशों पर सहमत हों और बाकी जगह अलग हों, तो सबसे पहले सम-विषम क्रम की जाँच उपयोगी है।

चार्ट का उत्तर भारतीय या दक्षिण भारतीय रूप इस क्रम को नहीं बदलता। चित्र में राशि का खाना ऊपर, नीचे या कोने में होने से उसकी क्रम-संख्या अलग नहीं होती। लिखे हुए राशि नाम या स्पष्ट संख्या पर भरोसा करें; केवल स्क्रीन की जगह से राशि न पहचानें।

गणना के लिए पाँच प्रविष्टियाँ लिखें

  1. रिपोर्ट में प्रयुक्त चार्ट और निर्देशांक पद्धति लिखें।
  2. ग्रह की राशि पहचानें और मेष से उसकी एक-आधारित संख्या निकालें।
  3. राशि के भीतर अंश लिखें; उपलब्ध मिनट और सेकंड बचाकर रखें।
  4. पहले छह अंश वाला खंड चुनें, फिर सम-विषम क्रम लगाएँ।
  5. अवस्था के साथ लिखें कि राउंडिंग या अनिश्चितता किसी सीमा को पार कर सकती है या नहीं।

एक काल्पनिक ग्रह वृषभ 3°00′00″ पर रखें। राशि संख्या दो है, इसलिए सम क्रम लगेगा। तीन अंश पहले खंड में हैं और सम क्रम में उसकी संज्ञा मृत है। यही अंश मेष में हों तो खंड वही रहेगा, पर विषम क्रम से बाल/शैशव आएगा। इस छोटे अभ्यास में किसी व्यक्ति का स्वास्थ्य, जीवनकाल, प्रतिभा या स्वभाव नहीं मापा गया।

ग्रह की भाव संख्या को अंश में जोड़ना, सूर्य से उसका अंतर घटाना या वक्री होने पर अंश को उलट देना इस कार्यपत्रक का हिस्सा नहीं है। यदि किसी रिपोर्ट में ऐसा कोई अतिरिक्त नियम है, तो उसका नाम और कारण अलग पूछा जाना चाहिए। दो अलग प्रक्रियाओं को एक ही शब्द देखकर समान न मानें।

आठ उदाहरणों को हाथ से जाँचें

आठ काल्पनिक स्थितियाँ; वास्तविक जन्मकुंडली या भविष्यवाणी नहीं
राशिअंश-मिनट-सेकंडशून्य से खंड सूचकअवस्था
मेष0°00′00″0बाल / शैशव
वृषभ3°00′00″0मृत
मिथुन6°00′00″1कुमार
कर्क11°59′59″1वृद्ध
सिंह12°00′00″2युवा
कन्या18°00′00″3कुमार
तुला24°00′00″4मृत
मीन29°59′59″4बाल / शैशव

कर्क वाला उदाहरण 12° से केवल एक विकला, यानी एक arcsecond, नीचे है। शून्य से क्रम देने पर वह अभी खंड एक में है। कर्क सम राशि है, इसलिए उत्तर वृद्ध है। ठीक 12° पर पहुँचते ही खंड दो और युवा अवस्था शुरू होगी। सीमा पर संज्ञा बदलना किसी वास्तविक जीवन घटना में अचानक छलाँग का प्रमाण नहीं बनता।

कन्या वाला उदाहरण ठीक 18° पर है। निचली सीमा शामिल होने के कारण वह खंड तीन में आता है। कन्या के उलटे क्रम में यह कुमार है। तुला का ठीक 24° खंड चार में जाता है और विषम राशि में मृत कहलाता है। मीन का 29°59′59″ भी खंड चार में है, मगर सम क्रम के कारण बाल/शैशव आता है।

इन उदाहरणों को एक ही जन्मकुंडली के आठ ग्रह न समझें। ये स्वतंत्र अभ्यास हैं। सभी उदाहरण 15° के आसपास रखने पर सम-विषम या सीमा की गलतियाँ छिप सकती थीं। इसलिए अलग राशियाँ, ठीक सीमा वाले मान और सीमा से एक सेकंड कम मान रखे गए हैं।

