कुंडली मिलान में वर्ण कूट: 1 अंक की राशि-आधारित गणना, सारणी और वास्तविक अर्थ

अष्टकूट कुंडली मिलान में वर्ण कूट की गणना: 1 अंक का चंद्र-राशि तत्व वर्गीकरण, 4x4 गुण सारणी, राशीश मैत्री नियम और सामाजिक वर्ण से स्पष्ट अंतर।

कुंडली और गणना-पद्धतियाँलेख · 13 मिनटRead in English ↗

त्वरित उत्तर: अष्टकूट कुंडली मिलान में वर्ण कूट क्या है?

36 गुणों वाली अष्टकूट (गुण मिलान) पद्धति में वर्ण कूट सबसे पहला और सबसे कम अंक भार वाला घटक है, जिसका अधिकतम मान केवल 1 गुण (अंक) होता है। इसकी गणना पूर्णतः दोनों साथियों की खगोलीय जन्म राशि (चंद्र राशि) के तत्व-आधारित वर्गीकरण से की जाती है: जल तत्व की राशियाँ (कर्क, वृश्चिक, मीन = प्रतीकात्मक ब्राह्मण वर्ग), अग्नि तत्व की राशियाँ (मेष, सिंह, धनु = प्रतीकात्मक क्षत्रिय वर्ग), पृथ्वी तत्व की राशियाँ (वृषभ, कन्या, मकर = प्रतीकात्मक वैश्य वर्ग), और वायु तत्व की राशियाँ (मिथुन, तुला, कुंभ = प्रतीकात्मक शूद्र वर्ग)।

  • खगोलीय तत्व आधार: वर्ण कूट बारह चंद्र राशियों को उनके चार तत्वों (जल, अग्नि, पृथ्वी, वायु) में बाँटता है—इसका किसी व्यक्ति की सामाजिक जाति, कुल या मानवीय गरिमा से कोई संबंध नहीं है।
  • 36 में से केवल 1 अंक: पारंपरिक सारणी में दोनों की राशि एक ही तत्व-वर्ग में होने या निर्धारित क्रम में होने पर 1 अंक और अन्यथा 0 अंक मिलता है।
  • राशीश मैत्री का महत्व: यदि वर्ण कूट में 0 अंक हो किंतु दोनों चंद्र राशियों के स्वामी ग्रह एक ही हों या परस्पर मित्र हों (ग्रह मैत्री कूट 5 अंक), तो 1 अंक की कमी नगण्य मानी जाती है।

वर्ण कूट 36 अंकों वाली अष्टकूट या गुण मिलान पद्धति का सबसे कम भार वाला भाग है। एक प्रचलित गणना में जन्म के समय चंद्रमा जिस राशि में हो, उस जन्म राशि को चार प्रतीकात्मक वर्ण-नामों में से एक दिया जाता है। फिर पारंपरिक तुलना से अधिकतम एक अंक मिलता है।

यह नाम ऐतिहासिक ज्योतिषीय ढाँचे का हिस्सा हैं। ये किसी व्यक्ति की जाति, सामाजिक दर्जा, शिक्षा, पेशा, नैतिकता, आध्यात्मिक मूल्य या प्रेमपूर्ण विवाह बनाने की क्षमता नहीं बताते। पुराने अंक-नियम में लिंग-आधारित पदानुक्रम भी है; इतिहास को समझते हुए भी इसे किसी को नीचा दिखाने, दबाव डालने या भेदभाव करने का कारण न बनाएं।

चंद्र राशियों के चार तत्व-आधारित वर्ग: जल, अग्नि, पृथ्वी और वायु त्रिकोण

जब किसी ऑनलाइन कुंडली-मिलान सॉफ्टवेयर में व्यक्ति के परिवार, समाज या पेशे की कोई जानकारी दर्ज नहीं की जाती, तब भी वह जन्म-कुंडली को चार संस्कृत वर्ण-नामों में से एक कैसे दे देता है? इसका कारण यह है कि मुहूर्त चिंतामणि और बृहत् ज्योतिषसार जैसे शास्त्रीय मेलापक ग्रंथों में राशि वर्ण केवल जन्म के समय चंद्रमा द्वारा अध्यासित राशि (जन्म राशि) के चार खगोलीय तत्वों (तत्व-त्रिकोण) का तकनीकी संक्षिप्त नाम है। भचक्र की बारह राशियों में हर तीसरी राशि एक ही तत्व की होती है और उसे एक ही प्रतीकात्मक वर्ग में रखा जाता है:

