सीधा उत्तर: नक्षत्र का शेष अंश आरंभिक दशा-शेष बताता है
प्रचलित विंशोत्तरी पद्धति में जन्म के समय चंद्रमा जिस sidereal नक्षत्र में होता है, उसका स्वामी पहली महादशा बताता है। उस नक्षत्र का जितना हिस्सा बाकी है, उतना ही उस स्वामी की पूरी महादशा का अंश जन्म पर शेष रहता है। नक्षत्र 13°20′ का होता है। यदि चंद्रमा रोहिणी में 5° आगे बढ़ चुका है तो 8°20′ शेष हैं; 800′ में से 500′ बचते हैं, यानी चंद्रमा की 10-वर्षीय महादशा का 62.5% या 6.25 विंशोत्तरी वर्ष।
- पहले चंद्रमा का नक्षत्र और उसका स्वामी पहचानें।
- जन्म तक नक्षत्र का कितना अंश बीत चुका है, निकालें।
- बचे हुए अंश के अनुपात को महादशा के पूरे वर्षों से गुणा करें।
- तारीखों में बदलने से पहले वर्ष-दिन की गणना-पद्धति लिखें।
यह गणना समझाने का मार्गदर्शक है, भविष्यवाणी नहीं। शेष राशि सही sidereal चंद्र-देशांतर और सॉफ्टवेयर की तारीख-पद्धति पर निर्भर करती है। नीचे का उदाहरण अंकगणित को दोहराने योग्य बनाता है; काल्पनिक देशांतर को वास्तविक जन्म-कुंडली नहीं बताता।
गणना से पहले आरंभिक दशा-स्वामी पहचानें
विंशोत्तरी ज्योतिष में वर्णित कई दशा-पद्धतियों में से एक है। प्रचलित 27-नक्षत्र क्रम में हर नौ स्वामियों की श्रृंखला तीन-तीन नक्षत्रों पर दोहरती है। जन्म की पहली महादशा जन्म-नक्षत्र के स्वामी की होती है; केवल इसलिए चंद्रमा की दशा शुरू नहीं होती कि नक्षत्र चंद्रमा से निकाला जाता है।
| स्वामी | पूरी अवधि | हर समूह के नक्षत्र |
|---|---|---|
| केतु | 7 वर्ष | अश्विनी, मघा, मूल |
| शुक्र | 20 वर्ष | भरणी, पूर्वाफाल्गुनी, पूर्वाषाढ़ा |
| सूर्य | 6 वर्ष | कृत्तिका, उत्तराफाल्गुनी, उत्तराषाढ़ा |
| चंद्रमा | 10 वर्ष | रोहिणी, हस्त, श्रवण |
| मंगल | 7 वर्ष | मृगशीर्ष, चित्रा, धनिष्ठा |
| राहु | 18 वर्ष | आर्द्रा, स्वाति, शतभिषा |
| गुरु | 16 वर्ष | पुनर्वसु, विशाखा, पूर्वाभाद्रपद |
| शनि | 19 वर्ष | पुष्य, अनुराधा, उत्तराभाद्रपद |
| बुध | 17 वर्ष | आश्लेषा, ज्येष्ठा, रेवती |
नौ अवधि मिलकर नाममात्र 120 वर्ष होती हैं। जन्म-नक्षत्र का स्वामी बताता है कि जन्म पर कौन-सी महादशा चल रही है; नक्षत्र का बीता हुआ अंश बताता है कि उस पहली अवधि का कितना हिस्सा समाप्त हो चुका है। इसके बाद ग्रहों का क्रम आगे चलता है। दो कैलकुलेटरों के परिणाम मिलाते समय अयनांश और दशा की setting भी देखें।
हाथ से उदाहरण करें: वृषभ में चंद्रमा 15° पर
केवल गणना समझाने के लिए मानें कि किसी chart में चंद्रमा sidereal वृषभ राशि के ठीक 15°00′ पर है। रोहिणी वृषभ के 10°00′ से शुरू होकर 23°20′ तक रहती है। इसलिए यह स्थिति रोहिणी में 5°00′ आगे है। रोहिणी का विंशोत्तरी स्वामी चंद्रमा है और उसकी पूरी महादशा 10 वर्ष की है।
| चरण | गणना | परिणाम |
|---|---|---|
| रोहिणी का कुल विस्तार | 13°20′ × 60 | 800′ |
| चंद्रमा का बीता अंश | 15°00′ − 10°00′ | 5°00′ = 300′ |
| नक्षत्र का शेष अंश | 800′ − 300′ | 500′ = 8°20′ |
| शेष अनुपात | 500′ ÷ 800′ | 0.625 |
| जन्म पर दशा-शेष | 0.625 × चंद्रमा के 10 वर्ष | 6.25 वर्ष |