हर सीमा के दोनों ओर का परिणाम देखें

सटीक सीमाओं का परीक्षण: मेष और वृषभ में समान अंश
राशि के भीतर स्थितिमेषवृषभ
0°00′00″बाल / शैशवमृत
5°59′59″बाल / शैशवमृत
6°00′00″कुमारवृद्ध
11°59′59″कुमारवृद्ध
12°00′00″युवायुवा
17°59′59″युवायुवा
18°00′00″वृद्धकुमार
23°59′59″वृद्धकुमार
24°00′00″मृतबाल / शैशव
29°59′59″मृतबाल / शैशव

5°59′59″ तक पहला खंड रहता है। 6°00′00″ पर अगला शुरू हो जाता है। यही ढाँचा 12°, 18° और 24° पर दोहरता है। यदि कोई रिपोर्ट केवल पूरे अंश दिखाती है, तो दो अलग वास्तविक स्थितियाँ एक जैसी दिख सकती हैं। यहाँ सेकंड रखने का उद्देश्य उसी अंतर को सामने लाना है।

तालिका जानबूझकर 29°59′59″ पर समाप्त होती है। ठीक 30° उसी राशि का वैध अंश नहीं है। आगे बढ़ने पर अंश को शून्य करना और राशि को अगली करना, दोनों आवश्यक हैं। केवल अंश बदलकर पुरानी राशि छोड़ देने से नए शून्य पर गलत सम-विषम क्रम लग सकता है।

अपनी जाँच में पहले अंतिम स्तंभ छिपाएँ। फिर राशि के क्रम और अंश के खंड से अवस्था निकालें। यदि गलती हुई, तो उसे केवल उत्तर बदलकर न सुधारें; लिखें कि गलती खंड चुनने में थी, सम-विषम पहचानने में या सीमा को शामिल करने में। अगली बार वही चरण तुरंत जाँचा जा सकेगा।

सूत्र में इकाइयाँ स्पष्ट रखें

राशि संख्या s को 1 से 12 और राशि के भीतर अंश d को 0 से 30 से कम तक लें। शून्य से खंड सूचक b = floor(d / 6) होगा। विषम s के लिए अवस्था सूची का b स्थान और सम s के लिए 4 − b स्थान लें। सूची का क्रम बाल/शैशव, कुमार, युवा, वृद्ध, मृत है। floor का अर्थ उससे बड़ा न होने वाला पूर्णांक है।

यदि पूर्ण arcsecond में डेटा उपलब्ध है, तो u = 3600D + 60M + S लिखें। छह अंश में 21,600 arcsecond होते हैं, इसलिए b = floor(u / 21600) मिलेगा। इससे अंश-मिनट-सेकंड को छोटे दशमलव में गोल करने की जरूरत घटती है। यह उपाय मूल जन्म-समय या ग्रह-गणना की सटीकता अपने आप नहीं बढ़ाता।

पूरे राशि-चक्र का देशांतर λ हो तो पहले उसे 0 ≤ λ < 360 के रूप में रखें। फिर s = floor(λ / 30) + 1 और d = λ − 30(s − 1) निकालें। उदाहरण के लिए 48° का कुल देशांतर वृषभ 18° है। सम क्रम में इसका उत्तर कुमार होगा। पूरे चक्र को सीधे छह से भाग देकर मिली संख्या को पाँच अवस्थाओं की सूची में नहीं डाल सकते।

स्क्रीन पर 12° और मूल 11.999° में अंतर

मान लें रिपोर्ट A स्क्रीन पर 12° दिखाती है, लेकिन भीतर 11°59′58″ रखती है। रिपोर्ट B में आपने स्क्रीन का 12° लिख दिया। A पुराने खंड और B अगले खंड में जा सकती है। संभव है दोनों समान नियम को अपने-अपने अलग इनपुट पर सही लगा रही हों। इसलिए पहले मूल निर्देशांक माँगें, तुरंत परंपरा या सॉफ्टवेयर को दोष न दें।