स्पष्ट रूप से, तीन जल तत्व (जल-त्रिकोण) की राशियाँ—कर्क (4), वृश्चिक (8) और मीन (12)—मननशील/संवेदनशील स्वभाव के प्रतीक रूप में ब्राह्मण वर्ग में रखी गई हैं; तीन अग्नि तत्व की राशियाँ—मेष (1), सिंह (5) और धनु (9)—ऊर्जा/नेतृत्व के प्रतीक रूप में क्षत्रिय वर्ग में आती हैं; तीन पृथ्वी तत्व की राशियाँ—वृषभ (2), कन्या (6) और मकर (10)—व्यावहारिक/संसाधन कौशल के प्रतीक रूप में वैश्य वर्ग में आती हैं; और तीन वायु तत्व की राशियाँ—मिथुन (3), तुला (7) और कुंभ (11)—संवाद/सेवा व समन्वय के प्रतीक रूप में शूद्र वर्ग में रखी गई हैं। एक ही माता-पिता के दो बच्चों का जन्म यदि दो दिन के अंतर पर अलग चंद्र राशियों में हो, तो उनके राशि-वर्ण अलग होते हैं।

वर्ण कूट में 12 जन्म राशियों (चंद्र राशियों) का तत्व-त्रिकोण के अनुसार खगोलीय वर्गीकरण
प्रतीकात्मक राशि-वर्ण नामखगोलीय तत्व-त्रिकोण (तत्व)शामिल जन्म राशियाँ (चंद्र राशियाँ)राशि स्वामी ग्रह (राशीश)
ब्राह्मण (जल तत्व वर्ग)जल तत्व (राशि संख्या 4, 8, 12)कर्क, वृश्चिक, मीनचंद्रमा (कर्क), मंगल (वृश्चिक), बृहस्पति (मीन)
क्षत्रिय (अग्नि तत्व वर्ग)अग्नि तत्व (राशि संख्या 1, 5, 9)मेष, सिंह, धनुमंगल (मेष), सूर्य (सिंह), बृहस्पति (धनु)
वैश्य (पृथ्वी तत्व वर्ग)पृथ्वी तत्व (राशि संख्या 2, 6, 10)वृषभ, कन्या, मकरशुक्र (वृषभ), बुध (कन्या), शनि (मकर)
शूद्र (वायु तत्व वर्ग)वायु तत्व (राशि संख्या 3, 7, 11)मिथुन, तुला, कुंभबुध (मिथुन), शुक्र (तुला), शनि (कुंभ)

ये एक आम अष्टकूट सारणी में चंद्र राशि के वर्ग हैं। जन्म राशि के स्थान पर सूर्य राशि, लग्न या सामाजिक पहचान न रखें। कैलकुलेटर में पद्धति चुनने का विकल्प हो तो इस्तेमाल की गई सेटिंग लिखें।

वर्ण कूट की 4x4 अंक-गणना सारणी और ग्रह-वर्ण (राशीश) का नियम

कैलकुलेटर इन चार राशि-वर्गों से 1 अंक की गणना कैसे करते हैं? उत्तर भारतीय पंचांगों की मानक 4x4 दिशात्मक सारणी में चारों तत्व-वर्गों को जल (ब्राह्मण) → अग्नि (क्षत्रिय) → पृथ्वी (वैश्य) → वायु (शूद्र) के क्रम में रखा जाता है। जब दोनों साथियों की चंद्र राशियाँ एक ही तत्व-वर्ग में हों (जैसे वृषभ और कन्या दोनों पृथ्वी वर्ग में, या मिथुन और तुला दोनों वायु वर्ग में), तब किसी भी क्रम में कुंडली भरने पर पूरे 1 अंक मिलते हैं। जब दोनों अलग तत्व-वर्गों में हों, तो पुरानी दिशात्मक सारणी में पहले स्तंभ (परंपरागत रूप से वर) का वर्ग समान या ऊपर होने पर 1 अंक और नीचे होने पर 0 अंक दिखाया जाता है।