| बीता हुआ हिस्सा | 0.375 × 10 वर्ष | 3.75 वर्ष |
जाँच आसान है: 3.75 वर्ष बीत चुके और 6.25 शेष, दोनों मिलकर चंद्रमा की पूरी 10-वर्षीय महादशा बनाते हैं। यह जन्म पर बचा समय है; इसका अर्थ यह नहीं कि व्यक्ति के जीवन में चंद्रमा से जुड़ी अवधि केवल 6.25 वर्ष की होगी। गणना में पहली महादशा जन्म से पहले शुरू मानी जाती है।
यह उदाहरण किसी वास्तविक व्यक्ति के चंद्र-स्थान का दावा नहीं करता। वास्तविक कुंडली के लिए जन्म-दिन, स्थानीय समय, समय-क्षेत्र, जन्म-स्थान के निर्देशांक, ephemeris और बताई गई sidereal setting चाहिए। नक्षत्र-सीमा के पास चंद्रमा हो तो छोटी input या setting बदलने से आरंभिक स्वामी भी बदल सकता है।
वर्षों को तारीखों में बदलते समय पद्धति स्पष्ट रखें
दशा-शेष पहले वर्षों के अंश में मिलता है। फिर सॉफ्टवेयर तय करता है कि एक दशा-वर्ष कितने दिनों का होगा, अवधि को किस इकाई तक round किया जाएगा और उसे किस तारीख-समय पर जोड़ा जाएगा। शेष-अंश का गुणा अपने-आप civil calendar की अंतिम तारीख नहीं बताता।
तारीख वाला उदाहरण दोहराने के लिए वही 6.25 वर्ष लें, एक वर्ष 365.2425 दिन मानें, आरंभ 2000-01-01 को 00:00 UTC रखें और अवधि को निकटतम सेकंड तक round करें। परिणाम 2,282.765625 दिन, यानी 2,282 दिन, 18 घंटे, 22 मिनट और 30 सेकंड है। इस आरंभिक क्षण में जोड़ने पर अंतिम समय 2006-04-01 को 18:22:30 UTC आता है। वर्ष की लंबाई या rounding का नियम बदलने से दिखाई गई अंतिम तारीख बदल सकती है।
हमारी कुंडली समय-रेखा अपनी year-days setting दिखाती है और तारीखें UTC में देती है। दो परिणाम मिलाते समय year-days मान, जन्म-मoment का समय-क्षेत्र रूपांतरण और दिखाई गई precision देखें। UTC तारीख की तुलना स्थानीय तारीख से करके उन्हें अलग खगोलीय घटनाएँ न मानें।
पूरी कुंडली बनाने के लिए कुंडली कैलकुलेटर खोलें और जन्म-विवरण तथा settings सुरक्षित रखें। वेबसाइटों पर कुंडली अलग क्यों दिखती है वाला लेख बताता है कि input और गणना-पद्धतियाँ कैसे अंतर लाती हैं।
चंद्र स्थिति और नक्षत्र की सीमा जाँचें
कैलकुलेटर जाँचने के लिए केवल नक्षत्र का नाम नहीं, चंद्रमा का ठीक sidereal longitude लिखें। हर नक्षत्र के चार पाद होते हैं और प्रत्येक पाद 3°20′ का है। इसलिए longitude या rounding में अंतर से नक्षत्र वही रह सकता है लेकिन पाद अलग दिख सकता है। दशा-शेष पूरी नक्षत्र-सीमा के अंदर का अनुपात लेता है, सिर्फ पाद संख्या नहीं।
- दर्ज स्थानीय जन्म-समय और उस तारीख का सही time-zone offset डालें।
- पास के default शहर की जगह वास्तविक जन्म-स्थान उपयोग करें।
- चंद्रमा के लिए sidereal zodiac और चुना हुआ अयनांश देखें।
- नक्षत्र की आरंभिक सीमा और उससे चंद्रमा का offset निकालें।
- अंतिम तारीख मिलाने से पहले शेष अनुपात और year-days setting जाँचें।
जन्म-समय अनिश्चित हो तो कई दिनों में चंद्रमा का longitude स्थिर रह सकता है, लेकिन वह नक्षत्र-सीमा पार भी कर सकता है। ऐसी स्थिति में आरंभिक महादशा का स्वामी ही अनिश्चित होगा। जिम्मेदार रिपोर्ट समय-सीमा की जाँच दिखाती है या साफ कहती है कि उपलब्ध record से आरंभिक क्रम की पुष्टि नहीं की जा सकती।