दशमलव अंश और अंश-मिनट भी अलग हैं। 12.30° का अर्थ 12°18′ है, क्योंकि 0.30 × 60 = 18 होता है। उसका अर्थ 12°30′ नहीं है। दूसरी ओर 12°30′ को दशमलव में 12.5° लिखेंगे। ये उदाहरण एक खंड में रह सकते हैं, लेकिन सीमा के पास यही भूल परिणाम बदल सकती है।

हर संख्या के पास इकाई लिखना अच्छी आदत है। किसी काटे हुए स्क्रीनशॉट में 18.05 दिखे और शीर्षक गायब हो, तो वह दशमलव अंश, समय या अंश-मिनट लिखने का अनौपचारिक तरीका हो सकता है। बिना प्रारूप पहचाने अत्यंत निश्चित दिखने वाला उत्तर निकालना उपयोगी गणना नहीं है।

अनिश्चित स्थिति में दोनों संभावनाएँ लिखें

कल्पना करें कि उपलब्ध जानकारी से विषम राशि में ग्रह का अंश केवल 23°58′ से 24°02′ के बीच पता चलता है। यह सीमा वृद्ध और मृत दोनों खंडों को छूती है। दोनों संभावित संज्ञाएँ और अनिश्चित निर्देशांक लिखें। अंतराल दोनों ओर बराबर फैलता हो, तब भी बिना वितरण संबंधी जानकारी दोनों को पचास-पचास प्रतिशत संभावना कहना उचित नहीं।

राशि की सीमा पर अगली राशि भी जाँचें। इस नियम में विषम राशि के अंतिम खंड की मृत संज्ञा अगली सम राशि के पहले खंड में भी मृत रहती है। सम राशि के अंतिम खंड का बाल/शैशव अगली विषम राशि के पहले खंड में भी वही रहता है। राशि बदल गई, फिर भी यह एक संज्ञा नहीं बदली। दूसरे चार्ट-तत्त्व फिर भी बदल सकते हैं।

इसलिए अवस्था का स्थिर रहना सही जन्म-समय का प्रमाण नहीं है। यह वर्गीकरण बहुत-सी अलग स्थितियों को एक नाम देता है। एक ही अवस्था कई अंशों और कई राशियों में मिल सकती है। समय या गणना का विवाद सुलझाने के लिए मूल निर्देशांक जरूरी रहते हैं।

परंपरागत संज्ञा को मानव मूल्यांकन न बनाएँ

यहाँ आयु-संबंधी शब्द रूपक हैं। मृत का अर्थ भौतिक ग्रह का मर जाना, व्यक्ति की मृत्यु होना या किसी जीवन-क्षेत्र का हमेशा बंद हो जाना नहीं है। उद्धृत लेखक भी केवल इस अवस्था पर निर्णय टिकाने से सावधान करते हैं। वर्ग का नाम सफलता का मापा अनुपात या किसी मनुष्य की योग्यता का अंक नहीं है।

इसे षड्बल और उसकी इकाइयों के स्थान पर भी नहीं रखना चाहिए। छह अंश का खंड और कई घटकों वाली बल-गणना अलग प्रक्रियाएँ हैं। रिपोर्ट दोनों दिखाए तो उनके नाम और इकाइयाँ अलग बचाएँ। परंपरागत वर्णन में पूर्ण जैसा शब्द किसी घटना की सौ प्रतिशत निश्चितता नहीं बना देता।

नक्षत्र और चरण भी देशांतर से निकलते हैं, पर उनके विभाजन अलग हैं। समान प्रारंभिक निर्देशांक से निकले दो वर्ग आवश्यक नहीं कि एक ही बात बताएँ। हर पद्धति के संदर्भ और सीमाएँ अलग पढ़ना अधिक उपयोगी है।