यहाँ एक अत्यंत महत्वपूर्ण शास्त्रीय नियम ग्रह-वर्ण और राशीश मैत्री का है: पाराशरी ग्रह-वर्गीकरण में गुरु व शुक्र ब्राह्मण ग्रह, सूर्य व मंगल क्षत्रिय ग्रह, चंद्र व बुध वैश्य ग्रह तथा शनि शूद्र ग्रह कहे गए हैं। यदि राशि-वर्ण में 0 अंक आ रहा हो, किंतु दोनों चंद्र राशियों के स्वामी ग्रह एक ही हों या परस्पर घनिष्ठ मित्र हों (जिससे 5 अंकों वाले ग्रह मैत्री कूट में पूरे अंक मिलते हैं), तो शास्त्रीय मेलापक में वर्ण कूट की 1 अंक की कमी स्वतः संतुलित मानी जाती है। अलग-अलग ऐप्स में राशि-वर्ण और ग्रह-वर्ण के विकल्प बदलने से अंक कैसे बदलते हैं, इसे हमारे विभिन्न वेबसाइटों पर कुंडली अलग क्यों दिखती है लेख में समझाया गया है।

अष्टकूट वर्ण कूट की मानक 4x4 गुण सारणी (अधिकतम 1 गुण / अंक)
साथी A (पंक्ति) \ साथी B (स्तंभ)ब्राह्मण (कर्क, वृश्चिक, मीन)क्षत्रिय (मेष, सिंह, धनु)वैश्य (वृषभ, कन्या, मकर)शूद्र (मिथुन, तुला, कुंभ)
ब्राह्मण (जल: कर्क, वृश्चिक, मीन)1 अंक (समान जल तत्व)1 अंक (पारंपरिक दिशात्मक नियम)1 अंक (पारंपरिक दिशात्मक नियम)1 अंक (पारंपरिक दिशात्मक नियम)
क्षत्रिय (अग्नि: मेष, सिंह, धनु)0 अंक (राशीश मैत्री होने पर संतुलित)1 अंक (समान अग्नि तत्व)1 अंक (पारंपरिक दिशात्मक नियम)1 अंक (पारंपरिक दिशात्मक नियम)
वैश्य (पृथ्वी: वृषभ, कन्या, मकर)0 अंक (राशीश मैत्री देखें)0 अंक (राशीश मैत्री देखें)1 अंक (समान पृथ्वी तत्व)1 अंक (पारंपरिक दिशात्मक नियम)
शूद्र (वायु: मिथुन, तुला, कुंभ)0 अंक (राशीश मैत्री देखें)0 अंक (राशीश मैत्री देखें)0 अंक (राशीश मैत्री देखें)1 अंक (समान वायु तत्व)

36 में वर्ण कूट का अधिकतम एक अंक है। पुराने लिंग-आधारित नियम में वर के वर्ण की तुलना वधू के वर्ण से की जाती है: समान या ऊँची श्रेणी होने पर एक अंक, और वर की श्रेणी नीचे होने पर शून्य। कुछ कैलकुलेटर चंद्र राशि के स्वामी के वर्ण पर आधारित अतिरिक्त विकल्प भी देते हैं; वह अलग नियम है, उसे मूल अंक में चुपचाप न मिलाएँ।

सरल गणना-उदाहरण: यदि चुनी गई सारणी में दोनों चंद्र राशियों को एक ही वर्ण दिया गया है तो इस नियम में एक अंक मिलता है। यदि पुराने नियम में वर का वर्ग वधू से नीचे है तो शून्य मिलता है। इनमें से कोई परिणाम यह नहीं बताता कि वे एक-दूसरे के साथ कैसा व्यवहार करेंगे या रिश्ता सफल होगा या नहीं।

नियम एकतरफा होने के कारण पूछें कि कैलकुलेटर में किस व्यक्ति का जन्म-विवरण किस खाने में भरा गया है और कोई आधुनिक, गैर-दिशात्मक व्याख्या ली जा रही है या नहीं। पुराने नियम में क्रम बदलने से यही एक अंक बदल सकता है।

खगोलीय चंद्र-राशि तत्व और सामाजिक वर्ण/लिंग पदानुक्रम में स्पष्ट अंतर क्यों आवश्यक है