पहली अंतरदशा और अलग परिणामों को समझें
महादशा बड़ी अवधि है; अंतरदशा या भुक्ति उसके भीतर की छोटी अवधि है। उप-अवधि का क्रम महादशा-स्वामी से शुरू होकर उसी ग्रह-चक्र में चलता है और उसकी लंबाई तय अनुपात से निकलती है। यदि महादशा जन्म से पहले शुरू हो गई थी तो अंतरदशा-क्रम भी पहले शुरू हो चुका होगा। इसलिए जन्म पर चल रही अंतरदशा, उस महादशा की पहली अंतरदशा होना आवश्यक नहीं है।
दो रिपोर्टों में अंतर के आम कारण हैं: अयनांश बदलने से चंद्रमा नक्षत्र-सीमा पार कर गया; जन्म-समय अलग रूपांतरित हुआ; 360-दिन और civil-year की अलग लंबाई ली गई; दूसरी दशा-पद्धति चुनी गई; सीमा पर rounding अलग हुई; या एक तारीख UTC और दूसरी स्थानीय समय में दिखाई गई। कई कार्यक्रम समान setting को अलग नाम से भी दिखा सकते हैं। परिणाम निर्णायक मानने से पहले setting और बीच के longitude की जानकारी माँगें।
गणना को फलादेश से अलग रखें। दशा-ज्योतिष में प्रयुक्त समय-विभाजन है; तारीखें अपने-आप यह सिद्ध नहीं करतीं कि कोई खास घटना होगी। केवल दशा-नाम देखकर स्वास्थ्य, कानून, धन या संबंधों का निर्णय न लें। ज्योतिष व्याख्यात्मक परंपरा है, वैज्ञानिक रूप से सत्यापित भविष्यवाणी-पद्धति नहीं।
परिणाम की छोटी जाँच-सूची
जन्म-शेष स्वीकार करने से पहले ये मान लिखें: sidereal चंद्र longitude; जन्म-नक्षत्र और स्वामी; बीता तथा शेष arc; स्वामी की पूरी दशा-अवधि; शेष अंश का अनुपात; निकला हुआ दशा-शेष; वर्ष-दिन setting; rounding नियम; और अंतिम तारीख का time zone। इतनी जानकारी परिणाम को दोहराने और अंतर का कारण ढूँढ़ने में मदद करती है।
रोहिणी उदाहरण में ये मान हैं: वृषभ 15°00′; रोहिणी; चंद्रमा; 5°00′ बीता और 8°20′ शेष; 10 वर्ष; 500′/800′; 6.25 दशा-वर्ष; तारीख वाले उदाहरण के लिए 365.2425 दिन प्रति वर्ष; UTC output। आपके परिणाम में अंतर हो तो अर्थ निकालने से पहले input जाँचें।
लग्न, चंद्र राशि और सूर्य राशि वाला लेख बताता है कि चंद्र राशि और लग्न कुंडली के अलग सवालों का उत्तर देते हैं।
सामान्य प्रश्न
जन्म पर विंशोत्तरी दशा-शेष कैसे निकालते हैं?
चंद्रमा का जन्म-नक्षत्र और उसका स्वामी पता करें, नक्षत्र का बचा हुआ अंश निकालें और उस अनुपात को स्वामी की पूरी महादशा के वर्षों से गुणा करें।
पहली महादशा किससे तय होती है?
प्रचलित पद्धति में चंद्रमा के sidereal जन्म-नक्षत्र का स्वामी आरंभिक महादशा बताता है।
इस गणना में एक नक्षत्र कितना बड़ा है?
27 समान नक्षत्रों में प्रत्येक का विस्तार 13°20′, यानी 800 arcminute है।
जन्म पर दशा-शेष पूरी अवधि से कम क्यों है?
गणना में दशा-चक्र पहले शुरू माना जाता है; जन्म-नक्षत्र में चंद्रमा का बीता अंश पहली अवधि के बीते हिस्से के बराबर होता है।
दो दशा-कैलकुलेटरों की अंतिम तारीख अलग क्यों है?
वे अलग चंद्र-longitude, अयनांश, time zone, दशा-वर्ष की लंबाई, rounding या तारीख दिखाने का क्षेत्र उपयोग कर सकते हैं।
क्या महादशा किसी घटना की गारंटी देती है?
नहीं। दशा ज्योतिष में प्रयुक्त व्याख्यात्मक समय-ढाँचा है; यह किसी घटना की वैज्ञानिक रूप से सत्यापित गारंटी नहीं है।