दो रिपोर्टों का अंतर इस क्रम से सुलझाएँ

  1. ग्रह और चार्ट का स्तर समान करें।
  2. राशि-चक्र, लागू अयनांश और मूल देशांतर मिलाएँ।
  3. दशमलव अंश तथा अंश-मिनट-सेकंड का प्रारूप पहचानें।
  4. भाव संख्या से अलग राशि की सम-विषम संख्या जाँचें।
  5. बिना गोल किए निर्देशांक को सटीक सीमाओं पर रखें।
  6. पुष्टि करें कि दोनों जगह अवस्था शब्द से यही आयु-संबंधी पद्धति अभिप्रेत है।

वक्री ग्रह के मामले में समय के साथ स्थिति बदलने और सूची का क्रम उलटने में भेद रखें। यहाँ सूची राशि की सम-विषम प्रकृति से उलटती है, वक्रता से नहीं। पीछे जाता ग्रह सीमा को दूसरी दिशा में पार कर सकता है, जबकि सीमा पर लागू नियम वही रहता है।

अपनी कुंडली के ग्रह-निर्देशांक लेकर यह कार्यपत्रक बना सकते हैं। लेख कोई नया अवस्था-कैलकुलेटर नहीं जोड़ता और न सभी रिपोर्टों में यही सीमा-नियम होने का दावा करता है। अच्छी तुलना का परिणाम किसी स्पष्ट इनपुट या नियम-अंतर की पहचान है, अधिक डरावना या अधिक आकर्षक भविष्यवचन नहीं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

बालादि अवस्था की पाँच संज्ञाएँ कौन-सी हैं?

यहाँ बाल/शैशव, कुमार, युवा, वृद्ध और मृत संज्ञाएँ हैं। ये राशि के भीतर अंश और राशि की सम-विषम संख्या से निकाली गई परंपरागत आयु-अवस्थाएँ हैं। घोषित स्रोत पहली अवस्था को शैशव कहता है।

क्या युवा अवस्था हमेशा 12° से 18° में होती है?

इस पाँच-खंड नियम में बीच का स्थान उलटा क्रम करने पर भी नहीं बदलता। इसलिए दोनों समूहों में यही युवा खंड है। इस लेख में 12° शामिल और 18° बाहर है; दूसरी रिपोर्ट का बराबरी वाला नियम अलग जाँचें।

सम-विषम ग्रह के भाव से चुनते हैं?

नहीं। मेष से मीन तक राशि संख्या लें। वृषभ दूसरी राशि होने से सम क्रम लेगी, भले किसी कुंडली में वही पहला भाव क्यों न हो। भाव और राशि की गिनती को अलग रखें।

ठीक 30° होने पर क्या करें?

वास्तविक ठीक 30° को अगली राशि का 0° लिखें। लेकिन स्क्रीन पर गोल किया 30° मूल रूप में सीमा से थोड़ा नीचे हो सकता है। इसलिए गणना के लिए मूल, बिना गोल किया निर्देशांक सुरक्षित रखें।

क्या मृत अवस्था मृत्यु या निश्चित असफलता बताती है?

इस वर्गीकरण से ऐसा निष्कर्ष नहीं निकलता। यह परंपरागत अवस्था का नाम है, चिकित्सा या जीवन-भविष्यवाणी नहीं। अंश का खंड किसी व्यक्ति के भविष्य या उसके वास्तविक हालात के प्रमाण का स्थान नहीं ले सकता।

वक्री होने पर पाँच अवस्थाओं का क्रम उलटेगा?

इस कार्यपत्रक में नहीं। क्रम सम संख्या वाली राशि में उलटता है। वक्री गति समय के साथ ग्रह का निर्देशांक बदल सकती है, पर चुने क्षण पर संज्ञा उसी राशि और अंश से निकलेगी।

स्रोत और संदर्भ

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