चूँकि इन चार राशि-तत्व समूहों के नाम ऐतिहासिक सामाजिक वर्ण-व्यवस्था से मिलते हैं, इसलिए प्रत्येक प्रबुद्ध पाठक और परिवार को खगोलीय राशि-त्रिकोण और सामाजिक पहचान या श्रेष्ठता के बीच स्पष्ट रेखा खींचनी चाहिए। स्वयं ज्योतिषीय गणित के भीतर भी तुला (शुक्र की वायु राशि) या वृषभ (जहाँ चंद्रमा उच्च का होता है, किंतु पृथ्वी/वैश्य वर्ग में आता है!) किसी भी प्रकार से वृश्चिक (जहाँ चंद्रमा नीच का होता है, किंतु जल/ब्राह्मण पंक्ति में आता है!) से 'कमतर' नहीं है। इसलिए 1 अंक के प्रतीकात्मक मिलान नियम को किसी साथी पर प्रभुत्व या सामाजिक ऊँच-नीच का आधार बनाना ज्योतिष और मानवीय गरिमा दोनों के विरुद्ध है।

चार नाम ऐतिहासिक वर्ण-व्यवस्था से जुड़े हैं, जिसका संबंध सामाजिक श्रेणी और जाति से भी रहा है। जन्म-राशि से निकला ज्योतिषीय नाम किसी की जाति, पारिवारिक इतिहास या समाज में स्थान का प्रमाण नहीं है। इसे वधू की आज्ञाकारिता या उपयुक्तता का माप कहना आपसी सम्मान का विश्वसनीय वर्णन नहीं, बल्कि पुरानी लैंगिक और पदानुक्रम वाली धारणा को दोहराता है।

परिवार इसे सांस्कृतिक अध्ययन के रूप में समझ सकते हैं। इसका इस्तेमाल किसी की गरिमा, निर्णय-स्वतंत्रता या साथी चुनने के अधिकार को छीनने के लिए न करें। कम अंक किसी को अपमानित करने, उपाय खरीदवाने या महिला को अधीन रहने को कहने का कारण नहीं है। सहमति, समान सम्मान और दबाव से मुक्ति अधिक महत्त्वपूर्ण हैं।

36 गुणों की संपूर्ण अष्टकूट प्रणाली में 1 अंक का वास्तविक अनुपात

वर्ण कूट के 1 अंक (कुल 36 गुणों का मात्र 2.78%) को सही परिप्रेक्ष्य में देखने के लिए इसकी तुलना शेष सात कूटों से करें: वश्य कूट (2 अंक), तारा कूट (3 अंक), योनि कूट (4 अंक), ग्रह मैत्री (5 अंक), गण कूट (6 अंक), भकूट कूट / भकूट दोष (7 अंक), और नाड़ी कूट / नाड़ी दोष (8 अंक)। ध्यान दें कि अंतिम तीन कूट (गण 6 + भकूट 7 + नाड़ी 8) मिलकर ही 36 में से 21 अंक बनाते हैं, जबकि वर्ण कूट केवल 1 अंक का है और अकेले कभी भी कोई गंभीर मिलान दोष उत्पन्न नहीं करता।

36-अंकीय अष्टकूट गुण मिलान प्रणाली में आठों कूटों का क्रमिक अंक-भार1. वर्ण (1 अंक) व 2. वश्य (2 अंक)संयुक्त भार: 3 / 36 अंक (कुल मिलान का 8.3%)।चंद्र-राशि के चार तत्व-त्रिकोण (जल/अग्नि/पृथ्वी/वायु) और स्वभाव-वर्ग की प्रारंभिक तुलना।3. तारा (3 अंक) व 4. योनि (4 अंक)संयुक्त भार: 7 / 36 अंक (कुल मिलान का 19.4%)।जन्म-नक्षत्र की 1–9 तारा गणना और प्रतीकात्मक नक्षत्र-सहजता की जाँच।5. ग्रह मैत्री (5 अंक) व 6. गण (6 अंक)संयुक्त भार: 11 / 36 अंक (कुल मिलान का 30.6%)।दोनों चंद्र राशियों के स्वामियों की नैसर्गिक मित्रता और नक्षत्र-गण स्वभाव का मिलान।7. भकूट (7 अंक) व 8. नाड़ी (8 अंक)संयुक्त भार: 15 / 36 अंक (कुल मिलान का 41.7%)।उच्च भार वाले राशि-अंतर (2/12, 5/9, 6/8) और नक्षत्र-नाड़ी का परीक्षण व राशीश परिहार।
आरेख: अष्टकूट के 36 गुणों में वर्ण कूट के 1 अंक की तुलना में ग्रह मैत्री, गण, भकूट और नाड़ी का वास्तविक भार।

अष्टकूट में आठ कारकों के अलग-अलग अधिकतम अंक होते हैं: वर्ण 1, वश्य 2, तारा 3, योनि 4, ग्रह मैत्री 5, गण 6, भकूट 7 और नाड़ी 8। इसलिए वर्ण एक खास उत्तर भारतीय कुंडली-मिलान पद्धति का छोटा हिस्सा है। दूसरे क्षेत्रीय मिलान में अलग कारक, अंक या नियम हो सकते हैं।

कुल अंक सभी के लिए समान अनुकूलता-माप नहीं हैं। अलग कैलकुलेटर अपवाद अलग तरह से लगा सकते हैं और एक ही अंक की व्याख्या बदल सकती है। रिपोर्ट को चुनी परंपरा की गणना मानें, प्रेम, सुरक्षा, साझा मूल्यों या दीर्घकालीन रिश्ते की वैज्ञानिक परीक्षा नहीं। पास के दो-अंकीय कारक के लिए वश्य कूट और राशि-वर्गों की मार्गदर्शिका पढ़ें।

व्यावहारिक उदाहरण: समान तत्व, दिशात्मक अंतर और एक ही राशीश से संतुलन

आइए तीन ठोस उदाहरणों से देखें कि वर्ण कूट और राशीश मैत्री एक साथ कैसे काम करते हैं। उदाहरण 1 (साथी A: कर्क चंद्र राशि; साथी B: मीन चंद्र राशि): कर्क और मीन दोनों जल तत्व की राशियाँ (ब्राह्मण राशि-वर्ण) हैं। दोनों एक ही तत्व-त्रिकोण में होने से सीधे 1 में से 1 अंक प्राप्त करती हैं, उनके स्वामी चंद्र और गुरु परस्पर मित्र हैं, और नवम-पंचम (5/9) अंतर से भकूट में भी पूरे 7 अंक मिलते हैं।

उदाहरण 2 (साथी A: मेष चंद्र राशि; साथी B: वृश्चिक चंद्र राशि): मेष अग्नि तत्व (क्षत्रिय राशि-वर्ण) है और वृश्चिक जल तत्व (ब्राह्मण राशि-वर्ण)। पारंपरिक दिशात्मक सारणी में मेष (पंक्ति 2) और वृश्चिक (स्तंभ 1) के मिलान पर वर्ण कूट में 0 / 1 अंक दिखता है। किंतु दोनों राशियों का स्वामी देखें: मेष और वृश्चिक दोनों का स्वामी एक ही ग्रह मंगल है! एक ही राशीश होने से उन्हें ग्रह मैत्री कूट में पूरे 5 / 5 अंक मिलते हैं और अष्टकूट में एक-राशीश परिहार लागू होता है। उदाहरण 3 (साथी A: वृषभ चंद्र राशि; साथी B: तुला चंद्र राशि): वृषभ पृथ्वी तत्व है और तुला वायु तत्व; क्रम बदलने पर यह 1 या 0 दिखाता है, परंतु दोनों का स्वामी एक ही ग्रह शुक्र होने से ग्रह मैत्री में पूर्ण 5 / 5 अंक प्राप्त होते हैं।

वर्ण कूट की जाँच-सूची और वे बातें जो यह कभी तय नहीं कर सकता

मिलान तालिका की पहली पंक्ति के 0 या 1 अंक को किसी पारिवारिक निर्णय पर हावी होने देने से पहले दोनों जन्म-कुंडलियों के चंद्र-अंश जाँचें और वास्तविक जीवन के आपसी सम्मान को सर्वोच्च स्थान दें।

  1. जन्म-विवरण मिलाएँ। दोनों की सही तारीख, समय और स्थान दें, खासकर चंद्रमा राशि-सीमा पर हो तो।
  2. चंद्र राशि की पुष्टि करें। देखें कि कैलकुलेटर जन्म राशि ले रहा है, सूर्य राशि या लग्न नहीं।
  3. नियम का नाम लिखें। राशि-वर्ण सारणी और यह कि अंक दिशात्मक है या अतिरिक्त विकल्प भी लगा है, दर्ज करें।
  4. अंक का भार याद रखें। पारंपरिक अधिकतम एक है; इसे पूरे रिश्ते का विकल्प न बनाएं।
  5. वास्तविक सवालों पर बात करें। सहमति, संवाद, पैसे, परिवार की अपेक्षाएँ, आस्था और सीमाएँ सीधे पूछें।
  6. दबाव से इनकार करें। किसी को एक अंक के कारण विवाह या अलगाव के लिए मजबूर नहीं करना चाहिए।

ज्योतिषी से सलाह लें तो सरल भाषा में गणना समझाने और परिणाम के साथ उसकी सीमाएँ भी बताने को कहें।

वर्ण कूट यह तय नहीं कर सकता कि दो लोग दयालु, सुरक्षित, भावनात्मक रूप से अनुकूल या साझा जिम्मेदारियों के लिए तैयार हैं या नहीं। यह जाति, नैतिक गुण, ज्ञान, आय, परिवार का व्यवहार, भविष्य की संतान या विवाह की सफलता नहीं बताता। एक अंक का अंतर भरोसे, सम्मान, संवाद और स्वेच्छा से दी गई सहमति के वास्तविक प्रमाण से ऊपर नहीं है।

यदि मिलान से डर पैदा हो या वह साथी को नियंत्रित करने का औजार बने, तो प्रक्रिया रोककर ऐसे लोगों से सहारा लें जो दोनों की निर्णय-स्वतंत्रता का सम्मान करते हों। सांस्कृतिक और धार्मिक चिंतन अर्थपूर्ण हो सकता है, जब वह स्वैच्छिक हो और भेदभाव या हानि को सही न ठहराए।

आगे पढ़ें

व्यक्तिगत जन्म-कुंडली योगों, अष्टकूट मिलान नियमों, परिहार शर्तों और सॉफ्टवेयर गणना सेटिंग्स की विस्तृत जाँच के लिए नीचे दिए गए संबंधित मार्गदर्शक पढ़ें।

सामान्य प्रश्न

पाठकों के सामान्य प्रश्नों के संक्षिप्त उत्तर।

36 गुणों के अष्टकूट मिलान में वर्ण कूट कितने अंक का होता है?

अष्टकूट गुण मिलान में वर्ण कूट का अधिकतम मान केवल 1 गुण (36 में से 1 अंक) होता है, जो आठों कूटों में सबसे कम अंक भार वाला घटक है।

12 चंद्र राशियों को चार वर्ण कूट वर्गों में कैसे बाँटा जाता है?

बारह जन्म राशियों को उनके तत्वों के आधार पर बाँटा जाता है: जल तत्व (कर्क, वृश्चिक, मीन) को ब्राह्मण, अग्नि तत्व (मेष, सिंह, धनु) को क्षत्रिय, पृथ्वी तत्व (वृषभ, कन्या, मकर) को वैश्य, और वायु तत्व (मिथुन, तुला, कुंभ) को शूद्र प्रतीकात्मक वर्ग में रखा जाता है।

क्या वर्ण कूट का किसी व्यक्ति की सामाजिक जाति या पारिवारिक पृष्ठभूमि से कोई संबंध है?

बिल्कुल नहीं। अष्टकूट मिलान में वर्ण कूट केवल जन्म के समय चंद्रमा की खगोलीय राशि का तत्व-आधारित नाम है। एक ही परिवार में दो दिन के अंतर पर जन्मे दो भाई-बहनों की चंद्र राशियाँ और राशि-वर्ण अलग-अलग हो सकते हैं।

दोनों कुंडलियों का क्रम बदलने पर वर्ण कूट का अंक 1 से 0 क्यों हो जाता है?

पारंपरिक अष्टकूट सारणी दिशात्मक है, जिसमें एक साथी के राशि-वर्ग की तुलना दूसरे से की जाती है। जब दोनों की चंद्र राशियाँ अलग तत्व-वर्गों में हों, तो फॉर्म में नामों का क्रम बदलने से 1 और 0 का परिणाम पलट जाता है।

यदि वर्ण कूट में 1 में से 0 अंक आए तो इसका क्या प्रभाव होता है?

वर्ण कूट में 0 आने से 36 के कुल योग में केवल 1 अंक का अंतर पड़ता है और इससे कोई विवाह-रोधी दोष नहीं बनता। विशेषकर यदि दोनों चंद्र राशियों के स्वामी मित्र हों या एक ही ग्रह हों (जैसे मेष-वृश्चिक का मंगल या वृषभ-तुला का शुक्र), तो ग्रह मैत्री में पूरे 5 अंक मिल जाते हैं।

वर्ण कूट में सूर्य राशि, लग्न या चंद्र राशि में से किसका उपयोग होता है?

मानक अष्टकूट वर्ण कूट में निरयन (sidereal) जन्म राशि अर्थात् चंद्र राशि का ही उपयोग होता है, पाश्चात्य सूर्य राशि या लग्न का नहीं।

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